कृषि एवं फार्मिंग

कृषि एवं फार्मिंग

भारत में गायों की दुधारू नस्लें |

भारत की गायों की Milch Breeds अर्थात दुधारू नस्लों के बारे में जानने से पहले यह समझ लेना बेहद जरुरी है की पशुधन हमेशा से ग्रामीण भारत की Kamai एवं आजीविका का मुख्य स्रोत रहा है | इसलिए जब किसी उद्यमी के अंतर्मन में डेरी फार्मिंग का बिज़नेस शुरू करने की लालसा का प्रादुर्भाव होता है | तो शायद दो तीन सवाल उसके अंतर्मन में आना स्वभाविक है | पहला यह की अपने डेरी फार्मिंग का हिस्सा भैंसों को बनायें या फिर गायों को वैसे हमने अपनी पिछली पोस्ट में गाय फार्मिंग करने में आने वाला अनुमानित खर्चा और कमाई एवं भैंस फार्मिंग में आने वाला खर्चा एवं कमाई दोनों का अनुमानित ब्यौरा दिया हुआ है | उद्यमी अपने स्वयं के विवेक के आधार पर यह निर्णय कर सकता है की उसे उसकी भौगौलिक, आर्थिक स्थित देखकर कौन से पशु को अपने डेरी फार्मिंग का हिस्सा बनाकर फायदा होगा | दूसरा सवाल यह है की वह इन पशुओं की कौन सी नस्ल को अपने डेरी फार्मिंग का हिस्सा बनाये आज हम अपने इस  Milch Breeds of Cow in India नामक पोस्ट में उद्यमी के अंतर्मन में उठ रहे इसी सवाल का उत्तर देने की कोशिश करेंगे अर्थात आज हम

Chicken Hatchery Business की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी |

Chicken hatchery का business start करने वाले उद्यमी को जरुरी है, की इसकी तकनिकी जानकारी होनी चाहिए, अन्यथा वह इस बिज़नेस में असफल भी हो सकता है | जैसा की हम सबको विदित है chicken सम्पूर्ण विश्व में  सर्वाधिक खाया जाने वाला एक Popular मांस है | इसलिए India में भी बहुत सारे उद्यमी आधुनिक तौर पर Poultry Farm Business कर अपनी Kamai कर रहे हैं | Chicken hatchery business की आधारशिला भी वैश्विक तौर पर हो रही Chicken meat की demand पर टिकी हुई है | यद्यपि Chicken related business को India के किसी भी कोने से संचालित किया जा सकता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में शहरों एवं नगरों में लोगों की बढती आमदनी के कारण इन क्षेत्रों में Chicken की मांग में भारी वृद्धि हुई है | वर्तमान में India, egg production में पूरे विश्व में पांचवे और Broiler production में आठवें नंबर पर है | किसानो और कृषि से जुड़ा हुआ व्यवसाय होने के कारण, और सरकार की नाममात्र दखलंदाजी होने के कारण अब उच्च शिक्षित लोग भी Poultry Farm, Poultry feed Business इत्यादि करने में रूचि रखने लगे हैं | एक आंकड़े के मुताबिक कुल Poultry Industry में लगभग 70% हिस्सेदारी संगठित एवं 30%

बकरी का भोजन -Food For Goats in India.

भारत में बकरी के भोजन यानिकी Food for goats in India विषयवस्तु पर वार्तालाप करने से पहले यह समझ लेना बेहद जरुरी है की बकरियों को खुले मैदान में में भी घास, पत्तियां इत्यादि खाने के लिए छोड़ा जा सकता है | बकरी के भोजन में  मुख्यतः सुखी घास, छांटन, चोकर, सब्जियों पेड़ पौधों के पत्ते एवं दानेदार भोजन बकरियों को खिलाया जाता है | Food for goat का चयन करते समय यह बात ध्यान में रखना बेहद जरुरी है की बकरियां अपने भोजन में सड़ी गली कोई भी वास्तु पसंद नहीं करते हैं | Types of Food for Goat in India in Hindi: India में बकरी के भोजन को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है | इसमें एक भाग में जहाँ Roughages जिसे Hindi में रेशेदार भोजन की संज्ञा दी गई है आता है तो दूसरे भाग में Concentrates जिसे Hindi में दानेदार भोजन कहा जाता है आता है | बकरियों के लिए रेशेदार भोजन: बकरियों के लिए रेशेदार खाने की लिस्ट निम्नवत है | बबूल, बरगद, तूत, नीम, आम, कटहल, पीपल, बेतून, भीमल इत्यादि पेड़ो की पत्तियां | गुड़हल, बेर, गुलाब, करोंज, किल्मोरा इत्यादि झाड़ियों के पत्ते | मेथी के पत्ते , मूली, मूली

Chicken Breeds in India in Hindi.

India में क्षेत्र और राज्यों से संबंधित बहुत सारी chicken breeds विद्यमान हैं, और इन नस्लों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं | Poultry Farm business कर रहे उद्यमी और इच्छुक उद्यमी को chicken breeds की Information होना बेहद जरुरी है, क्योंकि नस्लों की जानकारी ही उद्यमी को उसके बिज़नेस के लिए अच्छी Productive नस्ल का चुनाव करने में मदद करेगी | हालांकि हमने अब तक मुर्गी पालन व्यवसाय से सम्बंधित अनेक विषयों जैसे प्रशिक्षण केंद्र, बैंक ऋण, यह बिज़नेस शुरू करने की प्रक्रिया, इस व्यवसाय को करने में होने वाला खर्चा और कमाई, इनके खाने के बिज़नेस के बारे में और सब्सिडी स्कीम इत्यादि पर लेख लिख चुके हैं | यही कारण है की हमारे पाठकों द्वारा Poultry अर्थात chicken  breeds के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की गई, जिसका जवाब हम इस पोस्ट के माध्यम से देने की कोशिश करेंगे | मुर्गियों की शुद्ध देशी नस्ल की बात करें, तो इनमे मुख्य रूप से ये नस्लें हैं जिनका विवरण निम्नवत है | Asil (Aseel) chicken Breeds: Asil नस्ल को Aseel भी कहा जाता है, यह chicken breeds India के अलावा Iran में भी पाई जाती है जिसे वहां किसी अन्य नाम से संबोधित किया जाता है |

Organic Farming – जैविक खेती |

Organic Farming अर्थात जैविक खेती का महत्व भारत एवम चीन के किसानों से कोई अधिक इसलिए नहीं समझ सकता, क्योंकि इन देशों में पिछले 4000 वर्षों से Organic Farming ने यहाँ के किसानों को बनाये रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है | लेकिन इन देशों में पिछले 4000 वर्षों से चली आ रही Organic farming को तब धक्का लगा जब विश्व में बढ़ती हुई जनसँख्या, मौसम में आकस्मिक परिवर्तन के चलते लोगों ने खाद्य पदार्थो की आपूर्ति हेतु खेतों में समय से पहले फसल तैयार करने के लिए तरह तरह के रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, हार्मोन, Feed Additives इत्यादि का उपयोग शुरू कर दिया | इन कृत्रिम रसायनों से जहाँ मृदा की सेहत ख़राब होने लगी, वही इन रसायनों से उत्पादित खाद्य पदार्थों को खाने के कारण मनुष्य में तरह तरह की बीमारियों का जन्म होने लगा | Organic Farming न होने से सिर्फ मनुष्य की सेहत का ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि मृदा की सेहत और वातावरण भी दूषित हो रहा है | इन्ही सब बातों के मद्देनज़र देश विदेशों में निवासित लोगों और सरकार का ध्यान भी जैविक खेती की ओर आकर्षित हुआ है | और विभिन्न देशों की सरकारों ने जनता के बीच चेतना जगाने