कृषि एवं फार्मिंग

कृषि एवं फार्मिंग

Soil Testing Lab Business In Hindi.

Soil Testing Lab Business से हमारा अभिप्राय मिटटी की जांच के लिए बनायीं गई प्रयोगशाला के बिज़नेस से है वर्तमान में हम ग्रामीण इलाकों जहाँ कृषि की जाती है देखंगे तो हमें इस प्रकार की प्रयोगशालाओं का अभाव दिखाई देता है इसलिए जहाँ जहाँ भी कृषि की जाती है या कृषि की संभावनाएं हैं इस प्रकार की प्रयोगशालाएं आसानी से चल सकती हैं | यद्यपि इस प्रकार की सर्विसेज सरकारी विभागों द्वारा दी जाती हैं लेकिन किसानो की मांगों को देखते हुए वे पर्याप्त नहीं है वर्तमान में लोग हर बिज़नेस के प्रति जागरूक दिखाई देते हैं, यही कारण है की जहाँ बीच में लोगों का ध्यान कृषि एवं कृषि से समबन्धित व्यवसायों से हट गया था अब तकनिकी जानकारी के आधार पर खेती करने से अच्छे परिणाम मिलने के कारण लोगों का ध्यान फिर से इस ओर आकर्षित हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत सारे ग्रामीण इलाके ऐसे हैं जहाँ पुरानी पद्यति से ही कृषि की जाती है क्योंकि अक्सर नवयुवक एवं पढ़ा लिखा वर्ग कृषि सम्बन्धी क्रियाकलापों पर ध्यान देता नहीं है और बुजुर्ग पारम्परिक तरीके से ही कृषि सम्बन्धी क्रियाकलापों में क्रियाशील रहते हैं | इसलिए Soil Testing Lab Business में यदि कोई उद्यमी अपने बिज़नेस

How to Identify Goat Disease on the Basis of Symptoms.

अक्सर होता क्या है असंगठित क्षेत्र में बकरी पालन व्यवसाय से प्रत्यक्ष रूप से किसान जुड़ा हुआ होता है, और यह व्यवसाय उन किसानों की आजीविका यानिकी कमाई का मुख्य स्रोत होता है, बरसात में या अन्य मौसम में बकरियों की तरह तरह की बीमारियाँ फैल सकती हैं | ऐसी स्थिति में यदि किसान के पास लक्षणों के आधार पर बीमारियों को पहचानने की जानकारी उपलब्ध हो तो, हो सकता है की बीमारियों से ग्रसित बकरियों का उपयुक्त ईलाज चाहे वह घरेलू ही सही हो पाय | चूँकि यह भी सच्चाई ही है की, बहुत बार ऐसा भी होता है जब बकरियों की बीमारी के चलते बहुत सारे किसानों के सपने ही चकनाचूर हो जाते हैं वह किसान जो यह सपने पाले हुए था की इस बार सारी बकरियों को बेचकर गुड़ियाँ की शादी करा दूंगा उसका यह छोटा सा लेकिन बहुत जरुरी सपने को भी बकरी पर लगने वाली बीमारियाँ लील कर जाती हैं | इसलिए आज हमारे इस लेख का उद्देश्य हमारे पाठक गणों से रोग अर्थात बीमारी के लक्षणों के आधार पर बकरियों के रोग की पहचान कराना होगा | रोग का लक्षण :  बकरी को तीव्र बुखार यानिकी बकरी के शरीर का तापमान सामान्य तापमान

Draught Purpose Breeds of Cows In India

Draught Purpose breeds of cows से हमारा आशय ऐसी गायों की नस्ल से हैं जिन्हें प्राचीन काल से बोझा ढोने, या हल जोतने के उपयोग में लाया जाता रहा है | बैलगाड़ी शब्द भी इन्हीं नस्ल की गाय एवं बैलों की देन है ग्रामीण भारत में पहले इस नस्ल का किसानों की आजीविका चलाने के लिए किये जाने वाले कार्यों में बड़ी अहम् भूमिका होती थी | वर्तमान में ट्रेक्टर, एवं परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध होने के कारण इन नस्लों के जानवरों का काम कम हो गया होगा लेकिन अभी भी भारत के दूर सुदूर इलाकों में इन्हें हल जोतने एवं बोझा ढोने के उपयोग में लाया जाता रहा है | Nagori Cow: गाय की Nagori नामक इस नस्ल की उत्पति या जन्म स्थान राजस्थान के बीकानेर को माना जाता है | चूँकि गायों की यह नस्ल बोझा ढोने के उपयोग में लायी जाती है इसलिए कहा जाता है की जब देश में  परिवहन के साधनों का अभाव था तब लोग बैलगाड़ी, तांगा इत्यादि को स्थान से दुसरे स्थान जाने के लिए एवं बोझा ढोने के उपयोग में लाते थे | उस समय बीकानेर जिले के जोधपुर से नोखला तक इस नस्ल की गायों का उपयोग सवारी या बोझा ढोने

Welfare Scheme For Fishermen

मछुआरों के हितों को ध्यान में रखकर चलाई गई यह Welfare Scheme for Fishermen को समझने से पहले यह समझ लेते हैं की  मछली पकड़ना एवं मत्स्य पालन  एक खतरनाक व्यवसाय है जो प्रकृति की अनियमितताओं से प्रभावित होता रहता है । मछुआरों के कल्याण के लिए संरचित यह राष्ट्रीय योजना  देश में मछुआरों के कल्याण के लिए एक समर्पित योजना है,  जो कि मछुआरों को मछली पकड़ने के दौरान होने वाली दुर्घटना के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है और गरीब मछुआरों को उस स्थिति जब उनके पास काम नहीं होता है से उबरने के लिए आर्थिक रूप से राहत प्रदान करती है । यह Welfare Scheme for Fishermen मछली पकड़ने के सत्र के लिहाज से एक अनूठी योजना है भारत सरकार का लक्ष्य  इस योजना का लाभ देश में बड़ी संख्या में मछुआरों को देने का है । राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान संभावित रूप से कई मछुआरों को संभावित रूप से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि गरीबी रेखा (बीपीएल), महिला और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को इस कल्याण योजना का लाभ प्राप्त हो सके | राज्यों एवं केंद्र सरकार का व्यय: मछुआरों के

Livestock Insurance Scheme in Hindi

Livestock Insurance Scheme से हमारा तात्पर्य पशुधन बीमा योजना से है | औद्योगिक क्षेत्र में हमारा देश भारतवर्ष चाहे किसी भी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा हो लेकिन सच्चाई यही है की आज भी हमारे देश में एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे जनमानस की है जिनका कमाई का या आजीविका चलाने का मुख्य स्रोत कृषि एवं पशुधन है | यही कारण है की भारत सरकार ने दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007) के अंतर्गत 2005 से Livestock Insurance Scheme अर्थात पशुधन बीमा योजना की शुरुआत की | इसके अलावा यह भी योजना बनाई गई की आने वाली पंचवर्षीय योजना यानिकी ग्यारवहीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) के शुरूआती वर्ष 2007-2008 में चयनित विभिन्न राज्यों के 100 जिलों में इस स्कीम को क्रियान्वयन में लाने की थी | उसके बाद यानिकी 2008-09 के बाद इस Livestock Insurance Scheme को प्रति वर्ष नियमित रूप से 100 जिलों में लागू करने का प्रावधान रखा गया | इस स्कीम को सरकार द्वारा किसानों और पशु पालकों के आजीविका या कमाई को ध्यान में रखते हुए उसकी सुरक्षा हेतु चलाया गया है ताकि यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाती है तो किसान या पशु पालक को उसकी कीमत मिल सके | इसके अलावा सरकार का लक्ष्य इस