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Tea Startups in India.

यह लेख Tea Startups in India के पीछे हमारा लिखने का उद्देश्य आदरणीय पाठक गणों को यह बताना है बिज़नेस चाहे किसी भी वस्तु या सेवा इत्यादि पर निर्भर हो यदि उसके करने के तरीके में नयापन होता है तो संभव है की उसी तरीके के बलबूते उद्यमी अपना साम्राज्य खड़ा कर पाने में सक्षम हो | भारतवर्ष में जब भी चाय की दुकान या फिर घर के अलावा चाय पीने की बात किसी के अंतर्मन में आती होगी तो रोड के बगल में उपलब्ध रेहड़ी पटरी की चाय की दुकान या फिर सड़क के किनारे मौजूद ढाबे, रेस्टोरेंट, सितारे होटलों की तस्वीर रह रह के उसके आँखों के सामने आती होगी | कहने का आशय यह है की चाय की बात जहाँ पर भी आती है किसी कंपनी विशेष का जिक्र लोगों की जुबान पर कभी नहीं आता है लेकिन भविष्य में हो सकता है की लोग बनी बनाई चाय को भी किसी खास ब्रांड या कंपनी के नाम से जानने लग जाएँ क्योंकि भारतवर्ष में ऐसे  Tea Startups शुरू हो चुके हैं | शायद इन Chai Startups से जुड़े उद्यमियों को इस प्रकार का बिज़नेस करने के लिए भारतवर्ष में उपयोग होने वाली चाय की मात्रा ने

क्या सच में कोई आईडिया किसी की दुनिया बदल सकता है |

बहुत बार हम एक दुसरे के वार्तलाप में Idea शब्द को सुनते हैं, साधारण भाषा में आईडिया का अर्थ किसी युक्ति या फिर प्लान से लगाया जाता है | लेकिन Idea एक विचार होता है, जो किसी भी मनुष्य के मष्तिष्क में किसी भी विषय पर आ सकता है | किसी भी मनुष्य के मस्तिष्क में प्रतिदिन हजारों हज़ार विचारों का आदान प्रदान होता है, इन विचारों को व्यक्ति की वर्तमान स्थिति, शिक्षा, मेहनत, लगन, जूनून, व्यक्ति की सोच इत्यादि प्रभावित करते हैं | यदि हम बिज़नेस आइडियाज की बात करें, तो अधिकतर लोगों का मानना है की अच्छे बिज़नेस आइडियाज सिर्फ किस्मत वाले व्यक्तियों को ही आते हैं, इसलिए उन्हीं के बलबूते वे अपना साम्राज्य खड़ा कर पाने में सक्षम होते हैं | हमारे हिसाब से यह बिलकुल सत्य नहीं है, क्योकि Ideas का किस्मत से नहीं बल्कि मनुष्य के नित्य प्रतिदिन कर्मों से लिंक होता है | इसलिए किसी भी क्षेत्र से सम्बंधित एक अच्छा Idea तभी आ सकता है, जब मनुष्य उस क्षेत्र में मेहनत, लगन और जूनून से अभ्यास करे | अच्छे Ideas को दिमाग में कैसे लायें | कभी कभी अच्छे Ideas दिमाग में एकदम अर्थात अकस्मात आते हैं, तो हमें लगता है की

किसान के बेटे ने बनायीं, अरबों की कंपनी |

Karsanbhai Khodidas Patel  को भले ही कम लोग जानते हों | लेकिन इनके द्वारा उत्पादित ब्रांड निरमा को तो ग्रामीण भारत में रहने वाले अशिक्षित या कम पढ़े लिखे लोग भी जानते हैं |  जिस प्रकार यह सत्य है की सफलता किसी भी व्यक्ति को जन्मजात नहीं मिलती, उसी प्रकार यह भी सत्य है की सफलता पाने के लिए व्यक्ति को स्वयं के लिए दिशनिर्देश एवं नियम निर्धारित करने पड़ते हैं | Karsanbhai Khodidas Patel ने भी डिटर्जेंट पाउडर के बिज़नेस में प्रवेश तो कर लिया था | लेकिन बहुत सारे ऐसे मौके आये जब उन्होंने अपनी सूझ बूझ से रिस्क भी उठाये | और वे रिस्क उनके बिज़नेस में चार चाँद लगाने में कामयाब भी हुए | वर्तमान में निरमा ग्रुप द्वारा विभिन्न सौंदर्य प्रसाधनों, साबुनो, डिटर्जेंट पाउडर, केमिकल्स, सीमेंट, रेंड़ी का तेल, पेपर और प्लास्टिक कपों का विनिर्माण किया जा रहा है | 2011 में प्रसारित एक आंकड़े के अनुसार निरमा ग्रुप का सालाना टर्नओवर 5008 करोड़ रूपये है | Early Life (प्रारम्भिक जीवन): Karsanbhai Khodidas Patel का जन्म गुजरात के मेहसाना जिले में एक किसान परिवार में वर्ष 1945 को हुआ था |  इन्होने केमेस्ट्री विषय में बैचलर ऑफ़ साइंस की शिक्षा 21 साल की उम्र में पूरी कर

पांचवी कक्षा पास व्यक्ति ने खड़ा किया, अरबों का साम्राज्य |

यदि हम Spice Industry की बात करें तो, Mahashian Di Hatti (MDH) किसी परिचय का मोहताज इसलिए नहीं है | क्योकि भारतवर्ष के हर रसोईघर में MDH का कोई न कोई मसाला मिल ही जायेगा | और Mahashian Di Hatti (MDH) को Spice Industry की दुनिया में श्रेष्ठतम स्तिथि में पहुँचाने वाले Mahashay Dharampal Gulati के बारे में अनेकों कथाएं कहानिया हर तरह की मीडिया में प्रचलित हैं | आज हम हमारे पढ़ने वालों को महाशय धर्मपाल गुलाटी और उनकी कंपनी Mahashian Di Hatti (MDH) की Success Story के बारे में बताने वाले हैं | जिससे हमारे पाठकगण उनकी Success Story से Inspiration ले सकें | EARLY Life of Mahashay Dharampal Gulati: Mahashay Dharampal Gulati का जन्म आज से 93 साल पहले, 27 मार्च सन 1923 ब्रिटिश इंडिया में सियालकोट (अब जो पाकिस्तान का हिस्सा है ) में हुआ था | इनके पिता का नाम महाशय चुन्नी लाल व माता का नाम माता चनन देवी था | इनके माता पिता बहुत ही परोपकारी धार्मिक विचारों के इंसान थे | वैसे यदि हम यह कहें, तो गलत नहीं होगा, की Mahashian Di Hatti (MDH) की शुरुआत 1919 में महाशय धर्मपाल गुलाटी  के पिताजी महाशय चुन्नी लाल के द्वारा हुई |

व्यक्ति की बकरी पालन व्यवसाय में सफलता की कहानी |

यदि कोई व्यक्ति Goat Farming बिज़नेस करने की सोचता है, तो उसकी उस business के प्रति कुछ अपेक्षाएं होती हैं | इनमे मुख्य रूप से आजीविका चलाना, इतनी Kamai करने की अपेक्षा रखना की पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन हो सके, और किसी दुसरे के अधीन नौकरी न करने की लालसा इत्यादि होती हैं | यह कहानी (Story) भी एक ऐसी ही व्यक्ति की है, जिसने शायद Goat Farming बिज़नेस की शुरुआत इन्ही सब बातों के मद्देनज़र की हो | कहते हैं की कठिनाइयाँ, चुनौतियाँ हर बिज़नेस में आती हैं, और ये अक्सर बिज़नेस के शुरूआती दौर में आती हैं | यही वह समय होता है, जब या तो बिज़नेस करने वाला व्यक्ति इन कठिनाइयों, चुनौतियों से हार मान लेता है, या इनका डटकर सामना करके आगे बढ़ता जाता है | आज हम एक ऐसे ही व्यक्ति की बात करेंगे जिन्होंने अनेक कठिनाइयों, चुनौतियों का सामना  करके अपने Goat Farming business को success बनाया है | जी हाँ दोस्तों, जिस व्यक्ति की हम यहाँ पर बात कर रहे हैं उनका नाम है Deepak Patidar | कृषि में BSC करने के बावजूद Deepak Patidar को इनके 15 सालों के Goat Farming business में अनेकों कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा