व्यक्ति की बकरी पालन व्यवसाय में सफलता की कहानी |

व्यक्ति की बकरी पालन व्यवसाय में सफलता की कहानी |

यदि कोई व्यक्ति Goat Farming बिज़नेस करने की सोचता है, तो उसकी उस business के प्रति कुछ अपेक्षाएं होती हैं | इनमे मुख्य रूप से आजीविका चलाना, इतनी Kamai करने की अपेक्षा रखना की पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन हो सके, और किसी दुसरे के अधीन नौकरी न करने की लालसा इत्यादि होती हैं | यह कहानी (Story) भी एक ऐसी ही व्यक्ति की है, जिसने शायद Goat Farming बिज़नेस की शुरुआत इन्ही सब बातों के मद्देनज़र की हो | कहते हैं की कठिनाइयाँ, चुनौतियाँ हर बिज़नेस में आती हैं, और ये अक्सर बिज़नेस के शुरूआती दौर में आती हैं | यही वह समय होता है, जब या तो बिज़नेस करने वाला व्यक्ति इन कठिनाइयों, चुनौतियों से हार मान लेता है, या इनका डटकर सामना करके आगे बढ़ता जाता है | आज हम एक ऐसे ही व्यक्ति की बात करेंगे जिन्होंने अनेक कठिनाइयों, चुनौतियों का सामना  करके अपने Goat Farming business को success बनाया है | जी हाँ दोस्तों, जिस व्यक्ति की हम यहाँ पर बात कर रहे हैं उनका नाम है Deepak Patidar | कृषि में BSC करने के बावजूद Deepak Patidar को इनके 15 सालों के Goat Farming business में अनेकों कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा | एक बार तो बहुत अधिक आर्थिक हानि उठाने के कारण उनके मन में इस बिज़नेस को छोड़ने का विचार आया था | लेकिन यहाँ पर केंद्रीय बकरी अनुसन्धान द्वारा दी गई मदद और सलाह उनके लिए ‘’ डूबते को तिनके का सहारा’’ साबित हुई | और वे फिर से अपने बिज़नेस को नई दिशा देने में कामयाब हुए |

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Early Life :

Deepak Patidar का जन्म मध्य प्रदेश राज्य के धार जिले के एक गांव में हुआ था | इन्होने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा कक्षा 5 तक की पढाई गाँव के ही एक सरकारी स्कूल में की | उसके बाद Deepak Patidar आगे की पढाई करने हेतु इंदौर चले गए थे | और वही इन्होने अपने आगे की  शिक्षा पूरी की | इंदौर के कृषि महाविद्यालय से इन्होने सन 2000 में कृषि स्नातक की डिग्री प्राप्त की | कृषक परिवार में जन्मे Deepak Patidar का हमेशा से कृषि सम्बन्धी कामो और व्यवसायों में झुकाव रहा | जिसका असर इनके द्वारा ग्रहण की गई शिक्षा पर भी दीखता है | इन्होने BSC की डिग्री कृषि विषय पर ही ली | Deepak Patidar के अनुसार उनका Goat Farming को व्यवसाय के रूप में अपनाने का मूल कारण यह था, की बकरियों को लोग अक्सर नकद पैसे देके खरीदते हैं | और यह कृषि आधारित व्यवसाय होने के साथ साथ ज़ीरो मार्केटिंग वाला व्यवसाय भी था | वर्ष 2000 में Deepak Patidar ने केंद्रीय बकरी अनुसन्धान संस्थान उत्तरप्रदेश द्वारा आयोजित Training में हिस्सा लेकर, ट्रैनिंग ली | और वर्ष 2001 से बकरी पालन व्यवसाय में प्रवेश किया | बकरी पालन प्रारम्भ करने के सात सालो बाद अर्थात वर्ष 2008 में केंद्रीय बकरी अनुसन्धान संसथान ने Deepak Patidar को बकरी पंडित नामक पुरस्कार से अलंकृत किया |

Experience of Deepak Patidar in Goat Farming:

Deepak Patidar के अनुसार उनके द्वारा प्रारम्भ में अर्थात शुरू में बकरी की लोकल नस्ल का पालन किया गया | लेकिन कुछ लाभकरी और अच्छे परिणाम नहीं निकले | Deepak Patidar ने लगभग डेढ़ वर्ष तक बड़ी मुश्किलों का सामना किया, यहाँ तक की बकरी पालन व्यवसाय में उन्हें नुकसान तक हुआ | जिसके चलते उन्हें आर्थिंक हानि उठानी पड़ी | अब उनके मन में आया की यह व्यवसाय बंद कर दें, और कोई और व्यवसाय करें | उन्हें लगने लगा था की बकरियों को शेड (Shed) के अंदर पालना बहुत कठिन है | लेकिन जब उन्होंने केंद्रीय बकरी अनुसन्धान संस्थान के वैज्ञानिकों से संपर्क किया | तो उन्होंने उनको प्रोत्साहित किया, और उनका मनोबल बढ़ाया | और उन वैज्ञानिकों की बात मानकर Deepak Patidar ने फिर से अपने Goat Farming बिज़नेस को एक नया रूप देकर व्यवसाय शुरू करने की ठानी | Deepak Patidar के अनुसार उस स्थिति में संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा जो सुझाव Deepak Patidar को दिए गए उनमे से कुछ मुख्य सुझाव और सहायता निम्न हैं |

  • बकरी की नस्ल में परिवर्तन करके किसी भारतीय नस्ल की बकरियों को फार्म का हिस्सा बनाना |
  • उन्नत किस्म की नस्ल की बकरियों का पालन करने के साथ breeding फार्म |
  • Goat Farm के उत्पादन अर्थात बकरियों को जीवित भार के आधार पर बेचना |
  • अपने उत्पादन हेतु मार्केटिंग करना |
  • उस क्षेत्र में निवासित सभी छोटे बड़े बकरी पालन करने वाले लोगो को मिलकर काम करने की सलाह |
  • संस्थान के स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय समय पर बकरी की बिमारियों समबन्धी रोगों का उपचार |
  • बकरी की नस्ल में सुधार करने Breeding हेतु संस्थान द्वारा बीजू बकरे प्रदान किये गए |
  • Deepak Patidar ने अपने फार्म के लिए सिरोही नस्ल को चयनित किया जिसे उन्हें इस व्यवसाय में लाभ हुआ |
  • संस्थान द्वारा दी गई मदद से बकरी और बकरों की मृत्यु दर काफी कम हो गई | और नस्ल बदलने से आर्थिक लाभ बी प्राप्त हुआ |

Achievement of Deepak Patidar in Goat Farming:

वर्तमान में Deepak Patidar के Goat farm में अलग अलग नस्लों जैसे सिरोही, बरबरी, जमुनापारी, जखराना इत्यादि की 500 बकरियाँ हैं | जिन्हे ये अपने ग्राहकों को उनके जीवित भार के अनुसार 350 से 500 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं | उनके आस पास जितने भी अन्य बकरी पालक हैं, Deepak Patidar की कोशिश रहती है, की वो भी अपनी बकरियों में बीजू बकरों के माध्यम से गर्भधारण कराएं | ताकि बकरी की अच्छी उत्पादकता वाली नस्ल पैदा हो सके | इसके अलावा अन्य बकरी पालकों को बकरी की बिमारियों हेतु दवाइयों, टीकाकरण, डी वार्मिंग इत्यादि में Deepak Patidar सहायता प्रदान करते रहते हैं | इनके Goat farm का मुख्य उद्देश्य अन्य बकरी पालकों को पशु पालन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और NGO’s के बारे में अवगत कराना, और उनकी सहायता करना है | साथ ही साथ दीपक बकरी पालन करने वाले इच्छुक व्यक्तियों को प्रशिक्षण भी देते हैं | अब तक इनके Goat farm में लगभग 5000 लोग भ्रमण कर चुके हैं | जिन उपर्युक्त सेवाओं की हम बात कर रहे हैं इन सबके बदले Deepak Patidar शुल्क लेते हैं | अपने उत्पाद एवं सेवा के ऑनलाइन प्रचार प्रसार हेतु दीपक ने एक वेबसाइट goatwala.com बनायीं है |

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

Comments

  1. By Kundankumargupta

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  2. By kishore paridar

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  3. By राम निवास

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  5. By सुनिता मुर्मू

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  6. By anil

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