कृषि एवं फार्मिंग

कृषि एवं फार्मिंग

रजनीगंधा की खेती – Tuberose Farming In Hindi.

क्या आपने रजनीगंधा की खेती के बारे में सुना है, जी हाँ यदि आपको पहचानने में तकलीफ का अनुभव हो रहा है तो आपको बता दें हम उसी रजनीगंधा की बात कर रहे हैं जिसे अंग्रेजी में Tuberose कहा जाता है, और इसकी खेती अर्थात उत्पादन करने की प्रक्रिया को Tuberose Farming या Rajanigandha Farming कहा जाता है | अक्सर आपने अपने जीवन में काफी बार बहुत सारे लोगों के मुहं से फूलों की खेती के बारे में चर्चाएँ सुनी होंगी जिसमे व्यक्ति फूलों की खेती को बेहद लाभदायक बिज़नेस बताते नहीं थकता है, जी बिलकुल फूलों की खेती की यदि हम बात करें तो यह होती ही लाभदायक है | लेकिन इस बिज़नेस को लाभदायक बनाने में उगाने अर्थात खेती किये जाने वाले फूल के चयन करने की प्रक्रिया का अहम् योगदान होता है | अर्थात उद्यमी को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है की किस प्रकार के फूल का उत्पादन वह कम लागत में कर सकता है | ऐसे ही फूलों अर्थात कम लागत में होने वाले फूलों की लिस्ट में शामिल है यह रजनीगंधा की खेती का व्यवसाय | रजनीगंधा की खेती या फार्मिंग क्या है: हालांकि जैसा की इसके नाम से ही स्पष्ट है

Mushroom Farming Business – मशरुम की खेती का व्यवसाय |

जहाँ इंडिया में पहले Mushroom farming या अन्य खेती सम्बन्धी कार्य करना अशिक्षा की पहचान होती थी अर्थात जो लोग खेती करते थे उन्हें अशिक्षित समझ लिया जाता था, और सच्चाई भी यही थी की अधिकतर अशिक्षित लोग ही इस तरह के कार्यों को करने में संलिप्त थे | लेकिन बदलते समय ने कृषि में भी पढ़े लिखे अर्थात शिक्षित लोगों के लिए अवसर पैदा किये हैं और वर्तमान में बहुत सारे नौजवान भी डेयरी फार्मिंग, पोल्ट्री फार्मिंग, गोट फार्मिंग, फिश फार्मिंग एवं जैविक खेती के कार्यों में संलिप्त हैं और अपना व्यापार सफलतापूर्वक चला भी रहे हैं | आज हम अपने कृषि एवं फार्मिंग नामक इस श्रेणी में एक ऐसे फार्मिंग बिज़नेस की बात करने वाले हैं जो बीतते वक्त के साथ युवाओं में बेहद प्रचलित होता जा रहा है | क्योंकि पिछले दिनों  Mushroom farming की बदौलत उत्तराखंड की 26 साल की दिव्या रावत काफी सुर्ख़ियों में रही थी उनका सुर्ख़ियों में रहने का मुख्य कारण यह था की उन्होंने एक नामी गिरामी शिक्षण संस्थान से शिक्षा ग्रहण की थी और लोगों की अपेक्षा के मुताबिक जहाँ उन्हें शहर में रहकर ही कुछ काम या नौकरी करनी चाहिए थी उन्होंने वह शहरी NGO की नौकरी छोड़ दी

Soil Testing Lab Business In Hindi.

Soil Testing Lab Business से हमारा अभिप्राय मिटटी की जांच के लिए बनायीं गई प्रयोगशाला के बिज़नेस से है वर्तमान में हम ग्रामीण इलाकों जहाँ कृषि की जाती है देखंगे तो हमें इस प्रकार की प्रयोगशालाओं का अभाव दिखाई देता है इसलिए जहाँ जहाँ भी कृषि की जाती है या कृषि की संभावनाएं हैं इस प्रकार की प्रयोगशालाएं आसानी से चल सकती हैं | यद्यपि इस प्रकार की सर्विसेज सरकारी विभागों द्वारा दी जाती हैं लेकिन किसानो की मांगों को देखते हुए वे पर्याप्त नहीं है वर्तमान में लोग हर बिज़नेस के प्रति जागरूक दिखाई देते हैं, यही कारण है की जहाँ बीच में लोगों का ध्यान कृषि एवं कृषि से समबन्धित व्यवसायों से हट गया था अब तकनिकी जानकारी के आधार पर खेती करने से अच्छे परिणाम मिलने के कारण लोगों का ध्यान फिर से इस ओर आकर्षित हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत सारे ग्रामीण इलाके ऐसे हैं जहाँ पुरानी पद्यति से ही कृषि की जाती है क्योंकि अक्सर नवयुवक एवं पढ़ा लिखा वर्ग कृषि सम्बन्धी क्रियाकलापों पर ध्यान देता नहीं है और बुजुर्ग पारम्परिक तरीके से ही कृषि सम्बन्धी क्रियाकलापों में क्रियाशील रहते हैं | इसलिए Soil Testing Lab Business में यदि कोई उद्यमी अपने बिज़नेस

How to Identify Goat Disease on the Basis of Symptoms.

अक्सर होता क्या है असंगठित क्षेत्र में बकरी पालन व्यवसाय से प्रत्यक्ष रूप से किसान जुड़ा हुआ होता है, और यह व्यवसाय उन किसानों की आजीविका यानिकी कमाई का मुख्य स्रोत होता है, बरसात में या अन्य मौसम में बकरियों की तरह तरह की बीमारियाँ फैल सकती हैं | ऐसी स्थिति में यदि किसान के पास लक्षणों के आधार पर बीमारियों को पहचानने की जानकारी उपलब्ध हो तो, हो सकता है की बीमारियों से ग्रसित बकरियों का उपयुक्त ईलाज चाहे वह घरेलू ही सही हो पाय | चूँकि यह भी सच्चाई ही है की, बहुत बार ऐसा भी होता है जब बकरियों की बीमारी के चलते बहुत सारे किसानों के सपने ही चकनाचूर हो जाते हैं वह किसान जो यह सपने पाले हुए था की इस बार सारी बकरियों को बेचकर गुड़ियाँ की शादी करा दूंगा उसका यह छोटा सा लेकिन बहुत जरुरी सपने को भी बकरी पर लगने वाली बीमारियाँ लील कर जाती हैं | इसलिए आज हमारे इस लेख का उद्देश्य हमारे पाठक गणों से रोग अर्थात बीमारी के लक्षणों के आधार पर बकरियों के रोग की पहचान कराना होगा | रोग का लक्षण :  बकरी को तीव्र बुखार यानिकी बकरी के शरीर का तापमान सामान्य तापमान

Draught Purpose Breeds of Cows In India

Draught Purpose breeds of cows से हमारा आशय ऐसी गायों की नस्ल से हैं जिन्हें प्राचीन काल से बोझा ढोने, या हल जोतने के उपयोग में लाया जाता रहा है | बैलगाड़ी शब्द भी इन्हीं नस्ल की गाय एवं बैलों की देन है ग्रामीण भारत में पहले इस नस्ल का किसानों की आजीविका चलाने के लिए किये जाने वाले कार्यों में बड़ी अहम् भूमिका होती थी | वर्तमान में ट्रेक्टर, एवं परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध होने के कारण इन नस्लों के जानवरों का काम कम हो गया होगा लेकिन अभी भी भारत के दूर सुदूर इलाकों में इन्हें हल जोतने एवं बोझा ढोने के उपयोग में लाया जाता रहा है | Nagori Cow: गाय की Nagori नामक इस नस्ल की उत्पति या जन्म स्थान राजस्थान के बीकानेर को माना जाता है | चूँकि गायों की यह नस्ल बोझा ढोने के उपयोग में लायी जाती है इसलिए कहा जाता है की जब देश में  परिवहन के साधनों का अभाव था तब लोग बैलगाड़ी, तांगा इत्यादि को स्थान से दुसरे स्थान जाने के लिए एवं बोझा ढोने के उपयोग में लाते थे | उस समय बीकानेर जिले के जोधपुर से नोखला तक इस नस्ल की गायों का उपयोग सवारी या बोझा ढोने