Green Cement जितना सुनने में नया है, उतना ही नयापन इसमें है भी। आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है, इस बात को फिर से कुछ कंपनियों ने साबित कर दिया है। क्योंकि भारत के अधिकतर शहरों में प्रदूषण जानलेवा साबित हो रहा है। और यह लगातार बढ़ रहा है जिसमें कंस्ट्रक्शन निर्माण का भी अहम् योगदान है।

इसी समस्या के चलते अब सीमेंट बनाने वाली कंपनीयाँ नए ज़माने का सीमेंट Green Cement बनाने की राह में निकल पड़ी हैं। यह इसलिए क्योंकि माना जा रहा है ग्रीन सीमेंट पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। वह इसलिए क्योंकि इसका निर्माण कबाड़ या कचरे से भी संभवहै। यही कारण है की इस तरह का बिजनेस पर्यावरण को स्वच्छ रखने में काफी मददगार होगा।

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ईको फ्रेंडली होता है Green Cement       

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है हरे भरे पेड़ पौधे पर्यावरण को स्वच्छ और हरा भरा बनाये रखने में मददगार होते हैं। Green Cement का नाम भी इसलिए ग्रीन रखा गया क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल अर्थात ईको फ्रेंडली है। एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया में जितना भी कार्बन उत्सर्जन होता है उसका 8% केवल ग्रे सीमेंट बनाने में होता है। केवल एक गतिविधि के लिए 8% बहुत बड़ा आंकड़ा है।

और जानकारी के मुताबिक Green Cement बनाने में लगभग 40% कम कार्बन का उत्सर्जन होता है। इसके अलावा इसे कबाड़ और कचरे से भी बनाया जा सकता है तो इस प्रकार पर्यावरण को स्वच्छ भी रखा जा सकता है। कहने का आशय यह है की ग्रीन सीमेंट को बनाने में इंडस्ट्रियल वेस्ट एवं अन्य कचरे का भी इस्तेमाल होता है, जिससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद मिलती है।

किन किन चीजों से बनता है ग्रीन सीमेंट

आम तौर पर किसी भी उत्पाद को बनाने और उसे अपने मन मुताबिक आकार में ढालने के लिए उसे गरम किया जाता है। कहने का आशय यह है की अधिकतर औद्योगिक उत्पाद ऐसे होते हैं जिन्हें बनाने में भट्टियों का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि इन भट्टियों में कच्चे माल इत्यादि को गरम करके उत्पादों को मन मुताबिक आकार में ढाला जा सके। फैक्ट्रीयों में लगी भट्टियों से स्लेग (slag) और उड़ने वाली राख (Fly Ash) निकलती है। जो पर्यावरण में प्रदूषण फ़ैलाने के लिए जिम्मेदार होती है।

आश्चर्य की बात यह है की Green Cement बनाने में इन दोनों पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए हवा में कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है । इनके अलावा कबाड़, कचरे, indstrial waste इत्यादि का इस्तेमाल भी ग्रीन सीमेंट बनाने के लिए किया जाता है। यानिकी ग्रीन सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है। और कंपनियों ने कई तकनीकों का इस्तेमाल करके इसकी लागत को भी बेहद कम कर दिया है।   

मजबूत और टिकाऊ होता है या नहीं   

देश में कंपनियाँ Green Cement का निर्माण करने भी लगी हैं, लेकिन यह अभी उतना लोकप्रिय और प्रचलित नहीं हुआ है। शायद उसका कारण लोगों की झिझक है की यह उतना मजबूत होता भी होगा या नहीं, जितना की ग्रे सीमेंट होता है। लेकिन जो सीमेंट बनाने वाली कंपनियाँ हैं वे भी जानती हैं की सीमेंट का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन निर्माण कार्यों में होता है, इसलिए उसका मजबूत और टिकाऊ होना सर्वप्रथम गुण होना चाहिए।

जेके सीमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक Green Cement पारमपरिक सीमेंट की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और जंगरोधी सीमेंट है। इसलिए इसका इस्तेमाल करने से लोगों को झिझकना नहीं चाहिए। चूँकि ग्रीन सीमेंट में पोरोसिटी (Porosity) को कम करने के लिए कैल्सीनेटेड मिट्टी और चूना पत्थर मिलाये जाते हैं। इसलिए यह सीमेंट की शक्ति को बढ़ाकर और मजबूती प्रदान करते हैं।

Green Cement के इस्तेमाल से निर्माण लागत घटेगी   

हालांकि आम लोगों को लगता होगा की यह नया उत्पाद है तो बहुत महंगा होगा। लेकिन विशेषज्ञों और सीमेंट कंपनियों का मानना है की Green Cement का इस्तेमाल करके constrcution कराने पर निर्माण लागत को कम किया जा सकता है।

आज जहाँ दुनिया भर में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करने से पूरी दुनिया का पर्यावरण दूषित हो गया है। ऐसे में पर्यावरण को दूषित करने वाले कारकों पर चर्चा करके उनका कोई वैकल्पिक समाधान निकालना अत्यनत आवश्यक हो गया है।

Green Cement की उत्पति और फार्मूला भी वैज्ञानिकों ने सीमेंट कंपनीयों के साथ मिलकर इसलिए तैयार किया है। ताकि थोड़ा ही सही लेकिन वे पर्यावरण को स्वच्छ बनाने और दूषित होने से बचाने में अपना योगदान दे सकें।

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