लघु उद्योग की परिभाषा, महत्व, फायदे एवं लघु उद्यम शुरू करने की प्रक्रिया।

लघु उद्योग के बारे में शायद आप सभी जानते होंगे लेकिन दोस्तों चूँकि हमारी वेबसाइट का लक्ष्य अपने पढने वालो को सशक्त बनने के लिए प्रेरित करना है । और मनुष्य तभी सशक्त कहलाता है, जब उसकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो । और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने हेतु मनुष्य को कुछ न कुछ काम धंधा करना पड़ता है । और भारत में जब काम धंधों की बात आती है तो MSME Sector सबसे अधिक लोगों को रोजगार देने वाले क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आता है।

वैसे देखा जाय तो लघु उद्योग MSME Sector का तीन हिस्सों में से एक हिस्सा मात्र है । लेकिन आम बोलचाल में इसे ही पूर्ण एमएसएमई समझ लिया जाता है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से इसकी हर तरह की परिभाषा, फायदों और शुरू करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तारपूर्वक जानने का प्रयत्न कर रहे हैं। तो चलिए शुरू करते हैं।   

लघु उद्योग Sukshm,-Medium-Udyog
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लघु उद्योग क्या हैं?

Kya hote hain Laghu Udyog: हालांकि इसकी ज्यादा सटीक परिभाषा हमने नीचे दी हुई है, लेकिन आम तौर पर लघु उद्योग से लोगों का अभिप्राय छोटे मोटे काम धंधे करने से होता है । इनमें अनेकों काम जैसे गुड़ बनाना, मुर्गी पालना, मोमबत्ती बनाना, साबुन बनाना, सिलाई करना, बकरी पालना, भैस और गाय पाल के दुग्ध उत्पादन करना इत्यादि । 

अर्थात ऐसे काम जो छोटे पैमाने पर शुरू किये जाते हैं, और यहाँ तक की घर से भी शुरू किये जा सकते हैं । साधारणतया कुटीर, लघु एवं मध्यम उद्योगों की श्रेणी में आते हैं। लेकिन इनकी निवेश के हिसाब से सटीक परिभाषा इस लेख में नीचे दी गई है। 

सूक्ष्म, लघु एवं  मध्यम उद्योगों में कौन कौन से उद्योग आते हैं ?

इन उद्योगों को दो क्षेत्र में विभाजित किया जा सकता है ।

  • निर्माण क्षेत्र
  • सेवा क्षेत्र

इन दोनों क्षेत्रो में कौन कौन से उद्योग सूक्ष्म, लघु उद्योग एवं मध्यम उद्योग की श्रेणी में आयेंगे । उनका आर्थिक निर्धारण निम्न है ।

1. विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector)  :

जमीन और बिल्डिंग के खर्चे  को छोड़कर निर्माण के क्षेत्र में लगने वाले उद्योग जो 25 लाख या 25 लाख से कम का निवेश लगाकर स्थापित किये गए हैं । अति लघु उद्योग या सूक्ष्म उद्योग  की श्रेणी में आते है । वो उद्योग जो 25 लाख से अधिक और पांच करोड़ से कम का निवेश कर स्थापित किये गए हैं । लघु उद्यम की श्रेणी में आते हैं। और वो उद्योग जिन्होंने 5 करोड़ से ज्यादा और 10 करोड़ से कम का निवेश कर उद्योग स्थापित किया है। मध्यम वर्ग उद्योग में सम्मिलित हैं ।   

    2. सेवा क्षेत्र (Service Sector) :

वो उद्योग जिन्होंने 10 लाख से कम का निवेश करके कंपनी स्थापित की हो, अति लघु उद्योगों या सूक्ष्म उद्योगों की श्रेणी में आते हैं । ऐसे उद्योग जिन्होंने 10 लाख से ज्यादा और 2 करोड़ से कम का निवेश करके कंपनी स्थापित की हो । लघु उद्योगों की श्रेणी में आते हैं । और ऐसे उद्योग जिन्होंने 2 करोड़ से ज्यादा और 5 करोड़ से कम का निवेश किया हो । मध्यम वर्गीय उद्योग में सम्मिलित हैं । इनमे भी Land एवं building का खर्चा सम्मिलित नहीं है ।

लघु उद्योग की नई परिभाषा

Laghu Udyog ki Paribhasha: जैसा की हम सबको विदित है की 13 मई 2020 से भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की परिभाषा बदल दी गई है । इस नई परिभाषा में इन उद्योगों को विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र में विभाजित नहीं किया गया है बल्कि दोनों क्षेत्रों के लिए निवेश एवं सालाना टर्नओवर तय किये गए हैं। एक ऐसा उद्योग जिसमें 1 करोड़ या इससे कम का निवेश हुआ हो और उसका टर्नओवर 5 करोड़ हो, सूक्ष्म उद्योग की श्रेणी में आएगा।

एक ऐसा उद्योग जिसमें निवेश 1 करोड़ से अधिक एवं दस करोड़ से कम का हुआ हो और उसका टर्नओवर पांच करोड़ से अधिक एवं पचास करोड़ से अधिक न हो लघु उद्योग की श्रेणी में आएगा। और अंत में जिस उद्योग को दस करोड़ से अधिक एवं बीस करोड़ से कम का निवेश करके स्थापित किया गया हो और उसका टर्नओवर 50 करोड़ से अधिक एवं 100 करोड़ से कम का हो मध्यम उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित है।

नीचे दी गई तालिका में हमने इसे और अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाने की कोशिश की है ।

श्रेणी

सूक्ष्म उद्योग (Micro)

लघु उद्योग (Small)

मध्यम उद्योग (Medium)

मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विस

निवेश: 1 करोड़ तक  

टर्नओवर: 5 करोड़ तक

निवेश: 10 करोड़ तक  

टर्नओवर: 50 करोड़ तक

निवेश: 20 करोड़ तक  

टर्नओवर: 100 करोड़ तक

लघु उद्योग का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या महत्व है?

लघु उद्योगों के विषय में बात करते वक़्त बेहद जरुरी हों जाता है की। हम भारतीय अर्थव्यवस्था में इनके महत्व को समझें सूक्ष्म या कुटीर उद्योग, लघु उद्योग, मध्यम वर्ग के उद्योग भारतवर्ष में बड़े उद्योगों के मुकाबले अधिक लोगो को रोज़गार उपलब्ध करा रहे हैं।

अक्सर अति सूक्ष्म या कुटीर उद्योग, लघु उद्यम, मध्यम वर्ग के उद्योग विभिन्न समस्याओ से जूझते नज़र आते है। जैसे ऋण का समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना। अगर ऋण मिल भी गया तो उस पर ज्यादा ब्याज का होना। कच्चे माल का तुलनात्मक कीमत पर उपलब्ध होना । उत्पाद को संग्रहित रखने की उचित व्यवस्था न होना ।

बुनियादी जरूरतों का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना जैसे अच्छी सड़के न होना, पानी का न होना, बिजली का न होना इत्यादि । इसके बावजूद लघु उद्योगों और मध्यम वर्ग के उद्योगों से सबसे ज्यादा लोगो को रोज़गार मिलता है ।

और साल हर साल यह दर बढती जा रही है। अब सरकार का ध्यान भी इस ओर गया है। और लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने अनेक योजनायें प्रधान मंत्री एम्प्लोयेमेंट जनरेशन प्रोग्राम और प्रधान मंत्री मुद्रा योजना भी चलाई हैं । तो हों सकता है, आने वाले समय में हमें इसके कुछ क्रन्तिकारी परिणाम नज़र आयें ।

भारत में लघु उद्योग खोलने के फायदे

  1. लघु उद्योग खोलने के लिए आपको कम पूँजी की आवश्यकता पड़ती है । अर्थात आप कम पूँजी निवेश करके भी लघु उद्योग की स्थापना कर सकते हैं ।
  2. लघु उद्योग खोलने के लिए सरकार आपको प्रेरित करती है । और आपको सरकार का समर्थन हासिल होता है। आपके भविष्य के संवर्धन प्रक्रिया हेतु भी सरकार आपकी मदद करती है। जिससे अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों सकें ।
  3. निर्माण क्षेत्र में लघु उद्योगों के लिए आरक्षण विद्यमान है ।
  4. वित्त सम्बन्धी समस्याओ के लिए भी फंड और सब्सिडी विद्यमान है ।
  5. किसी विशेष खरीद पर सरकार द्वारा आरक्षण दिया जायेगा ।
  6. समग्र आर्थिक विकास हेतु घरेलू बाज़ार की मांग में वृद्धि ।
  7. दुनिया के बाजारों में भारतीय उत्पाद की मांग बढ़ सकती है। इसलिए भारतीय उत्पादों का निर्यात संभावित है ।
  8. लघु उद्यम स्थापित करने के लिए मशीने, कच्चा माल, मजदूर, सस्ते दरो पर उपलब्ध हों जाते हैं । क्योकि अधिकतर लघु उद्योग स्थानीय लोगो को लक्ष्य रखते हुए ही स्थापित किये जाते हैं । और लोगो को अपने घर के नजदीक ही काम मिल जाता है । इसलिए वे थोड़े कम पैसे लेके भी काम करने लगते हैं ।

लघु उद्योग कैसे शुरू करें?:

Laghu Udyog Kaise Khole: अपना लघु उद्यम स्थापित करना खुद का व्यवसाय शुरू करने जैसा ही है। इसलिए इच्छुक उद्यमी चाहे तो वह अपना उद्यम स्थापित करने के लिए वही महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है । जो उसे अपना खुद का कोई अन्य बिजनेस शुरू करने के लिए उठाने पड़ते हैं । लेकिन फिर भी हम यहाँ पर संक्षिप्त रूप से कुछ स्टेप के बारे में बता रहे हैं, जो उद्यमी को अपना लघु उद्यम स्थापित करने के लिए उठाने पड़ सकते हैं।

परियोजना का चयन करें

लघु उद्यम शुरू करने के लिए सर्वप्रथम आपको अपनी परियोजना का चयन अर्थात Project selection करना होगा । आपके द्वारा स्थापित किया गया Laghu Udyog किसी विचार अर्थात Idea पर आधारित होना चाहिए । और आप अपने उद्यम शुरू करने के विचार (Idea) को निम्न बातों के आधार पर तौल सकते हैं । आप चाहें तो इस विचार को कसौटी पर उतारने के लिए अपने आप से ही निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकते हैं ।

  • जो विचार आप में संचारित हुआ है । क्या वह आपकी रुचि से मेल खाता है ?।
  • जिस विचार को आप क्रियान्वित करना चाहते हैं, क्या उसी क्षेत्र में आपको कोई अनुभव है ?
  • लघु उद्यम के अंतर्गत आप जो कारोबार (Business) करने की सोच रहे हैं क्या आपका क्षेत्र उस business के लिए अच्छा क्षेत्र है?।
  • क्या आपके उद्यम द्वारा उत्पादित उत्पाद/सेवा आपके ग्राहकों को संतुष्ट कर पायेगी?
  • क्या आपने अपने Business सम्बन्धी किसी विशेषज्ञ से बात की?
  • क्या आपने बाज़ार में अपनी उत्पाद/सेवा Research की?
  • क्या आपने अपने उद्यम सम्बन्धी प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण किया?
  • जिस क्षेत्र में आप लघु उद्यम स्थापित करने वाले हैं, क्या वह क्षेत्र उठता हुआ अर्थात उगता हुआ क्षेत्र है ?
  • क्या आपको लगता है की यह अवसर आपके लिए सुनहरा अवसर है?
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग शुरू करने से पहले एमएसएमई की अधिकारिक वेबसाइट पर अवश्य विजिट करें। क्योंकि समय समय पर इसमें नई नई जानकारी और योजनाओं के बारे में बताया जाता है।

परियोजना की अवधारणा पर विचार करें

यदि उपर्युक्त प्रश्नों के लिए आपका जवाब हाँ है । तो उद्यम स्थापित करने के लिए अगला स्टेप परियोजना की अवधारणा अर्थात (Project Conceptualization) है । परियोजना की अवधारणा करते समय चार बातों का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए ।

  • उद्यम द्वारा उत्पादित उत्पाद का आकार, साइज़ और प्रकृति
  • उत्पाद के उत्पादन के लिए तकनिकी प्रक्रिया
  • जगह जहाँ आप लघु उद्यम अर्थात Plant लगाने वाले हैं ।
  • तकनिकी और आर्थिक रूप से सहयोग करने वाले सहयोगी ।

लघु उद्योग के लिए उत्पाद का चयन करें

Laghu Udyog के अंतर्गत उत्पाद चयन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें।

  • उत्पाद की गहराई, लम्बाई, चौड़ाई इत्यादि ।
  • उत्पाद की पैकेजिंग
  • उत्पाद की ब्रांडिंग
  • उत्पाद की वारंटी
  • उत्पाद के बिक जाने के बाद ग्राहक को सेवा
  • कच्चे माल की उपलब्धता
  • बाज़ार की पहुँच
  • सरकारी सहायता एवं प्रोत्साहन

उत्पाद का चयन करते समय बाज़ार का ज्ञान होना भी जरुरी है। की पहले से कितने और किस प्रकार के प्रतिस्पर्धी बाज़ार में उपलब्ध हैं ।

यदि लघु उद्यम खोलने वाला उद्यमी किसी ऐसे उत्पाद का उत्पादन करने जा रहा है जिसको निर्यात करने की संभावना अधिक है । इस स्तिथि में उद्यमी (Enterperuner)  को अपने आप से निम्नलिखित प्रश्न पूछने चाहिए ।

  • क्या मुझे पता है की जिस उत्पाद का में उत्पादन करने जा रहा हूँ उसको निर्यात करने में कौन कौन से कागजाद और कितना खर्चा आएगा ?।
  • क्या मैं निर्यात होने वाली वस्तु की पैकेजिंग विधि से अवगत हूँ?
  • क्या मेरे लघु उद्यम द्वारा उत्पादित उत्पाद सभी देशो में स्वीकृत है?
  • क्या मुझे World Trade Organization के नियमो के बारे में पता है?

इसके अलावा निर्यात योग्य उत्पाद का उत्पाद करते समय निम्न बातो का ध्यान रखना भी जरुरी है ।

  • बाहरी देशो में मांग की स्तिथि का जायजा लेना
  • अपने लघु उद्योग की उत्पादन क्षमता को परखना ।
  • अपने उत्पाद के प्रचार हेतु आने वाली जटिलताओ का विश्लेषण करना ।
  • बाज़ार में अपनी साख बनाने हेतु, निवेश का विश्लेषण करना ।

एक प्रभावी बिजनेस प्लान तैयार करें

अब जब आपने अपने लघु उद्योग के लिए उत्पाद का चयन कर दिया हो, तो अगला कदम एक प्रभावी एवं व्यवहारिक बिजनेस प्लान तैयार करने का होना चाहिए। इसमें आपके प्रोजेक्ट की हर एक छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी डिटेल्स लिखित रूप में होती है।

अनुमानित लागत, वित्त का प्रबंध कैसे करना है? जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध कैसे करना है? शुरू में कितने कर्मचारियों से शुरू करना है? किस किस प्रकार की मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल करना है? बिजनेस शुरू होने के एक साल बाद आप अपने लघु उद्योग को कहाँ पर देखना चाहते हैं? और जहाँ पर आप अपने बिजनेस को देखना चाहते हैं, वहां पर आप उसे किस तरीके से पहुँचाएँगे?।

एक प्रभावी बिजनेस प्लान आपके लघु उद्योग का दर्पण होता है, जिसमें आप उसकी छवि को साफ़ साफ़ देख सकते हैं। यही कारण है की यह दस्तावेज बैंकों से ऋण प्राप्त करने, और निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित करने में भी सहायक होता है।

प्रोजेक्ट की लागत के आधार पर वित्त का प्रबंध करें

जब आप अपनी परियोजना का बिजनेस प्लान तैयार कर लेते हैं, तो आप यह जानने में समर्थ हो जाते हैं, की आपकी परियोजना को पूर्ण करने में कितनी लागत आ सकती है । क्योंकि एक व्यवहारिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट (जिसमें परियोजना में आने वाले अनुमानित खर्चों और भविष्य में होने वाली अनुमानित कमाई का ब्यौरा होता है) भी किसी व्यापार योजना का अहम् हिस्सा होती है।

इसलिए अब आपका अगला कदम वित्त का प्रबंध करने का होना चाहिए। वित्त का प्रबंध करने के लिए आप अनेकों औपचारिक तरीकों जैसे बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण, और अनौपचारिक तरीकों जैसे पारिवारिक सदस्यों, दोस्तों, जानकारों से ऋण इत्यादि अपना सकते हैं।  

आवश्यक बिल्डिंग और जमीन का प्रबंध करें

ध्यान रहे कई ऐसे उत्पाद होते हैं जिनका निर्माण किसी रिहायशी इलाके में करना गैरकानूनी हो सकता है। कहने का आशय यह है की एक ऐसे फैक्ट्री या व्यापार जिससे रिहायशी इलाकों में रह रहे लोगों को परेशानी हो, वह व्यापार वहाँ नहीं किया जा सकता।

जैसे यदि आप किसी ऐसे उत्पाद का निर्माण कर रहे हों, जिसमें आपको उत्पाद को आग में पकाना पड़ता हो, तो फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाला धुआं रिहायशी एरिया में रह रहे लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है ।

ऐसे ही कुछ ऐसे व्यापार जिनमें मशीनों की इतनी तेज आवाज आती हो की वहां पर रहे रहे लोगों को काफी परेशानी होती हो। इसलिए कोशिश करें की आप राज्य या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत इंडस्ट्रियल एरिया में ही अपना लघु उद्योग स्थापित करने पर विचार करें ।

जरुरी लाइसेंस और पंजीकरण कराएँ

अपने बिजनेस को रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के साथ रजिस्टर करें, आप चाहें तो इसे प्रोप्राइटरशिप, वन पर्सन कंपनी, पार्टनरशिप फर्म, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में से किसी एक का चयन करके रजिस्टर करा सकते हैं । यदि आप किसी अन्य साझेदार के साथ यह काम कर रहे हैं, तो आप पार्टनरशिप फर्म के तौर पर रजिस्टर करा सकते हैं । अन्यथा शुरू में प्रोप्राइटरशिप या वन पर्सन कंपनी भी अच्छा विकल्प हो सकती है।

किसी उत्पाद का निर्माण करने हेतु फैक्ट्री खोलने के लिए आपको फैक्ट्री अधिनियम के तहत भी रजिस्टर कराने की आवश्यकता होगी। इन सबके अलावा जीएसटी रजिस्ट्रेशन, म्युनिसिपल लाइसेंस, उद्यम रजिस्ट्रेशन इत्यादि की भी आवश्यकता हो सकती है।   

मशीनरी और उपकरणों की खरीदारी करें

आप चाहे किसी भी उत्पाद का निर्माण करने के बारे में क्यों न सोच रहे हों, लेकिन वर्तमान में बिना मशीनरी और उपकरणों के उस उत्पाद का निर्माण करना लगभग असंभव है। यही कारण है की आपको अपने लघु उद्योग के लिए मशीनरी और उपकरणों की खरीदारी करनी ही करनी होगी।

कुछ मशीनरी और उपकरण हमारे देश भारत में भी आसानी से उपलब्ध होते हैं। लेकिन यह सब कुछ आपके व्यवसाय की प्रकृति पर निर्भर करता है, की उसमें किस तरह की मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल होना है ।

आम तौर पर देखा गया है की उद्यमी अपने निवेश क्षमता और प्लांट कैपेसिटी के आधार पर ही मशीनरी और उपकरणों की खरीदारी करता है। कुछ उद्यमी कम लागत के चक्कर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाली मशीन नहीं खरीदते।

जिसका खामियाजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ सकता है, इसलिए मशीनरी और उपकरणों की खरीदारी करने से पहले अच्छे ढंग से रिसर्च करके उचित दरों पर अच्छी कंपनी की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर आधारित मशीन ही खरीदनी चाहिए।    

स्टाफ और कर्मचारियों को नियुक्त करें

किसी भी कंपनी के विकास में उसके कर्मचारियों का अहम् योगदान होता है। इसलिए कर्मचारियों की नियुक्ति के समय कौशल, ज्ञान और अनुभव से समझौता न करें। ध्यान रहे एक कौशल, ज्ञान और अनुभव प्राप्त टीम आपके लघु उद्योग को फर्श से अर्श तक पहुँचाने में अहम् योगदान प्रदान कर सकती है।

ऐसे लोगों को नियुक्त करें, जिनके लिए उनका काम किसी जूनून से कम नहीं हो, और वे उस नौकरी के लिए अपना शत प्रतिशत देने को तैयार बैठे हों। अनुभवी और जानकार लोगों को आपको सैलरी अधिक देनी पड़ सकती है, लेकिन वे आपके व्यवसाय के विकास में अहम् योगदान देते हैं।     

उत्पाद का निर्माण करें और बेचें  

अब जब सब प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी हों, तो अपनी व्यवसाय की प्रकृति के आधार पर उत्पाद का निर्माण प्रारम्भ कर सकते हैं। यदि आप ग्राहक का आर्डर मिलने के पश्चात् उत्पाद का निर्माण करते हैं, तो सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद आपको अपनी मार्केटिंग रणनिति पर ध्यान होगा। ताकि आप अधिक से अधिक ग्राहकों से आर्डर प्राप्त कर अपनी इकाई में उत्पाद का निर्माण शुरू कर सकें।

Products in Laghu Udyog Business: कई उत्पाद ऐसे होते हैं, जिनका आप पहले से निर्माण करके उन्हें मार्किट में बेचने के लिए उतार सकते हैं। इनमें आम तौर पर वे उत्पाद शामिल होते हैं, जिनका इस्तेमाल लगभग सभी लोग करते हैं। इनमें साबुन, पंखें, टेलीविजन, बर्तन, फ्रिज, चादरें इत्यादि शामिल हैं ।

कुछ विशेष उत्पाद होते हैं, जिन्हें आप ग्राहक से आर्डर मिलने के बाद बनाना शुरू करते हैं। इनमें कस्टमाइज आइटम, गिफ्ट आइटम, ट्राफी इत्यादि शामिल हैं।

लघु उद्योग की परिभाषा क्या है?

MSME की समग्र परिभाषा के अनुसार ‘’ऐसे उद्यम जिनमें 1 करोड़ से अधिक और 10 करोड़ से कम निवेश हुआ हो, एवं जिनका सालाना टर्नओवर 5 करोड़ से अधिक एवं 50 करोड़ से कम हो। लघु उद्योग कहलाते हैं’’।  

लघु उद्योग के तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लें?

आपको अपने उद्योग को उद्यम पोर्टल में रजिस्टर कराना होता है। उसके बाद ही आपकी इकाई MSME Sector को प्रोत्साहित करने के लिए बनी, विभिन्न सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए पात्र हो पाते हैं।  

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