Laghu udyog ki Hindi Me Information

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Laghu Udyog Category Introduction

दोस्तों हमारी वेबसाइट ikamai का लक्ष्य अपने पढने वालो को सशक्त बनने के लिए प्रेरित करना है | और मनुष्य तभी सशक्त कहलाता है | जब उसकी आर्थिक स्तिथि सुदृढ़ हो | और आर्थिक स्तिथि को सुदृढ़ बनाने हेतु | मनुष्य को कुछ न कुछ काम धंधा करना पड़ता है | इसी बात के मद्देनज़र हमने अपने ब्लॉग में एक नई केटेगरी का चयन किया है | जिसका नाम है Laghu Udyog जी हाँ दोस्तों इस केटेगरी के अन्दर हम आपको समय समय पर Laghu Udyog के बारे में जानकारी देते रहेंगे | किसी भी लघु उद्योग के बारे में बताते समय उस व्यवसाय को खोलने या ढंग से संचालित करने के लिए जो भी सुझाव उपलब्ध होंगे | हमारी कोशिश रहेगी की हम आपको उनके बारे में विस्तृत तौर पर बताये |

Laghu Udyog kya hai?

Sukshm,-Laghu-and-Medium-Udyog

Sukshm,-Laghu-and-Medium-Udyog

Laghu Udyog से हमारा अभिप्राय छोटे मोटे काम धंधे करने से है | जैसे गुड़ बनाना, मुर्गी पालना, मोमबत्ती बनाना, साबुन बनाना,सिलाई करना, बकरी पालना, भैस और गाय पाल के दुग्ध उत्पादन करना इत्यादि |अर्थात ऐसे काम जो छोटे पैमाने पर शुरू किये जाते हैं | और यहाँ तक की घर से भी शुरू किये जा सकते हैं | Laghu Udyog कहलाते हैं |

लघु उद्योगों का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या महत्व है?

लघु उद्योगों के विषय में बात करते वक़्त बेहद जरुरी हों जाता है की | हम भारतीय अर्थव्यवस्था में इनके महत्व को समझें | अति लघु उद्योग, लघु उद्योग, मध्यम वर्ग के उद्योग भारतवर्ष में बड़े उद्योगों के मुकाबले अधिक लोगो को रोज़गार उपलब्ध करा रहे हैं | अक्सर अति लघु उद्योग, लघु उद्योग, मध्यम वर्ग के उद्योग विभिन्न समस्याओ से जूझते नज़र आते है | जैसे ऋण का समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना | अगर ऋण मिल भी गया तो उस पर ज्यादा ब्याज का होना |
कच्चे माल का तुलनात्मक कीमत पर उपलब्ध होना | उत्पाद को संग्रहित रखने की उचित व्यवस्था न होना | बुनियादी जरूरतों का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना जैसे अच्छी सड़के न होना, पानी का न होना, बिजली का न होना इत्यादि | इसके बावजूद लघु उद्योगों और मध्यम वर्ग के उद्योगों से सबसे ज्यादा लोगो को रोज़गार मिलता है | और साल हर साल यह दर बढती जा रही है | अब सरकार का ध्यान भी इस ओर गया है | और लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने अनेक योजनायें प्रधान मंत्री एम्प्लोयेमेंट जनरेशन प्रोग्राम और प्रधान मंत्री मुद्रा योजना भी चलाई हैं | तो हों सकता है आने वाले समय में हमें इसके कुछ क्रन्तिकारी परिणाम नज़र आयें |

भारत में Laghu Udyog खोलने के फायदे

  1. लघु उद्योग खोलने के लिए आपको कम पूँजी की आवश्यकता पड़ती है | अर्थात आप कम पूँजी निवेश करके भी लघु उद्योग की स्थापना कर सकते हैं |
  2. लघु उद्योग खोलने के लिए सरकार आपको प्रेरित करती है | और आपको सरकार का समर्थन हासिल होता है | आपके भविष्य के संवर्धन प्रक्रिया हेतु भी सरकार आपकी मदद करती है | जिससे अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों सकें |
  3. निर्माण क्षेत्र में लघु उद्योगों के लिए आरक्षण विद्यमान है |
  4. वित्त सम्बन्धी समस्याओ के लिए भी फंड और सब्सिडी विद्यमान है |
  5. किसी विशेष खरीद पर सरकार द्वारा आरक्षण दिया जायेगा |
  6. समग्र आर्थिक विकास हेतु घरेलू बाज़ार की मांग में वृद्धि |
  7. दुनिया के बाजारों में भारतीय उत्पाद की मांग बढ़ सकती है | इसलिए भारतीय उत्पादों का निर्यात संभावित है |
  8. Laghu Udyog स्थापित करने के लिए मशीने, कच्चा माल, मजदूर, सस्ते दरो पर उपलब्ध हों जाते हैं | क्योकि अधिकतर लघु उद्योग स्थानीय लोगो को लक्ष्य रखते हुए ही स्थापित किये जाते हैं | और लोगो को अपने घर के नजदीक ही काम मिल जाता है | इसलिए वे थोड़े कम पैसे लेके भी काम करने लगते हैं |

अति लघु उद्योग, लघु उद्योग, मध्यम उद्योग में कौन कौन से उद्योग आते हैं ?|

इन उद्योगों को दो क्षेत्र में विभाजित किया जा सकता है |

  • निर्माण क्षेत्र
  • सेवा क्षेत्र

इन दोनों क्षेत्रो में कौन कौन से उद्योग अति लघु उद्योग, लघु उद्योग एवं मध्यम उद्योग की श्रेणी में आयेंगे | उनका आर्थिक निर्धारण निम्न है |

Manufacturing Sector (निर्माण क्षेत्र)  :

जमीन और बिल्डिंग के खर्चे  को छोड़कर निर्माण के क्षेत्र में लगने वाले उद्योग जो 25 लाख या 25 लाख से कम का निवेश लगाकर स्थापित किये गए हैं | अति लघु उद्योग की श्रेणी में आते है | वो उद्योग जो 25 लाख से अधिक और पांच करोड़ से कम का निवेश कर स्थापित किये गए हैं | Laghu Udyog की श्रेणी में आते हैं | और वो उद्योग जिन्होंने पांच करोड़ से ज्यादा और 10 करोड़ से कम का निवेश कर उद्योग स्थापित किया है | मध्यम वर्ग उद्योग में सम्मिलित हैं |

Service Sector (सेवा क्षेत्र) :

वो उद्योग जिन्होंने 10 लाख से कम का निवेश करके कंपनी स्थापित की हो, अति लघु उद्योगों  की श्रेणी में आते हैं | ऐसे उद्योग जिन्होंने 10लाख से ज्यादा और 2 करोड़ से कम का निवेश करके कंपनी स्थापित की हो | लघु उद्योगों की श्रेणी में आते हैं | और ऐसे उद्योग जिन्होंने दो करोड़ से ज्यादा और पांच करोड़ से कम का निवेश किया हो | मध्यम वर्गीय उद्योग में सम्मिलित हैं |इनमे भी Land एवं building का खर्चा सम्मिलित नहीं है |

Read Also. लघु उद्योग के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं की लिस्ट ।

Laghu Udyog लगाने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखें?

Project Selection (परियोजना का चयन)

Laghu Udyog Start करने के लिए सर्वप्रथम आपको अपनी परियोजना का चयन अर्थात Project selection करना होगा | आपके द्वारा जारी किया गया Laghu Udyog किसी विचार अर्थात Idea पर आधारित होना चाहिए | और आप अपने Laghu Udyog खोलने के विचार (Idea) को निम्न बातों के आधार पर तौल सकते हैं | आप अपने Laghu Udyog खोलने के विचार को कसौटी पर उतारने के लिए अपने आप से ही निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकते हैं |

  • जो विचार आप में संचारित हुआ है | क्या वह आपकी रुचि से मेल खाता है ?|
  • जिस विचार को आप क्रियान्वित करना चाहते हैं, क्या उसी क्षेत्र में आपको कोई अनुभव है ?
  • Laghu Udyog के अंतर्गत आप जो कारोबार (Business) करने की सोच रहे हैं क्या आपका क्षेत्र उस business के लिए अच्छा क्षेत्र है?|
  • क्या आपके Laghu Udyog द्वारा उत्पादित उत्पाद/सेवा आपके ग्राहकों को संतुष्ट कर पायेगी?
  • क्या आपने अपने Business सम्बन्धी किसी विशेषज्ञ से बात की?
  • क्या आपने बाज़ार में अपनी उत्पाद/सेवा Research की?
  • क्या आपने अपने Laghu udyog सम्बन्धी प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण किया?
  • जिस क्षेत्र में आप Laghu Udyog स्थापित करने वाले हैं, क्या वह क्षेत्र उठता हुआ अर्थात उगता हुआ क्षेत्र है ?
  • क्या आपको लगता है की यह अवसर आपके लिए सुनहरा अवसर है?

Project Conceptualization for Laghu Udyog

यदि उपर्युक्त प्रश्नों के लिए आपका जवाब हाँ है | तो Laghu Udyog Kholne के लिए अगला स्टेप परियोजना की अवधारणा अर्थात (Project Conceptualization) है | परियोजना की अवधारणा करते समय चार बातों का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए |

  • Laghu Udyog द्वारा उत्पादित उत्पाद आकार, साइज़ और प्रकृति
  • उत्पाद के उत्पादन के लिए तकनिकी प्रक्रिया
  • जगह जहाँ आप Laghu Udyog  अर्थात Plant लगाने वाले हैं |
  • तकनिकी और आर्थिक रूप से सहयोग करने वाले सहयोगी |

Product Selection for Laghu Udyog

Laghu Udyog के अंतर्गत उत्पाद चयन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें |

  • उत्पाद की गहराई, लम्बाई, चौड़ाई इत्यादि |
  • उत्पाद की पैकेजिंग
  • उत्पाद की ब्रांडिंग
  • उत्पाद की वारंटी
  • उत्पाद के बिक जाने के बाद ग्राहक को सेवा
  • कच्चे माल की उपलब्धता
  • बाज़ार की पहुँच
  • सरकारी सहायता एवं प्रोत्साहन

उत्पाद का चयन करते समय बाज़ार का ज्ञान होना भी जरुरी है | की पहले से कितने और किस प्रकार के प्रतिस्पर्धी बाज़ार में उपलब्ध हैं |

यदि Laghu Udyog खोलने वाला उद्यमी किसी ऐसे उत्पाद का उत्पादन करने जा रहा है जिसको निर्यात करने की संभावना अधिक है | इस स्तिथि में उद्यमी (Enterperuner)  को अपने आप से निम्नलिखित प्रश्न पूछने चाहिए |

  • क्या मुझे पता है की जिस उत्पाद का में उत्पादन करने जा रहा हूँ उसको निर्यात करने में कौन कौन से कागजाद और कितना खर्चा आएगा ?|
  • क्या मैं निर्यात होने वाली वस्तु की पैकेजिंग विधि से अवगत हूँ?
  • क्या मेरे Laghu Udyog द्वारा उत्पादित उत्पाद सभी देशो में स्वीकृत है?
  • क्या मुझे World Trade Organization के नियमो के बारे में पता है?

इसके अलावा निर्यात योग्य उत्पाद का उत्पाद करते समय निम्न बातो का ध्यान रखना भी जरुरी है |

  • बाहरी देशो में मांग की स्तिथि का जायजा लेना
  • अपने Laghu Udyog की उत्पादन क्षमता को परखना |
  • अपने उत्पाद के प्रचार हेतु आने वाली जटिलताओ का विश्लेषण करना |
  • बाज़ार में अपनी साख बनाने हेतु, निवेश का विश्लेषण करना |

Comments

  1. By Anbar khan

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  2. By jigyanshu chaudhary

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  3. By himanshu

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  4. By RITESH BHATNAGAR

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