Aloe Vera Farming Business – How to start in India.

Aloe Vera Farming Business – How to start in India.

Aloe Vera farming यानिकी एलोवेरा की खेती वर्तमान में बेहद प्रचलित होती जा रही है क्योंकि एलोवेरा नामक इस कृषि उत्पाद का उत्पादन करके कुछ किसानों द्वारा अपनी अच्छी खासी कमाई की जा रही है | इस उत्पाद के उत्पादन में होने वाली कमाई का मुख्य कारण इस उत्पाद की अलग अलग उपयोगिताएं हैं अर्थात जहाँ एक तरफ एलोवेरा जिसे हिंदी में घृत कुमारी कहा जाता है का उपयोग इसमें औषधीय गुणों के चलते स्वास्थ्य सम्बन्धी उत्पाद बनाने के तौर पर किया जाता है वहीँ इसका उपयोग कॉस्मेटिक एवं ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने के लिए भी किया जाता है | यही कारण है की वर्तमान में Aloe Vera farming business कर रहे किसान या उद्यमी अपनी अच्छी खासी कमाई कर पाने में सक्षम हैं | लोगों की अपने स्वास्थ्य की ओर बढती चेतना के कारण कहें, या दूषित हवा में सांस लेने एवं दूषित पानी पीने के कारण लोगों का बार बार बीमार पड़ जाने के कारण कहें, या फिर लोगों की शारीरिक कार्यों में हो रही दिनोंदिन गिरावट के चलते शरीर में विभिन्न तत्वों की कमी के कारण होने वाली अस्वस्थता के कारण कहें सच्चाई यह है की वर्तमान में लोग अपनी सेहत एवं स्वास्थ्य को लेकर काफी सचेत हो गए हैं, चूँकि एलोवेरा को औषधि के तौर पर उपयोग में लाया जाता है इसलिए इसकी मांग बड़ी तेजी से बढ़ी है |

Aloe-Vera-farming

Aloe Vera Farming क्या है :

जहाँ तक एलोवेरा नामक औषधियुक्त गुणों से भरपूर इस पौधे का सवाल है माना यह जाता है की इसकी उत्पति उत्तरी अफ्रीका से हुई थी | हिंदी में इस औषधि युक्त पौधे को घृत कुमारी एवं ग्वारपाठा भी कहा जाता है जबकि Aloe Vera अंग्रेजी शब्द है | यह पौधा 60 से 90 सेमी. तक ऊँचा एवं इसकी पत्तों की लम्बाई 30-45 सेमी. तक हो सकती है | इसके पत्तों के किनारे पर छोटे छोटे कांटे जैसे होते हैं हालांकि Aloe Vera  नामक इस औषधियुक्त पौधे की कई प्रजातियाँ होती हैं, जो अलग अलग रोगों में अलग अलग ढंग से प्रभावी हो सकती हैं | जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की वर्तमान में Aloe Vera Farming का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इस औषधियुक्त पौधे के उपयोग बढ़ गए हैं अर्थात जहाँ पहले सिर्फ हर्बल इंडस्ट्री में इसका उपयोग होता था वर्तमान में ब्यूटी एवं कॉस्मेटिक प्रोडक्ट एवं टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भी इसका उपयोग होने लगा है | इसलिए उपर्युक्त दी गई इंडस्ट्री की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु जब किसी किसान या उद्यमी द्वारा एलोवेरा की खेती की जाती है तो उसे ही Aloe Vera Farming कहा जाता है |

बाज़ार में अवसर:

यद्यपि वर्तमान में इस जादुई पौधे एलोवेरा का उपयोग हेल्थ केयर, कॉस्मेटिक एवं टेक्सटाइल इंडस्ट्री में होता है इसलिए हर्बल दवाइयां बनाने वाली कंपनियां जैसे पतंजलि, डाबर, वैद्यनाथ, रिलायंस इत्यादि बड़ी कंपनियों द्वारा इस उत्पाद की सर्वाधिक मांग की जाती है | चूँकि वर्तमान में मनुष्य विलासिता पूर्ण जीवन व्यतीत करने लगा है जिसके चलते उसमे तरह तरह की बीमारियों का प्रादुर्भाव होने लगा है | और इसी कारण मनुष्य अपनी सेहत के प्रति काफी सचेत होता नज़र आता है और वह एलोवेरा का जूस इत्यादि उत्पाद आसानी से खरीदता है | इसके अलावा इससे निर्मित ब्यूटी एवं कॉस्मेटिक उत्पाद भी काफी प्रभावी होने के कारण लोगों का उन पर विश्वास बढ़ता है, और उत्पाद की मांग भी बाजारों में बढती है | इन्ही सब बातों के मद्देनज़र कहा जा सकता है की वर्तमान में Aloe Vera farming  business के लिए बाज़ार का रुख सकारात्मक है |

How to start Aloe Vera Farming in Hindi:

Aloe Vera farming business अर्थात एलोवेरा की खेती शुरू करने से पहले अपने आप से यह सवाल अवश्य पूछ लें की क्या आपको खेती सम्बन्धी कार्यों को करने में मजा आता है? यदि इसका जवाब हाँ है तो अगला सवाल यह पूछिए की आप यह खेती करने का काम क्यों करना चाहते हैं यदि आप सिर्फ यह इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि अन्य कोई व्यक्ति यह काम करके अपनी अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं और आप सोचते हैं की क्यों न आप भी Aloe Vera farming business करके कमाई करें तो यह गलत है और यदि आप यह कार्य यह सोचकर कर रहे हैं क्योंकि आपको यह कार्य करने में मजा एवं आनंद की अनुभूति होती है तो यह सही है |  कहने का आशय यह है की किसी की देखादेखी से शुरू होने वाला काम मुकाम तक पहुंचने में मुश्किलें खड़ी कर सकता है, लेकिन रूचि के मुताबिक किये जाने वाले काम को करने में ऐसे चांस कम होते हैं, तो उसकी सफलता के अधिक विकल्प | इसलिए Aloe Vera farming business शुरू करने से पहले व्यक्ति को अपनी रूचि, जानकारी एवं अनुभव का भी विश्लेषण करना चाहिए |

एलोवेरा फार्मिंग के लिए उपयुक्त मिटटी एवं जलवायु:

खेती में किसी भी फसल का उत्पादन करने के लिए पहले यह जरुरी हो जाता है की उस फसल के बारे में जान लें की उसके उत्पादन के लिए किस प्रकार की मृदा एवं जलवायु की आवश्यकता हो सकती है | जहाँ तक Aloe Vera farming  यानिकी एलोवेरा की खेती का सवाल है यह अनुपजाऊ एवं उपजाऊ किसी भी प्रकार की मिटटी में उगने का सामर्थ्य रखती है | क्योंकि वर्तमान में हम देख सकते हैं की लोग अपने घर के आँगन, छतों इत्यादि में भी इसके पौधे को उगाते हैं जहाँ की मिटटी उपजाऊ नहीं होती है | लेकिन इसकी खेती करने में एक बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए की खेती की जाने वाली जगह जलभराव वाली नहीं होनी चाहिए | Aloe Vera farming के लिए खेत को तैयार करने में दो बार जुताई की जा सकती है उसके बाद उस जमीन में प्रति हेक्टेयर 10-15 टन गोबर खाद, 100 किलोग्राम यूरिया, 120 किलोग्राम फॉस्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश इत्यादि डाला जा सकता है | और उसके बाद मिटटी को समतल बनाने वाले यंत्र का इस्तेमाल करके मिटटी को समतल बनाकर क्यारियों का निर्माण किया जा सकता है, जिनमे पौधों का रोपण किया जायेगा |

एलोवेरा के पौधों की रोपाई:

यद्यपि एलोवेरा की पौधों की रोपाई के लिए फरबरी महीने को उपयुक्त माना जाता है लेकिन इसका रोपण कभी भी किया जा सकता है | यद्यपि इन सबके बावजूद अच्छे उत्पादन के लिए Aloe Vera farming business  कर रहे उद्यमी या किसान को जून –जुलाई या फिर फरबरी मार्च में इनका रोपण करना चाहिए | अच्छी उपज के लिए एलोवेरा की अच्छी नस्ल का चुनाव करके उसके पौधों को रोपित किया जा सकता है | क्यारियों में पौधों को 50×50 सेमी. की दूरी पर रोपित किया जा सकता है |

एलोवेरा के पौधों की सिंचाई:

पौधों का रोपण कर देने के बाद Aloe Vera farming business कर रहे उद्यमी या किसान को चाहिए की वह उन पौधों को सिंचित करे | इस सिचाई को उद्यमी चाहे तो स्प्रिंकलर अर्थात छिड़काव या ड्रिप विधि से अंजाम दे सकता है चूँकि एलोवेरा की खेती 8-18 महीने तक की हो सकती है इसलिए उद्यमी या किसान को चार पांच बार सिंचाई करनी पड़ सकती है क्योंकि शोध से पता चला है की सिंचाई करने से एलोवेरा के पत्तों में उत्पन्न होने वाला जैल मात्रा एवं गुणवत्ता दोनों में उच्च होता है | हालांकि यह सत्य है की घृत कुमारी के इस पौधे को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन खेत में नमी बनी रहे इसलिए सिंचाई की आवश्यकता होती है |

बीमारी एवं कीट नियंत्रण:

यदि Aloe Vera farming business कर रहे उद्यमी या किसान द्वारा इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो हो सकता है की उन पौधों को कोई ऐसा रोग लग जाए जिससे सारी फसल खराब हो जाय इसलिए जब तक फसल कटे न तब तक बीमारी एवं कीट नियंत्रण करना बेहद जरुरी होता है इसके लिए उद्यमी या किसान चाहे तो समय समय पर खेत में उपलब्ध खरपतवारों को निकालते रहे, पौधों के जड़ों में समय समय पर मिटटी को इस तरह से चढ़ाएं की उनके जड़ों में पानी का ठहराव न हो | हालांकि एलोवेरा के पौधों पर बीमारियों के प्रकोप को कम ही देखा गया है लेकिन कभी कभी इनके पत्तों एवं तनों के सड़ने एवं उन पर धब्बा नुमा रोग को देखा गया है और इसके बारे में कहा जाता है की यह एक फफूंदी जनित रोग है जिसका निराकरण कुछ कवकनाशी दवाओं जैसे mancozeb, ridomil, dithane m-45 का छिड़काव किया जा सकता है |

फसल कटाई एवं उत्पादन:

एलोवेरा की फसल को तैयार होने में 8-18 महीने का समय लग सकता है लेकिन कटाई का कार्य प्रारम्भ करने से पहले Aloe Vera farming Business कर रहे उद्यमी या किसान को इस बात से अवगत होना चाहिए की कटने के बाद उस उत्पादित फसल को 4-5 घंटे में प्रोसेसिंग यूनिट अर्थात जहाँ उस एलोवेरा के पत्तों को जैल या अन्य किसी रूप में परिवर्तित कर दिया जायेगा तक पहुंचना जरुरी है इसलिए फसल की कटाई तभी करें जब आपके पास खरीदार उपलब्ध हो और वह अपने रिस्क पर इस उत्पादित माल को Processing Unit तक पहुँचाने की जिम्मेदारी ले रहा हो | इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक शुरूआती दौर में Aloe Vera farming Business कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अंतर्गत करनी चाहिए | जब इस पौधे की पत्तियां पूर्ण रूप से विकसित हो जाएँ तो उद्यमी या किसान को चाहिए की वह पहले उन्हीं पत्तियों की कटाई करे जो पूर्ण रूप से विकसित हो चूकी हैं अविकसित पत्तियों को पौधे पर ही छोड़ दे और 40-45 दिनों के बाद उनकी भी कटाई कर दे | कटाई के बाद इन पौधों की सफाई करने के लिए इन्हें साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लिया जाता है ताकि मिटटी इत्यादि निकल जाय उसके बाद इन पत्तियों के नीचे जो कट लगा होता है उसे कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं ताकि पीला गाढ़ा रस निकल जाय लेकिन इस पीले गाढे रस से वाष्पीकरण के माध्यम से निर्मित इसके अवशेष को वैश्विक बाजारों में मुसब्बर, सकोत्रा, जंजीवर,अदनी इत्यादि के नाम से जाना जाता है |

एलोवेरा फार्मिंग से कमाई:

एक आंकड़े के मुताबिक Aloe Vera farming Business के प्रथम वर्ष एक एकड़ में इसकी खेती करने पर लगभग 80 हज़ार से एक लाख रूपये तक का खर्चा आ सकता है | और जहाँ तक इसी एक एकड़ से फसल की परिपक्वता पर होने वाली कमाई का सवाल है इससे लगभग 6-7 लाख रूपये कमाई होने के आसार लगाये जा सकते हैं | Aloe Vera के पत्ते जहाँ 5-7 रूपये किलो बिकते हैं वहीँ इसका पल्प 20-30 रूपये किलो बिकता है इसलिए Aloe Vera farming Business कर रहे उद्यमी या किसान के लिए पत्तों की तुलना में पल्प बेचना अधिक लाभकारी हो सकता है |

कमाई के लिए अन्य फार्मिंग बिज़नेस आइडियाज:

Comments

  1. By Anish

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