Aluminum Utensils Manufacturing Business

Aluminum Utensils Manufacturing Business

Aluminum Utensils से हमारा अभिप्राय एल्युमीनियम के बर्तनों से हैं जिनका आज दैनिक जीवन में किसी भी घर परिवार में सर्वाधिक उपयोग होता है | हालांकि हम यहाँ पर यह बिलकुल नहीं कहना चाहेंगे की Aluminum Utensils का बाज़ार में कोई दूसरा विकल्प नहीं है बल्कि इस उत्पाद के विकल्पों से तो बाज़ार भरा पड़ा है | कहने का आशय यह है की कांच के बर्तन, तांबे के बर्तन, पीतल के बर्तन, स्टेनलेस स्टील के बर्तन, चीनी मिटटी के बर्तन, इस्पात से निर्मित बर्तन इत्यादि बाज़ार में हर जगह मिल जायेंगे लेकिन एल्युमीनियम के बर्तन ही सर्वाधिक उपयोग में लाये जाते हैं, क्योंकि इनकी कीमत एवं चलने की क्षमता ऐसी होती है की भारत में हर सामजिक, आर्थिक रूप से वर्गीकृत वर्ग की पहुँच इन बर्तनों तक आसानी से हो जाती है | हालांकि हम आगे भी सिलसिलेवार तरीके से अन्य बिज़नेस जैसे कांच के बर्तनों एवं चीनी मिटटी के बर्तनों के बारे में वार्तालाप जरुर करेंगे लेकिन आज अपने इस लेख के माध्यम से हम Aluminum Utensils Manufacturing Business के बारे में जानने की कोशिश करेंगे इस लेख के मुख्य विषय इस प्रकार रहेंगे जैसे की यह बिज़नेस है क्या? इस बिज़नेस के लिए बाज़ार में क्या अवसर विद्यमान हैं? इस बिज़नेस को करने के लिए कौन कौन से मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है इसके अलावा संक्षिप्त तौर पर हम इन बर्तनों के बनने की प्रकिया अर्थात Manufacturing process पर भी वार्तालाप करेंगे |

Aluminium-Utensils manufacturing business

Aluminum Utensils Manufacturing Business Kya hai:

बर्तन चाहे किसी भी धातु या मिटटी से बने हुए हों इनका उपयोग घरेलू सामान के तौर पर जैसे खाना पकाने, जल भण्डारण करने, पानी गरम करने इत्यादि क्रियाओं के लिए ही किया जाता है | जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की बर्तनों के बाज़ार में एल्युमीनियम के बर्तन अर्थात Aluminum Utensils ही एकमात्र विकल्प एवं लोगों की पसंद नहीं है बल्कि अन्य बर्तनों की तुलना में भारतवर्ष में इनका उपयोग अधिक लोगों द्वारा किया जाता है | हालांकि स्टेनलेस स्टील के बर्तनों ने भी बर्तनों के बाज़ार में अपनी खास जगह बनायीं हुई है लेकिन स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का अधिकतर उपयोग आर्थिक रूप से समर्थ लोगों द्वारा किया जाता है क्योंकि ये एल्युमीनियम बर्तनों की तुलना में महंगे होते हैं | यदि हम इन बर्तनों की तुलना अन्य धातुओं से निर्मित बर्तनों से करें तो हम पाएंगे की इन बर्तनों का उपयोग समाज के हर वर्ग द्वारा किया जाता रहा है क्योंकि ये कीमत एवं उपयोग के आधार पर उनकी आवश्यकता से ज्यादा मेल खाते हैं | यही कारण है की इंडिया में Aluminum Utensils का उपयोग बड़े पैमाने अर्थात व्यापक तौर पर किया जाता है | लोगों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जब किसी उद्यमी द्वारा व्यवसायिक तौर पर एल्युमीनियम के बर्तन बनाने का काम किया जाता है तो उस उद्यमी द्वारा किया जाने वाला बिज़नेस Aluminum Utensils Manufacturing Business कहलायेगा |

Market Opportunity in Aluminum Utensils Business:

जहाँ तक एल्युमीनियम के बर्तन बनाने के बिज़नेस में बाज़ार के अवसर का सवाल है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की इंडिया जैसे विशालकाय देश में इस प्रकार के बर्तन इनकी गुणवत्ता एवं कम कीमत के चलते पहली पसंद बने हुए हैं इसलिए इनका उपयोग क्षेत्र सीमित नहीं है अर्थात इनका उपयोग ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक सभी जगह किया जाता है | एक तरफ जहाँ इनकी मांग घरेलू सामान के तौर पर होती है वही होटल, रेस्तरां, ढाबों एवं खान पान के अन्य स्थलों पर इनकी मांग को व्यवसायिक भी कहा जा सकता है | इसके अलावा एल्युमीनियम से निर्मित बर्तन की उपयोग के बाद Recycling Value भी ठीक रहती है अर्थात यदि बर्तन पुराना हो जाय या टूट फूट हो जाय तो उसे फेंकने की बजाय कुछ पैसों में आसानी से बेचा जा सकता है | चूँकि इनसे सस्ते बर्तन बाज़ार में उपलब्ध होंगे लेकिन वे मिटटी से निर्मित होंगे जो Aluminum Utensils की तुलना में बहुत कम टिकाऊ होते हैं | इसलिए इनमे टिकाऊपन का गुण एवं सस्ते होने के कारण शहर हो या गाँव इन्हें पसंद किया जाता रहा है | प्राय ऐसा देखा गया है की Aluminum Utensils की मांग जनसँख्या वृद्धि के साथ और बढती जाती है, इसलिए आने वाले समय में भी इस Aluminum Utensils Manufacturing Business में मार्किट का रुख सकारात्मक है |

Required Machinery and raw Materials:

इस बिज़नेस में मुख्य रूप से प्रयुक्त होने वाला Raw Material व्यवसायिक तौर पर उपयोग में लायी जाने वाली एल्युमीनियम की सिल्लियाँ (Commercial grade aluminum Ingots)और एल्यूमिनियम स्क्रैप है | इसके अलावा उपयोग होने वाली मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • तेल से चालित भट्टी बर्नर तेल टैंक एवं पाइप फिटिंग इत्यादि के साथ
  • ब्लोअर
  • तेल लाइन वाला प्री हीटर
  • एनीलिंग भट्टी एनीलिंग के लिए चादरें और मंडलियां |
  • हैवी प्रकार की एल्युमीनियम हॉट रोलिंग मिल अन्य आवश्यक उपकरणों के साथ |
  • हैवी प्रकार की एल्युमीनियम कोल्ड रोलिंग मिल अन्य आवश्यक उपकरणों के साथ |
  • हाथ से चालित Sheering Machine
  • मोटर के साथ सर्किल cutting मशीन
  • लाइट पंचिंग के लिए हैण्ड फ्लाई प्रेस
  • मोटर और स्टार्टर के साथ डबल एक्शन डीप ड्राइंग पॉवर प्रेस |
  • Spinning Lathe
  • इलेक्ट्रॉनिक मापक यंत्र
  • सेण्टर lathe
  • पिलर ड्रिलिंग मशीन
  • Arc Welding Transformer
  • बेंच ग्राइंडर
  • Slab के लिए कास्ट आयरन मोल्ड
  • Deep Drawing dies
  • Spinning Dies
  • एसिड टैंक
  • Spinning उपकरण
  • टेस्टिंग उपकरण

Manufacturing Process of aluminum Utensils:

Aluminum Utensils manufacturing business में व्यवसायिक तौर पर उपयोग होने वाला 99.5% शुद्धता वाली एल्युमीनियम की सिल्लियाँ उपयोग में लायी जाती है इसके अलावा कुछ मात्रा में एल्युमीनियम स्क्रैप भी उपयोग में लाया जाता है | जिस स्क्रैप की पहचान न की गई हो अर्थात जिसे मानकों पर तौला नहीं गया हो उस स्क्रैप में जिंक, कॉपर या Lead हो सकता है इसलिए उसका उपयोग बर्तन बनाने में नहीं करना चाहिए क्योंकि यह केवल बर्तनों की गुणवत्ता को नहीं गिराएगा अपितु मनुष्य के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है | इसलिए ध्यान रहे उपयोग में लाये जाने वाला स्क्रैप यदि फ़ूड गुणवत्ता के आधार पर चयन नहीं किया जायेगा तो कच्चे माल की बर्बादी अधिक हो सकती है क्योंकि Manufacturing Stage में इसे रिजेक्ट करना पड़ेगा | और वह इसलिए क्योंकि Bureau Of Indian Standards ने इसके लिए ISS:1660(Part-I) 1982 मानक निर्धारित किये हैं | जहाँ तक Aluminum Utensils के Manufacturing Process की बात है उसका संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार से है | यद्यपि हम यहाँ पर यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं की बर्तनों के आकार एवं प्रकार के आधार पर Manufacturing Process में बदलाव स्वभाविक है, इस बिज़नेस को शुरू करने में कुल अनुमानित लागत पांच करोड़ से ऊपर की लग सकती है | लेकिन किराये इत्यादि को उसमे से Exclude कर दें तो यह लघु उद्योग के अंतर्गत आ सकता है, इसके अलावा किसी बर्तन विशेष का ही उत्पादन करने का प्लान बनाकर प्रोजेक्ट कास्ट को कम किया जा सकता है | सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योगों को समझने के लिए यह पढ़ें | Aluminum Utensils manufacturing process में सबसे पहले एल्युमीनियम की सिल्लियों एवं स्क्रैप को पिघलाया जाता है उसके बाद Cast Iron Moulds की मदद से स्लैब एवं साइज़ के आधार पर इनकी कास्टिंग की जाती है | उसके बाद चूँकि स्लैब पहले से गरम होते हैं इसलिए इन्हें हॉट रोलिंग मशीन में लगी प्लेट में रोल कर दिया जाता है | अंत में आवश्यक गेज की शीट को कोल्ड रोलिंग मिल में पुनः रोलिंग द्वारा प्राप्त किया जाता है ।उसके बाद इन शीट अर्थात एल्युमीनियम की चादरों को चौकौर या रिक्त circle आकृति में काट लिया जाता है | उसके बाद इन्हें आगे की प्रक्रिया पर भेजने से पहले Annealed कर लिया जाता है  उसके बाद इन circle को प्रेस में डाला जाता है और उसके बाद अलग अलग वस्तुओं के लिए प्रेसिंग प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है Spinning Process को भी अलग अलग वस्तुओं के उत्पादन के लिए अंजाम दिया जाता है | उसके बाद Surface Finishing नामक प्रक्रिया को अनजाम दिया जाता है और आगे स्टोर और आर्डर के मुताबिक डिस्पैच का काम करके उद्यमी द्वारा अपनी कमाई की जाती है |

Comments

  1. By rajeev gupta

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