आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे बनें । How to become an Ayurvedic Doctor.

यद्यपि बीच में एक दौर ऐसा चला था जब भारत जैसे देश में Ayurvedic Doctor की मांग इतनी ज्यादा नहीं थी की वह इस व्यवसाय से कमाई करके अपने सपनों को पूरा कर सकने में समर्थ हों । लेकिन वर्तमान में अंग्रेजी दवाइयों के बढ़ते दुष्प्रभावों के कारण, और आयुर्वेदिक दवाओं का बीमारी को जड़ से ख़त्म करने की क्षमता के कारण लोगों का ध्यान  आयुर्वेद की तरफ भी गया है । भारत में ही नहीं अपितु विश्व में भी आयुर्वेदिक दवाओं का प्रचलन बढ़ता जा रहा है और लोग इन्हें अंग्रेजी या केमिकल युक्त दवाओं से बेहतर मान रहे हैं। यही कारण है की वर्तमान में हेल्थकेयर क्षेत्र में आयुर्वेद अद्वितीय बन गया है और भारत में तो बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें केवल आयुर्वेदिक दवाइयों पर पूरा विश्वास रहता है की वे उनके रोग को दूर भगाने में पूरी तरह से कारगर साबित होंगे। तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मानते हैं की आयुर्वेदिक दवाईयाँ अंग्रेजी दवाईयों की तुलना में कम प्रभावी होती हैं इसलिए यह धीरे धीरे असर करती है। लेकिन इन सबके बावजूद वर्तमान में देश में Ayurvedic Doctor की माँग तेजी से बढ़ रही है । इसलिए कोई भी विद्यार्थी या व्यक्ति आयुर्वेदिक डॉक्टर बनकर न सिर्फ अपनी कमाई कर सकता है बल्कि मानव जाति की मदद भी कर सकता है। इससे पहले की हम यह जानें की भारत में Ayurvedic Doctor कैसे बनें आइये जान लेते हैं की ये होते कौन हैं।

Ayurvedic-doctor-kaise-bane

किन्हें कहा जाता है Ayurvedic Doctor:

प्राचीनकाल की चिकित्सा पद्यति की बात करें तो लगभग हर क्षेत्र में कोई न कोई वैद्य हुआ करते थे जो उस क्षेत्र विशेष के लोगों की चिकित्सा आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों द्वारा किया करते थे। उस जमाने में इन्हें इस क्षेत्र की कोई औपचारिक शिक्षा देने का रिवाज नहीं था अर्थात यदि कोई व्यक्ति वैद्य है तो वह अपने परिवार के किसी एक सदस्य को यह कार्य सीखा देता था। ताकि उसकी मृत्यु के बाद उसके परिवार से ही कोई वैद्य का काम संभाल सके। तब के वैद्य को उस जमाने का Ayurvedic Doctor कहा जा सकता है। लेकिन वर्तमान में एक ऐसा व्यक्ति जो BAMS की डिग्री लेकर आयुर्वेदिक पद्यति से लोगों के रोगों का ईलाज करने में तत्पर हो को Ayurvedic Doctor कहा जा सकता है । हालांकि आयुर्वेद का प्रमुख मकसद अच्छे स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना होता है न की रोगों का ईलाज करना, इसलिए ऐसे लोग जिन्हें किसी प्रकार का कोई रोग नहीं है वे भी आयुर्वेदिक उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे।

भारत में Ayurvedic Doctor की महत्वता:

जैसा की हम सबको विदित है की जनाधिक्य के मामले में अपना देश भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा देश है, इसलिए इतनी बड़ी जनसँख्या में हर किसी के पास एलोपेथिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना एक बड़ी चुनौती रही है। आज भी देश में अनेकों हिस्से ऐसे हैं जो एलोपेथिक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी Ayurvedic Doctor के कन्धों पर होती हैं दूसरा कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें अंग्रेजी दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण उन दवाइयों से भरोसा ही उठ जाता है और वे अपना ईलाज आयुर्वेदिक दवाइयों के माध्यम से कराना पसंद करते हैं। वर्तमान में लोगों की बदलती जीवनशैली एवं तनाव के बढ़ने के कारण लोगों में तरह तरह के रोगों का जन्म हो जा रहा है इनमें कुछ रोग ऐसे भी हैं जिनका केवल आयुर्वेद में ही उपचार संभव है। लोग आयुर्वेदिक उपचार को इसलिए भी अच्छा समझते हैं क्योंकि इन दवाओं का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता या फिर बहुत कम होता है । यही कारण है की एक बार भारत में फिर से Ayurvedic Doctor का स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है ।

Ayurvedic Doctor बनने के लिए योग्यता:  

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की Ayurvedic Doctor बनने के लिए इच्छुक विद्यार्थी को Bachelor of Ayurveda Medicine and Surgery (BAMS) करने की आवश्यकता होती है। और इस प्रकार का यह कोर्स करने के लिए निम्न योग्यता की आवश्यकता होती है ।

  • उम्मीदवार बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी (PCB) विषयों में कम से कम 50% अंको के साथ पास होना चाहिए।
  • साइंस से ग्रेजुएट विद्यार्थी भी इस कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं ।

Ayurvedic Doctor बनने के लिए आवश्यक कौशल:

  • आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए काफी कठिन परिश्रम, निष्ठा और समाज की सेवा करने का भाव चाहिए होता है ।
  • आयुर्वेदिक डॉक्टर को अनुशाषित, धैर्यवान एवं रोगियों के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए।
  • इन्हें जीवन चक्र और शरीर की शारीरिक रचना की पूरी जानकारी होनी चाहिए।
  • एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास मजबूत एकाग्रता, अवलोकन, देखभाल की प्रकृति, अच्छी कम्युनिकेशन इत्यादि कौशल होने चाहिए ।
  • ऐसे उम्मीदवार जिन्हें संस्कृत का ज्ञान हो उन्हें आयुर्वेद सीखने में आसानी होती है इसलिए उम्मीदवार को संस्कृत सीखनी चाहिए।   

आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे बने (How to become an Ayurvedic Doctor in Hindi):

Ayurvedic Doctor बनने के इच्छुक विद्यार्थी को अनेकों कदम उठाने पड़ सकते हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन हम नीचे दे रहे हैं।

1. बारहवीं साइंस से करें:

Ayurvedic Doctor बनने के इच्छुक विद्यार्थी को दसवीं के बाद साइंस सेक्शन का चुनाव करना चाहिए और इसमें भी उसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी इत्यादि विषयों का चयन करने की आवश्यकता होती है। सेक्शन एवं विषयों का चुनाव कर लेने के बाद आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के इच्छुक विद्यार्थी को पूरा ध्यान पढाई पर लगाना चाहिए। क्योंकि BAMS  करने के लिए बारहवीं में एक निर्धारित प्रतिशत के साथ परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है वर्तमान में यह 50% है। जो आने वाले सालों में बढ़ भी सकती है। इसलिए बारहवीं में अधिक से अधिक नंबर लाने की कोशिश करें।      

2. एंट्रेंस एग्जाम दें:

अलग अलग राज्यों में BAMS के लिए एडमिशन हेतु एंट्रेंस एग्जाम अलग अलग हो सकते हैं इनमें कुछ एंट्रेंस एग्जाम राज्य द्वारा आयोजित कराये जाते हैं तो कुछ एंट्रेंस एग्जाम आयुर्वेदिक कॉलेजों द्वारा भी आयोजित कराये जाते हैं। इस तरह की यह परीक्षाएं आम तौर पर मई जून में आयोजित की जाती हैं। और इनमे अंग्रेजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी इत्यादि विषयों से जुड़े हुए ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न आते हैं। इसलिए बारहवीं के बाद Ayurvedic Doctor बनने के इच्छुक विद्यार्थी को राज्य के विभिन्न आयुर्वेदिक कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया पर नज़र बनायीं रखनी होगी।   

3. एडमिशन लें, कोर्स एवं ट्रेनिंग पूरा करें:

एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने के बाद कॉलेज में BAMS के लिए एडमिशन लेना होता है यह पांच सालों की अवधि का कोर्स होता है जिसमे छह महीने की ट्रेनिंग भी सम्मिलित है । इन पांच सालों की अवधि में Ayurvedic Doctor बनने के इच्छुक विद्यार्थी को अनेकों विषयों का गहनता से अध्यन करना होता है । यही कारण है की इस दौरान विद्यार्थी को कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता होती है ताकि वह BAMS Course सफलतापूर्वक पूर्ण कर पाए । इन पांच सालों में से 4.5 साल BAMS करने में और छह महीने प्रशिक्षण प्राप्त करने में लगते हैं  ।  

4. सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ इंडियन मेडिसिन में रजिस्टर कराएँ:

BAMS Course पूरा कर लेने एवं ट्रेनिंग पूरा कर लेने के बाद उम्मीदवार को रजिस्टर Ayurvedic Doctor बनने के लिए खुद को सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ इंडियन मेडिसिन के साथ रजिस्टर करना पड़ सकता है। यह काम व्यक्ति चाहे तो इनकी अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी कर सकता है।  

आयुर्वेदिक डॉक्टर के लिए कमाई के अवसर:

भारत में आयुर्वेदिक डॉक्टर के लिए कमाई के अवसरों की भरमार है Ayurvedic Doctor चाहे तो किसी निजी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान में नौकरी करके भी कमाई कर सकता है। और वह चाहे तो सरकारी अस्पतालों एवं चिकित्सा संस्थानों में निकलने वाली आयुर्वेदिक डॉक्टर की वेकेंसी के लिए आवेदन कर सकता है। इसके अलावा Ayurvedic Doctor खुद का क्लिनिक खोलकर भी अपनी कमाई कर सकता है ।

यह भी पढ़ें

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

2 thoughts on “आयुर्वेदिक डॉक्टर कैसे बनें । How to become an Ayurvedic Doctor.

  1. Is vishay par aapne sahi aur achchhi jaankari di. Is post ko padhne ke baad main apne dost ko is fild ne jaane ki puri jankari dunga. Thanks

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *