आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर कैसे शुरू करें? Ayurvedic Medicine Shop Business.

वर्तमान में Ayurvedic Medicine की मांग लगातार बढती जा रही है जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की एलोपेथिक दवाओं को रासायनिक प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है, इसलिए इनका असर किसी भी उद्देश्य के लिए तुरंत हो जाता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है की मनुष्य को ऐसी व्याधियाँ हो जाती हैं जिन पर एलोपेथिक दवाओं का असर तो होता है लेकिन यह असर केवल कुछ समय के लिए होता है। जिससे मनुष्य की परेशानी बढ़ जाती है और फिर इन दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल साइड इफ़ेक्ट का कारण भी बन जाता है। यही कारण है की इस तरह की व्याधियों के शिकार मनुष्य एलोपेथिक दवाओं की बजाय आयुर्वेदिक, हर्बल, यूनानी जैसी दवाओं से अपना इलाज कराने को उत्सुक हो उठता है।  Ayurvedic Medicine और हर्बल दवाओं की विशेषता यह है की इन्हें प्राकृतिक पेड़, पौधों जड़ी, बूटियों, धातु, खनिज इत्यादि से निर्मित किया जाता है। और इलाज की यह पद्यति प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। लोगों के बीच यह भी अवधारणा है की इस तरह की ये दवाएं बीमारी के जड़ को खत्म करने का काम करती हैं, जिसके कारण इन दवाओं का लम्बे समय तक सेवन करने की आवश्यकता होती है। जबकि एलोपेथिक दवाएं बीमारी के लक्षणों को दबाने का काम करती हैं हालांकि यह कोई वैज्ञानिक मान्यता नहीं है बल्कि लोगों की मान्यताएं हैं। शायद यही कारण है की वर्तमान में लोग जड़ी, बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक, हर्बल एवं यूनानी दवाओं से उपचार कराना भी पसंद करने लगे हैं। ऐसे में लोगों के अंतर्मन में यह प्रश्न उठता है की यदि कोई व्यक्ति इन दवाओं की दुकान शुरू करके बिजनेस शुरू करना चाहता है तो वह यह कैसे कर सकता है। लोगों की आयुर्वेदिक, हर्बल, यूनानी दवाओं में बढ़ते विश्वास के चलते वर्तमान में इस तरह का यह बिजनेस शुरू करना भी लाभकारी हो सकता है। इसलिए इस लेख में हम यही जानने का प्रयत्न करेंगे की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति Ayurvedic Medicine की दुकान शुरू कर सकता है।

Ayurvedic Medicine Business in Hindi

आयुर्वेदिक दवाइयां क्या हैं (What is Ayurvedic Medicine in Hindi)

आयुर्वेद की यदि हम बात करें तो यह एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली है यह प्राचीन लेखन पर आधारित है। जो शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए प्राकृतिक एवं समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है। यह चिकित्सा प्रणाली न सिर्फ भारत की पारम्परिक देखभाल प्रणालियों में से एक है बल्कि यह दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणालियों में से भी एक है। यद्यपि Ayurvedic Medicine यानिकी आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में मूल रूप से पेड़ पौधों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें अन्य अवयवों जैसे पशु, धातु एवं खनिज इत्यादि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चरक संहिता में आयुर्वेद की परिभाषा का वर्णन इस प्रकार किया गया है ‘’ एक शास्त्र जो जीवन के हितों, हानि, विकृति, मूल्य, परिणाम और लक्षणों का वर्णन करता है, उसे आयुर्वेद के रूप में जाना जा सकता है। ” साधारण शब्दों में कहें तो पेड़, पौधों, धातु, खनिज, पशु उत्पादों से निर्मित दवाओं को ही आयुर्वेदिक दवाइयां कहा जाता है।

आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान कैसे शुरू करें? (How to Start Ayurvedic Medicine Shop)

आयुर्वेदिक दवाओं यानिकी Ayurvedic Medicine Shop कोई भी व्यक्ति आसानी से शुरू कर सकता है क्योंकि इस तरह की दवाओं को बेचने के लिए ड्रग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए इस तरह का व्यवसाय शुरू करने वाला उद्यमी अपने स्टोर के माध्यम से न सिर्फ आयुर्वेदिक उत्पाद बल्कि हर्बल, यूनानी एवं कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद जिन्हें बेचने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती, वह भी बेच सकता है। वर्तमान में बहुत सारी नई एवं पुरानी कम्पनियां जो आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करती हैं वे अपनी फ्रैंचाइज़ी भी ऑफर कर रही होती हैं, इसलिए उद्यमी चाहे तो फ्रैंचाइज़ी लेकर भी यह बिजनेस शुरू कर सकता है। लेकिन यदि उद्यमी आयुर्वेदिक दवाओं के साथ फ़ूड सप्लीमेंट भी अपने Ayurvedic Medicine Shop  के माध्यम से बेचना चाहता है तो उसे फ़ूड लाइसेंस यानिकी FSSAI License की भी आवश्यकता हो सकती है। कोई भी बिजनेस शुरू करने से पहले उद्यमी अक्सर यही जानना चाहते हैं की उस विशेष व्यापार को शुरू करने के लिए किस प्रकार की लाइसेंस की आवश्यकता होती है। और वह उस लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए पात्र है या नहीं। चूँकि एक आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान शुरू करने के लिए किसी प्रकार के ड्रग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इसे शुरू करना आसान एवं सरल माना गया है।

1. प्राइम लोकेशन में दुकान खोजना

इसमें कोई दो राय नहीं की वर्तमान परिदृश्य में लोगों का ध्यान Ayurvedic Medicine की तरफ बहुत अधिक आकर्षित हुआ है। इसलिए लोगों को इस तरह की दवाओं की आवश्यकताएं होती रहती है लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। की जब किसी व्यक्ति को कुछ भी चीज खरीदनी होती है तो उसका रुख उस एरिया में स्थित स्थानीय बाजार की तरफ होता है। इसलिए यदि उद्यमी चाहता है की आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान का यह बिजनेस उसका सफलतापूर्वक चले, तो उसे किसी प्राइम लोकेशन यानिकी उस एरिया में स्थित स्थानीय बाजार जहाँ दिन भर भीड़ ही भीड़ रहती हो में अपनी दुकान खोलने की योजना बनानी चाहिए। या फिर किसी ऐसे एरिया में जहाँ डॉक्टर के क्लिनिक अधिक संख्या में हों, हॉस्पिटल अधिक संख्या में हों पर भी इस तरह की दुकान खोलना काफी लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इसलिए कहा जा सकता है की Ayurvedic Medicine Shop की सफलता एवं असफलता में उसकी लोकेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। उद्यमी को ध्यान रखना चाहिए की वह दुकान किराये पर लेते वक्त रेंट एग्रीमेंट अवश्य बना ले, जिसे आगे अनेकों लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन प्राप्त करते वक्त पता प्रमाण के तौर पर पेश किया जा सकता है।    

2. अपनी दुकान का नाम चयन करना (Select Name of Ayurvedic Medicine Shop)

इस बिजनेस को शुरू करने की दिशा में उद्यमी का अगला कदम अपनी दुकान के लिए एक अच्छे से नाम का चयन करने का होना चाहिए। जो न सिर्फ बोलने में आसान हो, बल्कि उसका शाब्दिक अर्थ आयुर्वेद से भी जुड़ा हुआ हो। Ayurvedic Medicine Shop का नाम क्या होगा इसके लिए उद्यमी चाहे तो ऑनलाइन रिसर्च कर सकता है ध्यान रहे नाम यूनिक होने के साथ साथ, याद रखने में आसान एवं आयुर्वेद या प्रकृति से भी जुड़ा हुआ होना चाहिए।   

3. स्थानीय प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त करना

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Ayurvedic Medicine Shop शुरू करने के लिए ड्रग लाइसेंस की तो  आवश्यकता नहीं होती है।लेकिन उद्यमी को स्थानीय नियमों के मुताबिक अपनी दुकान को स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम, नगर पालिका, ग्राम पंचायत इत्यादि में रजिस्टर कराकर लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता हो सकती है । इसलिए उद्यमी को उस एरिया में लागू नियम एवं कानूनों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के पश्चात उचित लाइसेंस प्राप्त करने चाहिए।

4. जीएसटी रजिस्ट्रेशन करना

हालांकि उद्यमी को तब तक जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती, जब तक उसका टर्नओवर जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए दी गई छूट की सीमा को पार नहीं कर जाता है। अर्थात कहने का आशय यह है की Ayurvedic Medicine Shop Business शुरू कर रहे उद्यमी को तब तक जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है जब तक उसका बिजनेस टर्नओवर एक निश्चित सीमा को पार नहीं कर जाता है, यह 20-40 लाख कुछ भी हो सकती है। लेकिन यदि उद्यमी अपने आयुर्वेदिक उत्पादों को ऑनलाइन ई कॉमर्स वेबसाइट जैसे अमेज़न, फ्लिप्कार्ट इत्यादि के माध्यम से बेचने की भी योजना बना रहा है तो फिर उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा ही लेना चाहिए। क्योंकि इन वेबसाइट के माध्यम से उत्पाद बेचने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है इसके अलावा उद्यमी को उस डिस्ट्रीब्यूटर या मैन्युफैक्चरर से NOC लेने की भी आवश्यकता हो सकती है। जिसके आयुर्वेदिक उत्पाद वह ऑनलाइन बेचना चाह रहा हो।      

5. ग्राहकों की खरीदने की आदत पर रिसर्च करना

इसमें कोई दो राय नहीं की आयुर्वेदिक उत्पादों का इस्तेमाल उपचार अर्थात कोई बीमारी हो जाने के बाद उसके उपचार के लिए और प्रीवेन्टिव क्योर यानिकी कोई बीमारी न हो उसके लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह उस एरिया में Ayurvedic Medicine Shop सफलतापूर्वक चलाने के लिए सबसे पहले वहां पर लोगों के खरीदने की आदतों का पता लगाये। अर्थात उद्यमी यह पता लगाने की कोशिश करे की लोग किसी बीमारी के उपचार के लिए या फिर किसी बीमारी से बचाव के लिए कितने उत्पाद खरीद रहे हैं। क्योंकि हो सकता है बचाव एवं उपचार वाले उत्पाद अलग अलग हों और जब उद्यमी को लोगों के खरीदने की आदतों का पता लगेगा तब वह उसी आधार पर अपने स्टोर में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित कर पायेगा।   

6. आयुर्वेदिक डिस्ट्रीब्यूटर से दवाएं खरीदना (Purchase Ayurvedic Medicine for your Shop)

वर्तमान में भारत में एक नहीं अपितु अनेकों नई पुरानी कम्पनियां आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में शामिल हैं और भारत में लगभग हर जगह इनके डिस्ट्रीब्यूटर डीलर इत्यादि मौजूद हैं। लेकिन उद्यमी चाहे तो सीधे मैन्युफैक्चरर से भी आयुर्वेदिक दवाइयां खरीद सकता है। वर्तमान में विभिन्न वेबसाइट जैसे इंडियामार्ट, ट्रेड इंडिया इत्यादि में हजारों सप्लायर एवं मैन्युफैक्चरर रजिस्टर्ड हैं जिनसे संपर्क करके पूरे इंडिया में कहीं भी माल मंगाया जा सकता है । इसके अलावा उद्यमी अपनी Ayurvedic Medicine Shop के लिए विभिन्न यूट्यूब विडियो देखकर, ऑनलाइन आर्टिकल पढ़कर भी सप्लायर से संपर्क करके माल मंगवा सकता है। वैसे शुरू में स्थानीय सप्लायर या डिस्ट्रीब्यूटर से ही दवाएं खरीदना उचित है।     

7. आयुर्वेदिक दवाएं बेचना

यदि उद्यमी की Ayurvedic Medicine Shop किसी प्राइम लोकेशन जैसे किसी भीड़ भाड़ वाली जगह, स्थानीय बाजार, डॉक्टर के क्लिनिक के समीप, हॉस्पिटल के समीप इत्यादि में है। तो उद्यमी की दुकान में ग्राहक अपने आप ही आयेंगे, लेकिन उद्यमी को फिर भी अपनी दुकान एवं इसमें बेचे जाने वाले उत्पादों को प्रमोट करने में कोई कमी नहीं रखनी चाहिए । इसके लिए उद्यमी ऑनलाइन प्लेटफोर्म जैसे फेसबुक, गूगल बिजनेस, जस्ट डायल इत्यादि का भरपूर फायदा ले सकता है। इसके अलावा उद्यमी चाहे तो उस एरिया में स्थित डॉक्टरों से संपर्क करके उन्हें कमीशन का लालच देकर उनको कुछ आयुर्वेदिक दवाएं प्रेस्क्राइब करने के लिए भी कह सकता है । और उद्यमी को चाहिए की वह अपने स्टोर में हफ्ते में दो तीन दिन किसी आयुर्वेदिक वैद्धय जी को बिठाये, और लोगों को उनसे मुफ्त में सलाह लेने का ऑफर दे इससे निश्चित ही उद्यमी के स्टोर में उपलब्ध Ayurvedic Medicine बहुतायत मात्रा में बिकने की संभावना होगी।

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |