Cotton Buds Making – कपास के फाहे बनाने का बिजनेस ।

Cotton Buds making पर बात करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि वर्तमान में अनेकों लोग ऐसे बिजनेस के बारे में सोच रहे होते हैं । जिसे बेहद कम निवेश अर्थात कुछ हजार रूपये खर्च करके भी शुरू किया जा सके और उस उत्पाद की माँग भी बाजार में ठीक ठाक हो। वैसे देखा जाय तो हमारे दैनिक जीवन में कपास एवं कपास से निर्मित उत्पादों का उपयोग बहुतायत तौर पर होता है । लेकिन इस लेख में हम जिस उत्पाद की बात कर रहे हैं उसे अंग्रेजी में Cotton Buds तो हिंदी में कपास की फाहें कह सकते हैं । वर्तमान में इनका इस्तेमाल कॉस्मेटिक एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए बहुतायत तौर पर किया जाता है कहने का अभिप्राय यह है की इनका इस्तेमाल व्यवसायिक एवं घरेलू दोनों स्तरों पर बहुतायत तौर पर किया जाता है। इसलिए इस तरह के बिजनेस को शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है की इसे महज कुछ हजार रुपयों का निवेश करके भी छोटे स्तर पर शुरू किया जा सकता है। और इस व्यवसाय से उत्पादित उत्पाद Cotton Buds की माँग तो सर्वत्र है ही। कपास की फाहों की बात करें तो ये किसी एक छोटी सी प्लास्टिक या लकड़ी की तीली के दोनों सिरों पर कपास से निर्मित बेलनाकार आकृति की होती हैं। आम तौर पर इन कपास के फाहों का इस्तेमाल लोगों द्वारा विभिन्न कॉस्मेटिक एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के कार्यों के लिए किया जाता है। लेकिन कानों की सफाई के लिए इनका विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। वर्तमान में इनके विभिन्न प्रकार के डिजाईन बाजार में मौजूद हैं।

Cotton-buds-making-business

विक्री संभाव्यता (Market Potential):

Cotton Buds की बिक्री संभाव्यता की बात करें तो आम तौर पर देखा गया है की जिस उत्पाद का इस्तेमाल अधिक होता है उसके बिकने की संभाव्यता भी अधिक होती है। कपास के फाहों के इस्तेमाल की बात करें तो इनका इस्तेमाल भी अनेकों कार्यों को निपटाने हेतु व्यवसायिक एवं व्यक्तिगत तौर पर किया जाता है। शिशु की देखभाल में इनका इस्तेमाल बहुतायत तौर पर होने के साथ साथ मेकअप इत्यादि में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। इन सबके अलावा लोगों द्वारा कानों की सफाई अपने गैजेट इत्यादि की सफाई के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए वर्तमान जीवनशैली में Cotton Buds लगभग हर घर में दिख जायेंगे। एक उपभोग्य योग्य वस्तु होने के कारण इसकी बाज़ारों में माँग हमेशा ही बनी रहती है। यही कारण है की यह उन उद्यमियों को यह बिजनेस करने के लिए प्रोत्साहित करता है जो बेहद कम निवेश के साथ अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। यद्यपि इस तरह के उत्पादों के विनिर्माण में कुछ राष्ट्रीय ब्रांड भी शामिल हैं लेकिन स्थानीय बाजार को ध्यान में रखकर स्थानीय स्तर पर कपास के फाहों का विनिर्माण करना भी लाभकारी हो सकता है।

लाभ एवं हानियाँ (Pros & Cons of Cotton Buds making Business):  

यद्यपि बिजनेस आईडिया कोई भी हो उसके कुछ लाभ तो कुछ हानियाँ अवश्य होती हैं अर्थात प्रत्येक बिजनेस लाभ एवं हानियों के साथ आता है। इसलिए किसी भी उद्यमी के लिए यह बेहद आवश्यक है की वह किसी भी उद्यम में अपना पैसा एवं उर्जा लगाने से पहले उस बिजनेस के बारे में गहन रिसर्च कर ले। यहाँ पर हम Cotton Buds making Business के लाभों एवं हानियों का जिक्र कर रहे हैं।

लाभ:

  • इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए उद्यमी को बेहद कम निवेश की आवश्यकता होती है। हालांकि उद्यमी इस तरह के बिजनेस को कुछ हजार रुपयों के निवेश के साथ भी शुरू कर सकता है। लेकिन यह पूर्ण रूप से उद्यमी द्वारा चुने गए बिजनेस के आकार एवं पूँजी के लक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
  • उद्यमी इस बिजनेस को बेहद छोटे पैमाने पर शुरू कर सकता है और तरक्की के साथ साथ बिजनेस का पैमाना भी बढ़ा सकता है।
  • चूँकि cotton buds making व्यवसाय के संचालन के लिए उद्यमी को बहुत अधिक जगह की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए यदि उद्यमी के घर में कोई कमरा खाली है तो उद्यमी घर से भी इस तरह का बिजनेस शुरू कर सकता है।

हानियाँ:

  • इस बिजनेस में कुछ ऐसे ब्रांड भी हैं जिन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी पूरी तरह कब्ज़ा किया हुआ है। इसलिए नए उद्यमी के लिए अपने उत्पाद को ग्राहकों को बिक्री करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • चूँकि Cotton Buds एक बेहद सस्ता उत्पाद है इसलिए प्रति इकाई इसमें लाभ मार्जिन भी बेहद कम है। यदि उद्यमी इस व्यवसाय में सफलता का स्वाद लेना चाहता है तो उसे भारी मात्रा में अपने उत्पादों की बिक्री करनी होगी।                 

 Cotton Buds Manufacturing Process (विनिर्माण प्रक्रिया):

कपास की फाहों की विनिर्माण प्रक्रिया जानने से पहले यह जान लेना बहुत जरुरी है की इस प्रक्रिया में कच्चा माल इत्यादि क्या क्या इस्तेमाल किया जाता है। जहाँ तक Cotton Buds making के लिए बुनियादी कच्चे माल का सवाल है । इसमें उद्यमी को बेलनाकार आकृति की छड़ीयाँ या तीलीयों की आवश्यकता होती है। ये बेलनाकार छड़ियाँ या तीलियाँ आम तौर पर प्लास्टिक से बनी हुई होती हैं लेकिन लकड़ी या मोड़े हुए पेपर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दुसरे कच्चे माल के तौर पर एवं शोषक सामग्री के तौर पर कपास का इस्तेमाल किया जाता है कभी कभी कपास के साथ रेयान को भी मिलाया जाता है। कच्चे माल के अलावा उद्यमी को पैकेजिंग मटेरियल की भी आवश्यकता होती है। पैकेजिंग मटेरियल के तौर पर साफ सुथरी एवं पारदर्शी पन्नी की आवश्यकता होती है जिनके उपरी सिरे को दबाकर आसानी से बंद किया जा सकता है। वर्तमान में बाजार में Cotton Buds बनाने वाली विभिन्न प्रकार की मशीनें उपलब्ध हैं। उद्यमी को अपने बजट एवं आवश्यकता के मुताबिक मशीन का चयन करना चाहिए या फिर शुरूआती दौर में उद्यमी बिना किसी मशीन के भी इनका निर्माण कर सकता है। या फिर चाहे तो पूर्ण रूप से स्वचालित मशीन जो कपास के फाहों के निर्माण से लेकर उनकी पैकेजिंग का काम भी आटोमेटिक करते हैं खरीद सकता है । जहाँ मैन्युअल प्रक्रिया में अधिकतम काम व्यक्ति को करना पड़ता है वहीँ मशीन से उत्पादित करने पर अधिकतर काम मशीन ही कर लेती है। इसलिए उद्यमी को मशीन का चुनाव बड़ी बुद्धिमता के साथ करना चाहिए ।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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