बतख पालन बिज़नेस कैसे शुरू करें? How to Start Duck farming Business in India in Hindi.

इंडिया में ही नहीं अपितु दुनिया में भी Duck Farming यानिकी बतख पालन बेहद प्रचलित एवं आकर्षक व्यवसाय है | चूँकि बतख दुनियाभर में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं इसलिए दुनियाभर में इनकी मांस उत्पादन करने एवं अंडे उत्पादन करने वाली अनेकों नस्लें विद्यमान हैं | वर्तमान में मौजूद सभी घरेलू बतख जंगली पक्षियों के बीच से आये हैं ये जंगली पक्षी विश्व में किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं | इन्हीं में से कुछ पक्षियों को मांस के स्रोत के लिए पालतू बनाया गया है | इस प्रकार के ये जंगली पक्षी अधिकतर तौर पर मल्लार्ड प्रजातियों से सम्बंधित थे | जैसा की हम सब जानते हैं की बतख जलीय जीव होते हैं इसलिए कुछ लोग सोचते हैं की बतख पानी के बिना ठीक उसी तरह है जिस तरह तालाब पानी के बिना | यहाँ तक की कुछ लोग यह भी सोचते हैं की बतख पानी के बिना जिन्दा नहीं रह सकते जो की सही नहीं है | कहने का आशय यह है की चाहे पानी के बिना तालाब की कल्पना तक नहीं की जा सकती लेकिन पानी के बिना बतख पालन अर्थात Duck farming सफलतापूर्वक की जा सकती है | पानी के बिना बतख पालन से यह आशय बिलकुल नहीं है की बतखों को पीने के लिए भी पानी नहीं दिया जाय बल्कि इसका अभिप्राय यह है की बतखों को किसी छप्पर या घर के अन्दर भी आसानी से पाला जा सकता है | मतलब यह है की पोल्ट्री फार्मिंग अर्थात मुर्गी पालन की तर्ज पर Duck farming भी की जा सकती है | हालांकि उद्यमी को एक बात का विशेष ध्यान रखना होता है की बिना पानी के Duck Farming करने की स्थिति में बतखों द्वारा दिए गए अण्डों में गर्भाधान करने की क्षमता नहीं होती है | इसलिए बतखों के बच्चों का उत्पादन करने के लिए इन अण्डों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता | गर्भाधान योग्य अण्डों के लिए नर बतख एवं पानी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से चाहिए होती है |

duck farming business

बतख पालन के लाभ (Advantage of Duck farming in Hindi):

Duck farming अर्थात बतख पालन करने के एक नहीं बल्कि अनेकों फायदे हैं दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहाँ बतखों का इस्तेमाल चिकन के बाद अण्डों एवं मांस उत्पादन के लिए दूसरे नंबर पर किया जाता है | कोई भी किसान या उद्यमी इन्हें छोटे या वाणिज्यिक दोनों स्तर पर शुरू कर सकता है | यहाँ तक की छोटे स्तर पर Duck farming घर के पिछवाड़े मुर्गियों इत्यादि के साथ भी की जा सकती है | आइये जानते हैं बतख पालन करने के कुछ मुख्य फायदों के बारे में |

  • बतख पालन अर्थात Duck farming को आप एक छप्पर ओढकर भी शुरू कर सकते हैं जिसके कारण व्यवसायिक तौर पर इसे शुरू करने में कम खर्च आता है |
  • बतख बेहद मजबूत पक्षी होते हैं इसलिए इन्हें बेहद कम देखभाल या प्रबंधन की आवश्यकता होती है | इसके अलावा ये सभी प्रकार की पर्यावरणीय स्थितियों में खुद को ढाल लेते हैं |
  • चूँकि बतख अधिकतर तौर पर सुबह या शाम को अंडे देते हैं इसलिए उद्यमी हर सुबह इनके ताजे अंडे को एकत्रित कर सकता है | और बाकी पूरे दिन अपने अन्य काम कर सकता है |
  • बतख पालन अर्थात Duck Farming के लिए अन्य की तुलना में कम जगह की आवश्यकता होती है | बतख की बढ़ने की अवधि कम होती है इसलिए ये तेजी से बढ़ते हैं |
  • सामान्य रोगों के लिए बतखों का शरीर प्रतिरोधी होता है | जिसके चलते ये कम बीमार होते हैं |
  • उद्यमी बतख पालन करने के लिए बतखों को विभिन्न प्रकार के कम लागत वाले खाद्य पदार्थ जैसे कसावा, कोपरा, मक्का, चावल, फल इत्यादि खिला सकता है | इनके अलावा भी उद्यमी किसी और सस्ते खाने का प्रबंध बतखों के लिए कर सकता है | इन सबके अलावा बतखों में जलीय खरपतवार, शैवाल, हरे रंग की फलियां, कवक, गांडुड़ियों, मैगोट्स, घोंघे, विभिन्न प्रकार के कीड़े इत्यादि चरने की प्राकृतिक प्रवृत्ति भी होती है जिससे Duck farming में भोजन पर आने वाला खर्चा कम हो जाता है |
  • उद्यमी चाहे तो अपने बतखों को अपने बगीचे में चरने छोड़ सकता है ये बगीचे को नुकसान पहुँचाने वाले विभिन्न कीटों को भी अपना भोजन बना लेते हैं |
  • बतखों की मृत्यु दर कम होती है और ये मुर्गियों के मुकाबले में अधिक लम्बे समय तक जीते हैं इसलिए ये अण्डों का उत्पादन भी बड़े लम्बे समय तक कर सकते हैं |
  • Duck Farming यानिकी बतख पालन से उत्पादित उत्पादों जैसे बतख का मॉस एवं इनके अण्डों की घरेलू एवं वैश्विक बाज़ारों में बड़ी मांग है | इसलिए इस तरह का यह व्यापार उद्यमी की कमाई के लिए बेहतरीन साबित हो सकता है |
  • बतख पालन एक स्थायी रोजगार का साधन हो सकता है इसलिए बेरोजगार शिक्षित नौजवान इस तरह का बिज़नेस करके इसे अपने रोजगार का माध्यम बना सकते हैं |

बतख पालन कैसे शुरू करें (How to start duck farming in India in Hindi):

बतख पालन यानिकी Duck Farming शुरू करने के लिए उद्यमी को अनेकों कदम उठाने पड़ सकते हैं | जिनमें से कुछ मुख्य स्टेप की जानकारी नीचे दी जा रही है |

  1. बतखों के लिए आवास (Housing for Duck):

बतख पालन के फायदों के बारे में भी बात करते समय हम यह जान चुके हैं की बतखों के लिए आवास बड़ी आसानी से बनाया जा सकता है क्योंकि इन्हें सभी प्रकार की जगह, ऊँची, नीची, गीली, सूखी जगह में आसानी से पाला जा सकता है | कहने का आशय यह है की बतखों को गीली जगह से भी कोई आपत्ति नहीं होती है | इसलिए इनके लिए आवास का प्रबंध करते समय उद्यमी फलों की टोकरी, लकड़ी, तेल के ड्रम इत्यादि का उपयोग कर सकता है | इससे Duck Farming Business शुरू करने में आने वाली लागत कुछ हद तक कम हो जाएगी | ध्यान रहे बतखों को रखने के लिए आप जिस भी स्थान का चयन करें लेकिन उसमे आने जाने का दरवाजा अवश्य होना चाहिए | और दरवाजा ऊँचा होना चाहिए क्योंकि बतख प्रवेश करते समय अपने सिर को ऊपर उठाकर चलता है | Duck farming हेतु आवास की व्यवस्था करते समय वेंटिलेशन का भी ध्यान अवश्य रखना चाहिए बतखों के रहने का कमरा हवादार होना चाहिए जहाँ ताज़ी हवा अन्दर आ सके | सामान्य तौर पर एक बतख को दो से तीन वर्ग फूट जगह की आवश्यकता हो सकती है इसके अलावा घर बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखना पड़ेगा की कोई नुकसान पहुँचाने वाला जानवर जैसे कुत्ता, लोमड़ी इत्यादि वहां घुस न पाए |

  1. Duck farming के लिए नस्ल का चुनाव करें?

उद्यमी द्वारा अपने Duck Farming के लिए आवास का प्रबंध कर लेने के बाद बतखों की नस्ल का चुनाव करना चाहिए ताकि उद्यमी एक अच्छी उत्पादकता वाली नस्ल को अपनी Duck farming का हिस्सा बना पाने में कामयाब हो | यद्यपि पूरे विश्व में बतखों की अनेकों प्रजातियाँ पायी जाती हैं लेकिन व्यवसायिक तौर पर कमाई करने के लिए बतखों की सभी प्रजातियाँ उपयुक्त नहीं होती हैं | कुछ प्रजातियाँ ऐसी होती हैं जिनको अंडे देने के उद्देश्य से पाला जा सकता है और कुछ ऐसी होती हैं जिनका पालन मीट उत्पादन के लिए किया जाता है | इसलिए अगर हम देखें तो बतखों की प्रजातियों को मुख्य तौर पर तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं |

  • मीट उत्पादन वाली नस्ल:

विश्व में ऐसी कई बतख की नस्लें उपलब्ध हैं जो मांस अर्थात मीट उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं | इनमें से पेकिंग, आयलेशबारी, मास्कोवी, रूएल कागुआ और स्विडन डक्स मांस उत्पादन के लिए सबसे लोकप्रिय हैं । सामान्य तौर पर मीट उत्पादन के इस्तेमाल में लाये जाने वाले नर बतख का भार लगभग पांच किलोग्राम एवं मादा बतख का भार लगभग चार किलोग्राम का होता है | उद्यमी यदि मीट उत्पादन के लिए Duck Farming करना चाह रहा हो तो वह उपर्युक्त दी गई नस्लों में से किसी एक नस्ल का चयन कर सकता है |

  • लेयर बतख यानिकी अंडे उत्पादित करने वाली नस्ल:

जहाँ तक अंडे उत्पादित करने वाली बतख की नस्लों की बात है इनमे इंडियन रनर नाम की बतखों की प्रजाति अंडे उत्पादित करने के लिए काफी प्रसिद्ध है | यद्यपि इस प्रजाति के बतखों की नस्ल तीन प्रकार की होती है लेकिन सफ़ेद एवं भूरे बतख अधिक अंडे उत्पादित करने वाले होते हैं | इनके अलावा खाकी कैम्पबेल डक नामक यह प्रजाति भी अण्डों के उत्पादन करने के लिए प्रसिद्ध मानी जाती है | Layer Duck Farming करने के इच्छुक उद्यमी को अण्डों का अधिक उत्पादन करने वाली नस्लों का चुनाव करना चाहिए |

  • मीट एवं अंडे उत्पादन वाली नस्ल:

कुछ उद्यमी मीट के उत्पादन के लिए Duck Farming करना चाहते हैं तो कुछ अंडे उत्पादन के लिए कुछ उद्यमी ऐसे भी होते हैं जो अपनी Duck farming यानिकी बतख पालन के माध्यम से मीट एवं अंडे दोनों का उत्पादन करके कमाई करना चाहते हैं | बतख की ऐसी ही नस्लों में खाकी कैम्पबेल डक सम्मिलित है ये इंडियन रनर एवं रुएल कगुआ नामक बतखों की प्रजाति से सम्बन्ध रखती हैं | इसमें इंडियन रनर से सम्बन्ध रखने वाले खाकी कैम्पबेल डक अण्डों के उत्पादन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं | जबकि दूसरे मीट उत्पादन के लिए | इसलिए उद्यमी को अपनी आवश्यकता एवं लक्ष्यों के अनुरूप ही बतख की नस्ल का चयन करना चाहिए |

  1. भोजन का प्रबंध (Feeding Arrangement):

हालांकि देखा जाय तो बतख सामान्य रूप से खाने के उपयोग में लाये जाने वाले हर खाद्य सामग्री को खाते हैं इसलिए उद्यमी चाहे तो मुर्गियों की तरह इनके खाने का प्रबंध कर सकता है | लेकिन चूँकि कुछ बतख मुर्गियों की तुलना में अधिक अंडे देने का सामर्थ्य रखते हैं इसलिए इनके प्रति सावधान रहकर इनके भोजन का उचित प्रबंध करना बेहद जरुरी हो जाता है | उद्यमी को चाहिए की वह अपने Duck farming को सफल बनाने के लिए बतखों के आहार में पौष्टिक आहार जोड़ने से परहेज न करे | ध्यान रहे बतखों की नस्ल एवं उनके विकास दर के अनुसार ही उन्हें पौष्टिक आहार दिया जाना बेहद जरुरी है | यद्यपि छोटे स्तर पर Duck farming शुरू कर रहा उद्यमी अपने बतखों को रसोईघर में बचे अपशिष्ट, अनाज इत्यादि खिला सकता है | इस बात का हमेशा ध्यान रखें की बतख बहुत सारा खाना खाते हैं इसलिए यदि उद्यमी चाहता है की उसके द्वारा किये जा रहे बतख पालन से उचित अंडे एवं मांस उत्पन्न हो तो उन्हें संतुलित भोजन कराएँ |

  1. उत्पादित अण्डों का भण्डारण पैकेजिंग एवं कमाई:

जहाँ तक Duck farming से उत्पादित अण्डों के भण्डारण का सवाल है उद्यमी चाहे तो इनका भंडारण करने के लिए रेफ्रीजिरेटर का उपयोग कर सकता है | इसके अलावा अंडों के भंडारण के लिए लाइम वाटर एवं पाइफ्राइन का उपयोग भी किया जा सकता है | हालांकि कुछ लोग एक्टिनियम ग्लास वाटर का उपयोग भी इस उद्देश्य के लिए करते हैं |  अण्डों की मार्केटिंग या इन्हें बेचने से पहले अच्छे ढंग से साफ़ करना बेहद जरुरी हो जाता है | अंडे के बाहरी आवरण अर्थात खोल को अच्छे ढंग से साफ़ कर लेना चाहिए लेकिन इसे पानी से धोना नहीं चाहिए | उद्यमी चाहे तो अंडे के आवरण को चाकू, Soiled पेपर, या फिर साफ़ तौलिये की मदद से साफ़ कर सकता है | अण्डों की पैकेजिंग के लिए अर्थात अण्डों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के लिए टोकरी या बक्सों की मदद लें | उद्यमी को ऐसे गत्ते के डिब्बे यानिकी बक्से का चयन करना चाहिए जिसमे कम से 30 अंडे आयें | इन सबके अलावा Duck farming कर रहा उद्यमी बांस की टोकरी, लकड़ी के बक्से इत्यादि का उपयोग भी एक स्थान से दूसरे स्थान अण्डों को ले जाने में कर सकता है | लेकिन इन बक्सों में अण्डों को रखने से पहले उनमें घास फूस डालना जरुरी है ताकि ट्रांसपोर्टेशन के समय अंडे फूटें नहीं | अपने Duck Farming Business से अधिकतम कमाई करने के लिए उद्यमी को बतखों का विशेष ध्यान रखना होगा उनके खाने की, रहने की, प्रजनन की उचित व्यवस्था करनी होगी | यदि उद्यमी सभी कुछ अच्छे ढंग से करे तो वह इस बिज़नेस से अच्छी खासी कमाई कर पाने में सक्षम होगा |

बतख के अण्डों एवं मांस की मार्केटिंग :

Duck farming से उत्पादित उत्पाद जैसे बतख के अंडे एवं मांस की मार्केटिंग करना आसान है | प्राचीन काल से ही विश्व भर के लोग बतख के अण्डों एवं मांस का उपभोग करते आ रहे हैं | विश्व में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ बतख के अण्डों एवं मांस का उपभोग मुर्गियों के अंडे एवं मांस से अधिक किया जाता है | और कुछ क्षेत्रों में बतख का मांस इसके अण्डों से कम प्रसिद्ध है | Duck farming से उत्पादित उत्पादों को बाजार में अच्छी तरह जाना जाता है इसलिए इनकी मार्केटिंग करना इतना मुश्किल काम नहीं है | उद्यमी अपने स्थानीय मार्केट में इस तरह के उत्पादों की मार्केटिंग आसानी से कर सकता है |

बतखों की प्रजनन सम्बन्धी जानकारी:

Duck farming Business शुरू कर रहे उद्यमी को बतखों की प्रजनन समबन्धी जानकारी होना नितांत आवश्यक है | इसलिए बता देना चाहेंगे की प्रजनन उद्देश्य की पूर्ति के लिए बतखों को पानी की आवश्यकता अनिवार्य रूप से होती है | एक नर बतख 10 मादा बतखों के प्रजनन करने के लिए पर्याप्त होता है | सामान्य तौर पर उच्च गुणवत्तायुक्त एवं उत्पादक बतख नस्ल अपनी उम्र के पांच महीने से ही अंडे देना शुरू कर देते हैं | बतख के प्रत्येक अंडे का वजन लगभग 50-60 ग्राम होता है | हैचिंग के लिए बतखों के बजाय मुर्गियों का उपयोग भी किया जा सकता है | जन्म के प्रथम सप्ताह में में नवजात बतखों को पानी में न रखें क्योंकि पानी में रखने से उन नवजात बतखों को ठण्ड लग सकती है | आम तौर पर बतख को अंडे हैच करने में लगभग 28 दिनों का समय लगता है | हैचिंग के दौरान हफ्ते में दो तीन दिन अण्डों में पानी का छिडकाव किया जा सकता है | हैचिंग करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक एवं डीजल इनक्यूबेटर का उपयोग किया जा सकता है | लेकिन बहुत सारे Duck farming करने वाले किसान इनक्यूबेटर की जगह हैचिंग के लिए मुर्गियों का इस्तेमाल करते हैं |

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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