फाइनेंस कंपनी कैसे शुरू करें । How to Start Finance Company in India.

मनुष्य जीवन में वित्त के महत्व से शायद कोई भी अनभिज्ञ नहीं होगा यही कारण है की Finance Company का भी मानव जीवन में विशेष महत्व है। जैसा की हम सबको विदित है की हर मनुष्य को अपने जीवन को आगे बढाने, अपनी आंक्षाओं, इच्छाओं की पूर्ति और जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए वित्त की आवश्यकता पड़ती रहती है। यही कारण है की लोग अपने जीवनकाल में अधिक से अधिक कमाई करना चाहते हैं, ताकि वे स्वयं एवं अपने परिवार वालों को एक बेहतर जिन्दगी दे सकें । लेकिन पूरे जीवनकाल में किसी भी मनुष्य की आर्थिक परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं होती हैं और कई बार मनुष्य को अपने किसी लक्ष्य या जरुरत की पूर्ति के लिए पैसा कर्जा लेने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में बहुत सारे देशों में गरीब लोग किसी अनौपचारिक स्रोत से पैसे लेना पसंद करते हैं। ये अनौपचारिक स्रोत गाँव या क्षेत्र का कोई समृद्ध व्यक्ति जो ब्याज पर पैसे उधार देता हो इत्यादि हो सकते हैं । आम तौर पर इन अनौपचारिक चैनलों द्वारा उधारकर्ता पर उच्च ब्याज दरें लगायी जाती हैं यही कारण है की उधारकर्ता जिन्दगी भर इनके ऋण से मुक्त हो पाने में अपने आपको असमर्थ पाता है । ऐसे में एक Finance Company  जरूरतमंद लोगों को ऋण देकर उनकी मदद के अलावा अपनी कमाई भी कर सकती है।

finance-company-kaise-shuru-kare

फाइनेंस कंपनी क्या होती है (What is a Finance Company):

Finance Company की बात करें तो यह एक ऐसा संगठन होता है जो व्यक्तिगत व्यक्तियों या बिज़नेस इकाइयों को ऋण प्रदान करता है। यह बैंकों की तरह नहीं होते हैं क्योंकि यहाँ पर ग्राहक अपने खाते में नकदी जमा नहीं कर सकते हैं, और न ही यहाँ पर बैंकों जैसी अन्य सेवाएँ ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाती हैं। Finance Company की कमाई का स्रोत उधार दी गई राशि पर अर्जित ब्याज की रकम होती है। आम तौर पर फाइनेंस कंपनियों द्वारा लगाई जाने वाली ब्याज की दरें, बैंकों द्वारा लगाये जाने वाली दर से अधिक होती है। इसलिए अधिकतर तौर पर इस बिज़नेस में उद्यमी के ग्राहक के तौर पर वे ही लोग होते हैं जिन्हें किन्हीं कारणों से बैंकों से ऋण नहीं मिलता है। हालांकि भारत में कुछ ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्हें कम समय के लिए कुछ राशि चाहिए हो और वे बैंक की औपचारिकताओं में समय व्यर्थ न करना चाह रहे हों। इसलिए आम तौर पर एक ऐसी कंपनी जो अपने ग्राहकों को ब्याज पर ऋण प्रदान करती है Finance Company कहलाती है।

माइक्रो फाइनेंस कंपनी के लक्ष्य :

हालांकि आकार के आधार पर Finance Company के अनेकों प्रारूप हो सकते हैं जिनका उल्लेख हम आगे इस लेख में करेंगे। माइक्रो फाइनेंस कंपनी के लक्ष्यों की बात हम यहाँ पर इसलिए कर रहे हैं क्यूँकी शुरूआती दौर में कोई भी उद्यमी छोटे स्तर से ही इस बिज़नेस की शुरुआत करना चाहेगा। इसलिए आइये जानते हैं माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कुछ प्रमुख लक्ष्यों के बारे में।

  • चूँकि गरीबों के लिए बैंकों से ऋण प्राप्त करना बड़ी टेढ़ी खीर होती है ऐसे में माइक्रो फाइनेंसिंग कंपनीयों का लक्ष्य उन्हें वित्तीय सेवाएँ प्रदान करके उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का होता है।
  • एक व्यवहारिक वित्तीय संस्थान बनने के लिए टिकाऊ समुदायों का विकास करना।
  • गरीबों विशेष तौर पर महिलाओं को आर्थिक  तौर पर सहायता देने के लिए संसाधनों का एकत्रीकरण करना।
  • लोगों को गरीबी से ऊपर उठाने में सहायक कारकों का मूल्यांकन करना।
  • आर्थिक रूप से वंचित लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
  • ग्रामीण गरीबों को रोजगार एवं अपनी कमाई करने में सक्षम बनाने हेतु उन्हें प्रशिक्षित करने में सहायता प्रदान करना।   

भारत में खुद की फाइनेंस कंपनी कैसे शुरू करें ?

भारत में खुद की Finance Company शुरू करना आसान कार्य बिलकुल भी नहीं है कहने का तात्पर्य यह है की इस प्रकार की कंपनी के लिए लाइसेंस प्राप्त करना एक बहुत ही कठिन कार्य है। वह इसलिए क्योंकि आपकी कंपनी के साथ फाइनेंस शब्द जुड़ा हुआ होता है इसलिए हर कोई आपको संदिग्ध नजरों से देखेगा की कहीं आप लोगों के साथ धोखाधड़ी तो नहीं करने वाले हैं या कोई ऐसी योजनायें तो नहीं चला रहे हैं जो लोगों को बेवकूफ बना दें। जिस बिज़नेस को लोग संदिग्ध नज़रों से देखते हैं उसे सरकार भी संदिग्ध नज़रों से ही देखती है इसलिए इस प्रकार का बिज़नेस शुरू करने के लिए लाइसेंस आसानी से नहीं मिलता है। Finance Company को लोग संदिग्ध भरी नजरों से इसलिए देखते हैं क्योंकि 90 के दशक में इस प्रकार के बिज़नेस की भरमार थी और लोगों के साथ करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी की गई। यही कारण है की वर्तमान में इस तरह के बिज़नेस को शुरू करने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया में सुधार कर इस धोखाधड़ी को कम करने की कोशिश की गई है। तो आइये जानते हैं की भारत में खुद की Finance Company कैसे शुरू करें।

Finance Company के विभिन्न स्वरूप:  

हालांकि बैंकों के अलावा ऐसी कंपनीयां जो वित्त व्यापार में लगी हुई हैं उन्हें नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) कहा जाता है। भारत में फाइनेंस व्यापार अनेक स्वरूपों में किया जा सकता है, इन स्वरूपों की लिस्ट निम्नवत है।

  • नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनीज (NBFC)
  • ट्रस्ट एवं सोसाइटीज
  • निधि कम्पनीज
  • माइक्रो फाइनेंस कंपनी
  • प्रोड्यूसर कम्पनीज
  • लोकल फाइनेंस लाइसेंस

नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनीज रजिस्ट्रेशन :

भारत में NBFC पंजीकरण का कार्य भारतीय रिज़र्व बैंक देखता है इस तरह की यह कंपनी शुरू करने के लिए कम से कम 2 करोड़ रूपये कैपिटल की आवश्यकता होती है। यदि इकाई माइक्रो फाइनेंस कंपनी हो तो उसे कम से कम 5 करोड़ रूपये कैपिटल की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इस तरह की यह Finance Company शुरू करने में सबसे बड़ा काम भारतीय रिज़र्व बैंक का लाइसेंस प्राप्त करना होता है क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में 5-6 महीनों का समय लग सकता है। और इतना समय व्यतीत हो जाने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं होती की रिज़र्व बैंक द्वारा लाइसेंस दे ही दिया जायेगा। जहाँ तक इस प्रकार की Finance Company के फायदे एवं हानियों की बात है उनकी लिस्ट निम्नवत है।

एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन के फायदे:

  • फाइनेंस कंपनी का सबसे प्रमाणिक विकल्प.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के माध्यम से उचित लाइसेंस प्राप्त करना
  • इस लाइसेंस से कंपनी भारत में कहीं भी कार्य कर सकती है
  • इस तरह की यह कंपनी एक निश्चित सीमा तक विदेशी निवेश भी स्वीकार कर सकती हैं

 एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन के नुकसान

  • कम से कम आवश्यक कैपिटल का बहुत अधिक होना
  • भारतीय रिज़र्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त करना आसान काम नहीं है
  • अनुपालन लागत का बहुत अधिक होना

ट्रस्ट एंड सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन के माध्यम से:

उद्यमी चाहे तो खुद की Finance Company को ट्रस्ट एवं सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भी शुरू कर सकता है। इसलिए फाइनेंस कंपनी का इस प्रकार का यह स्वरूप भी काफी प्रसिद्ध है। कोई भी व्यक्ति जो इस तरह का यह बिज़नेस छोटे स्तर यानिकी जिला स्तर पर शुरू करना चाहता हो वह अपनी फाइनेंस कंपनी के लिए इस विकल्प का चुनाव कर सकता है। लेकिन वर्तमान में धोखाधड़ी के चलते सोसाइटी का लाइसेंस लेना भी अनेकों क्षेत्रों में थोड़ा कठिन हो गया है।

ट्रस्ट एवं सोसाइटी रजिस्ट्रेशन के फायदे

  • इसे बेहद कम रजिस्ट्रेशन लागत के साथ रजिस्टर किया जा सकता है ।
  • कम अनुमतियों की आवश्यकता होती है।
  • जमा भी स्वीकार कर सकते हैं।

ट्रस्ट एवं सोसाइटी के नुकसान:

  • केवल जिला स्तर तक ही काम कर सकते हैं।
  • चुनाव करके बिज़नेस का स्वामित्व बदला जा सकता है।
  • केवल सदस्यों को ही वित्तीय सेवाएँ दी जा सकती हैं।

निधि कंपनी रजिस्ट्रेशन:

भारत में खुद की Finance Company शुरू करने के लिए निधि कंपनी का पंजीकरण सबसे अच्छा एवं आसान विकल्पों में से एक है। इस प्रकार की यह फाइनेंस कंपनी रूपये पांच लाख के कैपिटल से शुरू की जा सकती है और एक निधि कंपनी रजिस्ट्रेशन में 15-20 दिनों का समय लग सकता है। इस विकल्प के तहत बिज़नेस शुरू करने वाला उद्यमी जमा भी स्वीकार कर सकता है और लोगों को ऋण भी प्रदान कर सकता है। निधि कंपनी के तौर पर फाइनेंस बिज़नेस शुरू करने के लिए रजिस्ट्रेशन हेतु निम्नलिखित आधारभूत आवश्यकताओं की जरुरत हो सकती है।

  • हालांकि यह सच है की Finance Company का निधि कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए कम से कम 5 लाख कैपिटल की आवश्यकता होती है। लेकिन एक साल की बिज़नेस अवधि के दौरान उद्यमी को इसे 10 लाख रूपये कैपिटल तक बढाया जाना बेहद जरुरी है।
  • भारत में निधि कंपनी शुरू करने के लिए कम से कम सात व्यक्तियों की आवश्यकता होती है जिसमें से तीनों को कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर चयनित किया जाना चाहिए।
  • जहाँ तक निधि कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए दस्तावेजों की बात हैं इनमें पैन कार्ड, फोटो, पहचान पत्र, पता प्रमाण पत्र इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है।
  • इसके अलावा रजिस्टर्ड ऑफिस के पता प्रमाण पत्र के तौर पर बिजली बिल, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, रेंट एग्रीमेंट इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है।

भारत में finance Company शुरू करने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया:

निधि कंपनी के तहत Finance Company registration को मुख्य तौर पर चार आसान भागों में विभाजित किया जा सकता है। इसलिए आगे बढ़ने से पहले किसी को भी निधि कंपनी की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को समझना अति आवश्यक है। निधि कंपनिया विशेष प्रकार की कंपनियां होती हैं जो निधि रुल 2014 के तहत अधिनियमित होती हैं इसलिए इसके तहत फाइनेंस बिज़नेस शुरू करने के लिए अलग से किसी प्रकार के लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है। भारत में निधि कंपनी पंजीकरण की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार से है।

  • उद्यमी को सर्वप्रथम दस्तावेजों का प्रबंध करना होगा और डिजिटल सिग्नेचर के लिए अप्लाई करना होगा। ध्यान रहे निधि कंपनी के तहत कम से कम सात व्यक्तियों की आवश्यकता होती है इसलिए उन सातों व्यक्तियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर आवेदन करने की आवश्यकता होती है ।

आइये जानते हैं डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें.

  • निधि कंपनी के तहत finance company  शुरू करने वाले उद्यमी का अब अगला कदम उन सात व्यक्तियों में से जो भी तीन व्यक्ति डायरेक्टर बनना चाहते हैं के लिए Director Identification Number (DINS) अप्लाई करने का होना चाहिए। क्योंकि कानून के मुताबिक प्रत्येक डायरेक्टर के पास DIN होना अति आवश्यक है।
  • अब उद्यमी का अगला कदम अपनी Finanace Company का नाम अप्रूव कराने का होना चाहिए। इसके लिए उद्यमी अपनी कंपनी का नाम MCA की वेबसाइट पर सर्च कर सकता है और जो कंपनी का नाम मौजूद न हो उसके लिए आवेदन कर सकता है। जब उद्यमी को मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर से नाम की स्वीकृति मिल जाती है। उसके बाद उद्यमी का अगला कदम इनकारपोरेशन के लिए आवेदन करने का होना चाहिए।
  • निधि कंपनी के निगमन या इनकारपोरेशन के लिए आवेदन करने हेतु उद्यमी को सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर लेने चाहिए और उसके बाद निगमन के लिए MCA के ऑफिस में जाकर आवेदन करना चाहिए।

उपर्युक्त दिए गए विकल्पों के अलावा उद्यमी अपनी Finance Company को माइक्रो फाइनेंस कंपनी, प्रोड्यूसर कंपनी, कुछ राज्यों में लोकल फाइनेंस लाइसेंस के अंतर्गत भी रजिस्टर करके शुरू कर सकता है।

यह भी पढ़ें

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |