जज कैसे बनें । How to become a Judge In India.

Judge नामक शब्द से सभी लोग अच्छी तरह वाकिफ होंगे, क्योंकि जब भी किसी के साथ कुछ गलत होता है या अन्याय होता है तो उसको देश की न्यायव्यवस्था की शरण में जाना पड़ता है। किसी भी देश को सफलतापूर्वक चलाने के लिए जितनी आवश्यकता कार्यपालिका की होती है उससे कहीं अधिक आवश्यकता न्यायपालिका की होती है ताकि उस राष्ट्र में सभी लोग नियम कानूनों का अनुसरण करके शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें। लोकतंत्र में न्यायव्यवस्था स्वतंत्र रूप से कार्य करती है ताकि, समाज के हर वर्ग के लोगों को न्याय मिल सके, उनका न्यायव्यवस्था में निरंतर विश्वास बना रहे। और यदि कार्यपालिका द्वारा भी कोई गलत निर्णय लिया जाता है तो न्यायपालिका को पूरा अधिकार होता है की वह उस पर अंकुश लगा सकती है। यही कारण है की एक आदर्श लोकतंत्र में न्यायपालिका को स्वतंत्र रखना बेहद जरुरी होता है। न्यायपालिका में लोगों को न्याय दिलाने के लिए न्यायधीशों की नियुक्ति की जाती है और Judge नामक यह पद एक ऐसा पद है जिसमें जिम्मेदारी के साथ काफी विवेक की भी आवश्यकता होती है और मुख्य रूप से कानूनी ज्ञान की आवश्यकता होती है। ताकि Judge कानून का अनुसरण करते हुए विवेकपूर्ण निर्णय देने में सक्षम हों। वैसे देखा जाय तो भारत में बहुत सारी कोर्ट जैसे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, ट्रिब्यूनल कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट इत्यादि हैं । लेकिन आम तौर पर हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की ही बात अधिक होती है जहाँ तक सुप्रीम कोर्ट की बात है इसके मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य जजों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर की जाती है । चूँकि हाई कोर्ट राज्यों से सम्बद्ध रखते हैं इसलिए हाई कोर्ट में मुख्य एवं अन्य न्यायधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा राज्य के गवर्नर यानिकी राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर की जाती है। District Judge की नियुक्ति भी राज्यपाल द्वारा ही की जाती है । जजों की नियुक्ति के बाद इन्हें केवल महाभियोग लाकर ही हटाया जा सकता है। Judge बनना केवल कमाई की दृष्टी से ही सुरक्षित नहीं है बल्कि इस पद से व्यक्ति को मान, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, दुआएं, आशीर्वाद इत्यादि सभी कुछ मिलता है जो किसी व्यक्ति को अपनी जिन्दगी में पाने की इच्छा रहती है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से भारतवर्ष में जज बनने की क्या प्रक्रिया है के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।

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न्यायाधीश क्या होते हैं (What Is Judge in Hindi):  

Judge को हिंदी में न्यायाधीश कहते हैं इनका काम देश की जनता को न्याय देने का होता है। देश में विभिन्न प्रकार की कोर्ट विद्यमान हैं जहाँ मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायधीश वकीलों की जिरह सुनकर अपना फैसला सुनाते हैं। कहने का आशय यह है की एक Judge या न्यायाधीश वह व्यक्ति होता है जो अदालत की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है वह यह काम या तो अकेले करता है या फिर न्यायाधीशों के एक पैनल के रूप में करता है। न्यायाधीशों की शक्तियाँ, कार्य, नियुक्ति की विधियाँ एवं प्रशिक्षण अलग अलग अधिकार क्षेत्र के आधार पर अलग अलग हो सकता है। एक Judge अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा पेश की गई जिरह, सबूतों एवं गवाहों को सुनता है । दोनों पक्षों की विश्वसनीयता एवं तर्कों का आकलन करता है और अपने विवेक एवं कानून की व्याख्या का अनुसरण करते हुए निर्णय जारी करता है।

न्यायाधीश बनने के लिए योग्यता (Eligibility Criteria to become Judge in Hindi):

जैसा की हम सबको विदित है की Judge बनने के लिए भी वकील बनने की तरह कानून की पढाई करनी पड़ती है। इसलिए हो सकता है की जज बनने के इच्छुक व्यक्ति को पहले वकील बनना पड़े। इसलिए विद्यार्थी को दसवीं से ही अच्छे अंक लाने की कोशिश करनी चाहिए और बारहवीं में किसी भी सेक्शन एवं विषयों में अच्छे अंक लाकर वह एलएलबी करने के लिए एडमिशन लेने हेतु CLAT नामक Entrance Exam दे सकता है। यदि व्यक्ति बारहवीं के बाद एलएलबी करता है तो उसे पांच सालों तक का समय लग सकता है और यदि वह यह ग्रेजुएशन के बाद करता हहै तो उसे तीन सालों तक का समय कानून की पढाई पूरा करने में लग सकता है। हालांकि एलएलबी में एडमिशन के लिए या एंट्रेंस एग्जाम में हिस्सा लेने के लिए कुछ निर्धारित प्रतिशत में अंक चाहिए हो सकते हैं। इसलिए Judge बनने के इच्छुक विद्यार्थी को बारहवीं एवं ग्रेजुएशन में अधिक से अधिक अंक लाने की कोशिश करनी चाहिए। चूँकि विद्यार्थी को Judge बनने के लिए एलएलबी करने की आवश्यकता होती है और एलएलबी में एडमिशन के लिए CLAT नामक एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने की आवश्यकता हो सकती है। CLAT के लिए कुछ प्रमुख योग्यताओं का जिक्र निम्नवत है।

अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए :  

  • उम्मीदवार की अधिकतम उम्र का वर्णन नहीं किया गया है ।
  • यदि उम्मीदवार सामान्य श्रेणी से आता है तो उसके बारहवीं में कम से कम 45% अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है।
  • यदि उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी से आता है तो उसका बारहवीं की परीक्षा कम से कम 40% अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है।

पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए :

  • यह परस्नातक कोर्स होता है इसलिए यदि उम्मीदवार सामान्य श्रेणी से है तो उसका 55% अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है ।
  • यदि उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी से है तो 50% अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है।
  • इसके लिए भी उम्र की उपरी सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

इसके अलावा अक्सर लोग इन्टरनेट पर यह भी ढूंढ रहे होते हैं की हाईकोर्ट के जज कैसे बनते हैं? सुप्रीम कोर्ट के जज कैसे बनते हैं इत्यादि तो आपको बता देना चाहेंगे की हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के Judge सिर्फ वही व्यक्ति बन सकते हैं जो पहले से जज हों या फिर वकील हों। इसलिए अलग अलग तरह के न्यायाधीश बनने के लिए अलग अलग योग्यता/पात्रता सम्बन्धी नियम हो सकते हैं। तो आइये जानते हैं की भारत में कोई न्यायाधीश कैसे बन सकता है।

न्यायाधीश कैसे बनें (How to become Judge in India in Hindi):

न्यायाधीश बनने की तैयारी दसवीं पास करने के बाद कर लेनी चाहिए क्योंकि बारहवीं में आपके द्वारा प्राप्त किये गए अंक ही इस बात का निर्णय कर पाने में मददगार साबित होते हैं की आप न्यायाधीश यानिकी Judge बन सकते हैं या नहीं।

1. बारहवीं अच्छे नम्बरों से पास करें:

Judge बनने के इच्छुक विद्यार्थी को शुरुआत से ही पढाई में ध्यान देना होगा खास तौर पर बारहवीं में क्योंकि यदि विद्यार्थी के एक निश्चित प्रतिशत से कम अंक परीक्षा में आये तो वह Judge बनने के अपने सपने को कभी पूरा नहीं कर पायेगा। इसलिए भले ही निश्चित प्रतिशत कुछ भी हो आप बारहवीं में अच्छे से अच्छे अंक लाने की कोशिश करें क्योंकि किसी भी कोर्स के एडमिशन के लिए कम से कम अंक निर्धारित होते हैं अधिक से अधिक नहीं। इसलिए बारहवीं में अधिक से अधिक अंक लाने की ही कोशिश करें।    

2. एंट्रेंस एग्जाम CLAT क्लियर करें:

एलएलबी करने के लिए लॉ कॉलेजों में एडमिशन के लिए CLAT नामक एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना पड़ सकता है। हालांकि एडमिशन प्रक्रिया कॉलेज के आधार पर अलग अलग हो सकती है लेकिन आम तौर पर प्रसिद्ध लॉ कॉलेजों में एडमिशन के लिए इस एंट्रेंस एग्जाम को क्लियर करना ही होता है। CLAT Entrance exam के लिए जनवरी महीने से आवेदन निकाल जाते हैं जिनकी अंतिम तिथि मार्च तक हो सकती है और मई में यह परीक्षा आयोजित की जाती है।   

3. एलएलबी कोर्स पूरा करें:

एंट्रेंस एग्जाम में अच्छी रैंक ही किसी प्रसिद्ध लॉ कॉलेज में उम्मीदवार के एडमिशन को सुनिश्चित करती है। इसलिए यदि Judge बनने के इच्छुक उम्मीदवार की एंट्रेंस एग्जाम में अच्छी रैंक आ जाये तो उसका एडमिशन हो ही जायेगा । एडमिशन हो जाने के बाद विद्यार्थी को पूरा ध्यान कानून की पढाई में लगाना चाहिए और एलएलबी नामक कोर्स पूरा करना चाहिए। ताकि वह अपने Judge बनने के सपने को साकार कर सके।     

4. वकील बनें:

एलएलबी कोर्स पूरा करने या कानून की पढाई पूरी कर लेने और इंटर्नशिप के बाद व्यक्ति को वकील बनने के लिए स्वयं को स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत करना पड़ सकता है। और इसके बावजूद व्यक्ति को  स्टेट बार काउंसिल  द्वारा आयोजित एक और परीक्षा AIBE को भी पास करना होता है । जिसके बाद व्यक्ति वकील बन जाता है। 

5. स्टेट जुडिशल सर्विस एग्जाम क्लियर करें :

Judge बनने के इच्छुक उम्मीदवार को वकील बनने के बाद जुडिशल सर्विस एग्जाम क्लियर करने की आवश्यकता होती है । इस परीक्षा में बैठने के लिए उम्र की सीमा राज्यों के आधार पर अंतरित हो सकती है आम तौर पर यह 21-35 साल रहती है। इस परीक्षा को भी तीन भागों में पूर्ण कराया जाता है पहला भाग प्रेलिमिनारी एग्जाम, दूसरा मेन एवं तीसरा पर्सनल इंटरव्यू होता है।  

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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