वर्तमान समय में कुरकुरे भी भारत में एक प्रसिद्ध स्नैक्स आइटम बन गया है इसलिए इच्छुक उद्यमी के लिए Kurkure Manufacturing शुरू करना भी एक फायदे का सौदा हो सकता है । हालांकि भारत की यदि हम बात करें तो यहाँ प्रत्येक भौगौलिक क्षेत्र में अपने अपने विशेष स्नैक्स उपलब्ध हैं। स्नैक्स का इस्तेमाल लोगों द्वारा पेय पदार्थों जैसे चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक इत्यादि के साथ अधिक किया जाता है। वैसे तो भारतीय स्नैक्स की एक बेहद लम्बी लिस्ट है लेकिन उनमें से कुछ केले के वेफर्स, चकली, समोसे, पकौड़ी, नमकीन इत्यादि कुछ भारतीय स्नैक्स के अच्छे उदाहरण हैं। चूँकि भारत में लोगों की जीवनशैली में बदलाव हो रहे हैं इस कारण उनकी खान पान की आदतों में भी बदलाव देखे जा सकते हैं। घरों में बढती कामकाजी महिलाओं की संख्या एवं एकाकी परिवारों में बढ़ोत्तरी के चलते लोग रेडी टू ईट फ़ूड आइटम की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यही कारण है की लोग घरों में स्नैक्स बनाने की बजाय बाज़ारों से बने बनाये स्नैक्स खरीदना पसंद कर रहे हैं। इसलिए ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति Kurkure Manufacturing Business करने के बारे में विचार करता है तो शायद यह उसकी जिन्दगी को पूर्णतया बदल के रख देने वाला विचार भी हो सकता है। कुरकुरे का इस्तेमाल सभी उम्र के लोगों द्वारा किया जाता है और बच्चे तो इनकी तरफ कुछ ज्यादा ही आकर्षित रहते हैं। हालांकि भारतीय बाज़ारों को लक्ष्य करते हुए बड़ी बड़ी कम्पनियां जैसे पेप्सिको इत्यादि भी इस क्षेत्र में पहले से मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद भारतीय बाज़ारों में कुरकुरे की मांग बहुत अधिक है। इसलिए मात्र कुछ कम्पनियां ही इतने बड़े बाजार की मांग की पूर्ति का दायित्व निभाने में अक्षम हैं। जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की भारत में अलग अलग भौगौलिक क्षेत्रों में अलग अलग स्वाद को पसंद करने वाले लोग मौजूद हैं। इसलिए यदि कोई उद्यमी किसी क्षेत्र विशेष के लोगों के स्वाद को ध्यान में रखकर कुरकुरे का निर्माण करता है तो वह उस क्षेत्र विशेष में अपने  Kurkure Manufacturing Business को सफल बनाने में सफलता हासिल कर सकता है। भारतीय बाजार में इस तरह के उत्पाद की सफलता उसके स्वाद, उसकी कीमत एवं उसकी उपलब्धता पर निर्भर करती है।

kurkure manufacturing business in hindi

कुरकुरे विनिर्माण बिजनेस क्या है (What is Kurkure Manufacturing Business)

कुरकुरे की यदि हम बात करें तो यह कॉर्न पफ का ही एक ब्रांड है भारत में इसे सन 1999 में लांच किया गया था। और इसके लांच होते ही भारतीय स्नैक का तरीका ही बदल गया इसे अंग्रेजी शब्द Crunchy के नाम से कुरकुरे रख दिया गया। इस स्नैक्स को भारत में कई फ्लेवर में विकसित किया गया और तब से लेकर आज तक यह भारतीयों के स्नैक्स आइटम में प्रमुख स्थान प्राप्त कर चूका है। लोगों की बदलती जीवनशैली में लोगों के पास घर में स्नैक्स इत्यादि बनाने के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया। वह इसलिए क्योंकि एकाकी परिवार में पति पत्नी दोनों अपने काम पर चले जाते हैं और काम से लौटने के बाद उनका स्नैक्स इत्यादि बनाने को मन नहीं करता है। यही कारण है की वे बाजार से बने बनाये स्नैक्स लेना पसंद करते हैं। लोगों की इन्हीं सब समस्याओं को ध्यान में रखकर जब किसी उद्यमी द्वारा कुरकुरे निर्माण का व्यवसाय शुरू किया जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह व्यवसाय ही Kurkure Manufacturing Business कहलाता है।

कुरकुरे की बिक्री संभावना

कुरकुरे की बिक्री कितनी होती होगी उसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं की आप किसी भी परचून की दुकान में चले जाएँ उसके बाहर कुरकुरे इत्यादि की लड़ियाँ लटकती रहती हैं। लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थों को पीने के दौरान स्नैक्स के तौर पर इनका इस्तेमाल किया जाता है इसके अलावा बच्चे भी इनकी आकर्षक पैकिंग की तरफ बेहद जल्दी आकर्षित होते हैं। कुरकुरे एक ऐसा आइटम है जिसे कोई भी राह चलता व्यक्ति भी आसानी से खरीद सकता है और इसके अलावा हर आय वर्ग के लोग इसे आसानी से खरीद सकते हैं। अर्थात कुरकुरे खरीदने के लिए किसी भी आय वर्ग के लोगों को बहुत अधिक सोच विचार करने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि इनकी कीमत 5 रूपये प्रति पैकेट होती है और इन्हें घरों, रेस्टोरेंट एवं पार्टीज में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। और चूँकि इसकी कीमत बेहद कम होती है इसलिए इसे समाज के लगभग हर एक आय वर्ग द्वारा ख़रीदा जाता है। वैसे देखा जाय तो Kurkure Manufacturing Business  में भी काफी प्रतिस्पर्धा व्याप्त है और इसमें पेप्सिको, हल्दीराम फूड्स, बालाजी वेफर्स, आईटीसी, पार्ले इत्यादि जाने माने ब्रांड पहले से मौजूद हैं। लेकिन यदि कोई उद्यमी स्थानीय स्वाद को ध्यान में रखकर इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करता है तो उसके सफल होने की संभावना अधिक है।

कुरकुरे विनिर्माण बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Kurkure Manufacturing Business)

वर्तमान में कुरकुरे बनाने वाली आटोमेटिक, सेमी आटोमेटिक मशीनें बाजार में उपलब्ध हैं इसलिए इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करना आसान हो गया है। इसके अलावा चूँकि हमारा देश भारत एक कृषि प्रधान देश है और Kurkure Manufacturing Business में प्रयुक्त होने वाला कच्चा माल जैसे मक्के का आटा, चावल का आटा, बेसन, खाद्य तेल, मसाले इत्यादि सभी कृषि आधारित वस्तुएं हैं। इसलिए इस तरह का यह व्यापार शुरू करने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता भी हर जगह आसानी से हो जायेगी। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति खुद का कुरकुरे बनाने का यह बिजनेस शुरू कर सकता है।

1. क्षेत्र विशेष में रिसर्च करें

उद्यमी जहाँ Kurkure Manufacturing Business करने की सोच रहा हो सबसे पहले वह जिन कुरकुरे का निर्माण करेगा उन्हें स्थानीय स्वाद के अनुसार होना चाहिए। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह इस बात का पता लगाये की उस क्षेत्र विशेष के लोग कैसा स्वाद पसंद करते हैं। क्योंकि शुरूआती दौर में उद्यमी को अपने उत्पाद को केवल और केवल स्थानीय क्षेत्र में ही बेचना होगा । और धीरे धीरे अपने व्यापार को विस्तृत करने की योजना बनानी होगी। यदि उद्यमी उस क्षेत्र में मौजूद लोगों का स्वाद पता करने में कामयाब हो गया, और उनके पसंदीदा स्वाद के अनुसार ही कुरकुरे का निर्माण हो गया तो उद्यमी उस क्षेत्र विशेष में इस फिल्ड में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है। यहाँ तक की वह पहले से संचालित एवं स्थापित ब्रांड को भी उस क्षेत्र विशेष में टक्कर दे सकता है।      

2. जगह का प्रबंध (Required Land for Kurukure Manufacturing Unit):

इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए 500-600 SQUARE Feet जगह पर्याप्त रहती है और यह भी जरुरी नहीं है की उद्यमी इस तरह की यह जगह किसी भीड़ भाड़ वाली जगह पर ही किराये पर ले। बल्कि उद्यमी चाहे तो 10-20 किलोमीटर के रेडियस में जहाँ भी सस्ती कीमतों या किराये पर जगह या बिल्डिंग मिले, ले सकता है। Kurkure Manufacturing Business के लिए जगह का प्रबंध करते समय बिजली, पानी, सड़क इत्यादि आधारभूत सुविधाओं का ध्यान अवश्य रखें। और जगह चयनित कर लेने के बाद रेंट या लीज एग्रीमेंट, कमर्शियल बिजली कनेक्शन, पानी कनेक्शन इत्यादि अवश्य करवा लें।     

3. जरुरी लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन

कुरकुरे निर्माण का व्यापार शुरू करने वाला उद्यमी चाहे तो अपने व्यवसाय को प्रोप्राइटरशिप के तहत रजिस्टर करवा सकता है। और फैक्ट्री अधिनियम के तहत भी रजिस्टर करने की जानकारी प्राप्त कर सकता है इसके अलावा जीएसटी रजिस्ट्रेशन इत्यादि भी आवश्यक है। चूँकि यह खाद्य से जुड़ा हुआ व्यवसाय है इसलिए इसके लिए फ़ूड लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है। और उद्यमी एमएसएमई के लिए चलने वाली अनेकों योजनाओं का फायदा लेने के लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन एवं एमएसएमई डाटा बैंक में भी अपने व्यवसाय को रजिस्टर कर सकता है । हालांकि ये रजिस्ट्रेशन उद्यमी की अपनी इच्छा पर निर्भर करते हैं क्योंकि Kurkure Manufacturing  के लिए इनकी अनिवार्यता तो नहीं होती है।

4. मशीनरी एवं उपकरण (Required Machinery for Kurkure Manufacturing Business):

कुरकुरे बनाने वाली मशीन का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के आटे जैसे मकई के आटे, चावल के आटे, बेसन इत्यादि से कुरकुरे का उत्पादन करने के लिए किया जाता है। इस मशीन की मदद से मिक्सिंग, ग्राइंडिंग, हीटिंग एवं पैकेजिंग का काम आसानी से पूर्ण किया जा सकता है। मशीन को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त रिमोट कण्ट्रोल भी इसे नियंत्रित करने के लिए होता है। Kurkure Manufacturing Business में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीन की कीमत उसकी उत्पादन क्षमता के आधार पर अलग अलग हो सकती है। इस तरह की मशीन की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

  • मशीन में लगे फ़ूड एक्स्ट्रूडर में लगातार पकाने एवं बाहर निकालने की सुविधा।
  • मशीन का मुख्य ढांचा ट्यूब फ्रेम एवं फीडिंग स्क्रू भी माइल्ड स्टील का बनाया गया होता है।
  • स्क्रू और बैरल एलाय स्टील से निर्मित होते हैं।
  • मशीन की फिटिंग स्टैण्डर्ड होती है।

उद्यमी Kurkure Manufacturing Machine को खरीदने से पहले विभिन्न सप्लायर से इसकी कोटेशन मंगा सकता है, सप्लायर से संपर्क करने के लिए उद्यमी विभिन्न वेब पोर्टल का सहारा ले सकता है। कई कोटेशन का तुलनात्मक विश्लेषण करने के बावजूद ही उद्यमी को मशीन खरीदने के लिए सप्लायर का चुनाव करना चाहिए।     

5. कच्चे माल का प्रबंध

जहाँ तक कच्चे माल का सवाल है यह कुरकुरे के फ्लेवर के आधार पर अलग अलग भी हो सकता है क्योंकि वर्तमान में बाजार में कुरकुरे के अनेकों तरह के फ्लेवर बिकते हैं । और इन अलग अलग फ्लेवर में अलग अलग कच्चे माल का इस्तेमाल होता है इसलिए कच्चे माल के बारे में जानने से पहले कुरकुरे के फ्लेवर के बारे में जानना भी आवश्यकता हो जाता है। कुरकुरे के कुछ प्रमुख फ्लेवर की लिस्ट निम्नवत है।

  • मसाला मंच
  • ग्रीन चटनी
  • चिल्ली चटका
  • मालाबार मसाला स्टाइल
  • मसाला ट्विस्ट
  • देसी बीट्स
  • नॉटी टोमेटो
  • पफकॉर्न
  • हैदराबादी हंगामा
  • जिग ज़ैग
  • सॉलिड मस्ती
  • बटर मस्ती
  • कुरकुरे ट्रायंगल
  • मल्टीग्रेन  

इन सब फ्लेवर के अलावा विभिन्न त्योहारों पर अलग अलग फ्लेवर बाज़ारों में आते हैं इसलिए फ्लेवर के आधार पर कच्चे माल की लिस्ट अलग अलग हो सकती है। लेकिन Kurkure Manufacturing Business में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कुछ प्रमुख कच्चे माल की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • मकई का आटा
  • चावल का आटा
  • चने का आटा (बेसन)
  • खाद्य तेल जैसे ताड़ का तेल इत्यादि
  • मसाले, कंडीमेंट, नमक, चीनी, टारटेरीक, दूध के ठोस इत्यादि 

इस व्यवसाय में प्रयुक्त होने वाला कच्चा माल उद्यमी को भारत के किसी भी कोने में आसानी से मिल सकता है उद्यमी चाहे तो सीधे किसानों से भी इसे खरीद सकता है।     

6. कर्मचारियों की नियुक्ति

यदि उद्यमी छोटे स्तर पर भी Kurkure Manufacturing Business स्थापित करना चाहता है तब भी उसे कम से कम 4-5 कर्मचारी तो नियुक्त करने ही होंगे। इनमें दो कर्मचारी कुशल, तो दो कर्मचारी अकुशल हो सकते हैं।चूँकि इस तरह के व्यवसाय के लिए उद्यमी को बहुत अधिक अनुभवी एवं जानकारी प्राप्त लोगों की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए उद्यमी चाहे तो फ्रेशर को भी अपनी फैक्ट्री में नियुक्त कर सकता है। वह इसलिए क्योंकि अनुभवी एवं जानकारी प्राप्त लोगों को अधिक सैलरी देने की आवश्यकता होती है, जबकि फ्रेशर को कम सैलरी पर भी काम पर रखा जा सकता है।   

7. कुरकुरे का निर्माण (Start Kurkure Manufacturing Process): 

आटोमेटिक कुरकुरे बनाने की मशीन के माध्यम से कुरकुरे बनाने का काम बेहद ही आसान है Kurkure Manufacturing Process में इस मशीन द्वारा कच्चे माल को मिश्रित किया जाता है।सिस्टम को गरम होने में थोड़ा समय अवश्य लगता है, उसके बाद कच्चे माल को मशीन के होपर में डाला जाता है। कच्चे माल की ग्राइंडिंग शुरू हो जाती है खपत के उचित अनुपात को बनाये रखने के लिए मशीन को नियंत्रित करने की आवश्यकता इस प्रक्रिया के दौरान पड़ती रहती है। उसके बाद कुरकुरे बनना शुरू हो जाते हैं और इनमें मसालों को एड किया जाता है। मसाले मिलाने के बाद इन्हें पैकेजिंग के लिए आगे बढ़ा दिया जाता है। आटोमेटिक मशीन के माध्यम से Kurkure Manufacturing Process को उद्यमी या उसका कोई प्रतिनिधि बेहद कम समय में आसानी से सीख भी सकता है।

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