भारत में गायों की दुधारू नस्लें |

भारत में गायों की दुधारू नस्लें |

भारत की गायों की Milch Breeds अर्थात दुधारू नस्लों के बारे में जानने से पहले यह समझ लेना बेहद जरुरी है की पशुधन हमेशा से ग्रामीण भारत की Kamai एवं आजीविका का मुख्य स्रोत रहा है | इसलिए जब किसी उद्यमी के अंतर्मन में डेरी फार्मिंग का बिज़नेस शुरू करने की लालसा का प्रादुर्भाव होता है | तो शायद दो तीन सवाल उसके अंतर्मन में आना स्वभाविक है | पहला यह की अपने डेरी फार्मिंग का हिस्सा भैंसों को बनायें या फिर गायों को वैसे हमने अपनी पिछली पोस्ट में गाय फार्मिंग करने में आने वाला अनुमानित खर्चा और कमाई एवं भैंस फार्मिंग में आने वाला खर्चा एवं कमाई दोनों का अनुमानित ब्यौरा दिया हुआ है | उद्यमी अपने स्वयं के विवेक के आधार पर यह निर्णय कर सकता है की उसे उसकी भौगौलिक, आर्थिक स्थित देखकर कौन से पशु को अपने डेरी फार्मिंग का हिस्सा बनाकर फायदा होगा | दूसरा सवाल यह है की वह इन पशुओं की कौन सी नस्ल को अपने डेरी फार्मिंग का हिस्सा बनाये आज हम अपने इस  Milch Breeds of Cow in India नामक पोस्ट में उद्यमी के अंतर्मन में उठ रहे इसी सवाल का उत्तर देने की कोशिश करेंगे अर्थात आज हम भारत में पायी जाने वाली गायों की दुधारू नस्ल पर वार्तालाप करेंगे | सामान्य तौर पर यदि हम देखें तो भारत में गायों की नस्ल को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है |

  • दुधारू नस्लें (Milch Breeds)
  • बोझा ढोने के उपयोग में लायी जाने वाली नस्लें (Draught Purposes Breeds) |
  • दुधारू एवं बोझा ढोने वाली नस्लें (Dual Purposes Breeds)|

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भारत में उपलब्ध कुछ प्रमुख Milch Breeds of Cow (दुधारू नस्ल की गायों) का विवरण कुछ इस प्रकार से है |

  1. Gir Cow Breeds:

यह Milch breeds  अर्थात Gir Cow की उत्पति गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र को माना जाता है इसलिए आज भी अधिक मात्रा में गीर  गायें गुजरात के कुछ जिलों जैसे भावनगर, राजकोट, टोंक, अमरेली इत्यादि में तथा राजस्थान के कोटा जिले में पायी जाती हैं | इनकी शारीरिक बनावट मध्यम से लेकर बहुत बड़ी तक होती है | यदि हम इनकी शारीरिक बनावट पर थोड़ी विशेष चर्चा करेंगे तो हम पाएंगे की एक Female Gir Cow का औसतन भार 385 Kg एवं ऊंचाई 130 CM होती है | और एक Male Gir का औसतन भार 545 एवं ऊंचाई 135 CM होती है | गीर  गाय की एक Lactation के दौरान औसतन 1590 किलो दूध देने की क्षमता होती है |

Features of Gir Cow in Hindi:

इस Milch Breeds यानिकी Gir Cow की विशेषताओं की बात करें तो इनकी कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नवत हैं |

  • अन्य गायों से जो Gir Cow को अलग करता है वह यह विशेषता है की इनका मस्तक उन्नतोदर (Convex) होता है जो इनमे Brain Radiator के रूप में काम करता है एवं हार्मोन को पैदा एवं बढ़ाने में मददगार होता है |
  • इनके कान लम्बे गले की ओर झुके रहते हैं जो मक्खियों एवं अन्य कीटाणु को दूर रखने के उद्देश्य से Gir cow द्वारा प्रयोग में लाये जाते हैं |
  • Gir Cow के सींग अधिकतर खूंटी दार होते हैं अर्थात सींग सीधे न होकर बीच से मुड़े हुए दोनों सींगो का अग्रभाग एक दूसरे सींग की तरफ होता है |
  • इनके पाँव काले और बहुत सख्त होते हैं |
  • गीर नस्ल की गायों की दूध देने की औसतन क्षमता लगभग 300 दिनों तक होती है |
  • Gir Cow की चमड़ी अर्थात त्वचा Pigmented होती है और त्वचा पर बहुत छोटे छोटे glossy बाल होते हैं | इनकी त्वचा काफी ढीली होती है इसलिए जब कोई मक्खी मच्छर इनकी त्वचा पर बैठता है तो ये त्वचा को हिलाकर उसे आसानी से भगाने में समर्थ होती हैं |
  • Gir Cow का स्वभाव काफी शांत होता है इसलिए ये मनुष्य के साथ रहना पसंद करती हैं ये अपने बछड़े को अपनी गर्दन के नीचे सुलाना पसंद करती हैं |
  1. TharParkar Cow :

इस Milch Breeds  अर्थात दुधारू नस्ल यानिकी गाय की थारपारकर नस्ल का नाम राजस्थान राज्य में स्थित थार मरुस्थल के नाम पर रखा गया है | इस नस्ल को White Sindhi, Grey Sindhi या Thari भी कहा जाता है | यह इसलिए क्योंकि इस गाय की नस्ल की उत्पति सिंध से हुई थी जो अब पाकिस्तान में है | Tharparkar नस्ल की गाय वर्तमान में गुजरात राज्य के कच्छ और बारमेर जिले एवं राजस्थान राज्य के जैसलमेर और जोधपुर जिले में पायी जाती हैं | इस नस्ल की गायों की दूध देने की औसतन क्षमता 1749 किलोग्राम प्रति Lactation होती है | वैसे दूध देने की क्षमता गायों के खान पान पर भी निर्भर करती है यदि इनके खान पान में समुचित पोषक तत्वों का समावेश हो तो गाय की यह Milch Breeds Tharparkar Cow एक Lactation में 3000 लीटर तक दूध देने का सामर्थ्य रखती है |

  1. Sahiwal Cow :

इस Milch Breeds (दुधारू नस्ल ) अर्थात Sahiwal नस्ल की पहचान भारत में एक अच्छे दुधारू पशु के रूप में की जाती है जहाँ तक Sahiwal Cow की उत्पति का सवाल है इस नस्ल की उत्पति पंजाब के मोंटेमेरी जिले से हुई थी जो वर्तमान में पाकिस्तान में है | इस नस्ल की गायों को अन्य नाम जैसे लोला, मुल्तानी और तेली के रूप में भी जाना जाता है | यह Milch Breeds Sahiwal Cow भारत में पंजाब राज्य के फीरोजपुर एवं अमृतसर तथा राजस्थान के गंगानगर जिले में पायी जाती हैं | इनका रंग अधिकतर तौर पर भूरे लाल रंग का होता है यद्यपि रंग में और अंतर देखने को मिल सकता है इस नस्ल की गायों के सींग बहुत छोटे होते हैं और इनकी दूध देने की औसतन क्षमता प्रति Lactation लगभग 2325 किलोग्राम होती है | इस नस्ल की वयस्क गाय का भार 600-800 किलोग्राम एवं बैल का भार 400-600 किलोग्राम होता है | इनका सिर छोटा एवं पूँछ लम्बी होती है |

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  1. Red Sindhi Cow:

Red Sindhi नामक इस Milch Breeds की उत्पति पाकिस्तान के सिंध प्रान्त से हुई है | इस नस्ल की गाय प्राचीनकाल से ही कराची, लसबेला एवं हैदराबाद में पाई जाती रही है | इस नस्ल की गाय को Red Sindhi के अलावा मालीर, रेड कराची या फिर सिन्धी भी कहा जाता है |इस नस्ल की गायों का रंग विशिष्ट लाल रंग का होता है जो की साहिवाल से थोडा गहरा रंग होता है यद्यपि रंग की शेड मंद पीले से लेकर गहरे लाल तक अंतरित हो सकती है लेकिन सामान्यतया इस नस्ल की गाय गहरे लाल रंग की ही होती हैं |एक आंकड़े के मुताबिक इस Mich Breeds यानिकी Red Sindhi Cow की दूध देने की औसत क्षमता प्रति Lactation 1840 किलोग्राम होती है | नस्ल को विकसित करने की दृष्टि से इस नस्ल की गायों को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फिलिपिन्स, ब्राज़ील और श्रीलंका इत्यादि देशों में इनका पालन किया जाता है | जहाँ इस नस्ल की वयस्क गाय की औसतन ऊंचाई 116 CM एवं भार 340 किलो होता है वहीँ इस नस्ल के बैल की औसत ऊंचाई 134 CM एवं भार 420 किलो होता है |
ग्रामीण इलाकों में निवासित लोगों की आजीविका चलाने एवं कमाई कराने में गाय की Milch Breeds अर्थात दुधारू नस्ल का महत्वपूर्ण योगदान है | इनकी इसी उपयोगिता के वशीभूत होकर हमने इन पर यह Milch Breeds of Cow in India नामक पोस्ट लिखी अपनी इसी श्रेणी में आगे हम गाय की नस्ल की अन्य दो श्रेणियों Draught Purpose Breeds यानिकी बोझा ढोने वाली नस्लों एवं Dual Purpose Breeds (दोहरे उपयोग में लायी जाने वाली नस्लों) पर भी वार्तलाप करेंगे |

Comments

  1. By Mahendar chaudhary

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