साबुन बनाने का बिजनेस। Soap Making Business Plan in Hindi.

Soap Making Business Plan in Hindi – साबुन का इस्तेमाल लगभग हर घर, कार्यालय, होटल एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर होता है । ऐसे में यदि आप कोई लाभकारी बिजनेस शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, तो साबुन बनाने का बिजनेस शुरू करने पर भी विचार कर सकते हैं। आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से इस व्यवसाय के बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। लेकिन इस लेख के अंत में साबुन बनाने का जो हम बताने जा रहे हैं वह तरीका उन उद्यमियों के लिए उपयोगी हो सकता है जो बेहद छोटे स्तर पर साबुन बनाने का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। जिस Soap Making Process का उल्लेख हमने इस ल्केह लेख के अंत में किया हुआ है उस प्रक्रिया के तहत केवल घरेलू तौर पर ही साबुन का निर्माण किया जा सकता है व्यवसायिक तौर पर नहीं ।

व्यवसायिक तौर पर साबुन का निर्माण करने के लिए उद्यमी को किसी प्रशिक्षण संस्थान से उचित प्रशिक्षण लेना अति आवश्यक है। इस लेख का मकसद साबुन बनाने की घरेलु पद्यति से लोगों को अवगत कराने का है। चूँकि समय के अनुरूप तकनिकी के प्रचार प्रसार के कारण व्यवसायिक तौर पर साबुन बनाने की प्रक्रिया भिन्न भिन्न हो सकता है। इसलिए उद्यमी को अपनी कमाई करने के लिए व्यवसायिक तौर पर इस तरह का बिजनेस करने से पहले इसका प्रशिक्षण अवश्य लेना चाहिए।

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साबुन बनाने का बिजनेस होता क्या है (What is soap making business):

साबुन को आप एक टिक्कीनुमा कठोर आकृति वाली एक टिकिया कह सकते हैं, जिसकी लम्बाई 3 इंच उर चौड़ाई २ इंच होती है । हालांकि अलग अलग कंपनियों द्वारा अलग अलग साइज़ की साबुन की टिकिया बनाई जाती हैं । इनके साइज़ के आधार पर ही इनकी कीमतें तय होती हैं। आज का मनुष्य स्वच्छता से रहना पसंद करता है, इसलिए मनुष्य द्वारा कई तरह के साबुन जैसे कपड़े धोने के साबुन, नहाने के साबुन, टॉयलेट सोप, लिक्विड सोप इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है।

यही कारण है की साबुन आज के समय में एक ऐसी वस्तु बन गई है जिसकी आवश्यकता हर रोज हर घर, होटल एवं अन्य जगहों पर होती रहती है। जब आप साबुन का उत्पादन करके उसे बेच रहे होते हैं तो आपके द्वारा किया जाने वाला बिजनेस साबुन बनाने का बिजनेस (Soap Making Business) कहलाता है।  

साबुन का उपयोग (Use of Soap)

साबुन एक ऐसी वस्तु है । जिसका उपयोग इस धरती पर हर एक मनुष्य करता है । इसलिए यदि आप इस व्यवपार में अपनी किस्मत और हाथ आजमाना चाहते हैं । तो आपके लिए निम्न बातों की जानकारी होना जरुरी है । साबुन घर की रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली वस्तुओ में से एक मुख्य वस्तु है । इसलिए साबुन के व्यापार में जोखिम थोड़ा कम हो जाता है ।

साबुन बनाने के व्यापार में संभावनाएं (Market Potential in Soap Making)

चूंकि साबुन का उपयोग हर घर में हर व्यक्ति द्वारा किया जाता है । इसलिए इस व्यापार में असीमित सम्भावनाये हैं । साबुन बनाने का व्यापार शुरू करने के लिए आपको बहुत अधिक निवेश की भी जरुरत नहीं पड़ती है । सबसे अच्छी बात इस व्यापार की यह है की इसको आप अपने घर से भी संचलित कर सकते है । अपना उत्पादन बाजार में उतारने से पहले अपने पड़ोसियों को अपना उत्पादन प्रयोग करने को कह सकते हैं । और साबुन कैसा है, की प्रतिक्रिया ले सकते हैं ।

ताकि आप अपने उत्पादन को बाजार में लाने से पहले ग्राहकों के हिसाब से उसमे सुधार कर सको । साबुन चाहे कोई सा भी हो चाहे वह कपड़े धोने वाला हो, या फिर शरीर धोने वाला, इसका प्रयोग हर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में अवश्य करता है । इसलिए साबुन का व्यापार एक ऐसा व्यापार है । जिसमे कभी मंदी आने के कोई आसार नहीं होते ।

इसलिए इस व्यापार में निरंतर कमाने के आसार अधिक हो जाते हैं । इसके अलावा आपके परिवार में यदि कोई ऐसा व्यक्ति है । जो कोई काम नहीं करते हैं, आप खुद यह काम करके उनको भी इस काम में लगा सकते हैं । कभी अपने किसी नज़दीकी जनरल स्टोर में चले जाइये । और उनसे जानने की कोशिश कीजिये । की आपके यहाँ साबुन कितना बिक जाता है । आशा करता हूँ उनका उत्तर पाकर आप इस व्यापार की क्षमता और संभावनाओ के बारे में और नहीं पूछेंगे ।

साबुन के प्रकार (Various Types of Soap)

बाजार में अभी भी आपको भिन्न भिन्न प्रकार के जैसे कपडे धोने वाला साबुन, नहाने वाला साबुन, खुशबूदार साबुन, एन्टीसिपाटिक साबुन, डिटर्जेंट पाउडर मिल जायेंगे । चूंकि प्रतिदिन इनका इस्तेमाल हर मनुष्य के द्वारा किया जाता है । इसलिए आपको छोटी से लेकर बड़ी दुकान में तक, साबुन का मिलना स्वभाविक है । अलग अलग तरह के साबुनों में अलग अलग केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है ।

इस लेख का उद्देश्य

हमारा उद्देश्य अर्थात ध्येय यहाँ पर आप लोगो को छोटे पैमाने पर कपडे धोने का साबुन बनाने की क्रिया से अवगत कराना है । इस दुनिया में साबुन बनाने के भिन्न भिन्न अर्थात अनेको तरीके हो सकते हैं । लेकिन इनमे से दो तरीके साबुन बनाने के लिए सर्वाधिक तौर पर प्रयोग में लाये जाते हैं ।

गरम वाला तरीका और ठन्डे वाला तरीका ।

जरुरी सामग्री (ingredients for Soap Making):

जहाँ Soap Making के गरम वाले तरीके में केमिकल को गरम करना पड़ता है । वही ठन्डे करने वाले तरीके में केमिकल को गरम नहीं करना पड़ता ।

आज हम आपको यहाँ पर ठंडा करने के तरीके से साबुन बनाना सिखाएंगे । तो आइये जानते हैं की ठन्डे तरीके से कपडे धोने का साबुन बनाने के लिए हमें क्या क्या सामग्री चाहिए होती है ।

नायलॉन शीट, दास्ताने, मास्क, लोहे का या प्लास्टिक का मिक्सर,एक तराजू, एक साँचा, हाइड्रोमीटर (नमी मापने के लिए),प्लास्टिक की बाल्टी। ताड की गरी का तेल,कास्टिक सोडा मोती,सोडा पाउडर,सोडियम सलफेट, इत्र, पानी, रंग इत्यादि। 

साबुन बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to start soap making business in India):

यदि आप साबुन बनाने के बिजनेस को शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, तो सबसे पहले आपको इस बात का निर्णय लेना होगा की आप अपनी फैक्ट्री में किस किस तरह के साबुन बनाने की योजना बना रहे हैं। क्योंकि नहाने का साबुन अलग होता है, कपड़े धोने का साबुन अलग होता है तो वहीँ टॉयलेट में इस्तेमाल में लाया जाने वाला साबुन अलग होता है ।

वैसे देखा जाय तो आप हर प्रकार के साबुन बनाने का काम अपनी फैक्ट्री में कर सकते हैं, वह इसलिए क्योंकि साबुन की टिकिया बनाने की प्रक्रिया हर तरह का साबुन बनाने में एक ही होती है। लेकिन उसमें इस्तेमाल में लाया जाने वाला कच्चा माल इत्यादि साबुन के आधार पर अलग अलग होता है। कहने का अम्त्लब यह है की जो कच्चा माल आप कपड़े धोने का साबुन बनाने के इस्तेमाल में लायेंगे, उसे आप नहाने वाला साबुन बनाने के लिए उपयोग में नहीं ला सकते ।

इसके अलावा भी कई प्रक्रियाएं इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आवश्यक होती हैं, जिनका विवरण निम्नवत है।

साबुन बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करें (Get Training)

भले ही साबुन बनाने का यह बिजनेस कम निवेश के साथ शुरू किया जा सकता है, लेकिन चूँकि यह कॉस्मेटिक प्रोडक्ट की श्रेणी में आता है। और इसमें कोई दो राय नहीं की कॉस्मेटिक प्रोडक्ट लोगों के शरीर एवं सुन्दरता से जुड़े होते हैं। इसलिए सबसे पहले उद्यमी के लिए साबुन बनाने का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य हो जाता है। क्योंकि यदि उद्यमी साबुन बनाने में संतुलित मात्रा में कच्चे माल का इस्तेमाल नहीं करेगा, तो हो सकता है की वह साबुन लोगों को पसंद न आए। और उससे लोग अपने शरीर या कपड़ों की उस तरह की सफाई न कर पायें, जो वे किसी साबुन से उम्मीद करते हैं।

बेहतर होगा की यदि प्रमोटर केमिस्ट्री पढ़ा हुआ हो, क्योंकि साबुन बनाने में कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल होता है । इसलिए यदि प्रमोटर रसायन विज्ञान पढ़ा हुआ होगा तो वह साबुन बनाने की प्रक्रिया को भी जल्दी एवं सहजता से समझ पाएगा। बहुत सारे खादी ग्रामोद्योग केंद्र एवं जिला उद्योग केंद्र लोगों को इस तरह के व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेने में मदद करते हैं।      

जगह का प्रबंध करें (Land Arrangement for Soap Making):  

जब आप साबुन बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं, तो आप इस बिजनेस की संभावनाओं का आकलन करने में भी समर्थ हो जाते हैं। उसके बाद आप इस बात का निर्णय आसानी से ले सकते हैं की आगे आपको इस बिजनेस को करना चाहिए या नहीं। यदि आपके द्वारा लिया गया प्रशिक्षण और विवेक इस व्यवसाय को करने की इजाजत देता है, तो उसके बाद आपका अगला कदम अपनी फैक्ट्री के लिए जगह तलाश करने का होना चाहिए ।

आप ऐसी जगह का चुनाव करें जहाँ पर आपको बहुत अधिक किराया न देना पड़े लेकिन वहां पर बिजली, पानी, सड़क इत्यादि मूलभूत सुविधाओं का अभाव न हो । सड़क भी चौड़ी होनी आवश्यक है क्योंकि आपको अपनी फैक्ट्री में कच्चा माल मंगवाने और उत्पादित माल को बाहर भिजवाने में ट्रक, टेम्पो जैसे भारी वाहनों की आवश्यकता होती है। जगह आपके बिजनेस के आकार पर निर्भर करती है, लेकिन छोटे स्तर पर इस बिजनेस को शुरू करने के लिए 1200 वर्ग फूट से लेकर १५०० वर्ग फूट की जगह उपयुक्त रहती है ।

जरुरी लाइसेंस और पंजीकरण करें (License)    

साबुन बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको निम्नलिखित लाइसेंस एवं पंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है ।

  • व्यापार पंजीकरण – भारत में कई तरह की कंपनीयों जैसे प्रोप्राइटरशिप फर्म, वन पर्सन कंपनी, साझेदारी फर्म, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, हिन्दू अविभाजित परिवार इत्यादि को क़ानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है। आप इनमें से किसी भी एक के तहत अपना बिजनेस रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
  • कर पंजीकरण –  कर पंजीकरण के तौर पर आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता होगी।
  • पैन कार्ड चालू खाता – व्यवसाय के नाम से पैन कार्ड और चालू खाता खुलवाने की आवश्यकता होती है।  
  • स्थानीय प्राधिकरण से लाइसेंस – स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम इत्यादि से फैक्ट्री एक्ट के तहत ट्रेड लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है।
  • ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन – यदि आप खुद का ब्रांड नाम स्थापित करके साबुन बेचने पर विचार कर रहे हैं, तो आपको अपने ब्रांड नाम को सुरक्षित करने के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता होगी ।
  • ड्रग एवं कॉस्मेटिक लाइसेंस – चूँकि यह एक कॉस्मेटिक प्रोडक्ट है इसलिए इसके लिए इस लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है ।

 कर्मचारी नियुक्त करें ( Appoint Staff for Soap Making Business):

 इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको फैक्ट्री परिसर में ही एक ऑफिस और एक लैब का भी निर्माण करना होता है। इसलिए स्वभाविक है की आपको दो स्किल्ड कर्मचारी न जगहों पर भी चाहिए। इसके अलावा आपको साबुन निर्माण प्रक्रिया को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए भी कम से कम एक स्किल्ड और ३ अनस्किल्ड कर्मचारियों की आवश्यकता हो सकती है।  

यद्यपि आपको अपने साबुन बनाने के बिजनेस के लिए कितने कर्मचारियों की आवश्यकता होगी वह आपकी कार्यशैली और बिजनेस की योजना और उसके आकार पर निर्भर करता है। यदि शुरूआती दौर में आप सेल्स, मार्केटिंग एवं ग्राहकों को खुद ही सँभालने वाले हैं तब तो ठीक है अन्यथा इस काम के लिए भी आपको अलग से कर्मचारी नियुक्त करने की आवश्यकता होगी।

मशीनरी और कच्चा माल खरीदें (Machinery Raw Materials)

यदि आपने पहले साबुन बनाने की ट्रेनिंग ली है तो उस प्रशिक्षण के दौरान आपको मशीनरी और कच्चे माल सप्लायर के बारे में भी बताया गया होगा। आप उन सप्लायर से संपर्क करके अपने Soap Making Business के लिए मशीनरी एवं कच्चा माल खरीद सकते हैं ।

लेकिन ध्यान रहे आपको केवल एक ही विक्रेता या सप्लायर से बात नहीं करनी है बल्कि कम से कम ६ या ७ सप्लायर से अलग अलग कोटेशन मँगवा लेनी हैं, और फिर उनका तुलनात्मक विश्लेषण करके अपने लिए सबसे बढ़िया सप्लायर का चुनाव करना है । इस बिजनेस में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कुछ प्रमुख मशीनरी और कच्चे माल की लिस्ट इस प्रकार से है ।

  • कच्चे माल को मिक्स करने के लिए ब्लेंडर की आवश्यकता होती है।
  • गर्म विधि से साबुन का निर्माण करने के लिए माइक्रोवेव ओवन की भी जरुरत हो सकती है।
  • साबुन को आकार देने के लिए विभिन्न सांचों यानिकी मोल्ड की आवश्यकता होती है।
  • स्टेनलेस स्टील से निर्मित घडा और मिक्सिंग केतली की भी जरुरत होती है।
  • मिश्रण हेतु रबर स्पेतुला और स्टिक ब्लेंडर की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • कच्चे माल को मापने के लिए मापक कप, चम्मच की आवश्यकता हो सकती है।
  • केमिकल से सुरक्षा के लिए चश्मे, दस्ताने इत्यादि की आवश्यकता और तापमान मापने के लिए थर्मामीटर की आवश्यकता हो सकती है।
  • कच्चे माल के तौर पर विभिन्न खुशबूदार तेल जैसे ताड़ का तेल, नारियल का तेल या फिर जैतून के तेल की आवश्यकता होती है।
  • विभिन्न रसायन जैसे सोडियम हाइड्रोऑक्साइड, पोटेशियम हाइड्रोऑक्साइड की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • इसके अलावा हनी, एलोवेरा,जई का आटा, समुद्री शैवाल, बादाम, हल्दी, अंगूर के बीज, नीम्बू इत्यादि की भी आवश्यकता होती है।
  • खुशबू के लिए कई तरह के सेंट और साबुन को रंग देने के लिए रंगों और पैकिंग के लिए पैकिंग सामग्री की आवश्यकता भी होती है ।

साबुन बनाना शुरू करें (Start Manufacturing of soap):

सब प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद आप अपनी साबुन की फैक्ट्री में साबुन का ट्रायल निर्माण शुरू कर सकते हैं । यद्यपि अलग अलग उद्यमों द्वारा साबुन बनाने की अलग अलग विधियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें गर्म प्रक्रिया और ठंडी प्रक्रिया शामिल है। लेकिन आपने उसी विधि द्वारा साबुन का निर्माण करना है जो आपने अपने प्रशिक्षण के दौरान सीखी हो।    

साबुन बनाने का घरेलू तरीका (Soap Making Process in Hindi):

कास्टिक सोडा को प्रयोग में लाने से पहले 24 या 48 घंटे पहले तैयार होने के लिए छोड़ दें ।

आइये जानते हैं कास्टिक सोडा को तैयार करने की विधि ।

Soap Making Process
Sabun-Banane-Ka-tarika

Step 1:  सबसे पहले कास्टिक सोडा में पानी मिलाना होता है । और पानी का अनुपात 1:2 होना चाहिए । अर्थात यदि आपके पास 2 लीटर कास्टिक सोडा है । तो पानी की मात्रा 4 लीटर होनी चाहिए । और पानी में कास्टिक सोडा को हिला कर मिला दें । और उसके बाद उसको उसी अवस्था में 24 से 48 घंटे के लिए छोड़ दें ।

साबुन बनाने में सावधानियाँ (Precautions):

इस कास्टिक सोडा बर्तन को बच्चो और घरेलु जानवरो की पहुँच से दूर रखें । क्योकि कास्टिक सोडा में एक संक्षारक क्षार निकलता है । जो नुकसानदेह हो सकता है । 24-48 घंटे के बाद यह दृव्य ठंडा हो जायेगा । तब आपको हाइड्रोमीटर का प्रयोग करना है । साधारणतः हाइड्रोमीटर का प्रयोग बैटरी के अंदर पानी चेक करने के लिए भी किया जाता है ।

हाइड्रोमीटर में कास्टिक सोडा की माप 12.50-12.75 तक होनी चाहिए । आप चाहे तो हाइड्रोमीटर को पानी के साथ और कास्टिक सोडा मोती, के साथ अलग अलग माप सकते हैं ।

Step 2 : उसके बाद सोडा पाउडर को भी खमीर बनने के लिए आपको लगभग 24 से 48 घंटे पहले ही तैयार  करना पड़ेगा । इसमें भी पानी की मात्रा 1:2 में ही होगी । और इसको भी आपको पानी के साथ अच्छी तरह मिला के छोड़ देना है । जब 24-48 घंटे बाद यह ठंडा हो जाय । फिर हाइड्रोमीटर से इसकी आर्द्रता मापे । आर्द्रता 12.00-12.25 के बीच होनी चाहिए ।

Step 3 : तीसरा स्टेप यह है कि आपको सोडियम सल्फेट को तभी पानी में घुलाना है जब आप साबुन बनाने जा रहे हों । और हाइड्रोमीटर से मापते समय इसकी आर्द्रता 12.75 तक होनी चाहिए ।

साबुन बनाने के लिए क्या क्या सामग्री चाहिए?

माना की आपने ताड़ की गरी का तेल लिया है 3 लीटर, और कास्टिक सोडा 1.5 लीटर, सोडा पाउडर 1.2 लीटर, सोडियम सलफेट 0.6 लीटर, इत्र अपने हिसाब से, रंग, रंग के हिसाब से |

Step 4 : जिस बर्तन में आप इन सबको मिक्स करने वाले हैं । उस बर्तन में सर्वप्रथम ताड की गरी का तेल डाल दें । उसके बाद कास्टिक सोडा भी उस बर्तन में डाल दें । और इस Soap Making Process में लगातार किसी लकड़ी या किसी अन्य वस्तु से इस मिश्रण को हिलाते रहें ।

Step 5 : उसके बाद सोडा पाउडर डाल दें फिर हिलाते रहें । और उसके बाद सोडियम सलफेट और इत्र डालें । यदि आप चाहते हैं की आपके द्वारा बनाये गए साबुनों का रंग अलग अलग हो ।  आप अपनी इच्छा के अनुसार इस मिश्रण में रंग डाल सकते हैं ।
Step 6 : अब अपने साँचे को नायलॉन की शीट से कवर करें । या यह क्रिया आप पहले भी कर सकते हैं । और इस मिश्रण को साँचे में उड़ेल दें । और इस मिश्रण को अपने मनमुताबिक या एक अच्छी शेप देने के लिए साँचे में फैलाएं ।

Step 7 : और उसके बाद Soap Making Process में इसे  4-5 घंटे के लिए छोड़ दें । अब नायलॉन की शीट को साँचे से बाहर निकालें । और देखें अब आपका साबुन तैयार है अब इसको अपनी मनमुताबिक पैकिंग के अनुसार काटें । और बाजार में बेचकर पैसे कमाएं ।

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