सुकन्या समृद्धि योजना के फायदे, नियम और खाता खोलने की प्रक्रिया।

सुकन्या समृद्धि योजना भारत सरकार द्वारा कन्याओ के लिए, संचालित एक बचत योजना है। इस बचत योजना के तहत 10 साल तक की कन्याओ का खाता खोला जा सकता है ।

खाताधारक को उच्च ब्याज दर, और आयकर में आयकर अधिनियम 80 (ग) के तहत रियायत दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य कन्याओ के कल्याण को बढ़ावा देना है। योजना की शुरुआत 2 दिसम्बर 2014 को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी।

सुकन्या समृद्धि योजना
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सुकन्या समृद्धि खाते से जुड़े नियम (Sukanya Samriddhi Rules in Hindi):

जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की Sukanya Samriddhi Yojana भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक बचत योजना है। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी बेटियों की पढ़ाई एवं उनकी शादी इत्यादि के लिए छोटी छोटी बचत करके पैसे जमा करने को प्रोत्साहित करना है।

इस योजना के तहत की गई बचत पूर्णत जोखिमरहित एवं सुरक्षित है। इस योजना से सम्बंधित जमा, ब्याज एवं निकासी से जुड़े नियम समय समय पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।

यही कारण है की आप अपनी बेटी के नाम से Sukanya Samriddhi Yojana के तहत खाता चाहे किसी डाकघर में खुलवाएँ, या किसी बैंक में, सभी जगह जमा, ब्याज और निकासी सम्बन्धी नियम एक जैसे ही रहेंगे। तो आइये आगे हम सुकन्या समृद्धि खाते से सम्बंधित कुछ मुख्य नियम एवं शर्तों के बारे में जानने का प्रयत्न करते हैं।

खाता कैसे खुलेगा और खाता खोलने के लिए कितने पैसे चाहिए?

स्वभाविक है की जब कोई व्यक्ति अपनी बेटी के नाम से Sukanya Samriddhi Account खोलने की सोचता होगा, तो उसके दिमाग में दो प्रश्न सबसे पहले आएँगे। वह यह की खाता खोलने के लिए कितने पैसे चाहिए? और खाता खोलने के लिए उसे कहाँ जाना पड़ेगा।

यदि आप भी अपनी बच्ची का सुकन्या समृद्धि खाता खोलना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको साल में कम से कम 250 रूपये जमा करने की आवश्यकता होती है।

जिसका सीधा सा मतलब है की आप 250 रूपये जमा करके सुकन्या खाता खोल सकते हैं । और ध्यान रहे आपको हर वित्तीय वर्ष में कम से कम 250 रूपये इस खाते में जमा करने ही होंगे । अधिकतम इसमें 1.50 लाख रूपये प्रति वर्ष तक जमा किये जा सकते हैं।  

न्यूनतम अमाउंट मेन्टेन न करने पर पेनल्टी  

जैसा की हमने अभी बताया की आपको हर वित्तीय वर्ष कम से कम 250 रूपये तो सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खोले गए खाते में जमा करने ही हैं। लेकिन यदि आप ऐसा नहीं कर पाए तो बैंक या पोस्ट ऑफिस जहाँ भी आपका सुकन्या खाता होगा वह उसे डिफ़ॉल्ट श्रेणी में डाल देगा।

उसके बाद जितने वर्ष आपने न्यूनतम अमाउंट जमा न किया हो उसके साथ प्रत्येक वर्ष के हिसाब से आपको 50 रूपये पेनल्टी के तौर पर भरने होंगे।

सुकन्या खाते में जमा पैसा वापस कब मिलेगा

जहाँ तक सुकन्या समृद्धि खाते में पैसे जमा करने की बात है, इस योजना के तहत खोले गए खाते में आपको लगातार 15 वर्षों तक पैसे भरने की आवश्यकता होती है । लेकिन यह खाता 21 सालों तक चलता है, यानिकी जब आपको पैसे भरते हुए 15 साल पूरे हो जाते हैं, उसके बाद आपको पैसे भरने की आवश्यकता नहीं होती।

लेकिन Sukanya Samriddhi Account आगे और छह सालों तक चलता रहेगा, जिस पर आपको ब्याज मिलता रहेगा। और 21 सालों बाद कुल जमा राशि ब्याज सहित खाताधारक, या नॉमिनी को लौटा दी जाती है।     

पैसे कितनी बार जमा किये जा सकते हैं?

Sukanya Samriddhi Yojana के तहत खोले जाने वाले खाते में पैसे जमा करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है । यानिकी आप जब चाहें साल में अपनी सुविधानुसार इस खाते में पैसे जमा कर सकते हैं।

लेकिन एक बात का ध्यान रखना है की 50 रूपये से कम इस खाते में जमा नहीं किये जा सकते। और एक पूरे वित्तीय वर्ष में इस खाते में 1.50 लाख रूपये से अधिक पैसे भी जमा नहीं किये जा सकते।  

मेच्योरिटी से पहले बीच में पैसे निकाल सकते हैं

जैसा की हमने बताया इस खाते की मेच्योरिटी की अवधि 21 साल निर्धारित की गई है। लेकिन मनुष्य जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं, इसलिए कहा नहीं जा सकता की आपको आपके पैसे की आवश्यकता कब पड़ जाय। तो अब सवाल यही उठता है की क्या Sukanya Samriddhi Account से बीच में भी पैसे निकाले जा सकते हैं?

जी हाँ यदि जिस बच्ची के नाम से सुकन्या खाता है उसे 18 साल पूरे हो जाते हैं, और उसकी शादी हो जाती है, तो इस खाते को पहले भी बंद किया जा सकता है, और खाता बंद करते समय कुल जमा और अर्जित ब्याज निकाला जा सकता है ।

यदि बच्ची की उम्र 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी हो, और उसने अपनी दसवीं की पढाई पूर्ण कर ली हो, तो उसकी उच्च शिक्षा के लिए भी कुल जमा राशि का 50% निकाला जा सकता है।

कुछ ऐसी स्थितियों का भी जिक्र इस योजना के तहत किया गया है, जिनके पैदा होने पर 5 साल बाद भी सुकन्या समृद्धि खाते को बंद किया जा सकता है। ऐसी स्थितियाँ निम्न हैं।

  • यदि जिस बच्ची के नाम से सुकन्या खाता हो उसकी मृत्यु हो गई हो।
  • खाते में पैसे भरने के लिए जो अभिभावक जिम्मेदार हो उसकी मृत्यु हो गई हो।
  • जिस बच्ची के नाम से सुकन्या खाता हो उसे कोई गंभीर बीमारी हो गई हो।            

खाते में जमा राशि और अर्जित ब्याज पर टैक्स में छूट

Sukanya Samriddhi Yojana मानव कल्याण खास तौर पर बेटियों की स्थिति को सुधारने के लिए शुरू की गई एक बचत योजना है। इसलिए इस योजना के तहत जमा पैसों पर धारा 80 C के तहत टैक्स में छूट प्रदान की जाती है। ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना के तहत अपनी बच्चियों के नाम से खाता खुलवाएँ।

सुकन्या समृद्धि खाते की ब्याज दरें (Interest rate on SSY)

सुकन्या समृद्धि खाते के तहत जमा पैसों पर मिलने वाली ब्याज की दरें हर वित्तीय वर्ष में परिवर्तित होती रहती हैं। वर्तमान में इस पर 7.6% ब्याज दिया जा रहा है। 2014 जब से यह योजना शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक की ब्याज दरों की टेबल कुछ इस प्रकार से है।

वर्षलागू ब्याज दरें
1 अप्रैल 2020 से अब तक7.6%
1 जुलाई 2019 से 31 मार्च 2020 तक8.4%
1 अक्टूबर 2018 से 30 जून 2019 तक8.5%
1 जनवरी 2018 से 30 सितम्बर 2018 तक8.10%
1 जुलाई 2017 से 31 दिसम्बर 2017 तक8.30%
1 अप्रैल 2017 से 30 जून 2017 तक8.40%
1 अक्टूबर 2016 से 31 मार्च 2017 तक8.50%
1 अप्रैल 2016 से 30 सितम्बर 2016 तक8.60%
1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक9.20%
1 अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 तक9.10%

सुकन्या समृद्धि योजना की विशेषताएं (Features of Sukanya Samriddhi Yojana) :

  • लाभार्थी अर्थात खाताधारक को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 9.2% की दर से ब्याज दिया जायेगा ।
  • सुकन्या समृद्धि योजना के तहत लाभार्थी कम से कम 1000, और अधिक से अधिक 150000 रूपये प्रति वर्ष जमा कर सकता है।
  • लड़की के माता पिता या कानूनी अभिभावक कन्या के नाम से खाता खुलवाने के लिए अधिकृत हैं।
  • एक अभिभावक एक कन्या के नाम से केवल एक ही खाता खुलवा सकता है। और एक अभिभावक अधिक से अधिक अपनी दो लड़कियों के अलग अलग नाम से खाता खुलवा सकता है। अर्थात जिस व्यक्ति की तीन कन्याये हैं, वह अपनी दो ही कन्याओ के नाम से खाता खुलवा सकता है।
  • खाता केवल 10 वर्ष तक उम्र वाली कन्याओ के नाम से खोला जायेगा। यानिकि 0 साल से 10 सालो के बीच आप कभी भी अपनी कन्या के नाम से सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता खुलवा सकते हैं।
  • यदि एक साल में कम से कम 1 हज़ार रूपये सुकन्या समृद्धि योजना के खाते में जमा नहीं किये गए तो अगली बार 50 रूपये दंड के रूप में भी भरना होगा।
  • यदि कन्या 18 साल उम्र की हो जाती है | तो 50% पैसे की निकासी आंशिक निकासी के तौर पर संभावित है।
  • कन्या को 21 साल हो जाने पर खाता बंद कर दिया जायेगा।
  • सुकन्या समृद्धि योजना में यदि किसी कारणवश कन्या को 21 साल होने के बाद अर्थात योजना की परिपक्वता के बाद खाता बंद नहीं होता, तो जो पैसा खाते में पड़ा होगा उसमे योजना के अंतर्गत दी गई ब्याज दर के आधार पर ब्याज दिया जायेगा।
  • समय से पूर्व अर्थात योजना के परिपूर्ण होने से पहले पैसे निकालने के लिए कन्या की उम्र 18 साल, और शादी एक कारण हो सकती है।

किन किन बैंकों में खाता खोला जा सकता है?

  • बैंक ऑफ़ बड़ोदा।
  • स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया।
  • बैंक ऑफ़ इंडिया।
  • पंजाब नेशनल बैंक।
  • सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया ।
  • आई डी बी आई बैंक।
  • इंडिया बैंक।
  • देना बैंक।
  • कारपोरेशन बैंक।
  • यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया।
  • अलाहाबाद बैंक।
  • आंध्रा बैंक।
  • यूको बैंक।
  • केनरा बैंक।
  • पोस्ट ऑफिस।
  • आइसीआइसीआइ बैंक। आप आइसीआइसीआइ बैंक के लिए सुकन्या समृधि योजना फॉर्म का प्रिंट आउट यहाँ से ले सकते हैं |

खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाने के लिए वैसे तो कोई ढेर सारे या तरह तरह के दस्तावेजों की जरुरत नहीं है। लेकिन फिर भी भारत सरकार ने योजना का लाभ सही कन्या तक पहुँचाने हेतु, कुछ आवश्यक कागज़ातों का प्रावधान रखा है । जो निम्न हैं ।

कन्या के जन्म प्रमाण पत्र की कॉपी । 

आपकी कन्या का जन्म प्रमाण पत्र यदि आपकी कन्या का जन्म अस्पताल में हुआ है। तो अस्पताल द्वारा दिया गया होगा। लेकिन ग्रामीण इलाको में यह जन्म प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत अधिकारी या फिर तहसील से भी बनवाया जाता है।

कन्या के अभिभावक का पता परिचय का साक्ष्य ।

जहाँ तक अड्रेस प्रूफ की बात है यह कुछ भी हो सकता है जैसे वोटर आई डी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस,बिजली बिल, टेलीफोन बिल, राशन कार्ड इत्यादि।

कन्या के अभिभावक का पहचान प्रमाण पत्र । 

पहचान पत्र से हमारा आशय पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर कार्ड इत्यादि से है ।

सुकन्या समृद्धि खाते के फायदे (Advantages of SSY in Hindi):

  1. इस योजना के तहत खुलवाये गए खाते को आप भारतवर्ष में कही भी ट्रांसफर करवा सकते है। अर्थात यदि आज आप और आप के बच्चे किसी और शहर में हैं। और भविष्य में किसी कारणवश आपको कोई और शहर चुनना पड़ता है। तो आप इस खाते को ट्रांसफर करवा सकते है।
  2. इस योजना के तहत दिए जाने वाले ब्याज की दर 9.2% है। जो किसी अन्य योजना के लिए अभी तक नहीं है।
  3. इस योजना के अंतर्गत जमा हुए पैसोमें आयकर अधिनियम 1961 80 (ग) के तहत आयकर में छूट का प्रावधान है। अर्थात भारत सरकार ने इस योजना से जुड़ने वाले खाताधारको/लाभार्थियों को आयकर में रियायत का प्रावधान रखा हुआ है।
  4. योजना के परिपूर्ण होने पर सारा का सारा पैसा कन्या को दिया जायेगा।
  5. सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खुलने वाले खातों में पैसा जमा करने की कोई निश्चित मात्रा तय नहीं की गई है। इसमें व्यक्ति 100 रूपये हर महीने भरकर भी शुरुआत कर सकता है।
  6. यदि कोई कन्या चाहती है की वह अपने खाते में खुद ही पैसे भरेगी, तो वह ऐसा कर सकती है, जिससे उसमे आत्मनिर्भरता वाली प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिले।
  7. यदि किसी लाभार्थी का खाता 21 साल में अर्थात योजना के परिपूर्ण होने के बाद भी खाता बंद नहीं होता। तो उसको उसके खाते में जमा पैसो पर वही ब्याज मिलेगा जो पहले मिल रहा था ।
  8. शादी या पढाई हेतु योजना के परिपूर्ण होने से पहले ही खाते में जमा राशि की 50% राशि 18 साल पूरा होने के बाद निकाली जा सकती है।
  9. सुकन्या समृद्धि योजना में यदि किसी लाभार्थी की योजना परिपूर्ण होने से पहले मृत्यु हो जाती है। तो उसके अभिभावक खाते को बंद करके पैसे निकाल सकते हैं। लेकिन इसके लिए प्रमाण पत्र आवश्यक है ।

वर्तमान समय में कन्याओं की स्थिति  :

भारतवर्ष की अधिकतर आबादी ग्रामीण इलाको में निवास करती है। और शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाको में कन्याओ की स्तिथि दयनीय है। भारतवर्ष में अभी भी लड़की और लड़के में भेद किया जाता है। इस भेद का लड़कियां बचपन से नहीं बल्कि जन्म होने से पहले से लेके बुढ़ापे तक शिकार होती हैं। डॉक्टर के मुहं से लड़की शब्द सुनते ही घरवाले उस नवजात को कोख में ही मौत के घाट उतारने की योजना बना रहे होते हैं।

इसी के चलते तो अपने देश में प्रति 1000 पुरुषो के मुकाबले महिलाओ की संख्या सिर्फ 944 है। इस अनुपात में भी पहले के मुकाबले थोडा सुधार हुआ है, 2012 से पहले स्तिथि और खतरनाक थी। और जैसा की मैं उपर्युक्त वाक्य में बता चूका हूँ। यह भेद आपको शहरो के मुकाबले ग्रामीण इलाको में ज्यादा देखने को मिलेगा। माँ बाप लड़के की हर जिद को पूरी करने की कोशिश करते हैं।

लेकिन जब कभी वह कन्या जिद पकडती है, तो उसको डांट- डपट के चुप करा दिया जाता है। लड़के को सिर्फ पढाई करने के लिए छोड़ दिया जाता है। लड़की को पढाई के अलावा घर के और दस काम बताये जाते हैं। कुछ लडकियों को स्कूल भेजा ही नहीं जाता, जिनको भेजा जाता है उनको इंटरमीडिएट के बाद अपनी पढाई समाप्त करनी पड़ जाती है।

क्योकि सभी का नहीं, लेकिन अधिकतर ग्रामीण समाज का मानना है, की लडकियों को ज्यादा पढ़ा लिखा के क्या फायदा जाना तो उनको पराया घर ही है। बहुत सारे उदहारण हैं दोस्तों मेरे से अधिक आप जानते होंगे, इन सब समस्याओ को कुछ हद तक कम करने और कन्याओ के कल्याण हेतु भारत सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की है।

चूंकि यह योजना एक सरकारी योजना है। इसलिए आपके लिए सुकन्या समृद्धि योजना का  विवरण नेशनल सेविंग इंस्टिट्यूट की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

सुकन्या समृद्धि खाते से जुड़े सवाल जवाब

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता कौन खुलवा सकता है?

माता पिता या कानूनी अभिभावक।

मेरी तीन लडकिया हैं, क्या में तीनो का खाता इस योजना के अंतर्गत खुलवा सकता हूँ?

नहीं, आप अपनी दो लड़कियों का अलग अलग खाता इस योजना के अंतर्गत खुलवा सकते हैं।

मैं खाते में पैसे कैसे जमा कर सकता हूँ?

आप Cash, चेक या फिर डिमांड ड्राफ्ट के द्वारा खाते में पैसे जमा कर सकते हैं।

यदि कन्या की शादी 18 वर्ष में हो जाती है तो क्या कन्या अपने खाते को चालू स्तिथि में अर्थात अपने ससुराल से अपने खाते में पैसे जमा कर सकती है?

नहीं, वह शादी के बाद अपने खाते में पैसे जमा नहीं कर पायेगी। क्योकि इस योजना में भारत सरकार इसकी अनुमति नहीं देती। लेकिन वह चाहे तो अपनी उम्र का प्रमाणपत्र जो यह सिद्ध करेगा की कन्या को 18 साल पूरे हो चुके हैं। देकर अपना पैसा निकलवा सकती हैं । इसके अलावा यदि खाते के परिपक्व होने तक पैसा नहीं निकाला जाता है तो उस पर ब्याज की दर वही रहेगी जो पहले था।

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोलने पर बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा खाताधारक को क्या क्या दस्तावेज जारी किये जायेंगे?

इस योजना के अंतर्गत खाता खोलने पर खाताधारक को, एक पासबुक जिसमे कन्या की जन्मतिथि, नाम और जमा की गई रकम का ब्यौरा होगा। पासबुक को खाते में रकम जमा करते वक़्त, ब्याज का हिसाब किताब करते वक़्त, या फिर खाते की परिपक्वता के बाद खाता बंद करते वक़्त बैंक या पोस्ट ऑफिस में प्रस्तुत करना जरुरी है।

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