Welding Electrodes Manufacturing Business Information in Hindi.

Welding Electrodes से भले आप सब अवगत हो न हों लेकिन वेल्डिंग नामक काम से तो शायद आप सभी अवगत होंगे, क्योंकि वेल्डिंग एक फेब्रिकेशन की प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न धातुओं को जोड़कर भिन्न भिन्न वस्तुओं का निर्माण किया जाता है । कहने का अभिप्राय यह है की Welding Electrodes का इस्तेमाल वेल्डिंग प्रक्रिया करते समय किया जाता है वेल्डिंग प्रक्रिया में आम तौर पर धातु में संलयन पैदा की जाती है ताकि धातु को पिघलाया जा सके। इस पिघलने की प्रक्रिया के दौरान पिघले हुए पदार्थ के साथ एक भराव सामग्री को जोड़ दिया जाता है और जब यह ठंडा हो जाता है तो यह बहुत अधिक मजबूत हो जाता है । वर्तमान में अधिकतर तौर पर अर्क वेल्डिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है और Welding Electrodes का उपयोग इसी प्रक्रिया में किया जाता है । इसलिए इनकी मांग बाजार में वर्ष के बारह महीने बनी रहती है इसलिए बिज़नेस से कमाई करने का इच्छुक व्यक्ति इस तरह का बिज़नेस शुरू करके अपनी कमाई कर सकता है। इस सामग्री का उपयोग वेल्डिंग प्रक्रिया में बहुतायत तौर पर होता है एक छोटी से वेल्डिंग करने पर भी अनेकों वेल्डिंग इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल संभव है जबकि यदि वेल्डिंग अधिक करनी पड़े तो इनका इस्तेमाल बहुतायत मात्रा में हो सकता है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से इस प्रकार की इलेक्ट्रोड बनाने के व्यवसाय की जानकारी देने का भरसक प्रयत्न करेंगे लेकिन उससे पहले यह जान लेते हैं की ये इलेक्ट्रोड होती क्या हैं ।

Welding-electrodes manufacturing

Welding Electrodes क्या है

जब वेल्डिंग प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है तो Welding Electrodes का इस्तेमाल वेल्डिंग मशीन के सिरे पर किया जाता है अर्थात इसको धातु जिसे जोड़ा जाता है के संपर्क में लाया जाता है। और वेल्डिंग इलेक्ट्रोड वेल्डिंग प्रक्रिया में अलग अलग भूमिकाएं निभा सकते हैं । ये वेल्डिंग के बिन्दुओं पर करंट को केन्द्रित करते हैं, वेल्डिंग के दौरान थर्मल संतुलन को बनाये रखते हैं और ये समान घनत्व बनाये रखते हैं । आम तौर पर हम वेल्डिंग प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल में लायी जाने वाली इलेक्ट्रोड को ही Welding Electrode कह सकते हैं। और जैसा की हम सबको विदित है की वेल्डिंग का प्रयोग धातु के अलग अलग टुकड़ों को मजबूती से जोड़ने एवं किसी वस्तु का निर्माण करने के लिए किया जाता है इसलिए जब किसी उद्यमी द्वारा इन्हीं सब आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इनका निर्माण किया जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह काम Welding Electrodes Manufacturing Business कहलाता है।

उत्पाद एवं इसके प्रयोग:    

यदि अर्क वेल्डिंग में इलेक्ट्रोड की पिघलाने की क्षमता कम है तो Welding Electrodes इसे पिघलाने में सहायता प्रदान करते हैं और वेल्डिंग के दौरान जो दो टुकड़ों के बीच गैप हो जाता है उसकी भी भरपाई करने का काम करते हैं । इस तरह के इलेक्ट्रोड को Consumables Electrode भी कहा जाता है। अर्क वेल्डिंग में गहराई या मजबूती के साथ वेल्डिंग करने के लिए इलेक्ट्रोड को पॉवर सप्लाई के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्ट किया जाता है जबकि कार्य के हिस्से को पॉवर सप्लाई के नेगेटिव टर्मिनल पर कनेक्ट किया जाता है। सामन्यतया Welding Electrode हलके स्टील एवं वांछित धातु संरचना के साथ  बना होता है। और यह धातु की मोटाई एवं गुणों के अनुरूप विभिन्न गेजों में उपलब्ध रहता है । इन इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल स्टील एवं मिश्रित स्टील धातु को जोड़ने के लिए भी किया जाता है और मशीनों एवं उपकरणों की मरम्मत के लिए भी इन्हें इस्तेमाल में लाया जाता है। विभिन्न लोहे के हिस्सों जिनमें स्टील का हिस्सा भी मिला होता है को अर्क वेल्डिंग प्रक्रिया के माध्यम से उनमें धातु का इस्तेमाल करके उनका पुनर्निर्माण भी किया जाता है। विशेष अनुप्रयोगों के लिए, Welding Electrodes का उपयोग हार्ड वेयर रेसिस्टेंस मेटल सरफेस प्रदान करने के लिए भी किया जाता है।

औद्यौगिक परिदृश्य एवं चलन:

भारत में वेल्डिंग उद्योग की बात करें तो इसमें अनेकों छोटी, बड़ी एवं मध्यम कंपनियां सम्मिलित हैं। जो वेल्डिंग में इस्तेमाल लायी जाने वाली सामग्रियों का उत्पादन करती हैं । इस व्यापार में अनेकों अंतराष्ट्रीय कंपनीयाँ अपने उत्पाद को अंतिम ग्राहक तक पहुँचाने के लिए बहुत सारी मध्यम एवं छोटी कम्पनियों से प्रतिस्पर्धा करती हैं। Welding Electrodes नामक इस उत्पाद की बात करें तो इसका वेल्डिंग उपभोग्य सामग्री में 55% से अधिक की हिस्सेदारी है। ये छड़ी रूपी इलेक्ट्रोड मुख्य रूप से मैन्युअल वेल्डिंग में इस्तेमाल में लाये जाते हैं और इन्हें इस्तेमाल में लाना बेहद आसान होता है। इसके अलावा इनका इस्तेमाल किसी भी फेब्रिकेशन कार्य के लिए किया जा सकता है। यही कारण है की भारत में Welding Electrodes चाहे उनका निर्माण स्टिक के रूप में हो रहा हो या फ्लक्स कारेड वायर के रूप में लेकिन यदि उनका निर्माण उचित विनिर्देशों का पालन करते हुए हो रहा है तो असंगठित क्षेत्र में भी इस तरह के व्यापार को बढाया जा सकता है। अभी भी हम भारत के वेल्डिंग उद्योग में टेक्नोलॉजी के कम इस्तेमाल को देखते हैं और इसमें तकनिकी रूप से नई चीजें देखना लगभग दुर्लभ है। लेकिन वर्तमान में आटोमेटिक एवं सेमी आटोमेटिक वेल्डिंग प्रोडक्शन सिस्टम की माँग में वृद्धि देखी गई है।  

बिक्री की संभावना:   

वेल्डिंग प्रक्रिया में Welding Electrodes एक उपभोग सामग्री है अर्थात इस प्रक्रिया के दौरान इसका दहन हो जाता है । और जहाँ तक वेल्डिंग का सवाल है लगभग हर प्रकार की विनिर्माण गतिविधि में इसका इस्तेमाल किया जाता है। Welding Electrodes धातु से निर्मित वस्तुओं एवं सामग्रीयों की मरम्मत के लिए भी आदर्श माने जाते हैं क्योंकि वेल्डिंग संभवत: टूटे हुए या खराब हुए धातु के भागों को ठीक करने या उबारने की एक विधि मात्र है। वेल्डिंग इलेक्ट्रोड की माँग देश में इस्पात एवं इस्पात से निर्मित सामग्रियों की मांग पर निर्भर करती है अर्थात इनकी खपत बढ़ने पर Welding Electrodes की माँग भी बढ़ने के आसार लगाये जा सकते हैं। निकट भविष्य में परिवहन, भवन और निर्माण, तेल और गैस जैसे उद्योगों और बिजली की खपत होने की संभावना है। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र का बहुत ज्यादा विस्तार होने के कारण, पानी के जहाजों का निर्माण, पवन उर्जा क्षेत्रों में होने वाले निर्माण के कारण भी वेल्डिंग उद्योग को मजबूती मिलने के आसार लगाये जा सकते हैं। Welding Electrodes  नामक उत्पाद को उपयोग में लाने वाले उद्योगों में वृद्धि होने के कारण एवं प्रोद्योगिकी में प्रगति होने के कारण भी भारत में वेल्डिंग उपभोग्य सामग्री की माँग में व्यापक वृद्धि होने की संभावना है। भारतीय वेल्डिंग उपभोग सामग्री बाजार की 2020 तक 45.37 बिलियन तक पहुँचने की संभावना है जबकि यह 2013 में केवल 30.88 बिलियन था।

आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन:

Welding Electrodes manufacturing के लिए आवश्यक लाइसेंस एवं पंजीकरणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • स्थानीय प्राधिकरण नगर निगम नगर पालिका इत्यादि से लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है।
  • जिला उद्योग केंद्र से स्टेट यूनिट रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है।
  • फैक्ट्री एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है ।
  • यदि उद्यमी अपने उत्पाद को निर्यात करना चाहता हो तो उसे इम्पोर्ट एक्सपोर्ट कोड की आवश्यकता हो सकती है ।
  • हालांकि यह कंपनी के आर्थिक ढाँचे पर निर्भर करेगा लेकिन उद्यमी को स्वयं का बिज़नेस रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के साथ रजिस्टर करने की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • फायर डिपार्टमेंट से क्लेअरेंस की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होती है।       

आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल:

Welding Electrodes Manufacturing Business शुरू करने के लिए कच्चे माल के तौर पर माइल्ड स्टील, निम्न और मध्यम कार्बन स्टील, मिश्रित स्टील की छड़ें इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है। फ्लक्स मटेरियल में रूटाइल सैंड्स और एडीटिव सामग्री जैसे मेटल ऑक्साइड, निकेल का मेटल पाउडर, मैंगनीज, आयरन इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है। इन सबके अलावा सेल्यूलोस, लाइम स्टोन, मैग्नीशियम की भी आवश्यकता हो सकती है। जहाँ तक मशीनरी एवं उपकरणों का सवाल है उनकी लिस्ट निम्नवत है।

  • मल्टी स्टेज बुल ब्लाक वायर ड्राइंग मशीन
  • आटोमेटिक वायर सीधे करने वाली एवं कटींग मशीन
  • फ्लक्स मिक्सिंग एंड ब्लेंडिंग
  • कन्वेयर के साथ फ्लक्स कोटिंग extruder
  • आटोमेटिक फ्लक्स स्लग प्रेस
  • ग्रिप इंड सैंडर मशीन
  • बेकिंग ओवन
  • एयर हैंडलिंग एंड डस्ट कलेक्शन सिस्टम
  • ओवन के लिए ट्रांसपोर्ट ट्राली
  • पैकिंग स्टेशन
  • टेस्टिंग लैब
  • Metallurgical Microscope
  • मशीनों की रिपेयरिंग के लिए वर्कशॉप
  • पैकिंग मशीन
  • टूल्स एवं अन्य सहायक उपकरण             

निर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Process of Welding Electrodes):

विभिन्न प्रकार के Welding Electrodes का उत्पादन विभिन्न गेज के तारों के रॉड जैसे 6 या 8 MM की ड्राइंग करके की जाती है। इलेक्ट्रोड की ड्राइंग करने के बाद गुणवत्तायुक्त तार को आवश्यक साइज़ में लेकर सबसे पहले उसे सीधे करने वाली मशीन से सीधे किया जाता है और फिर उसी मशीन से उसे आवश्यक साइज़ में काट लिया जाता है। सूत्रीकरण के अनुसार ड्राई ब्लेंडर एवं वेट मिक्सर में फ्लक्स तैयार किया जाता है। शील्डेड अर्क इलेक्ट्रोड के लिए विभिन्न प्रकार के कोटिंग फ्लक्स लगाये जाते हैं जिनके परिणाम वेल्डिंग प्रक्रिया के दौरान अलग अलग होते हैं। जैसे विज़ सेलूलोज़ की कोटिंग वेल्ड ज़ोन की सुरक्षा के लिए गैस की एक परत को उत्पन्न करती है तो वहीँ खनिज पदार्थों के कोटिंग्स, स्लैग की एक परत छोड़ते हैं ।  उसके बाद फ्लक्स सामग्री के स्लग को आटोमेटिक स्लग प्रेस मशीन की मदद से बेलनाकार रूप में बनाया जाता है। Welding Electrodes manufacturing process में उसके बाद स्लग को एक्सट्रूजन प्रेस में रखना होता है और सीधे कटे तारों को वहां पर खिलाया जाता है जहाँ एक्सट्रूजन प्रेस स्लग के माध्यम से तार को धकेल देता है और तार पर एक समान कोटिंग के लिए उस पर दबाव डालता है। फ्लक्स कोटेड कोर वायर रॉड को कन्वेयर सिस्टम की तरफ पास कराया जाता है और अंत में कलेक्ट किया जाता है । उसके बाद इन रॉड को सूखाने के लिए ड्राईग ओवन में भेज दिया जाता है इन्हें सूखाने के बाद पैकिंग एवं डिस्पैच करने से पहले टेस्टिंग लैब में टेस्ट किया जाता है ।  

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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