अपना बिज़नेस अर्थात व्यापार शुरू करने के पीछे सब उद्यमियों की अलग अलग महत्वकांक्षाएं होती हैं | कोई व्यापार इसलिए स्टार्ट करना चाहता है क्योंकि उसे दूसरे की नौकरी करना पसंद नहीं आता, किसी को लगता है की नौकरी करके दो जून की रोटी का प्रबंध तो किया जा सकता है लेकिन सपनों को कभी पूरा नहीं किया जा सकता, अर्थात दूसरे श्रेणी के मानने वाले लोग वे लोग होते हैं जो अधिक कमाई की मंशा से बिज़नेस में प्रविष्ट करने की सोचते हैं | कहने का आशय यह है की अपना बिज़नेस शुरू करने के ख्यालात की बात करें तो यह ख्याल लगभग हर व्यक्ति को अपने जीवन में कभी न कभी एक बार अवश्य आता है | लेकिन अनेकों पारिवारिक, सामाजिक, जिम्मेदारियों के चलते मनुष्य हमेशा वित्तीय दबाव में बना रहता है जिससे अधिकतर लोग अपने अंतर्मन में उठ रहे विभिन्न बिज़नेस आइडियाज को धरातल के पटल पर उतार पाने में असफल रहते हैं, और इसी डर में उनका पूरा जीवन व्यतीत हो जाता है | लेकिन एक सच्चाई और भी है की जिस व्यक्ति को अपने आप पर एवं अपने द्वारा चयनित बिज़नेस आइडियाज पर जितना अधिक विश्वास होगा, उसका डर भी उतना कम होता जायेगा | हालांकि आपने अनेक व्यक्तियों के बारे में पढ़ा होगा की कैसे उन्होंने जीरो से शुरू होकर अपना साम्राज्य स्थापित कर दिया, लेकिन सच्च्चाई यह भी है की उन्हें सफलता मिली तो वे दुनिया के सामने उजागर हो गए वरना यहाँ बिज़नेस में असफल होने वाले व्यक्तियों की तादात भी कम नहीं है | बिज़नेस में असफल होने के कारणों के बारे में अवश्य पढ़ें | इन सबके बावजूद चूँकि अपना बिज़नेस शुरू करके सफल हो चुके बिजनेसमैन की जीवनी इत्यादि से हमें प्रेरणा मिलती है और हमारे अन्दर एक ऐसी ताकत का प्रादुर्भाव होता है जो कहता है की हाँ तू भी यह कर सकता है, इसलिए समय मिलने पर किसी सफलतम बिजनेसमैन की जीवनी भी जरुर पढ़ लेनी चाहिए |

अपना बिज़नेस kaise-shuru-kare

अपना बिज़नेस में कैसा रहेगा सफ़र:

अपना बिज़नेस किसी भी व्यक्ति द्वारा स्टार्ट किया जाय लेकिन सच्चाई यह है की व्यापार के नाम जितना आसान यह सफ़र बिलकुल नहीं होगा, अपितु इस सफ़र में उद्यमी को अनेक जटिलताओं, समस्याओं, मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है और यदि समय पर अपने बिज़नेस में आई समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो वह उद्यमी के बिज़नेस के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा | इसलिए सब कुछ ठीक ठाक बढ़िया चले इसके लिए उद्यमी को अपना बिज़नेस शुरू करने से पहले ही योजना (Planning) बनानी पड़ती है इसमें वित्त से लेकर उन सभी बातों का उल्लेख करना होता है जो उद्यमी के बिज़नेस के लिए जरुरी हैं | एक प्रभावी बिज़नेस प्लान बनाने के बावजूद भी उद्यमी को अपने इस सफ़र में कड़ी मेहनत, लगन एवं आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है | इस सफ़र में अनेक मौके ऐसे आते हैं जो उद्यमी को विचलित एवं चिंतित कर जाते हैं इन्हीं विचलित एवं चिंतित कर देने वाली परिस्थितियों के सामने जो उद्यमी घुटने टेक देता है उसे असफलता एवं जो उद्यमी इनसे जूझकर इनसे निबटने का हल तलाशकर आगे बढ़ता है वह एक न एक दिन सफल अवश्य होता है और तब वह अपने बिज़नेस में एक ऐसा मुकाम भी पा लेता है, जहाँ उसे खुद अंदाज़ा लगाने में असावधानी होती है की उसके बीते हुए कल और आज में इतना परिवर्तन कैसे हो गया है |

अपना बिज़नेस कैसे शुरू करें (How to start Own Business in Hindi):

आज हम अपने इस लेख के माध्यम से अपना बिज़नेस शुरू करने में उपयोग में लायी जाने वाली कुछ मुख्य गतिविधियों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे ताकि उद्यमी द्वारा शुरू किये जाने वाले बिज़नेस की असफलता के विकल्पों को बेहद कम किया जा सके |

  1. अपने बिज़नेस के लक्ष्य निर्धारित करें?(Determine vision for your business)  

उद्यमिता की ओर अग्रसित व्यक्ति को अपना बिज़नेस शुरू करने से पहले अपने आप से यह प्रश्न जरुर करना चाहिए की आखिर वह बिज़नेस क्यों शुरू करना चाहता है? कहने का आशय यह है की उद्यमी का बिज़नेस लक्ष्य विहीन नहीं होना चाहिए अर्थात उद्यमी के पास बिज़नेस करने का कोई न कोई लक्ष्य होना बेहद जरुरी है | आमतौर पर कुछ लोग अपनी कमाई करने के लिए, कुछ लोग अपने सर्वाइवल के लिए, कुछ लोग मानवता की मदद के लिए, कुछ लोग समाज में दौलत के माध्यम से पद, प्रतिष्ठा इत्यादि पाने के लिए अपना बिज़नेस शुरू करने की सोचते हैं | इसलिए उद्यमी का यह तय करना बेहद जरुरी हो जाता है की आखिर उसके बिज़नेस का लक्ष्य है क्या?

  1. बिज़नेस के लिए उत्पाद या सर्विस का चयन (Select Product/Service for your business):

अब चूँकि पहले स्टेप में व्यक्ति ने उद्यमिता की ओर अपना पहला कदम बढाकर यह तय कर लिया होगा की उसके बिज़नेस का लक्ष्य क्या रहेगा, इसी बात के मद्देनज़र अपना बिज़नेस शुरू करने वाले व्यक्ति का उद्यमिता की ओर दूसरा कदम अपने बिज़नेस अर्थात व्यापार के लिए उत्पाद या सर्विस का चयन करना होता है | कहने का आशय यह है की यदि उद्यमी निर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) में बिज़नेस करना चाहता है, तो उसे बिज़नेस के लिए उत्पाद (Product) का चयन करना होगा और सर्विस सेक्टर में बिज़नेस करने के इच्छुक उद्यमी को अपने बिज़नेस के लिए सर्विस का चयन करना होगा | वर्तमान में लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा बहुत सारी योजनायें भी चलाई जा रही हैं लेकिन कुछ लोग लघु उद्योगों की परिभाषा महत्व एवं फायदों से अंजान रहते हैं इसलिए वे लाभ से भी वंचित रह जाते हैं | इसके अलावा सरकार ने कुछ उत्पादों को लघु उद्योग के अंतर्गत आरक्षित रखा हुआ है, उद्यमी चाहे तो अपना बिज़नेस शुरू करने से पहले इनमे से भी उत्पादों का चयन कर सकता है |

  1. व्यापार की लोकेशन का चयन करें (Select Business Location for your business):

अब चूँकि व्यक्ति द्वारा उद्यमिता की ओर दो कदम बढ़ा लिए गए हैं इसलिए अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए तीसरा कदम अपने व्यापार हेतु लोकेशन का चयन करना है | इसमें व्यक्ति को विभिन्न बातों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे क्या उस लोकेशन पर परिवहन सुविधाएँ, बिजली, पानी, सड़कें इत्यादि की व्यवस्था है? यदि बिज़नेस श्रम प्रधान है तो क्या व्यक्ति को उस लोकेशन पर आसानी से लेबर मिल जायेगी इत्यादि, इसके अलावा हमने एक अलग से लेख में बिज़नेस लोकेशन का चयन करने के बारे में बताया हुआ है व्यक्ति को चाहिए की वह इसे अवश्य पढ़े ताकि वह अपना बिज़नेस शुरू करने से पहले अपने व्यापार के लिए एक अच्छी लोकेशन का चुनाव कर पाने में सक्षम हो |

  1. मार्केट रिसर्च भी है जरुरी (Market research is Necessary):

मार्केट रिसर्च से हमारा अभिप्राय बाज़ार में व्याप्त आवश्यकताएं एवं उनकी पूर्ति के विश्लेषण से है | यदि आपके अंतर्मन में कोई नया उत्पाद या सर्विस आईडिया आया है यानिकी यदि आपके दिमाग में कोई ऐसा बिज़नेस आईडिया आया है, जो बिलकुल नया है तो यह जरुरी नहीं है की वह आईडिया बिलकुल नया है तो वह चलेगा ही चलेगा | बल्कि सच्चाई यह है की यदि लोगों को उस नए उत्पाद या सर्विस की आवश्यकता न हो तो नया आईडिया भी फेल हो सकता है | इसलिए अपना बिज़नेस शुरू करने की ओर अग्रसित व्यक्ति को मार्केट रिसर्च की आवश्यकता होती है की जो वह प्रोडक्ट या सर्विस लोगों को देने की सोच रहा है, लोगों को उसकी आवश्यकता भी है की नहीं? क्योंकि जब आवश्यकता होगी तभी लोग उद्यमी के उत्पाद या सर्विस को खरीदेंगे | इसके अलावा उद्यमी यदि किसी पुराने उत्पाद या सेवा को ही बेचना चाह रहा हो तो उसे यह रिसर्च करनी होती है की उसके लक्ष्यित क्षेत्र में उस वस्तु या सेवा के बिज़नेस में कितनी प्रतिस्पर्धा है, और उन वस्तु एवं सेवाओं में क्या क्या कमी है ताकि उद्यमी अपना बिज़नेस शुरू करते वक्त इन कमियों को दूर कर सके |

  1. व्यवसायिक संस्था का चुनाव (Selection of Business entity ):

हमारे देश भारतवर्ष में व्यवसायिक संस्थानों के अनेक प्रकार हैं और अपना बिज़नेस शुरू करने की सोच रहे व्यक्ति ने भी बहुत बार सुना होगा की  सूरज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम करता है, तो वहीँ रोहित लिमिटेड कंपनी में कार्यरत है, और सुरेश के मालिक की अकेले स्वामित वाली कंपनी (Proprietorship) है | इसलिए अपना बिज़नेस शुरू करने की ओर अग्रसित व्यक्ति को अपने बिज़नेस के लिए व्यवसायिक संस्था का चुनाव करना होगा | भारतवर्ष में उपलब्ध मुख्य व्यवसायिक संस्थानों के बारे में जानने के लिए पढ़ें | इस लेख में दिए गए विभिन्न Business Entities में से उद्यमी किसी एक का चयन करके अपने बिज़नेस को रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनी के साथ रजिस्टर करा सकता है | कंपनी पंजीकरण की स्टेप बाई स्टेप प्रक्रिया जानने के लिए यह पढ़ें |

  1. अपने व्यापार की योजना बनायें (Make Business Plan for your Business):

हालांकि अपना बिज़नेस शुरू करने वाला व्यक्ति चाहे तो अपने व्यापार की योजना सबसे पहले भी बना सकता है, क्योंकि एक प्रभावी बिज़नेस प्लान में बिज़नेस से जुड़ी हर एक बात का उल्लेख होना बेहद जरुरी है | बिज़नेस प्लान के अंतर्गत ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बनाई जाती है जो उद्यमी को अनुमानित खर्चे एवं कमाई का आईडिया तो देती ही है साथ बैंकों द्वारा भी ऋण देने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट या फिर सम्पूर्ण बिज़नेस प्लान माँगा जा सकता है | इसलिए एक प्रभावी बिज़नेस प्लान बनाने के लिए अपना बिज़नेस शुरू कर रहे व्यक्ति को चाहिए की वह किसी बिज़नेस कंसलटेंट की मदद लेकर यह योजना तैयार करे ताकि उसमे त्रुटि के कारण बैंक लोन देने से मना न कर सके |    

  1. खर्चे का आकलन एवं वित्त की व्यवस्था (Assessment of expenses & fund arrangement) :

हालांकि जहाँ तक खर्चे के आकलन की बात है उसका अंदाज़ा व्यक्ति को बिज़नेस प्लान के अंतर्गत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने पर हो जाता है, फिर भी अपना बिज़नेस शुरू कर रहे व्यक्ति को एक बार फिर से सभी खर्चों का आकलन कर लेना जरुरी है ताकि उसी के अनुरूप उद्यमी वित्त की व्यवस्था कर पाने में समर्थ हो | इसमें व्यक्ति को कार्यशील पूँजी एवं स्थिर लागत इत्यादि की पूरी पूरी जानकारी होना आवश्यक है | अर्थात खर्चों का आईडिया तभी आएगा जब व्यक्ति यह अनुमान लगा पाने में सक्षम हो पायेगा की उसको उसके बिज़नेस के लिए किस प्रकार की जगह, भवन, मशीनरी एवं उपकरण, कच्चा माल, फर्नीचर, श्रमिक इत्यादि की आवश्यकता है | और वह अपने बिज़नेस में आने वाली हर प्रकार की लागत के लिए वित्त का प्रबंध किस तरह से करेगा | हालांकि वित्त की व्यवस्था बैंकों से ऋण लेकर, क्राउड फंडिंग के माध्यम से, एंजेल इन्वेस्टर के माध्यम से, वेंचर कैपिटलिस्ट के माध्यम से उद्यमी कर सकता है लेकिन इसके लिए बेहद जरुरी है की सबसे पहले व्यक्ति फंडिंग प्रोसेस को अच्छे ढंग से समझे और यदि व्यक्ति बैंक से लोन लेने की सोच रहा हो तो वह बैंक द्वारा लोन रिजेक्ट किये जाने वाले कारणों के बारे में अवश्य जाने ताकि वह सावधानी बरत सके |

  1. अपना बिज़नेस शुरू करें (Start your own Business):

अब चूँकि व्यक्ति द्वारा अपना बिज़नेस शुरू करने सम्बन्धी लगभग सभी गतिविधियाँ पूर्ण कर ली गई हैं इसलिए अब उद्यमी उसके बिज़नेस के लिए आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं को खरीदकर बिज़नेस शुरू कर सकता है | अपने बिज़नेस को स्टार्ट करने के लिए उद्यमी को सभी आवश्यक संसाधन जैसे मशीनरी उपकरण, कच्चा माल जुटाने एवं कर्मचारियों की नियुक्ति इत्यादि क्रियाकलापों को अंजाम देना  होता है | एक बार बिज़नेस शुरू करने के पश्चात उद्यमी का जो सबसे पहला दायित्व एवं जिम्मेदारी होती है वह यह होती है की सभी कार्य उसके द्वारा बनाये गए बिज़नेस प्लान के अनुरूप ही होने चाहिए ताकि भविष्य में उद्यमी बिज़नेस प्लान में उल्लेखित लक्ष्यों को भी आसानी से हासिल कर सके | यदि उद्यमी निर्माण क्षेत्र में कोई बिज़नेस कर रहा है तो उसे यह अवश्य पता होना चाहिए की वह अपने उद्योग को सफल कैसे बना सकता है | इसके अलावा सर्विस सेक्टर में भी उद्यमी को अपनी मेहनत एवं कौशल का लोहा मनवाना होता है |

  1. व्यवसायिक रणनीति बनायें (Make Business Strategy):

अब चूँकि व्यक्ति अब एक सामान्य व्यक्ति न रह के एक उद्यमी बन चूका है इसलिए उद्यमी बनने के साथ साथ उसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं इसलिए अब उद्यमी अपने बिज़नेस को सफलता की ओर अग्रसित करने के लिए अपनी व्यापार रणनीति (Business Strategy) बना सकता है | इसमें वह तय कर सकता है की कैसे वह अपने उत्पाद या सेवा को औरों से अलग एवं पोपुलर बनाएगा | और कैसे वह अपने व्यापार से कमाई करने के साथ साथ ग्राहकों के विश्वास को जीतने का भी काम करेगा ताकि वह अपने बिज़नेस को शिखर तक पहुँचाने में सफल हो सके |

  1. बिज़नेस की मार्केटिंग :

अपना बिज़नेस शुरू कर चुके व्यक्ति के लिए शुरू शुरू में मार्केट ठीक नहीं रहती है अर्थात यदि उद्यमी निर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) से जुड़ा हो तो कोई भी दुकानदार उसका माल रखने को तैयार ही नहीं होता और यदि सेवा क्षेत्र (Service Sector) से जुड़ा हो तो भी लोग उसके द्वारा दी जाने वाली सर्विस पर कम ही विश्वास करते हैं | ऐसे में उद्यमी को बड़े पैमाने पर मार्केटिंग की आवश्यकता हो सकती है ताकि लोग उसके उत्पाद या सेवा के बारे में जानें और उसे अपने आप को साबित करने का मौका मिले  | इसलिए शुरू में उद्यमी चाहे तो इन मार्केटिंग के तरीकों को अजमाकर अपने व्यापार की मार्केटिंग कर सकता है | जब उद्यमी का ब्रांड धीरे धीरे प्रसिद्ध होने लगे तो उद्यमी को चाहिए की वह अपने ब्रांड के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन करा ले ताकि उसके ब्रांड के व्यापारिक चिन्ह को कोई और व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग में नहीं ला सके और लोगों की उस ब्रांड पर विश्वसनीयता बनी रहे | इसके अलावा अपना बिज़नेस शुरू कर चुके उद्यमी को अपने बिज़नेस की यू. एस. पी. (unique value proposition) विकसित करनी होगी इसके लिए उद्यमी चाहे तो अपने द्वारा उत्पादित उत्पाद या सेवा में कोई अतिरिक्त गुण जोड़ सकता है जो उसके उत्पाद या सेवा को अन्य उत्पाद या सेवाओं से अलग बनाते हों |

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7 Comments

  1. Avatar for Raman jha Raman jha
    September 24, 2019
  2. Avatar for Raj kumar Raj kumar
    March 28, 2019
  3. Avatar for R p vaidh R p vaidh
    March 7, 2018
  4. Avatar for bibliomanija bibliomanija
    March 2, 2018
  5. Avatar for अजय सिंह अजय सिंह
    February 28, 2018
  6. Avatar for Pipan sarkar Pipan sarkar
    February 27, 2018

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