बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज – Ayurvedic Treatment of Goat Diseases.

बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने हेतु उपयोग में लायी जाने वाली आयुर्वेदिक दवाइयों के बारे में जानने से पहले हम अपने आदरणीय पाठक गणों को यह बता देना चाहते हैं की इस लेख से पहले भी हम बकरी पालन व्यवसाय से जुड़े विभिन्न विषयों पर बात कर चुके हैं |और जहाँ तक बकरियों के स्वास्थ्य से जुड़े हुए विषयों का सवाल है इनमे हम बकरी की बीमारियाँ, लक्षणों के आधार पर बकरी के बीमारियों की पहचान इत्यादि लेख लिख चुके हैं, और इन लेखों के कमेंट बॉक्स में अनेक पाठक गणों ने हमसे बकरी के बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज में उपयोग में लायी जाने वाली दवाइयों के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की है | यही कारण है की कृषि एवं फार्मिंग श्रेणी में आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे की बकरियों की कुछ सामान्य बीमारियों में कौन कौन सी आयुर्वेदिक दवाइयां उपयोग में लायी जा सकती हैं | चूँकि पशु धन जैसे बकरियां इत्यादि किसी भी किसान की कमाई का मुख्य स्रोत होते हैं इसलिए इनका बीमारियों से बचाव करना बेहद जरुरी हो जाता है हालांकि बकरियों के बीमार होने पर पशु चिकित्सक के निर्देशानुसार ही दवाइयां देनी चाहिए | लेकिन यहाँ पर बकरी के रोगों के आधार पर कुछ आयुर्वेदिक दवाइयों की लिस्ट के साथ उनकी मात्रा भी दी जा रही है जिससे बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज संभव हो सके |

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  1. हाजमे तथा भूख लगने की आयुर्वेदिक दवाएं:

बकरी को भूख न लगने पर, कब्ज, कमजोरी इत्यादि की शिकायत होने पर उसे HB Strong नामक दवा एक दिन में 2.5 ग्राम दो बार लगातार तीन चार दिन तक दी जा सकती है | इसके अलावा इन्ही सब समस्याओं के लिए Rumbion Bolus नामक आयुर्वेदिक दवा का उपयोग HB Strong Powder के साथ किया जा सकता है | इन दवाओं का उपयोग सामान्य हेल्थ टॉनिक के रूप में भी किया जा सकता है और बकरियों को यह दवा गुड़ के साथ भी दी जा सकती है |

  1. बकरियों की लीवर टॉनिक:

अक्सर बकरियों का लीवर वर्षा ऋतू में खराब हो सकता है, इसलिए इस बकरियों को लीवर सम्बन्धी कोई भी बीमारी होने पर उन्हें Liv-52 Protec (जिसे हिमालय ड्रग द्वारा निर्मित किया गया है) की 15-20 मिली. दिन में दो बार लगातार 8-10 दिनों तक देना होगा | उपर्युक्त दवा के अलावा Livol जो की एक इंडियन हर्ब है की 8-12 ग्राम मात्रा भोजन या गुड़ के साथ मिलाकर दिन में एक से दो बार 8-10 दिनों तक खिलानी चाहिए |

  1. बकरी के अतिसार डायरिया का आयुर्वेदिक ईलाज:

यदि बकरी को डायरिया या अतिसार की समस्या हो तो बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए उसे Diovet (जिसका निर्माण Charak Pharmaceuticals किया गया है) 25 मिली दवा दिन में दो बार दी जा सकती है | इसके अलावा इसी समस्या के लिए Neblon जो की एक इंडियन हर्ब है का उपयोग 6-10 ग्राम दिन में 2-3 बार छह घंटे के अन्तराल में किया जा सकता है यह आयुर्वेदिक दवा चावल के मांड या गुड़ के साथ दी जा सकती है |

  1. अपच या पेट की सूजन में प्रयग में लायी जाने वाली दवा:

यदि बकरी पेट में सूजन या अपच जैसी बीमारी से ग्रस्त हो तो बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए उसे Timpol (जो की एक Indian herbs है) की पेट में गैस जमा होने के कारन होने वाली सूजन से निजात देने के लिए 20-25 ग्राम दवा 250 मिली गुनगुने पानी में दिन में दो बार दी जा सकती है | यदि पह्सू को अधिक तकलीफ है तो हर 4 घंटे के अन्तराल में यह दवा दी जा सकती है |  यदि बकरी का पेट फूल गया हो तो 250-500 मिली पानी या फिर बादाम के तेल के साथ यही दवा दिन में दो बार दी जा सकती है |

  1. बकरी के सर्दी जुकाम के लिए आयुर्वेदिक दवा:

बकरी के सर्दी जुकाम एवं ब्रांकाइटीस जैसी बीमारियों से जूझने पर इन बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए Caflon (जो की एक इंडियन हर्ब है) दिन में दो तीन बार 6-12 ग्राम की मात्रा में गुड़ या गरम पानी के साथ मिलाकर दी जा सकती है |

  1. मूत्र संक्रमण में प्रयोग में लायी जाने वाली आयुर्वेदिक दवाएं:

मूत्र तंत्र में संक्रमण, मूत्र थैली में प्रदाह या फिर मूत्र त्याग करते समय दर्द की शिकायत होने पर बकरी को Bangshil नामक दवा तीन टेबलेट दिन में दो बार लगातार चौदह दिनों तक या फिर जरुरत के मुताबिक दिन में दो बार दो टेबलेट दी जा सकती हैं इस दवा का प्रयोग एंटीबायोटिक दवाओं के साथ भी किया जा सकता है | इसके अलावा इन्हीं बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए बकरी को Cystone  (जिसका निर्माण हिमालय ड्रग द्वारा किया जाता है) की दिन में दो टेबलेट तीन बार देनी चाहिए यदि बकरी को मूत्र पथरी की शिकायत है तो यह दवा छह महीने तक दी जा सकती है |

  1. मादा बकरी को उत्तेजित करने वाली दवा:

यदि बकरी की ओवरी ठीक ढंग से कार्य नहीं करे तो मादा बकरी समय होने पर भी गर्भ धारण के लिए उत्तेजित नहीं होती है तो Projana HS ( जो की एक इंडियन हर्ब है ) या Janova (जो की डाबर आयुर्वेद द्वारा निर्मित है)  की दो कैप्सूल दो दिनों तक देनी होगी ये दवाइयां खिलाने के बाद भी यदि 10 दिनों के अंदर बकरी उत्तेजित नहीं होती है तो ग्यारहवें, बारहवें  दिन उसी मात्रा में फिर से दवा दी जा सकती है | इसके अलावा बकरी के समय पर उत्तेजित न होने का अगला कारण बकरी के शरीर में खनिज पदार्थो की कमी भी हो सकता है ऐसी स्थिति में बकरी को Cofecu (जो एक इंडियन हर्ब है)  की आधी टेबलेट बीस दिनों तक लगातार खिलाई जा सकती है |

  1. बकरी का दूध बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक दवा:

बकरी के प्रसवोपरांत बकरी को अनेक समस्याएं जैसे दूध कम आना, चयापचयी असुविधा, थकान, थन से ठीक तरह से दूध नहीं आना इत्यादि हो सकती हैं इन समस्याओं अर्थात इन बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए Galog (एक इंडियन हर्ब) प्रतिदिन 10-15 ग्राम एक बार गुड़ के साथ मिलाकर बीस दिनों तक दी जा सकती है | इसके अलावा Payapro bolus (डाबर द्वारा निर्मित) एक दिन में एक बार 1-2 bolus दस से पन्द्रह दिनों तक दी जा सकती है |

  1. बकरी के घाव दाद चर्मरोग की आयुर्वेदिक दवा:

बकरी की त्वचा पर समय समय पर घाव, दाद एवं अन्य चर्मरोग होते रहते हैं इन बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए Himax Ointment (जो एक इंडियन हर्ब है) का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे त्वचा या घाव पर लगाने से पहले नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर त्वचा या घाव को साफ़ करना बेहद जरुरी होता है | इसके अलावा Topicure Spray का भी उपयोग इन समस्याओं में किया जा सकता है |

  1. बकरी के जूं का आयुर्वेदिक ईलाज:

बकरी एक पशु है इसलिए अक्सर इनके शरीर में जूं, कीड़े एवं अन्य कीट अपना घर कर लेते हैं इनका आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए Pestoban (इंडियन हर्ब) या Pestex का उपयोग पानी के साथ 1:10 के अनुपात में किया जा सकता है | अर्थात इन दोनों दवा में से किसी का भी प्रयोग करके जितनी दवाई ली जाय उसके दस गुना पानी उसमे मिलाकर बकरी के शरीर पर छिड़क दिया जाता है और ध्यान देने वाली बात यह है की बकरी के शरीर पर यह दवा छिडकने के 48 घंटे बाद तक बकरी को नहलाना नहीं है | यदि एक ही बार में जूं एवं अन्य कीट समाप्त नहीं होते हैं तो तीन चार दिन बाद यह प्रक्रिया फिर से दोहराई जा सकती है |

  1. बकरी के आँखों का आयुर्वेदिक ईलाज:

बकरी की आँखों में कंजकटीवाइटिस, आँखे सफ़ेद हो जाने, चोट लगने पर आँखे लाल हो जाने जैसी समस्या अक्सर होती रहती हैं इन बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज करने के लिए Nanco Eye Lotion  का उपयोग दिन में 2 बार दो बूंदों के रूप में किया जा सकता है अर्थात कहने का आशय यह है की बकरी की आँखों में यह दवा दिन में दो बूंद दो बार डालनी होगी |

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

2 thoughts on “बकरी की बीमारियों का आयुर्वेदिक ईलाज – Ayurvedic Treatment of Goat Diseases.

  1. Meri bakri ka pora sarir me hawa Mar diya hai na to uta parahi hai na to khadi ho pa rahi hai. Pora sarir tait hai koi upchar. Batai

  2. मेरी वकरी चारा नही खारही है और मुह से पानी निकाल रही है

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