आपने ध्यान दिया होगा की बहुत सारे लोग अपने काम के बारे में परिचय देते समय Family Business का जिक्र करते हैं। वैसे तो भारत में अधिकतर लोगों को इसका मतलब समझने में कोई कठिनाई नहीं होती है। क्योंकि वे इसका अर्थ सीधे पारिवारिक व्यवसाय से ही लगा लेते हैं जो की बिलकुल ठीक भी है । लेकिन भारत में जब किसी व्यक्ति द्वारा Family Business नामक इस शब्द का उच्चारण किया जाता है, तो लोगों को लगता है की चूँकि यह उस व्यक्ति का पारिवारिक व्यवसाय है इसलिए इसका आकार बेहद छोटा होगा। कहने का आशय यह है की भारत में अधिकतर लोग इस शब्द का अर्थ कोई दुकान, या छोटे प्रतिष्ठान से लगाते हैं, लेकिन वे ये भूल जाते हैं की पारिवारिक व्यवसाय की श्रेणी में केवल छोटे प्रतिष्ठान या दुकान ही नहीं आते, बल्कि बड़ी बड़ी कम्पनियां तक इस व्यवसाय की श्रेणी में आ सकती हैं।

हमारे देश भारत में Family Business के प्रति अनेकों मिथ्या बातें प्रचलित हो सकती हैं इन मिथ्या बातों को दूर करने और पारिवारिक व्यवसाय की परिभाषा, लाभ, कठिनाइयाँ तत्व इत्यादि के बारे में हम इस लेख के माध्यम से जानने का पुरजोर प्रयत्न करेंगे।

फैमिली बिजनेस क्या होता है (What is Family Business in Hindi):

सबसे पहले यहाँ पर यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं की Family Business की परिभाषा व्यवसाय के आकार पर आधारित नहीं है। जिसका अभिप्राय यह हुआ की एक छोटे से लेकर बड़ा बिजनेस भी इस श्रेणी में आ सकता है। एक पारिवारिक व्यवसाय या फैमिली बिजनेस वह व्यवसाय होता है जिसमें एक ही परिवार के दो या दो से अधिक सदस्य शामिल होते हैं। और उस व्यवसाय का अधिकतर हिस्से पर स्वामित्व और नियंत्रण एक ही परिवार का होता है। बिजनेस की यदि हम बात करें तो बिजनेस का इस प्रकार का यह स्वरूप सबसे पुराना हो सकता है क्योंकि प्राचीनकाल में लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ ही किसी व्यवसाय की शुरुआत करते थे या फिर उन्हें बाद में शामिल कर लेते थे।

Family Business kya hai

खेती को पारिवारिक व्यवसाय का ही एक प्रारम्भिक रूप कहा जा सकता है क्योंकि इस कार्य में एक ही परिवार के लगभग सभी सदस्य अपनी अपनी भूमिका निभा रहे होते थे। शहरी वातावरण की यदि हम बात करें तो यहाँ पर ऐसे बहुत सारी दुकानें, क्लिनिक इत्यादि देखने को मिल जाएँगी जो अपने घर से ही काम कर रहे होते हैं। और परिवार के सभी सदस्य कभी न कभी इन कामों में मदद कर रहे होते हैं।

इसलिए स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है की एक ऐसा व्यवसाय जिसमें एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्य शामिल हों, और उस पर अधिकतर स्वामित्व और नियंत्रण उसी परिवार के सदस्यों का हो को एक Family Business कह सकते हैं।  इनमें वे व्यवसाय भी शामिल हैं जिन्हें एक पीढ़ी ने शुरू किया हो, और अगली पीढ़ी उस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हो।  टाटा, बिरला, रिलायंस ग्रुप, महिंद्रा इत्यादि सभी पारिवारिक व्यवसाय के ही उदाहरण हैं।

फैमिली बिजनेस के फायदे (Benefits of a Family Business in Hindi):

वर्तमान समय की यदि हम बात करें तो यह समय प्रतिस्पर्धा का समय है। लेकिन आज भी Family Business इस प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था में न सिर्फ पनप रहे हैं बल्कि लाभ कमाकर आगे भी बढ़ रहे हैं। पारिवारिक व्यवसाय के कई फायदे होते हैं उनमें से कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • जैसा की हमें ज्ञात है की पारिवारिक व्यवसाय में एक ही परिवार के दो या दो से अधिक लोग शामिल रहते हैं, और अधिकतर हिस्से पर स्वामित्व और नियंत्रण भी इन्हीं का होता है। इसलिए ये उस व्यवसाय के प्रति प्रतिबद्ध रहते हैं क्योंकि वे नहीं चाहते की उनके परिवार का नाम को कहीं से भी कोई आंच आये। कहने का आशय यह है की प्रतिबद्धता और एकीकृत नेतृत्व  Family Business का एक अहम् फायदा है।
  • परिवार के लोग वरिष्ठता के आधार पर नेतृत्व का चयन कर सकते हैं जिसका पालन उन्हें लम्बे समय तक करने की आवश्यकता होती है। इससे व्यवसाय में स्थिरता और स्थायित्व पैदा होता है।
  • विश्वास और प्रमाणिकता सभी व्यवसायिक संगठनों के लिए अहम् होती है और आम तौर पर पारिवारिक व्यवसायिक संगठनों में इसकी अधिकता पायी जाती है । क्योंकि इसमें नियंत्रण अपने परिवार के सदस्यों के पास ही रहता है जिन पर कोई भी व्यक्ति किसी बाहरी व्यक्ति से अधिक विश्वास कर सकता है ।
  • नेतृत्व में एक ही परिवार के लोग होने के कारण वे स्वेच्छा से उस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए एक नहीं बल्कि अनेकों भूमिकाएं निभाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसके अलावा वे अपनी सुविधानुसार कार्यालय में आ जा सकते हैं इसलिए लचीलापन और बहुमुखी प्रतिभा भी इसके फायदों में शामिल हैं।
  • अक्सर देखा गया है जो गैर पारिवारिक व्यवसाय होते हैं वे प्रति तिमाही के आधार पर लक्ष्य निर्धारित करते हैं। जबकि पारिवारिक व्यवसाय वार्षिक या फिर दशकों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित करने के बारे में सोचती हैं। उनका यही धैर्य उन्हें दीर्घकालीक परिप्रेक्ष्य में प्रभावी रणनीति और निर्णय लेने में मददगार साबित होता है।
  • एक Family Business में परिवार के सदस्य संगठन की दीर्घकालीक सफलता को सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के वित्त का योगदान करने से भी नहीं कतराते हैं। कहने का आशय यह है की वे जरुरत पड़ने पर स्वयं की पूँजी का योगदान भी कर सकते हैं और अपने वेतन में कटौती करके भी काम कर सकते हैं, जिससे इस प्रकार का व्यवसाय बुरे दौर से भी आसानी से उबर आता है।
  • आने वाली पीढ़ी को बिजनेस सेटअप करा कराया मिलता है, उन्हें सिर्फ उस व्यवसाय को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करना होता है। जिससे उस व्यक्ति को बिजनेस के शुरूआती दौर में आने वाली कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता। 

फैमिली बिजनेस में कठिनाइयाँ  

Family Business में कुछ कठिनाइयाँ भी आ सकती हैं जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है ।

  • क्योंकि एक परिवार में अलग अलग प्रकृति के लोग रहते हैं। इसलिए यह जरुरी नहीं की जो बात किसी एक को या फिर अधिकतर परिवार के सदस्यों को अच्छी लगे या जो किसी एक बात के पक्ष में हों, जरुरी नहीं की सभी उसी पक्ष में हों। परिवार के किसी सदस्य को यह बात गलत लग सकती है और वह परिवार में विभाजन कारी रेखाएं खींच सकता है। इसलिए पारिवारिक कलह Family Business का एक प्रमुख नुकसान है ।
  • चूँकि यह एक पारिवारिक व्यवसाय होता है इसलिए हो सकता है की परिवार के सदस्यों को उम्र की वरिष्ठता के आधार पर वरीयता दी जाय । कहने का आशय यह है की इस प्रकार के व्यवसाय को चलाने के लिए असंरचित शाषन होता है जिसमें पदानुक्रम एवं बाहरी कॉर्पोरेट कानूनों को अधिक महत्व नहीं दिया जाता है। और यह व्यवसाय के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है।
  • छोटे पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों की कठिनाइयों की यदि हम बात करें तो अपने आने वाली पीढ़ी को अपने पारिवारिक व्यवसाय में प्रवेश दिलाना उनके लिए एक बहुत बड़ी कठिनाई के तौर पर सामने आ रही हैं। क्योंकि आजकल का अधिकतर युवा किसी मल्टीनेशनल कम्पनी में ही काम करना पसंद करता है।  
  • एक Family Business में नेतृत्व प्रदान करने वाले व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य बड़े पद पर अपने परिवार के सदस्यों को ही रखने का होता है, भले ही वह सदस्य योग्य हो या नहीं। कहने का आशय यह है की वे बड़े पद पर किसी बाहरी व्यक्ति को नियुक्त करने से हिचकिचाते हैं। जिसके  कंपनी की सफलता पर दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। विशेषकर तब जब परिवार के किसी अयोग्य व्यक्ति के हाथों में बागडोर दे दी गई हो।
  • पारिवारिक व्यवसाय में राजा का बेटा राजा सिद्धांत लागू होता है, जो किसी कंपनी के लिए ठीक हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है ।

फैमिली बिजनेस की मूल बातें (Fundamentals of a family Business in Hindi):

आपको यकीन आये या न आये हमारे देश भारत में आज भी अधिकतर संख्या में Family Business ही किये जाते हैं। और यह जरुरी नहीं है की पारिवारिक व्यवसाय की बागडोर संभाले हुए व्यक्ति कोई ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट या कोई व्यवसायिक पढाई किया हुआ ही व्यक्ति हो। बल्कि ऐसे ऐसे लोग भी मिलेंगे जो खुद को अनपढ़ कहते हों, लेकिन उन्हें अपने व्यवसाय के बारे में हर छोटी से लेकर बड़ी जानकारी का ज्ञान अवश्य होगा।

अब सवाल यह उठता है की उस व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने वाला व्यक्ति अपने आपको अनपढ़ क्यों कहता है। जबकि वास्तविकता यह है की आज उसके व्यवसाय के बारे में जो जानकारी उसे है वह तो उसके खुद के एमबीए किये हुए बेटे को भी नहीं होगी। कहने का आशय यह है की किसी Family Business  को आगे बढ़ाने के लिए किसी डिग्री या मास्टर डिग्री की आवश्यकता हो या न हो, लेकिन निम्नलिखित तीन बातों पर जानकारी अवश्य होनी चाहिए और यही तीन बातें पारिवारिक व्यवसाय की मूल बातें हैं।     

1. उत्पाद की जानकारी (Product Knowledge):

पारिवारिक व्यवसाय किसी विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ा हुआ हो या फिर किसी सेवा क्षेत्र से, उत्पाद की जानकारी इसके लिए बेहद अहम् है। कहने का आशय यह है की उद्यमी जो भी सेवा ग्राहकों को बेच रहा हो, या जो भी फैक्ट्री चला रहा हो उसकी उसको पूरी जानकारी होना अति आवश्यक है। मान लीजिये की उद्यमी लोहे की फैक्ट्री चला रहा हो तो क्या उसे अलग अलग लोहे के बारे में पता है? उसमें क्या समस्याएं और कठिनाइयाँ आती हैं उनके बारे में पता है? किस वैरायटी को बनाने में किस प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल होगा इसके बारे में पता है? कहने का आशय यह है की जो उत्पाद उद्यमी द्वारा बनाया जा रहा हो उसके बारे में उसे पूर्ण जानकारी का होना अति आवश्यक है तभी वह Family Business को आगे बढ़ाने में योगदान दे पायेगा।   

2. नीतियों की जानकारी (Policy Knowledge):

Policy Knowledge से हमारा आशय कम्पनी की अन्दुरुनी नीतियों से नहीं, बल्कि उस व्यवसाय को वैधानिक रूप से चलाने के लिए जिन सरकारी दस्तावेज, लाइसेंस और पंजीकरण, फॉर्म इत्यादि की आवश्यकता होती है उनसे है। हालांकि बहुत सारे Family Business चलाने वाले उद्यमी यह मानते हैं की जब उन्हें यह काम चार्टेड अकाउंटेंट (CA) से ही कराना है तो उन्हें इनके बारे में जानकारी रखने की क्या आवश्यकता है। लेकिन इनमें से अधिकतर सफल पारिवारिक व्यवसाय करने वाले उद्यमियों की राय इनसे भिन्न है और उनका मानना है की पालिसी यानिकी सरकारी नीतियों की भी जानकारी होना जरुरी है।   

3. बात करने का तरीका (Communication for Family Business):

यदि उद्यमी का Family Business का आकार बहुत बड़ा है तो उसके पास विभाग के आधार पर बाहरी लोगों से बात करने के लिए अलग अलग कर्मचारी मौजूद होंगे। लेकिन यदि ऐसा नहीं है और उद्यमी चेयरमैन से लेकर चपरासी तक खुद है और उसे इन सभी कार्यों में शामिल होना पड़ता है तो उसे अलग अलग व्यक्तियों से बात करने का तरीका होना चाहिए। क्लाइंट से कैसे बात करनी है? किसी सरकारी अधिकारी से कैसे बात करनी है? किसी श्रमिक से कैसे बात करनी है ? इत्यादि का तरीका अवश्य होना चाहिए।

हालांकि यहाँ पर हमारा आशय सभी से सम्मानपूर्वक बात करने से है लेकिन हो सकता है उद्यमी को किसी से अंग्रेजी में बात करनी पड़ जाय, किसी से हिंदी में बात करनी पड़ जाय या फिर किसी से वहीँ की स्थानीय भाषा में बात करनी पड़ जाय। किसी को कुछ बात बतानी पड़ जाय, किसी से कुछ बात छुपानी पड़ जाय, इसलिए उद्यमी को बात करने का तरीका अवश्य आना चाहिए।

फैमिली बिजनेस में ध्यान रखने योग्य बातें  

Family Business को सफलता की ओर अग्रसित करने के लिए उद्यमी को अनेकों बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता हो सकती है इनमें से कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • चूँकि पारिवारिक व्यवसाय में परिवार के सदस्य भी शामिल होते हैं इसलिए उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप ही उपचार मिलना चाहिए। कहने का आशय यह है की किसी परिवार के सदस्य को सिर्फ इस बात के लिए विशेष उपचार नहीं मिलना चाहिए क्योंकि वह उस परिवार का सदस्य है। ऐसा रवैया उस परिवार के सदस्य का भी हौसला गिरा सकता है जो अपनी योग्यता के दम पर सम्मान पाने की कोशिश कर रहा हो। कुल मिलाकर देखा जाय तो Family Business की सफलता के लिए परिवार के सदस्यों को भी बाकी कर्मचारियों के समान ही माना जाना चाहिए।
  • अक्सर देखा गया है की फैमिली बिजनेस को नेतृत्व प्रदान करने वाले उद्यमी भाई भतीजावाद में विश्वास करते हैं। और अपनी कंपनी में अपने रिश्तेदारों को काम पर लगा सकते हैं। कुछ इन्हें इनकी योग्यता से अधिक का भुगतान करते हैं तो कुछ इन्हें बहुत ही कम भुगतान करते हैं। यह दोनों ही स्थितियां पारिवारिक व्यवसाय के अनुकूल नहीं है। इसलिए बेहतर है की कर्मचारियों की नियुक्ति सम्बन्ध देखकर नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और कौशल देखकर करें।
  • सिर्फ अपने परिवार के सदस्यों की भलाई और कल्याण के बारे में मत सोचें आपके लिए आपके कर्मचारी भी आपके व्यवसायिक परिवार का हिस्सा हैं। इसलिए इनके प्रति भी वफ़ादारी, लाभांश और सदभावना महत्वपूर्ण है।
  • Family Business को नेतृत्व प्रदान करने वाले व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए, की जो परिवार के लिए सबसे अच्छा हो सकता है। जरुरी नहीं है की वह आपके व्यवसाय के लिए भी अच्छा हो। इसलिए परिवार के लक्ष्यों और व्यवसायिक लक्ष्यों को अलग अलग ही रखें। 

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