गुलाब के बारे में भला कौन नहीं जानता होगा यह एक बेहद प्रसिद्ध पुष्प है इसलिए Rose Cultivation के बारे में बात करनी भी जरुरी हो जाती है । वह इसलिए भी क्योंकि भारत में गुलाब की अनेकों किस्में एवं प्रजातियाँ पाई जाती हैं और किस्मों एवं प्रजातियों के आधार पर इनके कई इस्तेमाल हो सकते हैं। हो सकता है की लोगों द्वारा इनका इस्तेमाल कटे हुए फूलों या फिर बगीचे के पौधों के रूप में किया जा रहा हो। और यह भी हो सकता है की गुलाब की खेती लोग अपनी कमाई करने के उद्देश्य से कर रहे हों क्योंकि गुलाब से गुलाब का तेल, गुलाब जल, गुलकंद इत्यादि बनाये जाते हैं।

इसके अलावा कटे हुए फूलों का इस्तेमाल गुलदस्ते बनाने, फूलों का प्रबंध करने, पूजा, सामाजिक अवसरों, और उपहारों के तौर पर भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसलिए आज के इस परिदृश्य में Rose Cultivation शुरू करना किसी भी इच्छुक व्यक्ति के लिए लाभकारी हो सकता है। कटे हुए गुलाब के फूलों की मांग सिर्फ घरेलु बाजार में ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय बाजार में भी अन्य पुष्पों की तुलना में कही अधिक है। भारत की यदि हम बात करें तो एक हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक भारत के तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल राज्यों में लगभग 4330 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 874 मिलियन गुलाब की स्टेम का उत्पादन होता है जिसका मूल्य लगभग 44 करोड़ रूपये है।

भारत में गुलाब की खेती अधिकतर खुले खेतों में की जाती है और यहाँ उगाई जाने वाली किस्में भी अन्तराष्ट्रीय बाज़ारों में काफी लोकप्रिय नहीं हैं। गुलाब के पौधों का प्रति हेक्टेयर घनत्व भी काफी कम है और यहाँ गुलाब के फूलों की कटाई के बाद जो वैज्ञानिक प्रबंध गुलाब के पौधों को चाहिए होता है वह नहीं मिल पाता है। भारत में गुलाब के फूलों को स्टोर करने की उचित व्यवस्था नहीं है और यहाँ Rose Cultivation छोटे उत्पादकों के हाथों में है जो स्टोर इत्यादि पर निवेश करने में असमर्थ हैं।

यूरोप एवं अमेरिका में गुलाब का व्यवसायिक उत्पादन जलवायु नियंत्रित ग्रीन हाउस के तहत किया जाता है जहाँ अल्ट्रा हाई प्लांट डेंसिटी की प्रैक्टिस की जाती है। और वहां पर उत्पादकों द्वारा गुलाब के फूलों की कटाई के बाद भी पौधों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। और फूलों को खेतों से लेकर घरेलु एवं अन्तराष्ट्रीय बाज़ारों में भेजने तक कोल्ड स्टोरेज का उचित प्रबंध उपलब्ध है। हालांकि गुलाब के फूलों के उत्पादन में इस्तेमाल में लायी जाने वाली टेक्नोलॉजी, जलवायु नियंत्रित ग्रीन हाउस की आवश्यकता, हीटिंग और कुलिंग सिस्टम की आवश्यकता, और उच्च मजदूरी के कारण उत्तरी गोलार्ध के देशों में इसकी उत्पादन लागत बहुत अधिक बढ़ रही है।

इसका नतीजा यह हुआ की दक्षिणी गोलार्ध के देशों जैसे कोलम्बिया, मैक्सिको, केन्या, जिम्बाम्बे इत्यादि देशों में Rose Cultivation के अवसर उत्पन्न हुए। इसके अलावा गुलाब की किस्मों में विकास के साथ कुछ ऐसी किस्में भी हैं जिनका उत्पादन उच्च तापमान में भी आसानी से किया जा सकता है। यही कारण है की अब ऐसे देश जहाँ का तापमान अधिक है वे भी प्लास्टिक ग्रीन हाउसों के तहत गुलाब की खेती कर रहे हैं।

हालांकि कटे हुए गुलाब के फूलों का यह उद्योग 9% प्रतिवर्ष की दर से आगे बढ़ रहा है इन्हीं सब घटनाक्रमों के चलते और देश में आर्थिक उदारीकरण के चलते भारत के लोगों की रूचि भी प्लास्टिक ग्रीन हाउस के तहत Rose Cultivation करने में बढ़ी है।

Rose cultivation Gulab ki kheti

गुलाब की खेती के लिए जलवायु (Climate Requirement for Rose Cultivation):

भारत में गुलाब की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु की बात करें तो यहाँ की उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में 15®C से 28® C के तापमान को आदर्श माना गया है। लेकिन कुछ परिस्थितयों में 15®C से नीचे के तापमान एवं 30® C से ऊपर के तापमान में भी गुलाब उगाये जा सकते हैं। 15®C से नीचे के तापमान में गुलाब उगाने पर फ्लश के बीच का इंटरवल काफी अधिक हो जाता है। और 30® C से ऊपर के तापमान पर Rose Cultivation करने के लिए उच्च आर्द्रता बनाये रखना जरुरी होता है ताकि वाष्पीकरण की प्रक्रिया बेहद धीमी हो जाय।

जहाँ तक गुलाब की खेती के लिए उपयुक्त मिटटी का सवाल है कार्बनिक पदार्थ और ऑक्सीजन से भरपूर मिटटी इनके उत्पादन के लिए अच्छी रहती है। बहुत सारे उत्पादकों द्वारा ग्रोविंग बेड के टॉप 30 CM तक में कार्बनिक पदार्थों की 30 % मात्रा को पसंद किया जाता है। और मिटटी का पीएच स्तर 6 या 6.5 के आस पास होना चाहिए।

गुलाब की खेती कहाँ करनी चाहिए

Rose Cultivation के लिए कौन सी लोकेशन उपयुक्त रहेगी इसका निर्णय कुछ कारकों पर निर्भर करता है वह भी तब जब खास तौर पर उद्यमी गुलाब के फूलों का उत्पादन करके इन्हें निर्यात करना चाहता हो। उत्पादन की लागत, उत्पाद की गुणवत्ता, ट्रांसपोर्टेशन लागत तीन ऐसे कारक हैं जो लोकेशन चयन में मददगार साबित होते हैं। यदि उद्यमी चाहता है की उसका उत्पाद अंतराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बने तो उसे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले गुलाब के फूलों का उत्पादन करना होगा। इसलिए उद्यमी को जहाँ जमीन, मजदूर, ट्रांसपोर्टेशन इत्यादि सस्ते दामों पर उपलब्ध हो सकें उद्यमी को उसी लोकेशन का चुनाव इसके लिए करना चाहिए।

यद्यपि भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गठित फ्लोरीकल्चर विशेषज्ञ समिति ने कटे हुए फूलों के उत्पादन एवं निर्यात के लिए हैदराबाद एवं इसके नजदीकी क्षेत्रों, बैंगलोर एवं इसके नजदीकी क्षेत्रों, नासिक, पुणे एवं इसके नजदीकी क्षेत्रों को उपयुक्त माना है। लेकिन उपर्युक्त पैराग्राफ में दिए गए कारकों के आधार पर Rose Cultivation के लिए अन्य लोकेशन एवं केंद्र भी उपयुक्त हो सकते हैं।

गुलाब की खेती कैसे शुरू करें? (How to Start Rose Cultivation in India):

खेती करने के लिए जो सबसे पहली चीज आवश्यक होती है वह है कृषि योग्य भूमि या जमीन इसलिए Rose Cultivation के लिए भी यह बेहद जरुरी है । इसके अलावा इस खेती के लिए आदर्श लोकेशन कौन सी रहेगी उसका जिक्र हम कर चुके हैं। यदि आपके पास आपकी जमीन है और वह जमीन उपर्युक्त पैराग्राफ में बताये गए आदर्श लोकेशन से मेल खाती है तो आप गुलाब की खेती शुरू कर सकते हैं। यह आप कैसे करेंगे इसकी जानकारी हम आगे देने वाले हैं ।

1. गुलाब की किस्मों के बारे में जानें

Rose Cultivation शुरू करने के इच्छुक व्यक्ति को सबसे पहले गुलाब की किस्मों एवं प्रकार की जानकारी होना अति आवश्यक है। इससे जहाँ एक तरफ उद्यमी इस बात का पता कर सकता है की उसकी लोकेशन पर कौन सी किस्म का उत्पादन किया जा सकता है तो दूसरा वह उस किस्म का भी चयन कर सकता है जिसकी मांग घरेलु एवं अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में अधिक हो। गुलाब की कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार से हैं।

हाइब्रिड टी रोजेज: इस किस्म के गुलाब के फूल बड़े और लम्बे तने वाले होते हैं इसलिए इन फूलों की कीमत भी अन्य गुलाब के फूलों की तुलना में अधिक होती है। इस किस्म के फूलों के प्रकार में सोनिया, विवाल्डी, तिनके, मेलोडी, डार्लिंग एवं ओनली लव काफी प्रसिद्ध हैं।  

फ्लौरीबुना रोजेज: इस किस्म के गुलाब के फूल हाइब्रिड टी की तुलना में काफी छोटे होते हैं और इनका तना भी छोटा ही होता है। लेकिन इन्हें अन्य फूलों की तुलना में कम जगह में अधिक उगाया जा सकता है इस किस्म के फूलों के प्रकार के फ्रिस्को, मर्सिडीज, जैगुआर, किस और फ्लोरेंस इत्यादि उदाहरण हैं।

स्प्रे रोजेज: इस किस्म के गुलाब में एक ही तने पर पांच छह फूल लगे होते हैं लेकिन इन्हें उत्पादन करने की प्रति स्क्वायर मीटर क्षमता कम है।इस किस्म के कुछ महत्वपूर्ण प्रकार एवेलिएन, जॉय और निकिता हैं।         

2. शेड नेट हाउस के तहत प्लांटिंग करें (Shed Net housing for Rose Cultivation)

भारत में Rose Cultivation के लिए शेड नेट हाउस प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है इस प्रणाली में हाउस को पारदर्शी सामग्री से कवर करने की आवश्यकता होती है। और इस प्रणाली में पौधों को प्राकृतिक प्रकाश प्राप्त होता रहता है। बिना किसी दोष के उच्च गुणवत्तायुक्त गुलाब का उत्पादन करने के लिए यह आवश्यक है। गुलाब की खेती करने के लिए प्रत्येक बे जो 8 मीटर की हो सकती है में 1.20 मीटर चौड़ाई के साथ 5 ग्रोविंग बेड होने चाहिए। प्रत्येक बेड में पौधों की दो पंक्तियाँ हो सकती हैं और इन्हें ऐसे व्यवस्थित किया जाता है की इनकी जड़ों को समुचित पानी भी मिले और पानी इनके इर्द गिर्द या जड़ों में जमा भी न हो।

बेड में पौधों की कम संख्या पौधों तक हवा परिसंचरण को बढ़ावा देती है। बेहतर ढंग से गुलाब के फूलों का उत्पादन करने के लिए एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति की दूरी 30 सेमी. और एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 17 CM तक रखी जा सकती है। और चौबीस मीटर लम्बी प्रत्येक पंक्ति में 140 गुलाब के पौधे उगाये जा सकते हैं इससे प्रति हेक्टेयर 70000 पौधों का घनत्व प्राप्त किया जा सकता है। Rose Cultivation के लिए पौधों का रोपण फरबरी से अप्रैल या फिर जुलाई से सितम्बर के महीनों में किया जा सकता है।  

 3. पौधों के लिए खाद पानी का प्रबंध करें

उपर्युक्त बताई गई क्लोज डेंसिटी विभिन्न शाखाओं में बंटी हुई है इस तरह से पौधे 2 CM तक ही बढ़ पाते हैं उसके बाद उन्हें तार द्वारा सपोर्ट प्रदान करके बढ़ने में मदद की जाती है।  Rose Cultivation के लिए जैविक खाद की आवश्यकता होती है ताकि टॉप 30 CM मिटटी में कार्बनिक पदार्थों की प्रचुरता हो। प्रत्येक स्क्वायर मीटर के लिए 15 किलो जैविक खाद काफी रहेगी। इसके अलावा उद्यमी को मिटटी एवं पौधों का अच्छी तरह विश्लेषण करके उन्हें पोषक तत्व प्रदान करने की भी आवश्यकता होती है।

इनमें नाइट्रोजन और पोटेशियम, फास्फोरस इत्यादि शामिल हैं। गुलाब के पौधों को बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है इसलिए उद्यमी को ड्रिप सिस्टम के माध्यम से इनकी सिंचाई का प्रबंध करना होगा। पौधों में सितम्बर से मार्च तक फूल आते रहें इसके लिए पौधों की छंटाई की जाती है आम तौर पर प्रूनिंग के 45 दिनों बाद पौंधों पर फूल आना शुरू हो जाते हैं।

4. पौधों को कीटाणु एवं रोगों से बचाएं

Rose Cultivation करने वाले उद्यमी को गुलाब के पौधों को कीटाणु एवं रोगों से दूर रखने के लिए उचित व्यवस्था करने की आवश्यकता होती है। क्योंकि लाल मकड़ी का घुन, लीफ रोलर्स, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, एफिड्स,  नेमाटोड इत्यादि गुलाब को नुकसान पहुँचाने वाले कीट हैं। वहीँ पाउडर की तरह फफूंदी, डाउनी फफूंदी, बोट्रीटीस, Pruning का मरना, ब्लैक लीफ स्पॉट गुलाब के कुछ प्रमुख रोग हैं। इसलिए उद्यमी चाहे तो किसी विशेषज्ञ की सलाह पर हफ्ते या पंद्रह बीस दिनों में एक बार डाइथेन एम, मेटासिस्टॉक्स, करैथेन इत्यादि रसायनों को स्प्रे करके इन रोगों एवं कीटाणु से मुक्ति भी पा सकता है ।

5. फूलों को हार्वेस्ट करें

Rose Cultivation करने वाले उद्यमी को एक बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है की फूलों की कटाई सही समय पर होनी चाहिए। अर्थात फूलों को तभी काटा जाना चाहिए जब ये कटाई की अवस्था तक पहुँच चुके हों, यदि इन्हें जल्दी काट दिया जाय तो इन्हें इनके लिए आरक्षित सम्पूर्ण भोजन नहीं मिल पायेगा जिस कारण इनका पूर्ण विकास नहीं हुआ होगा । और यदि इन्हें काटने में ज्यादा देर हो जाती है तो इनकी आयु वैसे ही कम हो जाती है जिससे ये निर्यात करते समय या फिर बाज़ारों में भेजते समय जल्दी खराब हो सकते हैं। गुलाबों की कटाई या हार्वेस्टिंग लम्बे तने के साथ शाम को या फिर सुबह सुबह जल्दी की जा सकती है ।

तने का निचला हिस्सा तुरंत साफ़ पानी की बाल्टी में रखा जाना चाहिए जिसमें सिट्रिक एसिड या क्रिसल – आरवीबी मिलाया गया हो । उसके बाद जिस बाल्टी में कटे हुए फूल रखे हुए हों, उसे ग्रेडिंग एवं पैकिंग हाल में ले जाया जाता है।   

6. फूलों की ग्रेडिंग, पैकिंग एवं भण्डारण (Packing, Grading and Storage after Rose Cultivation)

Rose Cultivation Process पूर्ण होने के बाद फूलों की हार्वेस्टिंग के बाद इन्हें आम तौर पर ग्रेडिंग, पैकिंग, शीतल और रेफ्रीजिरेटेड वाहनों के माध्यम से ट्रांसपोर्ट किया जाता है। यदि ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग में देरी होती है तो इन्हें कोल्ड स्टोरेज में डाला जा सकता है लेकिन कोल्ड स्टोरेज में इन्हें डालने से पहले दुबारा से नीचे से इनके तने को थोड़ा सा काटा जा सकता है लेकिन ध्यान रहे इसमें काँटों एवं पत्तियों को इनसे नहीं हटाया जाता है। और इन्हें बाल्टी में साफ़ पानी भरकर उसमें साइट्रिक एसिड डालकर पीएच स्तर मेन्टेन करते हुए ही 30-60 मिनट तक रखा जाता है।

उसके बाद इन्हें साइट्रिक एसिड से बाहर निकाल दिया जाता है और फिर इन्हें एक प्रजरवेटिव सोल्यूशन में रखा जाता है। और तत्पश्चात इन फूलों को कोल्ड स्टोर की ओर स्थानांतरित किया जाता है और इन्हें 0 से 20®C तापमान में रखा जाता है इन गुलाब के फूलों को प्रजरवेटिव सोल्यूशन में 4-5 दिनों के लिए रखा जा सकता है।   

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