बायोगैस की यदि हम बात करें तो, यह एक ज्वलनशील गैस है। इसलिए आज हम Biogas Plant स्थापित करने के मद्देनज़र कुछ जरुरी जानकारी देने का प्रयत्न कर रहे हैं । इस तरह की गैस का विनिर्माण बायोगैस संयंत्रों में बायोमास के फेर्मेंटेशन (किण्वन) के माध्यम से किया जाता है। इस गैस को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बनिक पदार्थों के जैविक विघटन से उत्पन्न होने वाली गैस के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है। इसकी उत्पति बायोजैनिक पदार्थों से होती है। इसलिए यह एक प्रकार का जैव ईधन भी कहलाता है।

वर्तमान में बायोगैस को उर्जा का एक अक्षय स्रोत भी माना जा सकता है। इसलिए Biogas Plant नामक इस विषय पर बात करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। बायोगैस बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर विभिन्न जैविक कचरा जैसे मृत पौधे एवं पशुओं से उत्पन्न सामग्री, पशु गोबर, रसोई का कचरा इत्यादि का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है की कभी कभी इसे गोबर गैस के नाम से भी जाना जाता है। कहने का आशय यह है की, अपने आस पास के अपशिष्ट को गैसीय ईधन में परिवर्तित किया जा सकता है। बायोगैस में प्रमुख रूप से मीथेन (CH4) और कार्बन डाई ऑक्साइड होती है, और इसमें थोड़ी बहुत मात्रा में हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) की नमी और सिलोकेन की मात्रा भी हो सकती है।

और ये तो हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की विभिन्न गैसों जैसे मीथेन, हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का ऑक्सीजन के साथ ऑक्सीकरण या दहन किया जा सकता है। इसलिए बायोगैस का इस्तेमाल भी खाना पकाने के ईधन या फिर अन्य किसी हीटिंग उद्देश्य के लिए आसानी से किया जा सकता है। इस गैस का इस्तेमाल गैस इंजन में गैस को बिजली या गर्मीं में परिवर्तित करने के लिए भी किया जा सकता है। यही कारण है की वर्तमान में Biogas Plant स्थापित करना कमाई एवं व्यवसाय की दृष्टी से भी लाभकारी हो सकता है। बायोगैस को भी प्रकृतिक गैस की तरह ही संपीड़ित की जा सकता है, इसलिए मोटर वाहनों को पॉवर देने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

Biogas Plant Information in hindi

बायोगैस प्लांट क्या होता है? (What is Biogas Plant in Hindi):

एक Biogas Plant की यदि हम बात करें तो, यह नाम एक ऐसे अवायवीय डाइजेस्टर को दिया जाता है, जो घरेलु कचरे अर्थात अपशिष्ट या एनर्जी क्रॉप्स का ट्रीटमेंट करता है। एनारोबिक डाइजेस्टर का इस्तेमाल करके बायोगैस नामक इस उत्पाद का उत्पादन किया जा सकता है, एक बायोगैस प्लांट निम्नलिखित अवयवों से मिलकर बना हुआ हो सकता है।

कंक्रीट टैंक (डाइजेस्टर): इस टैंक में ही अपशिष्ट इत्यादि को डाला जाता है और कार्बनिक अपशिष्ट को यहाँ के रोगाणुओं द्वारा यहाँ पचाया जाता है ताकि मीथेन गैस प्राप्त हो सके।

फ्लोटिंग कवर: Biogas Plant का दूसरा महत्वपूर्ण अवयव फ्लोटिंग कवर होता है जिसे टैंक के ऊपर रखा जाता है और यह कवर बढ़ता रहता है क्योंकि टैंक में गैस की मात्रा भी बढ़ती रहती है।

आउटलेट: आउटलेट से आशय एक ऐसी संरचना से है जो टैंक से पाइप के माध्यम से जुड़ा हुआ होता है और इसी पाइप से टैंक में उत्पन्न गैस को निकाला जाता है और इस्तेमाल में लाया जाता है।

स्लरी कलेक्टर: स्लरी कलेक्टर में अन्य जैव अपशिष्ट के साथ गाय के गोबर को पानी के साथ डाला जाता है यह इसलिए किया जाता है क्योंकि गाय के पेट के रूमेन भाग में बैक्टीरिया मेथनोगन्स होते हैं। और ये गाय के गोबर में भी मौजूद होते हैं, और ये भी जैव अपशिष्ट के तौर पर कार्य करके मीथेन गैस का उत्पादन करते हैं।

स्लज कलेक्टर: स्लज कलेक्टर को कीचड़ कलेक्टर भी कहा जा सकता है, इसके माध्यम से टैंक में उपलब्ध स्पेंट घोल को इस भाग से हटा लिया जाता है। और इस कीचड़ का इस्तेमाल विभिन्न प्रयोजनों हेतु खाद या उर्वरक के तौर पर किया जा सकता है।

बायोगैस के इस्तेमाल और मार्किट  (Use & Market of Biogas )  

वर्तमान में Biogas Plant स्थापित करना इसलिए लाभकारी हो सकता है, क्योंकि बायोगैस पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती है, और यह पर्यावरण के अनुकूल गैस मानी गई है। इसके कुकिंग, ड्राइंग, कुलिंग, हीटिंग इत्यादि कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा बायोगैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन मेथनॉल और भाप उत्पादन के लिए भी किया जाता है। इसके कुछ और भी विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग हैं, जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • घरेलु ईधन के तौर पर इस्तेमाल।
  • इलेक्ट्रिसिटी उत्पादन में बायोगैस का इस्तेमाल।
  • विकेंद्रीकृत ईधन आपूर्ति और कचरे का निस्तारण।
  • गैस विभिन्न प्रकार की लकड़ी, गोबर, कृषि अवशेष, पेट्रोल डीजल, बिजली ईधन इत्यादि का एक बेहतरीन विकल्प है।
  • कचरा प्रबंधन में Biogas Plant का अहम् योगदान रहता है।
  • बायो सीएनजी का उत्पादन।  

बायोगैस उत्पादन करके उद्यमी विभिन्न प्रकार के कचरे जैसे कृषि, पशु, औद्योगिक और नगरपालिका इत्यादि के अपशिष्ट को उर्जा में बदलने का कार्य कर रहा होता है। इसलिए सरकार भी इस तरह की परियोजनाओं को यथासंभव मदद करने के लिए प्रयासरत रहती है। वर्तमान में भारत की यदि हम बात करें तो एक आंकड़े के मुताबिक यहाँ प्रति वर्ष लगभग  2.07 बिलियन m3 बायोगैस का उत्पादन हो रहा है। ग्रामीण भारत में इस्तेमाल में लाया जाने वाला प्रमुख उर्जा स्रोतों में बायोमास का नाम प्रमुख है, जो ग्रामीण भारत में लगभग 96% उर्जा के स्रोतों को कवर करता है।

बायो गैस प्लांट के लिए आवश्यक मशीनरी और कच्चा माल (Machinery and Raw Material for Biogas Plant)    

Biogas Plant स्थापित करने के लिए उद्यमी को विभिन्न प्रकार की मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता होती है, इन्हें खरीदने या स्थापित करने में लाखों रूपये का खर्चा आ सकता है। लेकिन चूँकि यह प्लांट विभिन्न प्रकार के जैव कचरे को परिवर्तित करके बायोगैस में परिवर्तित करता है। इसलिए यह पर्यावरण के अनुकूल तो है ही, साथ में यह पर्यावरण में स्वच्छता बनाये रखने में भी मददगार है। इसलिए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा इस तरह का उद्यम स्थापित करने के लिए अनेकों योजनायें चलायी गई हैं। उद्यमी चाहे तो अपने राज्य, क्षेत्र में उपलब्ध योजना के तहत इस तरह की परियोजना को शुरू कर सकता है। प्रमुख मशीनरी और उपकरणों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • बायोगैस प्लांट
  • एफआरपी टैंक
  • स्लरी स्टोरेज टैंक
  • अपशिष्ट को पम्प करने के लिए स्लीज पम्प
  • क्रशर मशीन
  • एक्सकेवेशन

Biogas Plant के लिए कच्चे माल के तौर पर उद्यमी को विभिन्न अपशिष्ट की आवश्यकता होती है, जिनकी लिस्ट निम्नवत है।

  • फसल अपशिष्ट (Crop Waste)
  • जानवरों से उत्पन्न अपशिष्ट (Animal Waste)
  • नगरपालिका अपशिष्ट (Municipal Waste)
  • कृषि उद्योग अपशिष्ट (Agro Industry Waste)
  • जंगल अपशिष्ट (Forest Waste) 

आवश्यक जगह और लाइसेंस

Biogas Plant स्थापित करने के लिए उद्यमी को विभिन्न प्रक्रियाओं को अच्छे ढंग से करने के लिए 1500-2000 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है। इस तरह के व्यवसाय को ग्रामीण क्षेत्रों से आसानी से शुरू किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरणों की लिस्ट इस प्रकार से हैं।

  • रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में रजिस्ट्रेशन।
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन।
  • फायर डिपार्टमेंट से एनओसी।
  • उद्यम पोर्टल रजिस्ट्रेशन।
  • पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से लाइसेंस लेने की आवश्यकता हो सकती है।
  • ब्रांड नाम और ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन

बायोगैस निर्माण प्रक्रिया (Biogas Manufacturing Process):

ध्यान रहे यहाँ पर Biogas Plant में खाद्य अपशिष्ट, घरेलु कचरा और गाय के गोबर के माध्यम से बायोगैस बनाने की प्रक्रिया के बारे में संक्षिप्त तौर पर बताया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूर्ण रूप से सीखने और उसे लागू करने के लिए उद्यमी को कुछ महीनों का प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता हो सकती है। इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले कच्चे माल का प्रबंध किया जाता है। खाद्य अपशिष्ट को कृषि प्रसंस्करण उद्योगों और नगर निकायों से ख़रीदा जाता है, जबकि गाय का गोबर डेयरी फार्म या फिर पशुपालक किसानों से खरीद लिया जाता है।

और इन सभी कच्चे माल का उचित ढंग से संग्रहण कर लिया जाता है, उसके बाद आवश्यक खाद्य अपशिष्ट को स्टोर रूम से निकालकर क्रशर मशीन में डाला जाता है। यह मशीन इसे उपयुक्त आकार में कुचल देती है, ताकि स्लरी बनाने में इसका उपयोग आसान हो जाय। इस कुचली हुई सामग्री और गाय के गोबर के साथ पानी मिलाकर इसे स्लरी टैंक में डाला जाता है।  स्लरी टैंक में इस मिश्रण को एक समान करने के लिए एक एजिटेटर पहले से लगा होता है।  Biogas Plant में बायोगैस बनाने के लिए इसके बाद इस स्लरी को बायोगैस प्लांट के डाइजेस्टर में डाल दिया जाता है।

यही पर इस जैविक कचरे का विघटन होता है, जिससे मीथेन एवं अन्य गैसें निकलती हैं, और गैसों के इन सामूहिक रूप को ही बायोगैस कहा जाता है। और यह गैस, टैंक के गुम्बद या फ्लोटिंग कवर में जमा हो जाती है। जहाँ से इसे प्रवाह नियंत्रण वाल्व के माध्यम से समय समय पर निकाल लिया जाता है। गैस को निकालने के बाद जो अपशिष्ट या कीचड़ बच जाता है, उसे स्लज टैंक में पम्प कर दिया जाता है, जिसका इस्तेमाल खाद के तौर पर किया जा सकता है।  

बायोगैस को कंप्रेसर के माध्यम से एक बड़े गैस रिसीवर में एकत्र किया जाता है, इस प्रक्रिया में यह रिसीवर टेम्पररी होल्डिंग टैंक के रूप में कार्य करता है। Biogas Plant से उत्पादित यह गैस उसके बाद उपयुक्त दबाव नियामक और वाल्व का इस्तेमाल करके गैस सिलिंडर में भी भरी जा सकती है। या फिर किसी बड़े दबाव वाले बर्तन में भी भरी जा सकती है, जहाँ से उद्यमी रेगुलेटर और पाइपलाइन का इस्तेमाल करके अपने ग्राहकों को गैस की आपूर्ति कर सकता है।

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