सफलता की कहानी चाहे राधाकिशन दमानी की हो या अन्य किसी अरबपति की, यह हमें कुछ न कुछ प्रेरणा अवश्य देती है। जब हम सुनते हैं की कोई हमारे बीच रहने वाला व्यक्ति ही आज अपने जीवन में एक बेहद सफल व्यक्ति बन चुका है, तो हमें उसकी सफलता की कहानी जानने में काफी उत्सुकता होने लगती है।

हालांकि केवल अरबपतियों को ही सफल व्यक्ति कहना सही नहीं है, लेकिन चूँकि हम यहाँ पर लोगों को कमाई करने की ओर प्रोत्साहित करते हैं। इसलिए हम यहाँ पर सिर्फ सफल उद्यमियों के बारे में ही बात करते हैं, ताकि हमारे पाठकगण उनकी जीवनी और संघर्ष से प्रेरणा ले सकें।

वर्तमान में राधाकिशन दमानी भारतीय औद्यौगिक जगत में एक जाना पहचाना नाम है, वे न सिर्फ एक सफल उद्यमी हैं। बल्कि वे एक बेहद सफल निवेशक और भारत के सातवें सबसे अधिक अमीर व्यक्ति एक हैं। ये भारत में स्थापित सबसे लोकप्रिय रिटेल चेन डी मार्ट ले संस्थापक हैं।

डी मार्ट के संस्थापक राधाकिशन दमानी

आज भले ही राधाकिशन दमानी के पास वह सब कुछ है, जो एक व्यक्ति अपने जीवन में पाने की इच्छा रखता है। लेकिन कभी वे दिन भी थे, जब वे भी एक आम इन्सान थे। और उनके पास भी उतना ही था जितना एक साधारण इन्सान के पास होता है। ऐसे में उनके लिए जहाँ वे आज हैं वहाँ तक पहुँचना बिलकुल भी आसान नहीं था, लेकिन उनकी कड़ी मेहनत, मजबूत इच्छाशक्ति और सूझ बूझ ने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया।

राधाकिशन दमानी के बारे में कहा जाता है की उनके किये गए कार्य उनके कहे गए शब्दों से कहीं अधिक तेज आवाज में बात करते हैं। कहने का आशय यह है की वे एक ऐसे इन्सान हैं जो बोलने की बजाय कार्य करने में भरोसा करते हैं। इसलिए लोगों का मानना है की वे इतनी ख़ामोशी से काम करते हैं की उनकी कामयाबी अपने आप शोर मचा देती है।

राधाकिशन दमानी का जन्म और पहले का जीवन  

अन्य लोगों की तरह राधाकिशन दमानी का जन्म भी एक मध्यम वर्गीय मारवाड़ी परिवार में हुआ था। इनका जन्म सन 1954 में राजस्थान के बीकानेर में एक मध्यम वर्गीय मारवाड़ी परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री शिवकिशनजी दमानी था। कहा यह जाता है की राधाकिशन दमानी ने अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए अपनी बीकॉम की पढाई को अधूरा छोड़ दिया था।

लेकिन इनके बड़े भाई इनके पिता के साथ मिलकर स्टॉक ब्रोकिंग बिजनेस सँभालते थे। ये तब की बात है जब ये अपने बीकॉम की पढाई मुंबई यूनिवर्सिटी से कर रहे थे। बी कॉम की पढाई अधूरी छोड़ने के बाद उन्होंने मुंबई में ही अपना बॉल बेअरिंग बिजनेस शुरू कर लिया था। लेकिन जब इनके पिता का निधन हो गया तो उसके बाद ये अपने पिताजी के स्टॉक बिजनेस को सँभालने में अपने बड़े भाई की मदद करने लगे ।

कहा जाता है की जब उन्हें अपने बॉल बीयरिंग बिजनेस को छोड़कर स्टॉक ब्रोकर में शामिल होना पड़ा, तब वे मात्र बीस साल के थे, और उन्हें स्टॉक ब्रोकिंग का कोई अनुभव और जानकारी नहीं थी।

निवेशक के तौर पर यात्रा

राधाकिशन दमानी भारतीय स्टॉक मार्किट में एक जाना पहचाना नाम है, यहाँ तक की भारत के वारेन बफेट के नाम से जाने जाने वाले राकेश झुनझुनवाला भी राधाकिशन दमानी को अपना गुरु मानते हैं। इसलिए कहा जा सकता है की इनके जीवन में जो सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आया वह स्टॉक मार्किट की बदौलत ही आया।

20 साल की उम्र में जब इन्होने अपने पिता का स्टॉक ब्रोकर बिजनेस ज्वाइन किया तो इन्हें इसकी किंचित मात्र भी जानकारी नहीं थी। यही कारण था की उन्होंने अपने आप को ट्रेडिंग में शामिल करने की बजाय स्टॉक मार्किट की रणनीतियों का अनुमान लगाकर उनका अनुसरण करना ही ठीक समझा।

कहा यह जाता है की दमानी ने 32 साल की उम्र में खुद को सेबी के साथ रजिस्टर कराके अपना पहला निवेश किया। इसके बाद उन्होंने ट्रेडिंग के माध्यम से काफी पैसा कमाया और उन्होंने यह भी महसूस किया की यदि वे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में निवेश करेंगे तो उन्हें और अधिक लाभ होगा।

हालांकि आज भले ही हमें लगता हो की राधाकिशन दमानी ने हमेशा लाभ ही कमाया होगा। लेकिन यह सच नहीं है, बल्कि उन्होंने नुकसान भी उठाया और नुकसान क्यों हुआ उसका विश्लेषण करके अपनी गलतियों में सुधार भी किया।

जब तक उन्हें ट्रेडिंग का अनुभव और ज्ञान नहीं था तब तक उन्होंने सिर्फ ट्रेडिंग करने वाले अन्य खिलाडियों को फॉलो करना, निरीक्षण करना और उनसे सीखना ही पसंद किया। और उसके बाद स्टॉक मार्किट रणनीतियों का अवलोकन करके भी उन्होंने स्टॉक मार्किट के बारे में काफी ज्ञान जुटाया। और बाद में अपने ज्ञान, अनुभव और रणनीतियों का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग करके पैसे कमाए।

राधाकिशन दमानी की सूझ बूझ ने उन्हें कठिन समय में भी कमा के दिया

90 के दशक में भारतीय शेयर बाज़ार के मशहूर निवेशक हर्षद मेहता पर जब हेरा फेरी करने का मामला प्रकाश में आया, तब भी दमानी की सूझ बूझ ने उन्हें काफी लाभ कमा के दिया। इनमें शेयर बाज़ार की नब्ज को समझने और उसके हिसाब से निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता विकसित हो चुकी थी, जिसका इन्होने भरपूर फायदा उठाया और शोर्ट सेल्लिंग करके काफी लाभ कमाया।

उस समय हर्षद मेहता द्वारा शेयर खरीदने के लिए बैंकों के पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा था और ऐसे शेयर जिनके फंडामेंटल उन शेयरों की कीमत में हो रही बढ़ोत्तरी की गवाही नहीं दे रहे थे उन शेयरों में भी काफी बढ़ोत्तरी हो रही थी तभी राधाकिशन दमानी ने शोर्ट सेल्लिंग शुरू कर दी थी।

कहा यह जाता है की एसीसी का शेयर जिसकी कीमत मात्र 200 रूपये थी हर्षद मेहता ने उसे 9000 तक पहुँचा दिया था जबकि उसके फंडामेंटल इस बात की गवाही देने से साफ़ इंकार कर रहे थे। इस बीच दमानी को भी थोड़ा बहुत नुकसान करना पड़ा। लेकिन बाद में दमानी समझ गए थे की हर्षद मेहता हेर फेर कर रहा है तो उन्होंने उन विशेष विशेष शेयरों की शोर्ट सेलिंग शुरू कर दी जिन पर हर्षद मेहता बड़ी मात्रा में निवेश कर रहा था।

क्योंकि वे समझ गए थे की इन शेयरों ने नीचे गिरना ही गिरना है और उनका आकलन एकदम सही भी रहा, जैसे ही हर्षद मेहता घोटाला उजागर हुआ, उन्हें बहुत अच्छा लाभ प्राप्त हुआ और उनकी कुल सम्पति में भी भारी वृद्धि हुई।

अपनी इस निवेश की यात्रा के दौरान राधाकिशन दमानी उस समय के मूल्य निवेशक चन्द्र कान्त संपत से प्रेरित होकर मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक में निवेश करना शुरू कर दिया। वे इन्हें कम कीमत पर खरीदकर लम्बी अवधि के लिए छोड़ देते थे। वे अच्छे शेयरों को थोक के भाव कम कीमत पर खरीद लेते थे। स्टॉक मार्किट के प्रति उनकी समझ, दूरदर्शिता, अनुभव इत्यादि ने उन्हें शेयर बाज़ार से काफी अच्छा पैसा कमाने में मदद की।

दमानी ने किन किन शेयरों से पैसा कमाया   

1995 में जब सभी सरकारी बैंक फल फूल रहे थे, तब राधाकिशन दमानी ने HDFC Bank में निवेश किया था। हालांकि उस समय शेयर मार्किट एक्सपर्ट ने उनकी खिल्ली भी उड़ाई थी, लेकिन उन्हें अपनी दूरदर्शिता पर पूरा भरोसा था।

दमानी ने न सिर्फ HDFC बल्कि ब्लू डार्ट, सुन्दरम फाइनेंस, जिलेट, इंडिया सीमेंट इत्यादि कंपनियों में निवेश करके दीर्घ काल में काफी अच्छा लाभ कमाया। इनकी रणनीति अच्छे कंपनी के शेयरों को रियायती दामों में खरीदकर उन्हें लम्बे समय तक अपने पास रखना था।

90 के दशक के बाद वर्ष 2000-2001 में जब केतन पारिख भी शेयरों में हेरफेर कर रहे थे, तब भी राधाकिशन दमानी ने शोर्ट सेलिंग की रणनीति को अपनाकर काफी अच्छा मुनाफा कमाया था। कहा यह जाता है की इन्होने एचडीएफसी बैंक, जीएटीआई, ब्लू डार्ट, सुंदरम फाइनेंस, जिलेट और इंडिया सीमेंट इत्यादि कंपनियों से काफी अच्छा मुनाफा कमाया।

यद्यपि राधाकिशन दमानी का पोर्टफोलियो बहुत बड़ा है लेकिन उनके कुछ प्रमुख स्टॉक में जीई कैपिटल ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्रीज, वीएसटी इंडस्ट्रीज, सिम्प्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, बीएफ यूटिलिटीज, मंगलम ऑर्गेनिक्स, स्पेंसर रिटेल, 3 एम इंडिया, सुंदरम फाइनेंस, क्रिसिल, आईसीआरए इत्यादि प्रमुख हैं।

रिटेल चेन डी मार्ट की स्थापना

दमानी की रणनीति और दूरदर्शिता से हर कोई प्रभावित है, क्योंकि उनकी रणनीति और दूरदर्शिता की छाप उनके द्वारा किये गए कार्यों में साफ देखी जा सकती है। उपभोक्ता व्यवसाय में इनकी पहले से ही विशेष रूचि थी, इसलिए ये इस तरह की कंपनियों के शेयर भी खरीदते थे। डी मार्ट शुरू करने से पहले उन्होंने एक रिटेल चेन अपना बाज़ार की फ्रैंचाइज़ी भी खरीदी थी।

लेकिन वर्ष 2002 में जब प्रॉपर्टी यानिकी अचल संपति की कीमतें निचले स्तर पर थी, तभी राधाकिशन दमानी ने डी मार्ट नामक रिटेल चेन की स्थापना की थी, और इसके लिए प्रॉपर्टी भी उसी समय खरीदी गई थी। इस प्रकार इन्होने काफी पैसों की बचत की थी।

राधाकिशन दमानी की एक अच्छी बात यह है की इन्होने अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए कभी भी भीड़ का अनुसरण नहीं किया। यही कारण है की डी मार्ट के जितने भी स्टोर हैं वे किसी माल में नहीं बल्कि खुद की प्रॉपर्टी में स्थापित हैं।

दमानी का प्रमुख उद्देश्य व्यवसाय का विस्तार नहीं, बल्कि व्यवसाय से लाभ कमाना रहा है। इसलिए इन्होने पहले दो स्टोर खोले जब वे अच्छे चलने लगे तो उनके मुनाफे के पैसों से चार और स्टोर खोले इस तरह से ये धीरे धीरे आगे बढ़ते गए।

एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2011 तक डी मार्ट के भारत में कुल 25 स्टोर उपलब्ध थे। बाद में उन्होंने धीरे धीरे अपने स्टोर का विस्तार किया और आज पूरे देश में डी मार्ट के 200 स्टोर से अधिक हैं। यद्यपि उनके पास एक साथ कई नए स्टोर खोलने के लिए पर्याप्त पैसा था, लेकिन राधाकिशन दमानी ने जब तक लगाये जाने वाले स्टोर की लाभप्रदता की गणना न हो, तब तक कोई नया स्टोर खोलना उचित न समझा। आज डी मार्ट के अधिकतर स्टोर डी मार्ट के स्वामित्व में हैं, जिसका मतलब यह है की उन्हें किसी को किराया देने की आवश्यकता नहीं है। शायद यही कारण है की आज तक एक भी डी मार्ट का स्टोर बंद नहीं हुआ है।                  

उपदेशक के रूप में

कहा यह जाता है की दमानी बड़े ही साधारण तरीके से रहना पसंद करते हैं, आम तौर पर वे सफ़ेद कमीज और सफ़ेद पायजामे में देखे जा सकते हैं । शायद यही कारण है की उन्हें Mr. White and White के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन वे उच्च फोकस, दृढ़ संकल्पी और जुनूनी व्यक्ति हैं।

भारत के निवेशक सभी निवेश युक्तियों के लिए जिस व्यक्ति राकेश झुनझुनवाला की ओर देखते हैं, वे स्वयं राधाकिशन दमानी को अपना गुरु मानते हैं। और यह स्वीकार करते हैं की उन्होंने उनसे ही ट्रेडिंग करने के गुर सीखे हैं। वैसे देखा जाय तो आम तौर पर दमानी न तो स्वयं बहुत ज्यादा पढ़े लिखे हैं और नहीं पढने में उनकी कोई विशेष रूचि है। इसके बावजूद वो शेयर बाज़ार की नब्ज को अच्छी तरह से समझते हैं।                                            

राधाकिशन दमानी के सफल होने के पीछे अहम् कारण

वैसे अधिकतर मामलों में सफलता को किस्मत से जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि लोगों का मानना है की मेहनत तो सभी करते हैं, लेकिन उनमें से सफल केवल वही लोग होते हैं जिनकी किस्मत अच्छी होती है। तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो किसी व्यक्ति की सफलता का पूरा श्रेय उसकी कड़ी मेहनत, उस काम के प्रति जुनून, रूचि, दूरदर्शिता इत्यादि को भी देते हैं।

लेकिन सफलता इन सबका एक समावेश होता है, जिसमें कड़ी मेहनत जरुरी है तो दूरदर्शिता और उचित रणनीति भी जरुरी है, और कई ऐसे मौके भी आते हैं की आपकी किस्मत का साथ देना भी बहुत जरुरी हो जाता है।

लेकिन सच्चाई यह है की जैसे अन्य निवेशक नुकसान उठाते हैं, राधाकिशन दमानी को भी निवेश में नुकसान उठाना पड़ा था। लेकिन उन्होंने वह नुकसान क्यों हुआ उसका आकलन किया और उन गलतियों से सीखकर उन्हें दुबारा दोहराया नहीं, और यही कारण है की स्थितियाँ उनके अनुकूल बन गई। अपने जीवन में उन्होंने एक अच्छे पर्यवेक्षक की भूमिका अच्छी तरह निभाई और एक बेहतरीन श्रोता होने का गुण भी उनमें विद्यमान था।

उन्होंने ऐसे शेयरों जिनके फंडामेंटल सही थे उनमें लम्बी अवधि के लिए निवेश किया, और कम गुणवत्ता वाले शेयरों की शोर्ट सेलिंग शुरू की, उनकी इसी रणनीति ने उन्हें अरबपतियों की लिस्ट में शामिल कर दिया। निवेशक के तौर पर उन्होंने अपार सफलता हासिल की, तो दूसरी तरफ डी मार्ट की स्थापना के बाद जिस गति से उनका बिजनेस बढ़ता जा रहा है यह उन्हें एक सफल उद्यमी के तौर पर परिभाषित करता है।

एक व्यवसायी के रूप में राधाकिशन दमानी हमेशा अपने ग्राहकों, विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं को विशेष महत्व देते हैं, उनके डी मार्ट के स्टोर इन्हीं सिद्धांतों पर चलकर विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं की समय पर भुगतान करके अपने ग्राहकों को छूट जैसे ऑफर देने में भी सक्षम हो पाते हैं।  

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