Broom Making यानिकी झाड़ू बनाने का काम India में ही नहीं पूरे विश्व में सदियों से चला आ रहा है, हालाँकि ग्रामीण इलाकों में पहले अधिकतम रूप से प्राक्रतिक झाड़ू का उपयोग किया जाता था, प्राक्रतिक झाड़ू से आशय किसी घास या पेड़ के पत्तों को एकत्र करके उसे वैसे ही उपयोग में लाने से है | जबकि मनुष्य द्वारा बनाई गई झाड़ू से आशय जंगल से Broom Grass या अन्य कोई घास, पेड़ पौंधो के पत्ते लाकर उसको एकत्रित करके उसके पीछे प्लास्टिक या धातु का हैंडल लगाकर या अन्य किसी Material की सहायता से Professional Look देने का है | India में वैसे तो लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार की घास एवं पेड़ों के पत्तों का उपयोग करके अपने व्यक्तिगत use के लिए विभिन्न प्रकार की झाड़ू बनाई जाती हैं | लेकिन व्यवसायिक तौर पर हमें बाज़ार में तीन प्रकार की फूल झाड़ू, सीक वाली झाड़ू, और पेड़ के पत्तों से निर्मित झाड़ू ही देखने को मिलती है जिन्हें हम Hard Broom एवं Soft Broom दो भागों में विभाजित कर सकते हैं  | Broom Making business का यह Idea ग्रामीण इलाकों से भी इसलिए सफल हो सकता है क्योकि झाड़ू का उपयोग सर्वत्र साफ़, सफाई करने हेतु किया जाता है | यद्यपि अन्य देशों में व्यवसायिक तौर पर फूल झाड़ू बनांते समय Broom Grass जिसका वैज्ञानिक नाम Thysanolaena maxima, Poaceae है, का किया जाता है, लेकिन India में खजूर के पत्तों को बीच में से काटकर, बांस के पतली पतली सीकें तैयार करके,Coconut Sticks, Corn Husk, Palm Leaves और विभिन्न प्रकार की घास से  भी झाड़ू बनाई जाती हैं | India में अभी भी बहुत सारे राज्यों जैसे राजस्थान में Broom Making का काम Manually हाथों से किया जाता है यहाँ तक की व्यवसायिक झाडुओं को भी हाथों से ही तैयार किया जाता है, जिसमे कारीगर हाथ, एवं पैर की अँगुलियों से लेकर दांतों तक का उपयोग Broom Making के दौरान करते हैं |

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Broom Making Business Kya hai:

Broom यानिकी झाड़ू दैनिक कामों को पूर्ण करने में काम आने वाली एक महत्वपूर्ण वस्तु है | यद्यपि स्थान विशेष के आधार पर इसका आकार, बनाने का तरीका, बनाने के लिए उपयोग में लाया गया कच्चा माल इत्यादि अंतरित हो सकता है | लेकिन इसका उपयोग नहीं बदल सकता क्योकि इसे साफ़ सफाई के कामों में ही उपयोग में लाया जाता है, और हर जगह लाया जाता है | या हम झाड़ू को सफाई करने के  उपकरण की संज्ञा दे सकते हैं, जिसे विभिन्न प्रकार की घासों, पत्तों इत्यादि से निर्मित किया जा सकता है | और Broom Making business को हम झाड़ू का निर्माण कर उन्हें बेचकर कमाई करने की क्रिया कह सकते हैं |

Market Potential in Broom/Jhadu Making

Broom Making business में Market Potential का अंदाज़ा सिर्फ इसी बात से लगा लें, की India में कोई एक घर भी ऐसा नहीं होगा जहाँ झाड़ू का इस्तेमाल नहीं किया जाता हो | माना की Technology ने Cleaning Industry को भी बहुत सारे Equipment दिए हैं, लेकिन फिर भी आप बड़े बड़े ऑफिस, होटल, माल इत्यादि में चले जाएँ हर कहीं आपको झाड़ू देखने को मिलेगी ही मिलेगी, उसका एक कारण तो यह है की बहुत सारी जगह ऐसी होती हैं जहाँ सिर्फ झाड़ू से ही साफ़ किया जा सकता है | इसके अलावा नगर पालिका के सफाई कर्मियों या अन्य सार्वजनिक स्थान के सफाई कर्मियों द्वारा बहुतायत मात्रा में झाड़ू का उपयोग किया जाता है | एक आंकड़े के मुताबिक इंडिया में प्रति परिवार झाड़ू की खपत प्रति वर्ष 4 झाड़ू है | जो की अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है आसार लगाये जा रहे हैं की आने वाले समय में India में प्रति परिवार झाड़ू की खपत बढ़ेगी | घरों में प्राय: छोटे हैंडल वाली झाड़ू उपयोग में लायी है, वही व्यवसायिक एवं सार्वजनिक स्थानों जैसे शिक्षण संस्थान, हॉस्पिटल, नगर निगम में बड़ी हैंडल वाली झाड़ू उपयोग में लायी जाती है | Broom Making business कर रहे उद्यमी को अपने आंशिक ग्राहकों की पसंद के आधार पर ही कच्चा माल, झाड़ू का साइज़ एवं प्रकार इत्यादि तय करनी चाहिए |

Required Raw material and Equipment for Broom Making:

यद्यपि Broom Making Manually यानिकी हाथों एवं मनुष्य के अन्य अंगों जैसे पैर की अँगुलियों इत्यादि का उपयोग करके ही की जाती है, लेकिन झाड़ू पर लगने वाले Plastic या धातु के हैंडल बनाने के लिए मशीनरी की आवश्यकता हो सकती है | वैसे उद्यमी चाहे तो Metal Cutter की मदद से भी हैंडल बना सकता है, या फिर Plastic का हैंडल Market से खरीद सकता है  | इसके बावजूद फिर भी Broom Making business कर रहे उद्यमी को कुछ Hand Tools जैसे Grass Cutter, चाकू, Metal Cutter, कैंची और हथोडी की आवश्यकता होती है | Raw Materials स्थानीय विशेषताओं के आधार पर बदल सकता है जैसे Coconut उत्पादित क्षेत्रो में Coconut Stick, Palm Leaves इत्यादि का उपयोग किया जा सकता है एवं अन्य क्षेत्रों में खजूर के पत्तों, Broom Grass, बांस या कोई स्थानीय घास जिसका उपयोग स्थानीय लोग अस्थायी झाड़ू बनाने के लिए करते हों किया जा सकता है | इसके अलावा Binding एवं Packaging Materials भी Broom Making business करने के लिए चाहिए होता है |

Broom Making Process In Hindi:

Broom Making या झाड़ू बनाने की प्रक्रिया बेहद ही आसान है, आप इसे घर में आसानी से बना सकते हैं और शायद कभी आपने बनाया भी होगा | लेकिन जहाँ पर Business की बात आती है तो वहां पर उत्पाद की गुणवत्ता और Looking का बेहद ध्यान रखना पड़ता है, ताकि लोग उद्यमी के उत्पाद को पसंद करें | या यूँ कहें Product की Look Professional होनी चाहिए और चूँकि BIS द्वारा Broom Making के लिए कोई खास Specifications निर्धारित नहीं किये गए है इसलिए इसकी गुणवत्ता ग्राहकों की पसंद के हिसाब से होनी चाहिए | सबसे पहले जंगल या यदि किसी उद्यमी ने Broom Grass उगा रखी हो, तो उसे काट लिया जाता है, और इन्हें एक साथ एकत्रित करके बहुत सारे बंडल बना लिए जाते हैं, और इन्हें उस स्थान पर लाया जाता है जहाँ Broom Making अर्थात झाड़ू बनाने का काम करना हो | झाड़ू बनाते समय Broom Grass की अलग अलग फांकों को एकत्रित करते हुए यह ध्यान रखना पड़ता है, की एक झाड़ू बनाने में लगभग कितनी फांके लगेंगी, कारीगर चाहे तो इंच टेप या फिर मुट्ठी में भींच कर भी उसकी मोटाई का अनुमान लगा सकता है, जब एक झाड़ू के लायक घास इकट्ठी कर ली हो तो नीचे से इसको मोटा करने के लिए बांस की पतली पतली छड़ियाँ इन फांकों के बीच रख दी जाती हैं | उसके बाद इसे किसी तार से Bind अर्थात बाँध दिया जाता है, उसके बाद थोडा नीचे से और थोडा सिरे से काट लिया जाता है, ताकि झाड़ू दिखने में आकर्षक लगे | Broom Making के Process में अंतिम Step इसको Handle से सुशोभित करना होता है अर्थात झाड़ू को  Plastic/Metal Handle में डाल दिया जाता है, उद्यमी चाहे तो किसी रंग बिरंगी टेप का इस्तेमाल भी हैंडल के तौर पर कर सकता है |

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    March 24, 2021
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