Cattle Feed Manufacturing business की बात करें तो यह ग्रामीण भारत में चलने वाला एक फायदेमंद बिज़नेस हो सकता है, क्योंकि अक्सर देखा गया है की लोगों द्वारा डेरी फार्मिंग, गोट फार्मिंग, गाय पालने का व्यवसाय, भैंस पालने का व्यवसाय शहर से दूर ग्रामीण इलाकों की तरफ ही किया जाता है | Cattle Feed manufacturing business में मुख्य ग्राहक के तौर पर उपर्युक्त फार्मिंग से जुड़े व्यवसायी एवं अन्य पशुपालक होते हैं |

इसलिए ऐसी इकाई को उसी लोकेशन पर स्थापित करना अधिक लाभदायक रहेगा जहाँ गाय, भैस एवं बकरी के फार्मों की संख्या अधिक हो, यद्यपि इस लेख से पहले भी हम एक ऐसे ही बिज़नेस पोल्ट्री फीड मिल के बारे में बता चुके हैं उद्यमी चाहे तो Cattle Feed के अलावा Poultry Feed का भी उत्पादन अपनी इकाई में कर सकता है |

उद्यमी को इस बात का विशेष ध्यान देना चहिये की यह बिज़नेस स्थानीय क्षेत्र पर आधारित बिज़नेस है इसलिए ऐसे क्षेत्र जहाँ पशुपालन चाहे वह व्यवसायिक तौर पर किया जा रहा हो, या अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए में Cattle Feed Manufacturing business करना लाभदायक हो सकता है |

Cattle-feed

Cattle Feed बनाने का व्यापार क्या है?

Cattle feed का यदि हम शाब्दिक अर्थ निकालेंगे तो हम पाएंगे की अंग्रेजी शब्द Cattle का हिंदी में अर्थ पशु से लगाया जा सकता है वही Feed का अर्थ चारे से अर्थात पशुओं के लिए चारे के उत्पादन की व्यवसायिक क्रिया यानिकी जिसमे उद्यमी पशुओं के लिए चारे का उत्पादन करके अपनी कमाई करने हेतु उसे बेच रहा होता है को ही Cattle Feed Manufacturing Business कहा जा सकता है |

इस पशुधन में केवल गाय, भैंस एवं बकरी ही सम्मिलित नहीं है अपितु भेड़, सुअर, याक इत्यादि भी साम्मिलित हैं | मुख्य रूप से Cattle feed को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है, सूखा चारा, हरा चारा एवं Concentrate फ़ूड जिसमे से हरे चारे का उत्पादन पशुपालक अधिकतर तौर पर In House ही करते हैं लेकिन अन्य दो श्रेणियों के चारे का उत्पादन Cattle feed manufacturing Business के अंतर्गत करके इसे बेचकर अपनी कमाई की जा सकती है |

पशुओं का चारा बिक्री होने की संभावना

वर्ष 2015 में यस बैंक द्वारा जारी एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2020 तक भारत का पशु चारा उद्योग दुगुना हो जायेगा |  यह इसलिए क्योंकि समय व्यतीत होने के साथ साथ फार्मिंग के क्षेत्र में भी नए नए मेथड एवं टेक्नोलॉजी अपनाई जाने लगी है | वर्तमान में हम यदि देश में Cattle Feed की आवश्यकता की बात करें तो यह प्रति वर्ष लगभग 80 Mega Tonne है | इसके अलावा भारतवर्ष में पशुधन के चारे की डिमांड एवं सप्लाई में बहुत बड़ा अंतर देखा जा सकता है |

पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग द्वारा जारी एक आंकड़े के मुताबिक देश में जहाँ सूखे चारे की डिमांड 416 Million Tonne है वही इसकी आपूर्ति केवल 253 Million Tonne ही हो पाती है |

हरे चारे की डिमांड जहाँ 222 Million Tonne है वही इसकी आपूर्ति केवल 143 Million Tonne ही हो पाती है | इसके अलावा Concentrate Food की डिमांड जहाँ 53 Million Tonne है वहीँ आपूर्ति केवल 23 Million Tonne ही हो पाती है | देश में Cattle feed की मांग एवं सप्लाई में यह बड़ा अंतर यह साबित करता है की अभी भी Cattle feed manufacturing Business में नए उद्यमियों एवं इकाइयों के लिए सुनहरे अवसर विद्यमान हैं |

आवश्यक मशीनरी और उपकरण :

Cattle Feed manufacturing Business को उद्यमी चाहे तो एक ऐसी मशीन से भी शुरू कर सकता है जिसकी कीमत 1.25 लाख से लेकर 1.5 लाख रूपये तक है | लेकिन यदि उद्यमी बड़े स्तर पर Cattle Feed से जुड़ी विभिन्न उत्पादों का उत्पाद करना चाहता है तो उसे निम्नलिखित मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है |

  • मिक्सर कम से कम 100 किलो की क्षमता वाला |
  • उपकरणों से साथ ग्राइंडर |
  • उपकरणों से साथ Pulverizer
  • 10 HP मोटर के साथ स्टार्टर एवं अन्य उपकरण |
  • भार मापक यंत्र |
  • बैग को सिलने वाली मशीन |
  • हाथ से चालित अन्य उपकरण |

आवश्यक कच्चा माल:

Cattle Feed manufacturing Business में काम आने वाला मुख्य कच्चे माल की लिस्ट इस प्रकार से है |

  • गेहूं का भूसा (Wheat Bran)
  • धान का भूसा (Rice Bran)
  • चने के छिलके (Gram Husk)
  • गुड़
  • विभिन्न उत्पादों से निर्मित De oiled Cake.
  • चावल एवं मक्के के मोटे टुकड़े

निर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Process of Cattle Feed).

यद्यपि प्रयुक्त किये जाने वाले कच्चे माल के आधार पर एवं उपयोग में लायी जाने वाली मशीन एवं उपकरणों के आधार पर इस बिज़नेस में Manufacturing Process अलग अलग हो सकता है | लेकिन इस प्रक्रिया में सर्वप्रथम कच्चे माल जैसे गेहूं के भूसे, धान के भूसे, De oiled  Cake, चने के छिलके इत्यादि को Mixer Machine की मदद से मिक्स कर दिया जाता है | और उसके बाद इसे pulveriser की ओर अग्रसित कराया जाता है जहाँ इन्हें इच्छित आकृति में परिवर्तित कर दिया जाता है |

उसके बाद इस मटेरियल को स्टोरेज बिन में डाला जाता है और इसके बाद इसे एक मिक्सर की ओर अग्रसित कराया जाता है जहाँ इस सामग्री को एक दुसरे में अच्छी तरह मिला लिया जाता है | इसी प्रक्रिया में आवश्यक मात्रा में गुड़ भी इसमें डाल दिया जाता है | अब जब यह सारी सामग्री आपस में अच्छी तरह मिल जाती है तो इस सामग्री को होपर में डाला जाता है |

हॉपर से एक बाल्टी इस सामग्री को टेंपरिंग स्क्रू की तरफ भेजती है, जहां इस सामग्री को नरम करने के लिए पैलेटिसेशन से पहले खुली भाप प्रदान की जाती है | उसके बाद इस Cattle feed manufacturing Process में सामग्री को टेंपरिंग स्क्रू से pelletiser की ओर अग्रसित किया जाता है जहां यह एक स्क्रू के माध्यम से बनाई जाती है और फिर वांछित व्यास में बाहर निकल आता है |

pelletiser Machine से निकलने वाले यह छर्रे गर्म होते हैं जिन्हें Pellet cooler में ठंडा कर दिया जाता है, जहाँ वे ठंडा होने के पश्चात कड़े होना शुरू हो जाते हैं | उसके बाद इन ठन्डे पेलेट को एक Screen Vibratory मशीन से पास कराया जाता है जिससे unpelletise Material को हटा दिया जाता है |

10 Comments

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