चिक्की बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? Chikki Manufacturing Business.

Chikki Manufacturing पर बात करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि यह एक मीठा उत्पाद होता है जिसे विभिन्न प्रकार के नट्स जैसे मूंगफली, अखरोट, बादाम, काजू और अन्य सामग्रियों को गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है । चिक्की बनाने के लिए नट्स और विभिन्न सामग्रियों को गुड़ या चीनी से बनी गाढ़ी चाशनी में मिलाया जाता है। इस मिश्रण को ठंडा करने के बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है। Chikki Manufacturing Process में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लायी जाने वाली ऐसी बहुत सारी सामग्री जैसे मूंगफली, काजू की गुठली, तिल के बीज, सूखे नारियल के टुकड़े, ड्राई फ्रूट्स इत्यादि हैं। वैसे देखा जाय तो चिक्की नामक इस मीठे उत्पाद को लगभग सभी आयु वर्ग के लोग पसंद करते हैं। लेकिन विशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों एवं ग्रामीण इलाकों में यह बेहद प्रसिद्ध है। इसलिए इस तरह का यह उत्पाद देश के किसी भी कोने में उत्पादित किया जा सकता है।

chikki manufacturing business in hindi

चिक्की क्या है (What is Chikki in Hindi)

चिक्की की यदि हम बात करें तो यह एक मीठी पट्टी की तरह होती है और चूँकि इसे बनाने में अधिकतर बाइंडिंग एवं स्वीट एजेंट के तौर पर गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए कई क्षेत्रों में इसे गुड़पट्टी के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें मेवे, तिलहन, भुने या पके हुए अनाज, दालें या फलियों का इस्तेमाल और बाइंडिंग एजेंट के तौर पर गुड़, चीनी और तरल ग्लूकोज का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। इसमें प्रोटीन, मोनो- असंतृप्त वसा अम्ल, एंटीऑक्सिडेंट, खनिज और विटामिन के समृद्ध स्रोत विद्यमान होते हैं यही कारण है की चिक्की खाने के कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। इसे कैलोरी के एक बेहतरीन स्रोतों में जाना जाता है, और यह कोरोनरी, तंत्रिका और त्वचा रोगों में भी फायदेमंद होता है। यही कारण है की चिक्की मानव शरीर के समग्र विकास में सहायक होती है। लोगों में अपने स्वास्थ्य के प्रति बढती जागरूकता के चलते भी Chikki Manufacturing Business शुरू करना लाभकारी हो सकता है।

बिक्री की संभावना   

खास तौर पर मूंगफली से बनी चिक्की जिसे पाश्चात्य देशों में पीनट ब्रिटल के नाम से भी जाना जाता है, यह एक पारम्परिक रेडी टू ईट स्वीट स्नैक्स है। यह पूरे देश में बेहद पसंद किया जाने वाला उत्पाद है, जिसे सभी वर्गों की आबादी द्वारा खाने के इस्तेमाल में लाया जाता है। और यह भी सत्य है की Chikki Manufacturing Business में किसी बड़े ब्रांड ने प्रवेश नहीं किया है इसलिए चिक्की की अधिकतर मांग स्थानीय निर्माताओं द्वारा ही पूर्ण की जाती है। जिसका अभिप्राय यह है की इस औद्योगिक क्षेत्र में प्रमुख ब्रांड बेहद कम हैं और इसका बाजार पूर्ण रूप से असंगठित क्षेत्रों द्वारा ही नियंत्रित किया जाता है। और इसमें रिटेल यानिकी खुदरा विक्रेता अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खाद्य तेलों के बीज एवं चीनी से निर्मित उत्पादों को स्वस्थ, पौष्टिक और ऊर्जावान माना जाता है और चिक्की भी इन्हीं उत्पादों में से एक है जिसकी मांग बाज़ारों में लगातार बढती जा रही है। लेकिन बाज़ारों में इसकी उपलब्धता अक्सर सर्दियों के मौसम में ही पर्याप्त हो पाती है।  

चिक्की बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start Chikki Manufacturing Business):

यद्यपि उद्यमी chikki Manufacturing Business को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग में से किसी भी स्तर पर शुरू कर सकता है। वह इसलिए क्योंकि इस व्यवसाय में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी एवं उपकरणों की कीमत उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर अलग अलग होती है। इसलिए इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमी को इसी बात का निर्णय पहले लेने की आवश्यकता होती है, की वह अपने व्यवसाय को किस स्तर पर शुरू करना चाहता है। ताकि उसके बाद उसी आधार पर वह इस बिजनेस को शुरू करने के लिए जमीन, मशीनरी, कच्चा माल, वित्त, लाइसेंस एवं पंजीकरण इत्यादि का प्रबंध कर सके। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए उद्यमी को निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता होती है।

1. लोकल रिसर्च करें (Local Research for Chikki Manufacturing Business):

Chikki Manufacturing Business शुरू करने से पहले उद्यमी को अनेकों बातों पर जानकारी प्राप्त करने के लिए लोकल रिसर्च बेहद जरुरी हो जाती है, जो उद्यमी को आगे के निर्णय एवं चुनौतियों से निबटने के लिए योजना बनाने में सहायक होती हैं। वैसे यदि हम चिक्की की बात करें तो ये आम तौर पर हमें बाज़ारों में सिर्फ सर्दियों में ही दिखती हैं वह इसलिए क्योंकि मूंगफली की फसल भी तभी होती है। और हमारे देश भारत में मूंगफली एवं गुड़ से बनी चिक्की को लोग बहुत पसंद करते हैं क्योंकि यह सस्ती एवं स्वादिष्ट होती है। इसलिए यदि यह एक मौसमी व्यवसाय है तो उद्यमी को यह व्यवसाय शुरू करने से पहले इस बात पर विचार अवश्य करना चाहिए की वह कुछ महीने तो चिक्की का उत्पादन करेगा, लेकिन जब इसका सीजन खत्म हो जायेगा फिर वह उसी प्लांट में किस चीज का उत्पादन करेगा? इसके अलावा Chikki Manufacturing Business में इस्तेमाल में लाये जाने वाले प्रमुख कच्चे माल के तौर पर गुड़, चीनी, मूंगफली के दानों, काजू की गुठली, तिल के बीज इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर उद्यमी को कच्चे माल की उपलब्धता पर रिसर्च करने के अलावा प्रतिस्पर्धा का भी आकलन करने की आवश्यकता होती है।     

2. जमीन एवं बिल्डिंग का प्रबंध

Chikki Manufacturing Business शुरू करने के लिए उद्यमी चाहे तो किसी स्थानीय बाजार में कोई दुकान या बिल्डिंग किराये पर ले सकता है। यदि उद्यमी को लगता है की स्थानीय बाजार में किराया इत्यादि अधिक है तो फिर उद्यमी उस एरिया के 4-5 किलोमीटर के रेडियस में जहाँ भी सस्ती दुकान या जमीन किराये पर मिले, वहीँ इसका प्रबंध कर सकता है बशर्ते वहां पर बिजली, पानी, सड़क एवं श्रमिकों की उपलब्धता आसानी से हो। उद्यमी को इन्वेंटरी के लिए जगह, कार्यशाला या विनिर्माण क्षेत्र के लिए जगह, बिजली आपूर्ति उपयोगिताओं के लिए स्थान, जनरेटर सेटअप के लिए स्थान के लिए जगह की आवश्यकता होती है। और उद्यमी को एक छोटे से ऑफिस की भी आवश्यकता हो सकती है, इसलिए इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी को 700-800 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता हो सकती है।   

3. लाइसेंस एवं पंजीकरण

Chikki Manufacturing Business शुरू करने वाला उद्यमी अपने व्यवसाय को प्रोप्राइटरशिप के तौर पर रजिस्टर करा सकता है। यह इसलिए क्योंकि शुरूआती दौर में उद्यमी का व्यापार भी टर्नओवर इत्यादि की दृष्टी से छोटा होता है, इसलिए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इत्यादि रजिस्टर कराने की बाध्यता नहीं होती है। और प्रोप्राइटरशिप के तहत रजिस्ट्रेशन आसान एवं कम औपचारिकताओं वाला है यहाँ तक की इस प्रक्रिया को ऑनलाइन ही पूर्ण किया जा सकता है। उसके बाद उद्यमी को टैक्स रजिस्ट्रेशन, बैंक में चालू खाता इत्यादि खोलने की भी आवश्यकता हो सकती है। चूँकि यह खाद्य पदार्थ से जुड़ा हुआ व्यवसाय है इसलिए उद्यमी को फ़ूड लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है। अपने व्यवसाय को एमएसएई के तौर पर पहचान दिलाने के लिए उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन भी किया जा सकता है।      

4. मशीनरी एवं उपकरण (Machinery for Chikki Manufacturing Business)

Chikki Manufacturing Business में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट इस बात पर निर्भर करती है की उद्यमी कितनी उत्पादन क्षमता का प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है। क्योंकि कम उत्पादन क्षमता वाली इकाई के लिए कम मशीनरी एवं अधिक क्षमता वाली इकाई के लिए अधिक कीमत वाली मशीनरी की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन कुछ आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट निम्नवत है।

  • सिरप बनाने वाले वेसल्स
  • चिक्की कुकिंग और मिक्सिंग पैन
  • चिक्की रोलिंग, शीटिंग और कटिंग लाइन
  • फ्लो रैप पैकिंग मशीन
  • आर ओ प्लांट और अन्य उपकरण    

उपर्युक्त मशीनरी की खरीदारी करने से पहले उद्यमी को विभिन्न सप्लायर से कोटेशन मंगाकर इनका तुलनात्मक आकलन करने के पश्चात किसी सप्लायर का चुनाव करना चाहिए ।

5. कच्चा माल एवं कर्मचारी

जहाँ तक Chikki Manufacturing Business को शुरू करने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की बात है उद्यमी को मशीन से वांछित चिक्की का उत्पादन करने के लिए कुशल एवं अनुभवी मशीन ऑपरेटर को नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है। इनके अलावा उद्यमी को एक कार्य स्टेशन से दुसरे कार्य स्टेशन में सामग्री इत्यादि पहुँचाने के लिए भी श्रमिकों की आवश्यकता होगी, और ऑफिस में काम करने के लिए भी शिक्षित एवं कुशल कर्मचारी नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है। इस प्रकार उद्यमी को 7-8 कर्मचारी नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है। इस व्यवसाय में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कच्चे माल की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • चीनी 
  • भुनी हुई मूंगफली के दाने
  • गुड़
  • तरल ग्लूकोज
  • पैकिंग सामग्री

कच्चे माल की खरीदारी के लिए भी उद्यमी उपर्युक्त पद्यति को ही अपना सकता है ।

 6. चिक्की का निर्माण (Start Chikki Manufacturing Business)

घरेलु तौर पर बहुत सारे लोग अपने रसोईघर से ही चिक्की का निर्माण कर लेते हैं इसका अभिप्राय यह है की इस तरह की यह प्रक्रिया बेहद ही आसान है। Chikki Manufacturing Process में सबसे पहले सभी सामग्री को अच्छे से तोल लिया जाता है, और उसके बाद गुड़ को पिघलाकर उसका सिरप तैयार कर लिया जाता है । और इस प्रक्रिया के दौरान इसमें थोड़ा पानी भी मिलाया जाता है और आवश्यकतानुसार चीनी भी मिलाई जाती है। और फिर इस सिरप को अच्छे ढंग से पकाया जाता है और इसमें भुनी हुई दो भागों में विभाजित मूंगफली के दाने मिलाये जाते हैं। उसके बाद तैयार द्रव्यमान को रोल किया जाता है और आवश्यक मोटाई की शीट तैयार की जाती है और फिर इसी शीट से छोटे छोटे टुकड़े जैसे 10g और 25 g में काट लिया जाता है। इसके बाद इन तैयार बार को ठंडा करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है और ठंडा होने के बाद फ्लो रैप पैकिंग मशीन के माध्यम से पैक कर दिया जाता है ।    

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |