Communication यानिकी संचार की आवश्यकता हमें अपने व्यक्तिगत कामों के लिए तो पड़ती ही है। व्यवसायिक कार्यों को निपटाने के लिए और भी, अधिक प्रभावी संचार की आवश्यकता होती है। संचार की यदि हम बात करें तो यह एक स्थान, व्यक्ति या समूह से सूचनाओं को दूसरे स्थान या व्यक्ति को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया है। प्रत्येक Communication यानिकी संचार में एक प्रेषक यानिकी सूचनाएं देने वाला या प्रेषित करने वाला, एक सन्देश और एक प्राप्तकर्ता यानिकी रिसीवर शामिल होता है। हालांकि बहुत सारे लोगों को संचार आसान लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह एक बहुत ही जटिल विषय है। जिसका मनुष्य के व्यक्तिगत और व्यवसायिक जीवन में बड़ा महत्व है।

संचार प्रेषित करने वाले से लेकर रिसीव होने तक सन्देश का प्रसारण बहुत सी चीजों से प्रभावित हो सकता है। संचार को प्रभावित करने वाले कारकों में भावनाएं, सांस्कृतिक स्थिति, संचार के लिए इस्तेमाल में लाये जाने वाले माध्यम, और स्थान शामिल हैं।  इसमें कठिनाई यह है की दुनिया के अधिकतर नियोक्ताओं द्वारा अच्छे संचार कौशल को बेहद महत्व दिया जाता है जबकि सटीक, प्रभावी और स्पष्ट संचार वास्तव में बेहद कठिन होता है। लेकिन यह व्यवसायिक गतिविधियों को सफलतापूर्वक करने के लिए बेहद जरुरी होता है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से Communication यानिकी संचार के बारे में जानने का प्रयत्न कर रहे हैं।

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संचार क्या है (What is Communication in Hindi)

जब हम बोलकर, लिखकर या किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल करके किसी दुसरे व्यक्ति को जानकारी या सूचनाओं का प्रदान करते हैं, तो इसे Communication या संचार कहा जाता है। इस प्रक्रिया में विचारों और भावनाओं का सफल साझाकरण होता है। स्पष्ट और आसान शब्दों में कहें तो जानकारी, सन्देश, सूचना इत्यादि आदान प्रदान करने की प्रक्रिया ही संचार कहलाती है। इस परिभाषा से स्पष्ट हो जाता है की, केवल सूचनाओं के प्रसारण को ही संचार नहीं कहा जाता है। बल्कि सन्देश, जानकारी, विचार और भावनाओं का साझाकरण भी संचार ही कहलाता है।

संचार के प्रमुख तत्व (Main Elements of Communication in Hindi):  

संचार लगातार चलने वाली यानिकी सतत प्रक्रिया है। इसमें प्रमुख रूप से तीन तत्व संचार प्रेषित करने वाला यानिकी प्रेषक, सन्देश और सन्देश प्राप्त करने वाला रिसीवर होते हैं। संचार प्रक्रिया में और भी तत्व शामिल होते हैं, इनके बारे में संक्षेप में हम नीचे बता रहे हैं।

  1. संचारक या प्रेषक (Sender): Communication Process में प्रेषक या संचारक सन्देश भेजता है यही से संचार की प्रक्रिया शुरू होती है। यह संचार लिखकर, बोलकर, इशारों से या कुछ अन्य के माध्यम से भी हो सकता है।
  2. विचार (Ideas):  इस प्रक्रिया में विचार से आशय संचार के विषय से है जो एक राय, दृष्टिकोण, भावनाएं, विचार, आदेश या सुझाव कुछ भी हो सकता है।   
  3. संकेतीकरण (Encoding): संचारक या प्रेषक द्वारा सन्देश को सांकेतिक रूप से शब्दों, चित्रों, इशारों इत्यादि में कूटबद्ध किया जा सकता है ।
  4. संचार का माध्यम (Communication Channel):  संचारक द्वारा संचार के माध्यम का इस्तेमाल संचार के लिए किया जाता है इसमें टेलीफोन, इन्टरनेट, पोस्ट, कूरियर, फैक्स, ईमेल इत्यादि शामिल हैं ।
  5. प्राप्तकर्ता (Receiver): यह वह व्यक्ति होता है जो सन्देश प्राप्त करता है या जिसके लिए संचारक ने सन्देश भेजा है। रिसीवर को जब सन्देश प्राप्त हो जाता है तो वह उसे उचित परिप्रेक्ष्य में समझकर सन्देश के अनुसार कार्य करता है। तभी संचार का उद्देश्य सफल माना जाता है। 
  6. डिकोडिंग (Decoding): प्राप्तकर्ता उस सन्देश को समझने के लिए उसे अपनी समझ के अनुसार रूपांतरित करता है ताकि वह उसे अच्छी तरह से समझ कर उसका अर्थ निकाल सके।  
  7. फीडबैक : एक बार जब रिसीवर ने प्रेषक को इस बात की पुष्टि दे दी की उसे उसका सन्देश मिल गया है और उसे वह समझ में आ गया है तो इस प्रकार से Communication Process पूर्ण हो जाता है।

संचार का महत्व (Importance of Communication in Hindi):

संचार के कुछ प्रमुख महत्व इस प्रकार से हैं।

  • संचार समन्वय का आधार होता है, इसके माध्यम से मेनेजर कर्मचारियों को संगठनात्मक लक्ष्यों, उनकी उपलब्धियों के तरीकों और पारस्परिक संबंधों के बारे में बता पाने में सक्षम होता है। यह विभिन्न कर्मचारियों के बीच और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है। यही कारण है की Communication किसी भी संगठन में एक समन्वय आधार के तौर पर कार्य करता है।
  • किसी संगठन का प्रबंधक उसके भौतिक तत्वों और मानव को सुचारू रूप और कुशलता से चलाने के लिए कोर्डिनेशन करता है। यह कोर्डिनेशन उचित संचार के बिना संभव नहीं होता है।
  • उचित संचार के माध्यम से मैनेजर निर्णय लेने में सक्षम हो पाते हैं, यदि प्रबंधक के पास संचार का अभाव या जानकारी का अभाव रहेगा, तो वह उचित निर्णय नहीं ले पायेगा। इस प्रकार से देखें तो Communication उचित एवं सही निर्णय लेने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
  • संगठन का मैनेजर संगठन के लक्ष्य निर्धारित करता है, और अपने अधीनस्थो को उन लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए निर्देश जारी करता है और काम का आवंटन करता है। इन सभी पहलुओं में संचार प्रमुख रूप से शामिल होता है। इस प्रकार से देखें तो प्रबंधकों और सम्पूर्ण संगठन के त्वरित और प्रभावी प्रदर्शन के लिए संचार बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • दो तरफ़ा संचार प्रक्रिया जो श्रमिकों और प्रबंधकों के बीच होती है, वह श्रमिकों और प्रबंधकों के बीच सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देती है। इससे व्यवसायिक संगठन में शांति और कुशल संचालन बना रहता है।
  • अच्छा संचार औदयोगिक इकाई में कार्यरत श्रमिकों को काम के भौतिक और सामाजिक पहलू को समायोजित करने में मदद करता है। मानवीय संबंधों को बेहतर बनाने में भी सहायक होता है। संचार की कुशल प्रणाली के माध्यम से अधीनस्थों को प्रेरित, प्रभावित और संतुष्ट किया जा सकता है।       

संचार के प्रकार (Types of Communication in Hindi):

मौखिक संचार (Verbal Communication):

मौखिक संचार तब होता है जब हम किसी के साथ बोलकर अपनी बात कहते हैं वर्तमान में मौखिक संचार के अनेकों माध्यम जैसे टेलीफोन, स्काइप, ज़ूम, आमने सामने किसी से बात करना इत्यादि शामिल हैं। आम तौर पर मौखिक संचार आमने सामने व्यक्तियों के बीच अधिक होता है इसके अलावा फ़ोन और इन्टरनेट के अनेकों माध्यमों के जरिये भी मौखिक संचार होता है।

अनकहा संचार (Non Verbal Communication):

कभी कभी स्थिति ऐसी होती है की हमें बोलने की नहीं बल्कि अमौखिक रूप से भी अपनी बात को रखना पड़ता है। अनकहे संचार की श्रेणी में चेहरे के भाव, आसन, आँखों का संपर्क, हाथों की चहलकदमी, हाथों कला स्पर्श इत्यादि शामिल हैं। माना की यदि आप किसी से बातचीत कर रहे हैं और उस बातचीत के दौरान रिसीवर को उबकाई आ रही है, आँखों में थकान सी दिख रही है फिर भले ही वह मौखिक रूप से आपसे कुछ और कह रहा हो लेकिन अशाब्दिक शब्दों का मतलब स्पष्ट है की वह आपकी बातों से उब रहा है।

लिखित संचार (Written Communication):

व्यवसायिक संगठनों में कुछ भी कार्य करने के लिए लिखित संचार का होना अनिवार्य माना गया है इसलिए इस प्रकार के Communication में अनेकों जटिलताएँ होने के बावजूद यह बेहद ही महत्वपूर्ण है।वर्तमान में पोस्ट ऑफिस कूरियर के माध्यम से लिखित दस्तावेज भेजना, ईमेल, मेमो, रिपोर्ट, फेसबुक पोस्ट, ट्वीट, एग्रीमेंट इत्यादि सभी लिखित संचार के ही उदाहरण हैं।

सुनना (LISTENING) :

हालांकि देखा जाय तो सुनने का कार्य संचार के प्रकारों में अपना स्थान नहीं बनाता है। लेकिन वास्तविकता यह है की सुनना भी संचार के सबसे महत्वपूर्ण प्रकारों में से एक है क्योंकि यदि रिसीवर प्रेषक की बात सुनेगा नहीं, तो वह प्रभावी रूप से उस कार्य को करेगा कैसे? इसलिए बातचीत को सफल बनाने में सुनना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

दृश्य संचार (Visual Communication):  

दृश्य संचार से आशय टेलीविजन के माध्यम से हो रहे संचार, यूट्यूब, फेसबुक, इन्स्टाग्राम इत्यादि मंचों के माध्यम से हो रहे संचार से लगाया जा सकता है । संचार का यह प्रकार वर्तमान जीवनशैली में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सोशल मीडिया, टेलीविजन इत्यादि के माध्यम से लोग न सिर्फ अपने विचार या मनोरंजन करते हैं बल्कि उद्यमी अपने व्यवसाय का विज्ञापन भी करते हैं ।

संचार का उद्देश्य (Purpose of Communication in Hindi):

एक संगठन में काम करवाने की जिम्मेदारी प्रबंधकों की होती है उन्हें काम को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए समय समय पर अपने अधीनस्थों को काम इत्यादि के लिए सूचित करना पड़ता है और उन्हें बताना पड़ता है की वे सौपें गए काम को बेहतर ढंग से कैसे कर सकते हैं? इसलिए किसी भी संगठन में Communication बेहद जरुरी होता है। संचार के उद्देश्यों की लिस्ट इस प्रकार से है।

जानकारी का प्रवाह –

प्रासंगिक जानकारी ऊपर से नीचे की ओर या नीचे से ऊपर की ओर लगातार प्रवाहित होनी चाहिए। संगठन में संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी स्तरों पर कर्मचारियों को उनके काम के बारे में सूचित किया जाना आवश्यक होता है। जानकारी या सूचना को उस भाषा में पहुँचाना चाहिए जिस भाषा में कर्मचारी समझ सकें कोई गलत सूचना न पहुंचे इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। सही व्यक्ति के माध्यम से सही जानकारी सहोई वक्त पर सही व्यक्त तक पहुंचनी आवश्यक है।  

समन्वय (Coordination):

संचार के माध्यम से संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संगठन में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सकता है। इसलिए संचार का उद्देश्य सभी कर्मियों एवं विभागों के बीच समन्वय स्थापित करके व्यवसायिक लक्ष्यों को प्राप्त करने का भी होता है।

प्रबंधन कौशल सीखना –

Communication का अगला उद्देश्य कर्मचारियों को अनुभवी लोगों के माध्यम से सीखाकर प्रबंधकीय कौशल सिखाना भी है। क्योंकि संचार सूचना, विचारों, विश्वासों, धारणा, सलाह, राय, आदेश और निर्देश इत्यादि के प्रवाह की सुविधा प्रदान करता है।

लोगों को परिवर्तन स्वीकार के लिए तैयार करना

किसी भी संगठन के लिए प्रभावी संचार एक बेहद महत्वपूर्ण उपकरण है क्योंकि संगठन इसे संगठनात्मक नीतियों, प्रक्रियाओं और कार्य शैली में समग्र परिवर्तन लाने, कर्मचारियों को सकारात्मक रूप से इन परिवर्तनों को स्वीकार करने और प्रतिक्रिया करने के लिए इस्तेमाल में ला सकता है।  

अच्छे मानवीय सम्बन्ध विकसित करना –

किसी भी समस्या का समाधान या मनभेद, मतभेद इत्यादि को दूर करने के लिए संवाद बेहद आवश्यक है । इसलिए प्रबंधकों और श्रमिकों में व्यक्तिगत संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए भी Communication बेहद आवश्यक होता है क्योंकि जब जानकारी का आदान प्रदान होता है तभी हम एक दुसरे को अच्छी तरह समझ पाते हैं और इससे अच्छे मानवीय सम्बन्ध विकसित करने में मदद मिलती है।

अधीनस्थों के विचार जानने का उद्देश्य –

किसी व्यवसायिक संगठन में संचार का प्रमुख उद्देश्य अधीनस्थों के विचारों को जानना और उन्हें प्रोत्साहित करना भी हो सकता है। जब अधीनस्थों के विचारों का सम्मान होगा तो यह बात उन्हें और अधिक मेहनत करने को प्रेरित करेगी। इसके अलावा Communication के माध्यम से वे अपने सीनियर से बिना किसी हिचकीचाहट के जानकारी, सूचनाएँ इत्यादि साझा कर पायेंगे।

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