डायटीशियन कैसे बनें? How to become a dietician in India.

Dietician की भूमिका भी आजकल की जीवनशैली में बढती जा रही है, वर्तमान में स्वास्थ्य क्षेत्र कमाई का एक बेहतरीन साधन बना हुआ है इसका मुख्य कारण यह है की लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक हो गए हैं । और इसके अलावा मिलावटी खान पान के कारण लोग अधिक अस्वस्थ रहने लगे हैं। इस कारण अपने आपको फिट एवं स्वस्थ्य रखने के लिए लोग अपने भोजन के लिए डायटीशियन की सलाह लेते हैं और बहुत सारी स्थितियों में डॉक्टर भी बिना डायटीशियन की सलाह लिए, कुछ भी खाने पीने को मना करते हैं। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कोई भी खाद्य पदार्थ खाने से पहले उनकी पौष्टिकता का निरीक्षण करते हैं। कहने का अभिप्राय यह है की यदि आपको भी खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता का निरीक्षण करने का शौक है। और दूसरों को सही भोजन के बारे में बताने में आपको आनंद आता है । तो आप Dietician के तौर पर अपना कैरियर स्टार्ट कर सकते हैं। कहने का आशय यह है की खाद्य विज्ञान एवं खाद्य पदार्थों के लाभ एवं नुकसान को जानने के इच्छुक लोग Dietician के तौर पर अपना कैरियर शुरू करके कमाई कर सकते हैं। क्योंकि वर्तमान में न सिर्फ हॉस्पिटल डायटीशियन की नियुक्तियाँ करते हैं अपितु खाद्य पदार्थों के निर्माण से जुड़ी कम्पनियाँ भी Dietician की नियुक्तियाँ करती हैं।

Dietician kaise bane

कौन होते हैं डायटीशियन (Who are Dietician):

Dietician को हिन्दी में आहार विशेषज्ञ भी कहा जा सकता है इनका काम अपने ग्राहकों को या लोगों को आहार सम्बन्धी परामर्श देने का होता है। कहने का अभिप्राय यह है की डायटीशियन लोगों की आहार सम्बन्धी आदतों की जाँच एवं उनका मूल्यांकन करते हैं। इसके अलावा लोगों को आहार एवं पोषण के विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार संतुलित आहार खाने के लिए मार्गदर्शित करते हैं। एक Dietician को हम एक ऐसा व्यवसायिक व्यक्ति कह सकते हैं जो आहार एवं पोषण को प्रबंधित करने के लिए विज्ञान का इस्तेमाल करता है ताकि लोग एक स्वस्थ जीवनशैली जी सकें। एक डायटीशियन आहार एवं पोषण की उचित सलाह देकर न सिर्फ लोगों के अच्छे स्वास्थ्य को प्रमोट करता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाता है। ये लोगों के लिए उनके उम्र, मेडिकल स्थिति एवं काम के रूटीन के आधार पर आहार योजना बनाते हैं। और पोषण नियमों के मुताबिक उन्हें आहार समबन्धी परामर्श एवं शिक्षा प्रदान करते हैं।

डायटीशियन बनने के लिए योग्यता (Eligibility Criteria):

Dietician बनने के लिए अनेकों कोर्स विद्यमान हैं लेकिन इन सबमें B. Sc. Nutrition काफी प्रचलित कोर्स है। इसलिए इस तरह का यह कोर्स करने के लिए विद्यार्थी को 10+2 PCB विषयों के साथ पास होना बेहद जरुरी है। इसके अलावा कुछ इंस्टिट्यूट कम से कम अंको का भी निर्धारण करते हैं एक आंकड़े के मुताबिक ऐसे संस्थान कम से कम 60% अंकों की माँग करते हैं।

डायटीशियन बनने के लिए आवश्यक कौशल (Required Skills to Become Dietician):

हालांकि औपचारिक तौर पर डायटीशियन बनने के लिए कम से कम शैक्षणिक योग्यता बारहवीं PCB विषयों के साथ पास होना जरुरी है। कहने का आशय यह है की एक Dietician Course करने के लिए 10+2 PCB विषयों के साथ पास होना ही पर्याप्त है, लेकिन एक आहार विशेषज्ञ में कुछ और भी कौशल होने चाहिए जिनकी लिस्ट निम्नवत है।

  • एक आहार विशेषज्ञ को दूसरों की बातों पर पूरा ध्यान देना बेहद आवश्यक होता है और उनकी बातों को समझने के लिए पूरा समय लेना भी आवश्यक है। इसके अलावा लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उचित जवाब देना और उन्हें बीच में नहीं टोकना जैसी बातों का भी ध्यान रखना पड़ता है।
  • एक Dietician में दूसरों को कौन सी चीज कैसे करते हैं समझाना अच्छी तरह से आना चाहिए। काम से सम्बंधित पैराग्राफ एवं शब्द समझ में आने भी जरुरी हैं। ताकि वह प्रभावी ढंग से लोगों को जानकारी दे पाने में सफल हो सके।
  • आहार विशेषज्ञ को लिखने एवं बोलने दोनों में प्रभावी ढंग से संचार करना आना बेहद जरुरी है। और लोगों द्वारा दी जाने वाली नई जानकारी की कठिनाइयों को समझना और वर्तमान एवं भविष्य की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उस जानकारी का आकलन करना। एवं उसके बाद कोई निर्णय लेना भी आना चाहिए।

डायटीशियन कैसे बनें (How to Become Dietician in Hindi):

जहाँ तक Dietician बनने के लिए औपचारिक शिक्षा की बात है, उसका जिक्र हम उपर्युक्त वाक्य में कर चुके हैं। आगे इस लेख के माध्यम से हम आहार विशेषज्ञ बनने की स्टेप बाई स्टेप जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे।  

1. साइंस से बारहवीं करें:

Dietician बनने की चाह रखने वाले विद्यार्थी को दसवीं के बाद साइंस स्ट्रीम का चुनाव करना होगा। साइंस भी यदि PCB जैसे विषयों के साथ हो तो उपयुक्त रहता है। इसके अलावा कुछ संस्थान बारहवीं में कम से कम अंक भी मांगते हैं इसलिए विद्यार्थी को बारहवीं में अधिक से अधिक अंक लाने की कोशिश करनी चाहिए। कहने का अभिप्राय यह है की Dietician बनने के इच्छुक विद्यार्थी को बारहवीं साइंस स्ट्रीम से PCB विषयों के साथ अधिक से अधिक अंकों के साथ पास करनी होगी।     

2. एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करें :

विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थानों में Dietician Course करने हेतु प्रवेश करने के लिए सरकारी एवं निजी एजेंसीयों या संस्थानों द्वारा एंट्रेंस एग्जाम आयोजित कराये जाते हैं। हालांकि कुछ ऐसे संस्थान भी होते हैं। जो बिना एंट्रेंस एग्जाम के भी एडमिशन देते हैं लेकिन आम तौर पर प्रतिष्ठित एवं प्रचलित संस्थान एंट्रेंस एग्जाम के माध्यम से ही एडमिशन देते हैं।    

3. कोर्स का चुनाव करें:

एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने के बाद एडमिशन प्रक्रिया से पहले विद्यार्थी को Dietician Course का चुनाव करना होगा। विद्यार्थी चाहे तो B.Sc. Home Science, B.Sc. Nutrition एवं B.E Food Technology में से किसी एक का चयन कर सकता है। ये सभी कोर्स तीन सालों की अवधि के होते हैं। उपर्युक्त कोर्स में उम्मीदवार विभिन्न विषय जैसे बायोकेमिस्ट्री, न्यूट्रीशन, फिजियोलॉजी, फूड, माइक्रोबायोलॉजी, पब्लिक हेल्थ न्यूट्रीशन इत्यादि का अध्यन करता है। यदि किसी व्यक्ति के पास फूड साइंस में स्नातक की डिग्री नहीं है लेकिन वह फिर भी Dietician बनना चाहता है तो वह कुछ यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदान किये जाने वाले मास्टर न्यूट्रीशन कोर्स करके डायटीशियन बनने की इच्छा पूरी कर सकता है।      

4. स्नातक की डिग्री प्राप्त करें:

कोर्स का चुनाव करने के बाद Dietician बनने के लिए विद्यार्थी को अपने पसंदीदा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में एडमिशन लेना होता है। उसके बाद उसे तीन सालों तक कड़ी मेहनत करके पढाई करनी होती है ताकि वह फूड साइंस में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर सके।   

5. प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन:

किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से Dietician Course पूरा कर लेने के बाद व्यक्ति चाहे तो मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया से प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सकता है। इसमें व्यक्ति को शुल्क के तौर पर एक हजार रूपये और मान्यता प्राप्त संस्थान से पास किया हुआ सर्टिफिकेट जमा करना की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि विदेशी लोगों के लिए इस तरह का सर्टिफिकेट प्राप्त करने के कुछ अलग नियम हो सकते हैं।   

6. इंटर्नशिप करें:

प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्राप्त कर लेने के बाद आप एक साल की या छह महीने की इंटर्नशिप कर सकते हैं। आम तौर पर इस तरह की ये इंटर्नशिप अवैतनिक होती हैं यानिकी इस दौरान आपको काम करने के बदले पारिश्रमिक के तौर पर कुछ भी नहीं दिया जाता है। बहुत सारे बड़े बड़े हॉस्पिटल में समय समय पर इस तरह की अर्थात इंटर्नशिप की नियुक्तियाँ निकलती रहती हैं। इसलिए आप भी किसी विख्यात हॉस्पिटल में इंटर्नशिप लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।    

7. इंडियन डायटीशियन एसोसिएशन में रजिस्टर करें:

हालांकि Dietician Course के साथ ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कर लेने के बाद कोई भी व्यक्ति न्यूट्रिशनिष्ट तो बन जाता है। लेकिन डायटीशियन बनने के लिए और वह भी रजिस्टर्ड डायटीशियन बनने के लिए व्यक्ति को इंडियन डायटीक एसोसिएशन के साथ रजिस्टर होना पड़ेगा। लेकिन IDA में रजिस्टर होने के लिए व्यक्ति तभी पात्र हो पाता है जब वह उसके द्वारा आयोजित एक एंट्रेंस एग्जाम को क्लियर कर ले। इस एग्जाम के लिए पात्र होने के लिए आप चाहें तो न्यूट्रीशन एवं डायटेटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर सकता है या फिर फूड एंड न्यूट्रीशन में एमएससी भी कर सकता है। इसलिए भारत में एक रजिस्टर्ड डायटीशियन बनने के लिए व्यक्ति को इंडियन डायटीक एसोसिएशन द्वारा आयोजित एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करके खुद को रजिस्टर करना होता है।      

डायटीशियन बनकर कमाई के विकल्प:

यद्यपि Dietician अनेकों प्रकार के होते हैं जैसे क्लिनिनिकल डायटीशियन, पीडियाट्रिक डायटीशियन, स्पोर्ट एंड हेल्थ डायटीशियन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, अकादमिक डायटीशियन, कम्युनिटी डायटीशियन इत्यादि। इसलिए इनके प्रकार के आधार पर इनके कमाई के स्रोत भी भिन्न होते हैं लेकिन अधिकतर तौर पर Dietician हॉस्पिटल या खाद्य निर्माण करने वाली कम्पनियों में कार्यरत होकर ही अपनी कमाई करते हैं।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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