Draught Purpose Breeds of Cows In India

Draught Purpose Breeds of Cows In India

Draught Purpose breeds of cows से हमारा आशय ऐसी गायों की नस्ल से हैं जिन्हें प्राचीन काल से बोझा ढोने, या हल जोतने के उपयोग में लाया जाता रहा है | बैलगाड़ी शब्द भी इन्हीं नस्ल की गाय एवं बैलों की देन है ग्रामीण भारत में पहले इस नस्ल का किसानों की आजीविका चलाने के लिए किये जाने वाले कार्यों में बड़ी अहम् भूमिका होती थी | वर्तमान में ट्रेक्टर, एवं परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध होने के कारण इन नस्लों के जानवरों का काम कम हो गया होगा लेकिन अभी भी भारत के दूर सुदूर इलाकों में इन्हें हल जोतने एवं बोझा ढोने के उपयोग में लाया जाता रहा है |

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  1. Nagori Cow:

गाय की Nagori नामक इस नस्ल की उत्पति या जन्म स्थान राजस्थान के बीकानेर को माना जाता है | चूँकि गायों की यह नस्ल बोझा ढोने के उपयोग में लायी जाती है इसलिए कहा जाता है की जब देश में  परिवहन के साधनों का अभाव था तब लोग बैलगाड़ी, तांगा इत्यादि को स्थान से दुसरे स्थान जाने के लिए एवं बोझा ढोने के उपयोग में लाते थे | उस समय बीकानेर जिले के जोधपुर से नोखला तक इस नस्ल की गायों का उपयोग सवारी या बोझा ढोने हेतु किया जाता था यही कारण है की गाय की इस नस्ल का नाम Nagori रखा गया | Nagori Cow रंग में अधिकतर रूप से सफ़ेद होती हैं इस नस्ल की गाय बहुत सावधान एवं फुर्तीली प्रवृत्ति की होती हैं इनका मुख लम्बा एवं पतला होता है जैसा की घोड़े का मुख होता है | इनका मुख तो पतला होता है लेकिन माथा चपटा एवं चौड़ा होता है इनकी आँखे छोटी, साफ़ एवं चमकदार होती हैं कान बड़े एवं सींग सामान्य होते हैं | Nagori Cow इंडिया की बोझा ढोने वाली नस्लों में एक प्रमुख नस्ल है | चूँकि इस नस्ल की गायों/बैलों को मुख्य रूप से बोझा ढोने के उपयोग में लाया जाता है इसलिए इनकी दूध देने की क्षमता बहुत कम औसतन 600 किलो प्रति Lactation होती है |

  1. Khillari Cow:

Khillari Cow की यदि हम बात करें तो इस नस्ल का उद्गम महाराष्ट्र राज्य के सतारा जिले से हुआ था | इसके अलावा इस नस्ल की गायों का मूल स्थान अहमद्नगर, कोल्हापुर, सांगली और सोलापुर भी है | इस प्रजाति की गायों की लगभग 9 उप प्रजाति जैसे Atpadi, Mhaswad, Pandharpuri, Kosa, Harnya, Daphlya, Bramhani, Dhangiri, Nakli. इत्यादि हैं | इस नस्ल के बैल Racing एवं Transportation के लिए बेहद प्रचलित हैं | Khillari नस्ल के बैल उष्णकटिबंधीय  एवं सूखे की स्थिति के बिलकुल अनुकूल हैं | हालांकि Khillari Cow अपनी Speed के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं लेकिन फिर भी इनकी दूध देने की क्षमता बहुत कम होने के कारण लगातार इनकी संख्या घटती जा रही है | इस नस्ल की गायों का रंग इनके प्रकार के आधार पर अंतरित हो सकता है लेकिन अधिकतर तौर पर इनका रंग भूरा सफ़ेद होता है | इनका सिर लम्बा एवं पतला होता है लम्बे सींग पीछे की ओर मुड़े हुए होते हैं | इस नस्ल की गायों की ऊंचाई 4.5 फीट से लेकर 5.5 फीट तक एवं भार 350-450 किलोग्राम तक होता है |

  1. Hallikar Cow:

Hallikar Cow की इस नस्ल को Mysore भी कहा जाता है यह नस्ल दक्षिण भारत में बोझा ढोने वाली नस्लों में एक प्रमुख नस्ल है | इस नस्ल का प्रजनन क्षेत्र  कर्नाटक राज्य के विभिन्न जिलों  Mysore, Mandya, Bangalore, Kolar, Tumkur, Hassan and Chitradurga इत्यादि को माना जाता है | रंग के लिहाज से Halikar Cow सफ़ेद एवं हलके भूरे रंग की होती हैं इनके सींग पीछे की तरफ या फिर सीधे ऊपर की तरफ एकदम सीधे होते हैं | आँख, गाल, कंधे, गर्दन  के चारों तरफ सफ़ेद धब्बे या अन्य कोई चिन्ह देखने को मिलते हैं | इनकी फार्मिंग Semi Intensive System के अंतर्गत की जा सकती है | चूँकि यह Draught Purposes breed है इसलिए इनकी दूध देने की क्षमता बेहद कम औसतन लगभग 542 किलोग्राम प्रति Lactation होती है |

  1. Amritmahal:

Amritmahal नस्ल भी बोझा ढोने के उपयोग में लायी जाने वाली गाय की एक नस्ल है इस नस्ल को अन्य नामों जैसे जवारी दाना एवं नंबर दाना के नाम से भी जाना जाता है | इस नस्ल का नाम अमृतमहल रखने का कारण यह है की इसमें अमृत का अर्थ दूध से एवं महल का अर्थ निवास से लगाया गया है | AmritMahal Cow का पालन कर्नाटक राज्य के विभिन्न जिलों जैसे चिकमगलूर,चित्रदुर्गा,हस्सन,शिमोगा, तुमकुर एवं दवानगेरे में किया जाता रहा है |  इस नस्ल की गायों और बैलों का रंग सामान्य तौर पर भूरा होता है यद्यपि इनका रंग सफ़ेद से लेकर काले रंग तक अंतरित हो सकता है | कुछ जानवरों के मुख पर हलके भूरे एवं सफ़ेद रंग के चिन्ह देखने को मिल सकते हैं | इनका सिर एवं सींग दोनों लम्बे होते हैं कुछ स्थिति में इनके सींग एक दुसरे को स्पर्श करते हुए देखे जा सकते हैं | Amritmahal नस्ल अपनी शक्ति एवं मजबूती के लिए जानी जाती है इसलिए ये उग्र एवं क्रियाशील रहते हैं यह भी एक बोझा ढोने वाली नस्ल है इसलिए इनकी भी दूध देने की क्षमता बहुत कम औसतन लगभग 572 किलोग्राम प्रति Lactation होती है |

  1. Malvi Cow:

गाय की इस नस्ल Malvi का नाम इसकी उत्पति क्षेत्र मालवा के नाम के आधार पर पड़ा | इस प्रजाति की गाय को अन्य नामों जैसे महादो पुरी एवं ,मंथानी के नाम से भी जाना जाता है | इनका प्रजनन क्षेत्र मध्य प्रदेश के उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, रतलाम इत्यादि जिले हैं | Malvi Cow का रंग सफ़ेद या सफ़ेद भूरा होता है गर्दन, कंधे, कूबड़ इत्यादि अधिकतर तौर पर काले होते हैं | इनके सींग वक्राकार स्थिति में बाहर की ओर ऊपर या पीछे की ओर अग्रसित होते हैं सींगो की ऊंचाई 20-25 CM होती है | Malvi प्रजाति के मवेशी अपनी शक्ति एवं मजबूती के लिए जाने जाते हैं इसलिए बेकार सी सड़कों पर ये परिवहन एवं बोझा ढोने के उपयुक्त साधन हैं | Malvi Cow की औसतन दूध देने की क्षमता लगभग 916 किलोग्राम प्रति Lactation होती है |

  1. Bachaur Cow:

Bachaur Cow का प्रजनन क्षेत्र बिहार के सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी इत्यादि जिलो को माना जाता है | इस नस्ल के जानवरों को भूटिया भी कहते हैं | इन दिनों अधिकतर तौर पर Bachaur नस्ल के जानवरों का पालन भारत की नेपाल सीमा से सटे हुए इलाकों में किया जाता है | इस नस्ल के पशुओं का सामान्य रंग भूरा एवं भूरा सफ़ेद होता है इनकी पीठ बिलकुल सीधी, गोल बैरल, छोटी गर्दन एवं मजबूत कंधे होते हैं | इनका माथा बेहद चौड़ा एवं षटकोण आकृति का होता है | इनकी आँखे उन्नत एवं बड़ी होती हैं इनके सींग छोटे एवं गठीले होते हैं जो नीचे, ऊपर, बाहर की तरफ किसी भी दिशा को मुड़े हुए हो सकते हैं | Bachaur नस्ल को मुख्यतः काम करने के उपयोग में लाया जाता है इस नस्ल के बैल बड़े लम्बे समय तक काम करने का सामर्थ्य रखते हैं | इनकी दूध देने की क्षमता बेहद कम औसतन लगभग 347 किलोग्राम प्रति Lactation होती है |

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इसके अलावा बोझा ढोने वाली नस्लों (Draught Purpose breeds) में कृष्ण घाटी की नस्ल, कांगेयम, सिरी, पोंवार, खिरीगढ़ एवं गावलाव है |

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