Perfume Manufacturing की यदि हम बात करें तो इन्हें विभिन्न खुशबूदार तेलों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। वैसे तो हर आयु वर्ग के लोग इसका इस्तेमाल अपने शरीर एवं कपड़ों पर खुशबु पैदा करने के लिए करते हैं। लेकिन युवाओं में परफ्यूम या इत्र का दीवानापन छाया रहता है यही कारण है की किसी एक युवा के पास एक नहीं बल्कि अनेकों प्रकार एवं खुशबु के Perfume देखने को मिल जायेंगे।

आज का युग औद्यागिकीकरण एवं प्रौद्योगिकी का युग है इसलिए यहाँ पर लोग प्राचीन काल की तरह खेतों में ही काम करने नहीं जाते हैं। बल्कि उन्हें अपने नियमित कार्यों को निष्पादित करने के लिए बड़ी भाग दौड़ एवं विभिन्न प्रकार के लोगों से मिलने की आवश्यकता होती है।

इसी भाग दौड़ में उनके कपड़ों एवं शरीर से पसीने की दुर्गन्ध आना भी स्वभाविक है इस दुर्गन्ध से बचने के लिए अक्सर लोग अपने कपड़ों एवं शरीर पर परफ्यूम और डेडोरेंट का इस्तेमाल करते हैं। वर्तमान जीवनशैली में इत्र एक बेहद आवश्यक वस्तु बन गई है इसलिए Perfume Manufacturing Business शुरू करना हर दृष्टी से एक लाभकारी व्यवसाय हो सकता है।

इत्र का निर्माण वनस्पति स्रोतों से प्राप्त तेल से किया जाता है साधारणतया इस प्रकार के तेलों को हाइड्रो या स्टीम डिस्टिलेशन प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाता है। एक फारसी चिकित्सक द्वारा सर्वप्रथम इत्र का निर्माण फूलों के डिस्टिलेशन प्रक्रिया द्वारा किया गया था।

हालांकि Perfume का निर्माण रासायनिक साधनों के माध्यम से भी किया जा सकता है लेकिन प्राकृतिक परफ्यूम जिन्हें वास्तव में इत्र की संज्ञा दी गई उन्हें पानी के साथ आसुत करके बनाया जाता है। इन तेलों को आम तौर पर लकड़ी आधारित वनस्पति से डिस्टिल्ड किया जाता है जैसे चन्दन की लकड़ी । लेकिन तकनिकी रूप से परफ्यूम का निर्माण फूल, जड़ी बूटियों, मसालों, वनस्पतियों एवं अन्य प्राकृतिक सामग्रियों को इस्तेमाल में लाकर किया जाता है।

perfume manufacturing business

 Perfume Manufacturing प्रक्रिया में चंदन के तेल पर पके हुए मिटटी, तरल पैराफिन के रूप में डिस्ट या भपका का इस्तेमाल के साथ हाइड्रो डिस्टिलेशन तकनीक का भी उपयोग किया जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल आज भी भारत के कन्नौज में इत्र बनाने के लिए किया जाता है जैस्मिन से निर्मित इत्र हैदराबाद के निजामों का पसंदीदा इत्र हुआ करता था। पूर्वी देशों में जब उनके घर कोई मेहमान आता था तो उन्हें तरह तरह के इत्र पेश किये जाते थे यह एक पारम्परिक प्रथा थी।

लेकिन पूर्वी देशों के कुछ हिस्सों में आज भी यह प्रथा पूर्ण रूप से निभाई जाती है। और सूफी उपासकों के बीच मेडिटेशन के दौरान एवं नृत्य के दौरान इत्र का इस्तेमाल एक आम बात है।

परफ्यूम बनाने का व्यवसाय क्या है (What is Perfume Manufacturing Business)

Perfume को भारत में इत्र या अत्तर के नाम से भी जाना जाता है यह सुगन्धित तेलों, सुगंध यौगिकों, जुड़नार और साल्वेंट का मिश्रण होता है। परफ्यूम का इस्तेमाल मानव शरीर, जानवरों, भोजन, वस्तुओं और रहने वाले स्थानों को खुशबु प्रदान करने के लिए किया जाता है। इत्र की यदि हम बात करें तो यह साधारणतया तरल स्वरूप में होता है और मनुष्य द्वारा इसका सर्वाधिक उपयोग अपने शरीर को सुखद खुशबु प्रदान करने के लिए किया जाता है।

वैसे देखा जाय तो इसके इस्तेमाल की पुष्टि पुरातात्विक खुदाई एवं प्राचीन मानव सभ्यताओं के आकलन के दौरान भी हुई है लेकिन आधुनिक इत्र की स्थापना 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सुगन्धित यौगिकों जैसे की वैनिलीन या कूमरोन के व्यावसायिक संश्लेषण के साथ शुरू हुई है। जहाँ तक भारत की बात है परफ्यूम भारत में सिंधु सभ्यता में भी मौजूद था।

और आज समय व्यतीत होने के साथ साथ इसका इस्तेमाल बढ़ता ही गया है इसलिए जब किसी उद्यमी द्वारा व्यवसायिक तौर पर इत्र का निर्माण किया जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह काम ही Perfume Manufacturing Business कहलाता है।

परफ्यूम के प्रमुख प्रकार

Perfume Manufacturing Business शुरू करने के इच्छुक उद्यमी को इत्र के प्रकारों के बारे में भी जानकारी होना अति आवश्यक है। इत्र के प्रकारों की यदि हम बात करें तो अलग अलग इत्र के शरीर पर अलग अलग प्रभाव होते हैं इसलिए इसे शरीर पर होने वाले प्रभावों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। गर्म इत्र की यदि हम बात करें तो इनका इस्तेमाल सर्दियों में किया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है की ये शरीर का तापमान बढ़ाने में सहायक होते हैं।

इनमें कस्तूरी, एम्बर एवं केसर से निर्मित इत्र प्रमुख हैं। इसी तरह ठन्डे इत्र का इस्तेमाल गर्मियों में अधिक किया जाता है क्योंकि ये गर्मियों में शीतलता प्रदान करने का कार्य करते हैं इनमें गुलाब, चमेली, खस, केवड़ा और मोगरा के इत्र शामिल हैं। इत्र का इस्तेमाल Perfume के तौर पर तो किया ही जाता है साथ में इनका इस्तेमाल औषधीय और कामोद्दीपक उद्देश्य के लिए भी किया जाता है। इत्र के कुछ प्रमुख प्रकारों की संक्षेप में जानकारी निम्नलिखित है।

1. कस्तूरी इत्र

इत्र का यह प्रकार मोस्चस मॉस्किफ़ेरस से बनाया जाता है जो नर हिरण की एक दुर्लभ प्रजाति में पाया जाता है। कस्तूरी बनाने में प्रयुक्त पदार्थ को केवल और केवल एक वयस्क हिरण के मोस्चस से ही बनाया जा सकता है।

चूँकि वास्तविक कस्तूरी बनाने के लिए हिरन को अपनी जान गंवानी पड़ती थी और इसकी बढती माँग के कारण अधिकांश कस्तूरी मृग प्रजाति खतरे में आ गई थी। इसलिए इनके संरक्षण के लिए सिंथेटिक कस्तूरी का उदय हुआ और इसे सफेद कस्तूरी के नाम से जाना जाता है।

2. अगर लकड़ी इत्र

इस प्रकार का इत्र बनाने के लिए अगर की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है यह खुशबूदार होने के साथ साथ अनेकों औषधीय उपयोग के भी अनुकूल होती है। इसके औषिधिय गुणों में दर्द से निजात दिलाना या दर्द कम करना और तनाव से राहत देना इत्यादि शामिल है।

3. चन्दन की लकड़ी के तेल का इत्र

वैसे देखा जाय तो चन्दन की लकड़ी से निर्मित तेल अपनी खुशबू के लिए काफी प्रचलित है यही कारण है की लोग जब मेडिटेशन के दौरान भी इसका इस्तेमाल कर रहे होते हैं जो उन्हें शीतलता एवं शांति प्रदान करने में सहायक सिद्ध होता है।

4. गुलाब तेल से निर्मित इत्र

Perfume Manufacturing Business शुरू करने के इच्छुक उद्यमी को यह भी पता होना चाहिए की वह चाहे तो गुलाब के फूलों से भी तेल का निर्माण कर सकता है और फिर इन तेलों से इत्र का निर्माण कर सकता है।

गुलाब के तेल का निर्माण गुलाब की कुचली हुई पंखड़ियों का स्टीम डिस्टिलेशन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है इसी प्रक्रिया में सह उत्पाद गुलाब जल का भी निर्माण होता है। गुलाब के तेलों का इस्तेमाल परफ्यूम बनाने में सदियों से किया जाता रहा है।

इन सबके अलावा हिना, एम्बरग्रीस, जैस्मिन इत्यादि से भी इत्र का निर्माण किया जा सकता है।

परफ्यूम बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Perfume Manufacturing Business)

Perfume manufacturing business के लिए वनस्पति से लेकर समुद्री एवं वन्य जीवों के अलग अलग हिस्सों को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है। लेकिन यहाँ पर हम प्राकृतिक वनस्पति, जड़ी बूटियों, पुष्पों इत्यादि से निर्मित परफ्यूम की ही बात करने वाले हैं। वह इसलिए क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ पर हर प्रकार की वनस्पति, पुष्प, जड़ी बूटियों इत्यादि का उत्पादन प्रचुर मात्रा में किया जाता है। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक उद्यमी खुद का परफ्यूम बनाने का बिजनेस शुरू कर सकता है।

1. कच्चे माल की उपलब्धता का आकलन करें  

वैसे तो हम स्पष्ट कर ही चुके हैं की Perfume Manufacturing Business में कच्चे माल के तौर पर विभिन्न वनस्पति जैसे अगर की लकड़ी, चन्दन की लकड़ी से निर्मित तेल और फूल जैसे गुलाब, जैस्मिन, हीना एवं अनेकों प्रकार की जड़ी बूटियों का भी इस्तेमाल किया जाता है।

इसलिए उद्यमी को सर्वप्रथम वह जिस एरिया में यह बिजनेस शुरू करना चाहता है वहां पर कच्चे माल की उपलब्धता का जायजा अवश्य ले ले। हालांकि विभिन्न वनस्पतियों का खुशबूदार तेल किसी भी शहर या नगर के बाजार में आसानी से मिल जाता है लेकिन उद्यमी को इस बात का विश्लेषण करना होगा की क्या वह उस रेट में कच्चा माल खरीद पायेगा या नहीं। यदि उस एरिया के आस पास फूलों एवं विभिन्न खुशबूदार वनस्पतियों की प्रचुर मात्रा हो तो उद्यमी को कच्चा माल उचित दामों में प्राप्त हो सकता है।   

2. जगह का प्रबंध करें

यदि उद्यमी को लगता है की उस एरिया में उसे Perfume Manufacturing Business शुरू करने के लिए पर्याप्त कच्चा माल वर्ष भर उचित दरों पर मिलता रहेगा। तो अब उसका अगला कदम अपने प्लांट के लिए जगह का प्रबंध करने का होना चाहिए जगह का प्रबंध करते समय बिजली, पानी, सड़क इत्यादि की उपलब्धता का विशेष ध्यान रखें।

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 300-400 square feet जगह काफी रहेगी। उद्यमी चाहे तो जगह खुद खरीदकर निर्माण कार्य शुरू कर सकता है या फिर कोई छोटी सी जगह किराये पर भी ले सकता है वैसे शुरूआती दौर में जगह किराये पर लेना ही उचित रहेगा। दुकान या जमीन किराये पर लेते वक्त रेंट एग्रीमेंट या लीज एग्रीमेंट अवश्य बनवा लें ताकि उसे पता प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सके।     

3. आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन कराएँ

Perfume Manufacturing Business करने वाले उद्यमी को सर्वप्रथम अपने व्यवसाय को एक वैधानिक स्वरूप प्रदान करना होगा इसके लिए उद्यमी प्रोप्राइटरशिप या वन पर्सन कंपनी के तहत अपने व्यवसाय को रजिस्टर करा सकता है । और उसके बाद फैक्ट्री अधिनियम के तहत भी अपने व्यवसाय को रजिस्टर करने की आवश्यकता हो सकती है।

इन सबके अलावा उद्यमी को स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम इत्यादि से ट्रेड लाइसेंस लेने की भी आवश्यकता हो सकती है और टैक्स रजिस्ट्रेशन, उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन, बैंक में चालू खाता, एमएसएमई डाटा बैंक रजिस्ट्रेशन इत्यादि की भी आवश्यकता हो सकती है। जैसा की हम सब जानते हैं Perfume को कॉस्मेटिक उत्पाद के तौर पर देखा जाता है इसलिए हो सकता है की उद्यमी को ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत अधिकारिक प्राधिकरण से लाइसेंस लेने की आवश्यकता हो।  

4. मशीनरी, उपकरण एवं कच्चा माल खरीदें  

अब उद्यमी का अगला कदम अपने Perfume Manufacturing Business के लिए आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल खरीदने का होना चाहिए। जहाँ तक कच्चे माल की बात है उद्यमी को विभिन्न वनस्पतियों के खुशबूदार अर्क एवं तेल बाजार में आसानी से मिल जायेंगे पेट्रो आयल, सैंडल वुड आयल, फ्लावर इत्यादि भी बाजार में मिल जायेंगे।

उद्यमी चाहे तो पहले सप्लायर का चुनाव करने के बाद फिर उससे मूल्य को लेकर मोलभाव करके उसे परमानेंट सप्लायर के तौर पर नियुक्त करके भी कच्चे माल का प्रबंध कर सकता है।  Perfume Manufacturing Business में प्रयुक्त होने वाली कुछ आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • हीटिंग टैंक
  • बेस आयल टैंक
  • कुलिंग टैंक
  • सेपरेशन टैंक
  • पम्प
  • भट्टी
  • पैकेजिंग मशीन

उपर्युक्त मशीनरी एवं उपकरणों का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कच्चे माल से परफ्यूम बनाने के लिए किया जाता है। इनकी मदद से बहुत ही कम समय में स्टीमिंग, फार्मूलेशन एवं पैकेजिंग के काम को अंजाम दिया जा सकता है। इन्हें खरीदने में उद्यमी को लगभग 1.5- 2 लाख रूपये खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है। यद्यपि उद्यमी को शुरूआती दौर में 1 कुशल दो तीन अकुशल श्रमिकों को नियुक्त करने की भी आवश्यकता हो सकती है ।

5. परफ्यूम का निर्माण शुरू करें (Manufacturing Process of Perfume)   

अब यदि उद्यमी द्वारा सभी कार्य पूर्ण कर लिए गए हों तो अब Perfume Manufacturing Business को अंतिम रूप देने के लिए परफ्यूम का निर्माण शुरू कर देना चाहिए। इस निर्माण प्रक्रिया में सर्वप्रथम हीटिंग टैंक में आधा पानी भरा जाता है और फिर उसमें 10-12 किलो फूल डाले जाते हैं। उसके बाद इस टैंक को मैन्युअली सील कर दिया जाता है।

उसके बाद भट्टी में जलाने के लिए लकड़ी डाली जाती हैं और 8-10 घंटे तक हीटिंग टैंक को गर्म किया जाता है । बांस के पाइप की मदद से इसमें बनने वाली भाप का निकास किया जाता है। इसका एक हिस्सा हीटिंग टैंक से जुड़ा होता है और दूसरा हिस्सा बेस आयल टैंक से जुड़ा हुआ होता है।हीटिंग टैंक से निकलने वाली भाप को कंडेंस्ड प्रक्रिया के तहत बेस आयल टैंक में तरल के रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है।

इस प्रक्रिया को बेस आयल टैंक को कुलिंग टैंक में रखकर पूर्ण किया जाता है। हर रोज सात से नौ घंटे के बाद भट्टी को बंद कर दिया जाता है और बेस आयल टैंक में उपलब्ध सामग्री को सेपरेशन टैंक में भेज दिया जाता है। इस टैंक में इस सामग्री को लगभग एक घंटे तक रखा जाता है जहाँ बेस आयल, खुशबूदार तेल एवं पानी अलग अलग हो जाता है।

बेस आयल को बेस आयल टैंक में स्थानांतरित किया जाता है पानी को हीटिंग टैंक में और खुशबूदार पदार्थ को परफ्यूम के तौर पर पैकेजिंग के लिए भेज दिया जाता है। Perfume Manufacturing Process में यह प्रक्रिया बार बार रिपीट होती रहती है। 

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