भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए यहाँ पर Agriculture Consultancy Business शुरू करना काफी फायदेमंद हो सकता है। एक किसान के लिए उसकी उत्पादकता से जरुरी और महत्वपूर्ण कुछ नहीं है कहने का आशय यह है की यदि किसान की उपज बढती है तो उसके लिए इससे बड़ी ख़ुशी शायद ही कुछ होगी। कृषि परमर्शदाताओं की यदि हम बात करें तो वे कृषि के जानकार होते हैं इसलिए किसानों को वे उनकी उपज बढ़ाने के लिए परामर्श देते हैं।

जिस पृथ्वी या गृह पर हम रहते हैं यहाँ पर भोजन और खाद्य उत्पादों के उत्पादन के लिए कृषि सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक है। बेहत महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र में निरंतर वृद्धि और विकास देखा गया है आज हम विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को कृषि क्षेत्र की परियोजनाओं के साथ का करते हुए देख सकते हैं। कहने का आशय यह है की कृषि क्षेत्र बहुत विशाल है इसलिए इसमें कैरियर की एक नहीं बल्कि अनेकों अवसर विद्यमान हैं।

इन्हीं अवसरों में से एक अवसर Agriculture Consultancy Business है। भारत में आज भी हम देखते हैं की बड़े पैमाने पर परम्परागत तरीकों से ही खेती होती आ रही है जिससे किसान बहुत अधिक जमीन में भी अच्छा खासा उत्पादन नहीं कर पाते। कृषि सलाहकार किसानों को न सिर्फ मिटटी की जानकारी प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें किस मिटटी में कौन सी फसल उगानी चाहिए, सिंचाई कब और कितनी करनी है, खेती करने के अत्याधुनिक तरीके, खाद और उर्वरकों की जानकारी, सरकारी योजनाओं की जानकारी, कृषि से सम्बंधित लगभग सभी प्रकार की जानकारी प्रदान करते हैं।

यही कारण है की आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से यही जानने का प्रयत्न करेंगे की कोई इच्छुक व्यक्ति कैसे खुद की Agriculture Consultancy शुरू कर सकता है लेकिन उससे पहले यह जान लेते हैं की यह बिजनेस होता क्या है?

Agriculture Consultancy Business

Agriculture Consultancy क्या है?

Agriculture Consultancy की यदि हम बात करें तो इसे पहले से स्थापित किसानों या नए किसानों को कृषि परामर्श और सपोर्ट प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया जाता है। यह किसी विशेष भौगौलिक क्षेत्र में कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं, विकास दर इत्यादि की खोज करने में मदद प्रदान करता है जिससे उस क्षेत्र विशेष में कृषि क्षेत्र को और विकसित करके किसानों की उपज और आमदनी दोनों बढ़ाई जा सकें।

कहने का आशय यह है की एक कृषि सलाहकार एक क्षेत्र विशेष में पहले से स्थापित किसानों, नए किसानों या कृषि से जुड़े किसी भी व्यक्ति को कृषि से सम्बंधित सभी प्रकार की सलाह प्रदान करके उनकी उपज और आमदनी को बढ़ाने में मदद करता है। कृषि सलाहकार यह सब इसलिए कर पाता है क्योंकि वह कृषि गतिविधियों का विशेषज्ञ होता है जिसे कृषि उद्योग की पूर्ण समझ होती है और इसी बलबूते वह रिसर्च करने में भी सक्षम होता है। वे किसानों या अपने ग्राहकों की समस्याओं को सुनते हैं और उनका हल उन्हें बताते हैं।

एग्रीकल्चर कंसल्टेंसी क्या क्या काम करती है  

Agriculture Consultancy का रिसर्च एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि एक कृषि सलाहकार को कृषि क्षेत्र में नवीनतम और प्रासंगिक विकास को जानना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

इस तरह के परामर्शदाता को कृषि , पशुधन, पौधों और पशुधन के पोषण, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण और संरक्षण क्षेत्रों से समबन्धित तकनीकी और व्यवसायिक जानकारी अपने ग्राहकों को प्रदान करनी होती है ताकि वे अपनी उत्पादन क्षमता बढाकर अच्छा लाभ कमाकर अपने जीवन को बेहतर बना सकें। इन सबके अलावा Agriculture Consultancy के कुछ और भी कार्य होते हैं जिनकी लिस्ट इस प्रकार से है।

  • कंसल्टेंसी को अपने प्रतिनिधि को अपने ग्राहकों के खेतों इत्यादि में जाने की आवश्यकता होती है ताकि वे उनकी समस्याओं का मूल्यांकन और पहचान कर सकें।
  • कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को व्यापार नियोजन, सरकारी अनुदान आवेदन, कानूनी सलाह, और नए व्यापार के अवसरों के क्षेत्रों में सहायताप्रदान करना।
  • कृषि उद्यमों के प्रदर्शन को मापने के लिए डाटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करना।
  • व्यवसाय और संचालन योजनाओं की नियमित जाँच करना ताकि कमियों का पता लगाकर उन्हें समय से दूर किया जा सके।
  • ग्राहक की समस्याओं का समाधान करने के लिए फिल्ड टेस्ट और ट्रायल आयोजित करना।
  • ग्राहकों एवं अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करना, डेमोनस्ट्रेशन और प्रेजेंटेशन देना भी एक Agriculture Consultancy के कार्यों में शामिल है।
  • समय समय पर कृषि क्षेत्र से सम्बंधित प्रेस रिलीज, सलाहकार पत्रक, तकनीकी नोट और लेख लिखना।
  • नए ग्राहक पाने के लिए अपने व्यवसाय को प्रमोट करना और मौजूदा ग्राहकों ओ बनाये रखने के लिए योजनायें चलाना।

एग्रीकल्चर कंसल्टेंसी कैसे शुरू करें (How to Start Agriculture Consultancy in India):

जैसा की हमने पहले भी बताया हुआ है की एक कृषि सलाहकार को अपने ग्राहकों को कृषि से सम्बंधित हर प्रकार की सलाह देने की आवश्यकता होती है। अब कोई आम आदमी तो यह सलाह दे नहीं पायेगा इसलिए खुद का Agriculture Consultancy Business को केवल वही व्यक्ति शुरू कर सकता है जिसने कृषि में कम से कम ग्रेजुएशन तो आवश्यक की हो।

यानिकी कृषि से बीएससी, एमएससी करने वाले, कृषि में इंजीनियरिंग करने वाले इत्यादि लोग इस तरह के व्यवसाय के लिए उपयुक्त प्रमोटर माने जाते हैं। कहने का आशय यह है की जिन लोगों के पास कृषि सेक्टर का ज्ञान, समझ होने के साथ साथ डिग्री इत्यादि भी उपलब्ध है वहीँ लोग Agriculture Consultancy का बिजनेस शुरू कर सकते हैं। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक एवं योग्य व्यक्ति खुद का कृषि परामर्श इकाई स्थापित कर सकता है।

1. किसानों या कृषि से जुड़े उद्यमियों की समस्याएँ जानें

Agriculture Consultancy Business शुरू करने से पहले उद्यमी को खुद की योग्यता का तो निरीक्षण करना ही होगा इसके अलावा किसानों और कृषि से जुड़े अन्य उद्यमियों की परेशानी और समस्या को भी समझना होगा। ध्यान रहे इस तरह के व्यवसाय को केवल एक कृषि विषय से स्नातक, परस्नातक और कृषि इंजिनियर, कृषि वैज्ञानिक ही शुरू कर सकता है।

आम लोगों के लिए इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करना काफी जटिल हो सकता है। अब यदि उद्यमी कृषि सलाहकार बनने के योग्य है तो अब वह जिस क्षेत्र में इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करना चाहता है उस क्षेत्र में उसे किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों की परेशानी को समझना होगा।

जब उद्यमी उनकी समस्याओं को समझेगा तभी वह इस बात का निर्णय ले पायेगा की वह उनकी समस्याओं कोई सुलझा पायेगा या फिर नहीं? और यही बात जानकर वह इस बात का भी निर्णय ले पायेगा की उस क्षेत्र विशेष में उसे इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करना चाहिए या नहीं।

एक ऐसा एरिया जहाँ अभी तक लोग पारम्परिक तरीके से कृषि करते हैं उद्यमी के Agriculture Consultancy Business के लिए उपयुक्त हो सकता है। क्योंकि उद्यमी इन लोगों में जागरूकता बढाकर उन्हें अत्याधुनिक सलाह देकर उनकी उपज बढ़ाकर कोई मिसाल खड़ी कर सकता है जिससे उस एरिया विशेष में कृषि से जुड़े सभी लोग उसकी सलाह लेने के लिए आतुर हो उठें।    

2. स्थानीय मार्किट में ऑफिस स्थापित करें

Agriculture Consultancy Business शुरू करने के लिए उद्यमी का अगला कदम किसी स्थानीय मार्किट में ऑफिस स्थापित करने का होना चाहिए।

हालांकि इस ऑफिस का किसी भीड़ भाड़ वाली जगह या व्यस्त जगह में होना आवश्यक नहीं है लेकिन इतना जरुर हो की आपके ग्राहक आपके ऑफिस तक आसानी से पहुँच सकें इसलिए यह शहर की मुख्य सड़क से अधिक दूरी पर न हो । ऑफिस किराये पर लेते वक्त उद्यमी को इसका रेंट एग्रीमेंट इत्यादि अवश्य बनवा लेना चाहिए ताकि बाद में इसे पता प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सके।  

3. आवश्यक लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्राप्त करें

वैसे देखा जाय तो छोटे स्तर पर इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी को शायद ही किसी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होगी। लेकिन चूँकि Agriculture Consultancy Business  कर रहे उद्यमी को कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमों से भी डील करने की आवश्यकता होती है इसलिए उसे निम्नलिखित लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन करा ही लेने चाहिए।

  • सबसे पहले अपने व्यवसाय को प्रोप्राइटरशिप या वन पर्सन कंपनी के तहत रजिस्टर करें।
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन, व्यवसाय के नाम से पैन और बैंक में चालू खाता खोलें।
  • उद्यम रजिस्ट्रेशन भी कर सकते हैं।
  • स्थानीय प्राधिकरण से ट्रेड लाइसेंस इत्यादि ले सकते हैं।        

4. आवश्यक उपकरण और कर्मचारी नियुक्त करें

अब उद्यमी का अगला कदम विभिन्न प्रकार के टेस्टिंग उपकरण एवं सहायक उपकरण खरीदने का होना चाहिए। उद्यमी को ऑफिस के लिए भी कंप्यूटर, प्रिंटर, सॉफ्टवेयर, कुर्सी, टेबल इत्यादि खरीदने की आवश्यकता होती है।

जबकि कृषि और पशुधन इत्यादि में इस्तेमाल में लाये जाने वाले विभिन्न टेस्टिंग उपकरण जिनके माध्यम से उद्यमी अपने ग्राहकों की समस्याओं का आकलन करने में सक्षम हो सके। खरीदने की आवश्यकता होती है इसके अलावा उद्यमी को शुरूआती दौर में तीन से चार कर्मचारियों को भी नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है।    

5. जागरूकता और ग्राहक बढ़ाएं 

अब उद्यमी का अगला कदम अपने Agriculture Consultancy Business को प्रमोट करने का होना चाहिए ताकि उस क्षेत्र विशेष में किसानों और कृषि से सम्बंधित अन्य उद्यमियों के बीच अपनी उपज बढ़ाने को लेकर जागरूकता पैदा हो और वे कृषि के पारम्परिक तरीकों को छोड़ने के लिए राजी हो पायें। उद्यमी चाहे तो सबसे पहले किसी एक किसान या ग्राहक की उपज में बढ़ोत्तरी करके दिखाए और फिर उसी को आधार मानकर अपने व्यवसाय को प्रमोट करे और परिणाम दिखाने के लिए उद्यमी उस किसान का उदाहरण दे सकता है।

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