मिट्टी के बर्तन यानिकी Pottery Products Manufacturing की यदि बात करें तो यह मिट्टी एवं सिरेमिक सामग्री इत्यादि का इस्तेमाल करके बर्तन एवं अन्य वस्तुओं को बनाने की एक प्रक्रिया है । इस प्रक्रिया में इन उत्पादों को मजबूत एवं कठोर रूप देने के लिए उच्च तापमान पर पकाया जाता है।

इन उत्पादों में प्रमुख रूप से मिट्टी से निर्मित बर्तन, पत्थरों से निर्मित बर्तन और चीनी मिट्टी से निर्मित बर्तन शामिल हैं। जिस व्यक्ति द्वारा इस तरह के ये बर्तन बनाये जाते हैं उसे आम तौर पर कुम्हार भी कहा जाता है। Pottery Products का निर्माण सिरेमिक, मिट्टी या अपनी मनचाही सामग्री को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाकर बनाया जाता है और इन्हें बर्तनों का ढांचा देने के बाद एक निश्चित तापमान पर पकाया जाता है ताकि इनमें कठोरता एवं मजबूती को बढाया जा सके।

बहुत सारे मिटटी के बर्तन या Pottery Products आम तौर पर उपयोगी होती हैं लेकिन कुछ उत्पाद को सिरेमिक आर्ट के तौर पर भी इस्तेमाल में लाया जाता है। एक मी के बर्तन को पकाने से पहले या बाद में आसानी से सजाया जा सकता है। आम तौर पर मिट्टी आधारित इन उत्पादों को प्रमुख रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है इसमें पहली श्रेणी मिट्टी के बर्तन, दूसरी श्रेणी पत्थरों के पात्र और तीसरी श्रेणी चीनी मिट्टी के बर्तनों की है।

इन तीनों श्रेणियों में इस्तेमाल में लाये जाने वाला कच्चा माल भी अलग हो सकता है और इन्हें बनाने की तकनीक भी अलग अलग हो सकती है और इन्हें कठोरता एवं स्थायित्व प्रदान करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाने वाला तापमान भी अलग अलग हो सकता है।

और Pottery Products की इन तीनों श्रेणियों को ग्लेज्ड एवं अनग्लेज्ड दोनों प्रकारों में बनाया जा सकता है। इस तरह के इन उत्पादों की खोज नव पाषाण काल से पहले ही हो गई थी इन्हें मिट्टी के साथ अन्य सामग्री को मिश्रित करके बनाया जाता था। और फिर उन्हें भट्टी में डालकर उच्च तापमान पर पकाया जाता था ताकि मिट्टी एवं अन्य सामग्री सख्त हो जाए और ये उत्पाद मजबूत हो जाएँ।

उसके बाद कुम्हारों द्वारा इन्हें विभिन्न तरीके से सजाया भी जा सकता है । ताकि इन्हें पानीरोधक, चमकदार, आकर्षक बनाया जा सके।

Pottery Products business in India

पॉटरी उत्पादों का मार्किट विश्लेषण

भारत अन्य विकासशील देशों के साथ साथ Pottery Products बनाने और उनके निर्यात करने के लिए जाना जाता है। इस तरह के उत्पादों को खरीदने वाले प्रमुख देश अमेरिका, मैक्सिको, हांगकांग, जापान, जर्मनी, इटली और फ्रांस इत्यादि हैं। हालांकि इस तरह के उत्पादों के कुल वैश्विक बाजार का केवल 1% हिस्सेदारी भारत की मानी जाती है इसलिए महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ताओं की सूची में भारत का नहीं अपितु चीन, ब्रिटेन, जापान और अमेरिका का नाम शामिल है। उत्तर प्रदेश की खुर्जा इकाइयों में पॉटरी उत्पादों का सालाना उत्पादन लगभग 85 करोड़ से भी अधिक है ।

और इस उत्पादन का लगभग 20% से अधिक अंतराष्ट्रीय बाज़ारों को निर्यात किया जाता है। भारत से अन्य देशों को निर्यात होने वाले उत्पादों में रासायनिक पोर्सलीन, हेंडीक्राफ्ट आर्ट और बर्तन शामिल हैं। भारत की पॉटरी इंडस्ट्री के समग्र उत्थान और स्थिति में सुधार के लिए विनिर्माण केन्द्रों की विभिन्न आवश्यकताओं की पहचान करना, तकनिकी विकास के साथ साथ, उनके ढांचागत विकास की आवश्यकताओं की पहचान करना भी नितांत आवश्यक हो गया है।

 Pottery Products के उत्थान के लिए सरकार द्वारा इस प्रकार के उद्योगों की उचित समीक्षा, इनकी आवश्यकता का विश्लेषण और इनकी मदद के लिए उचित योजनायें भी तैयार की जा रही हैं। 

पॉटरी उत्पादों के प्रकार (Types of Pottery Products)

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Pottery Products को प्रमुख तौर पर तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है, जिनका संक्षिप्त विवरण कुछ इस प्रकार से है।

1. मिट्टी से निर्मित बर्तन (Earthenware):

यह एक ऐसी मिट्टी होती है जिसे बर्तन तो बनाये जा सकते हैं लेकिन इन्हें पानी इत्यादि तरल के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है। इस मिट्टी से बने बर्तनों को कठोर एवं सख्त करने के लिए अपेक्षाकृत कम तापमान पर पकाया जाता है इससे इनमें कठोरता तो आ जाती है लेकिन यह सामग्री छिद्रपूर्ण हो सकती है जिससे हवा या पानी निकल सकता है। यही कारण है की इनका इस्तेमाल पानी रखने के लिए नहीं किया जाता है गमले इत्यादि इनका अच्छा उदाहरण हो सकते हैं।

2. पत्थर के पात्र (Stoneware):

हालांकि इन्हें हम पत्थर के पात्र तो कहा रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है की इन्हें सिर्फ पत्थरों से ही बनाया जाता है। बल्कि सच्चाई यह है की श्रेणी के पात्रों को एक विशेष प्रकार की मिट्टी से ही बनाया जाता है और इन्हें 1200®C से भी उच्च तापमान पर कठोर और सख्त करने के लिए पकाया जाता है। और इस प्रकार से इस विशेष मिट्टी से निर्मित बर्तन पत्थर की तरह मजबूत हो जाते हैं और ये जलरोधक भी होते हैं। बाद में इन्हें सजाया जाता है और किसी भी इस्तेमाल के लिए इन Pottery Products का इस्तेमाल किया जाता है।

3. चीनी मिट्टी से निर्मित उत्पाद (Porcelain)

चीनी मिट्टी के बर्तनों को एक परिष्कृत मिट्टी से बनाया जाता है और इन्हें मजबूत एवं सख्त बनाने के लिए 1450®C तक के उच्च तापमान पर पकाया जाता है। और इसी परिणामस्वरूप अत्यंत कठोर एवं चमकदार उत्पाद प्राप्त होते हैं। इस तरह के उत्पाद दिखने में सफ़ेद पारभासी होते हैं। 

पॉटरी प्रोडक्ट के स्वास्थ्य लाभ

Pottery Products का इस्तेमाल हजारों वर्ष पूर्व से होता आ रहा है इसलिए इन उत्पादों का इस्तेमाल उपचार कला के तौर पर भी होता रहा है । ये उत्पाद केवल मन के लिए ही लाभप्रद नहीं हैं, बल्कि ये शरीर को भी स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।

  • जब बात कला की होती हो तो इसमें कोई दो राय नहीं की कला का कोई भी स्वरूप हो, इसके सभी रूपों में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने का गुण होता है। जिससे तनाव और अन्य चिंताओं को कम करने में मदद मिलती है । Pottery Products में समय समय पर कुछ न कुछ नया बनाने की आवश्यकता होती है और कुछ अनोखा तैयार करना मनुष्य को संतुष्टि प्रदान करता है। क्योंकि मिट्टी से कुछ बनाने से व्यक्ति की रचनात्मकता बाहर प्रस्फुटित होती है। जिससे मनुष्य के मष्तिष्क में चल रहा तनाव कम होने में मदद मिलती है।    
  • कई लोग जब दुखी होते हैं तो वे किसी चीज को बनाने में व्यस्त होने पर अपने दुखों को भूल जाते हैं कहने का आशय यह है की मिट्टी से कुछ बनाना बहुत सारे लोगों के लिए उनके दुखों को भूलने का एक तरीका भी हो सकता है। और जब मनुष्य अपनी समस्याओं एवं दुखों को भूलने लगता है तो उसका मूड बेहतर होने लगता है। इसलिए इस तरह के उत्पादों का निर्माण करना मूड बेहतर करने में भी सहायक होता है।   
  • इस तरह के उत्पादों का निर्माण उद्यमी को अपने काम पर फोकस करने में मदद करता है जिससे उद्यमी अपने जीवन में चल रही चीजों के बारे में चिंता करना छोड़ देता है। और जब आदमी केवल एक चीज पर ध्यान केन्द्रित करता है तो उसके मष्तिष्क को काफी आराम पहुँचता है।
  • Pottery Products बनाने के न सिर्फ मानसिक फायदे हैं बल्कि इसके शारीरिक फायदे भी होते हैं। क्योंकि भले ही इस प्रकार के उत्पादों को बनाने में बेहद अधिक कठोर परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन इसमें हाथों, कलाई एवं बाहों का समुचित एवं बार बार उपयोग होता है। जिससे इनमें मजबूती आती है।
  • इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने से उद्यमी की कल्पना करने की शक्ति में भी विकास होता है । क्योंकि वह हमेशा ही मिट्टी से कुछ न कुछ नए उत्पाद बनाने के लिए सोचता रहता है।

आवश्यक मशीनरी एवं कच्चा माल

वैसे देखा जाय तो Pottery Products Manufacturing बिजनेस शुरू करने के लिए कोई भारी भरकम कीमती मशीनरी की आवश्यकता तो नहीं होती है। लेकिन कुछ मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता अवश्य होती है। चूँकि इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के लिए मात्र 70 हज़ार से लेकर 1.5 लाख रुपयों में मशीनरी एवं उपकरण ख़रीदे जा सकते हैं।

इसलिए Pottery Products का व्यवसाय भी बेहद कम निवेश के साथ शुरू किया जाने वाला व्यापारों की लिस्ट में शामिल है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए उद्यमी को निम्नलिखित मशीनरी की आवश्यकता हो सकती है।

पॉटर व्हील (चाक मशीन) : यह मशीन एक क्षैतिज परिक्रामी डिस्क होती है जिस पर गीली मिट्टी को बर्तन या अन्य सिरेमिक वस्तुओं को गोल ढाँचे में ढाला जाता है।

भट्टी (Furnace): भट्टी का इस्तेमाल मिट्टी से निर्मित बर्तनों एवं अन्य उत्पादों को उचित तापमान पर पकाने के लिए किया जाता है, ताकि उन्हें आवश्यक मजबूती प्रदान की जा सके ।

इन दो साधारण सी मशीनों के माध्यम से Pottery Products को आकार देने एवं सुखाने का कार्य पूर्ण किया जा सकता है, सजावट इत्यादि मैन्युअली या फिर अन्य मशीनरी का उपयोग किया जा सकता है। जहाँ तक कच्चे माल का सवाल है इसके लिए मिट्टी, चीनी मिट्टी, विशेष प्रकार की मिट्टी इत्यादि का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पॉटरी उत्पाद निर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Process of Pottery Products):

इस तरह के व्यवसाय को छोटे स्तर पर शुरू करने के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता तो नहीं है। लेकिन फिर भी उद्यमी को स्थानीय नियम, कानूनों के बारे में जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। सबसे पहले कच्चा माल खरीद लिया जाता है उसके बाद कच्चे माल जैसे मिट्टी इत्यादि को छान लिया जाता है।

और इसे छानने के बाद इसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलाया जाता है। Pottery Products Manufacturing Process में उसके बाद इसे पानी के साथ अच्छे ढंग से मिक्स कर दिया जाता है और उसके बाद मिक्स सामग्री को पॉटर व्हील में रखा जाता है।

उसके बाद उस मिट्टी को विभिन्न प्रकार के आकार दिए जाते हैं उसके बाद इन्हें सुखाने के लिए खुले क्षेत्र में या धुप में रख दिया जाता है। और जब ये उत्पाद सूख जाते हैं तो इन्हें मजबूती एवं स्थायित्व प्रदान करने के लिए भट्टी में पकाया जाता है। और उसके बाद इन उत्पादों की पेंटिंग एवं ब्रशिंग की जाती है।

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