सस्ते गल्ले की दुकान यानिकी Fair Price Shop (FPS) के बारे में आप लोग सभी अच्छे से जानते होंगे। वह इसलिए क्योंकि इस तरह की ये राशन की दुकानें ग्रामीण एवं शहरी दोनों इलाकों में देखी जा सकती हैं। यदि आप या आपका परिवार राशन कार्ड धारक हैं तो हो सकता है की आप इन सस्ते गल्ले की दुकानों से अनेक बार अनाज लाये भी हों। चूँकि लोगों की आवश्यकता के मुताबिक हर एक निश्चित क्षेत्र में इस तरह की दुकानें उपलब्ध होती हैं।

इसलिए आम तौर पर लोगों में यह जानने की जिज्ञासा होती है की यदि वे भी Fair Price Shop की दुकान खोलना चाहते हों तो इसके लिए उन्हें क्या क्या करना पड़ सकता है। और क्या वे इस तरह की यह दुकान खोलने के लिए पात्र हैं भी की नहीं। वैसे देखा जाय तो राशन की दुकानों को भी लोगों ने कमाई का एक बेहतरीन जरिया बना रखा है। इसलिए अक्सर लोग इस बात से प्रभावित रहते हैं की वे भी कैसे इस तरह की सस्ते गल्ले की दुकान खोलकर पैसे कैसे कमा सकते हैं।

हालंकि यहाँ पर यह स्पष्ट कर देना जरुरी है की राशन वितरक को केवल सरकार के नियमों के मुताबिक ही राशन वितरण करने की स्वतंत्रता होती है। इसलिए अक्सर ऐसे वितरक अन्य सामानों की दुकान जैसे जनरल स्टोर इत्यादि खोलकर भी व्यापार कर रहे होते हैं। इससे पहले की हम सस्ते गल्ले की दुकान यानिकी Fair Price Shop खोलने की प्रक्रिया के बारे में बात करें आइये जानते हैं की यह होती क्या है।

Fair Price Shop Saste Galle ki Dukan

सस्ते गल्ले की दुकान क्या है ( Fair Price Shop kya hai)

सस्ते गल्ले की दुकान को आप अंग्रेजी में Fair Price Shop (FPS) या फिर सीधे राशन की दुकान भी कह सकते हैं। लेकिन यदि हम इसकी परिभाषा को समझने की कोशिश करेंगे तो हम पाएंगे की एक ऐसी दुकान जिसे सरकार द्वारा एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट की धारा 3 के तहत उचित मूल्यों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत आवश्यक वस्तुओं को वितरित करने के लिए लाइसेंस प्रदान किया जाता है।

कहने का आशय यह है की एक ऐसी दुकान जहाँ पर सम्बंधित क्षेत्रवासियों को सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर एक निश्चित मात्रा में गेहूं, चावल, दाल, चीनी इत्यादि आवश्यक सामग्री मिलती है उसे ही सस्ते गल्ले की दुकान या Fair Price Shop कहा जाता है। इन दुकानों को सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवश्यक वस्तुओं को वितरित करने की जिम्मेदारी दी जाती है।

सस्ते गल्ले की दुकान खोलने के लिए पात्रता

यद्यपि अलग अलग राज्यों में पात्रता सम्बन्धी नियम अलग अलग हो सकते हैं लेकिन कुछ प्रमुख पात्रता सम्बन्धी नियम निम्नलिखित हैं।

  • आवेदक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है और वह उसी एरिया से सम्बंधित हो जहाँ वह सस्ते गल्ले की दुकान खोलना चाहता है।
  • जहाँ आप यह दुकान खोलना चाहते हैं वह दुकान या तो आपकी होनी चाहिए या किराये पर हो तो रेंट एग्रीमेंट होना चाहिए।
  • यह जगह एक कम से कम 15 फीट सड़क पर होनी चाहिए। ताकि लोग वहां तक राशन लेने आसानी से पहुँच सकें।
  • Fair Price Shop की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर, लम्बाई 5 मीटर एवं चौड़ाई भी तीन मीटर होनी चाहिए।
  • हो सके तो इस लोकेशन के नज़दीक कहीं आटा चक्की भी होनी चाहिए। ताकि लोग मिलने वाले गेहूं को पिसाने में समर्थ हो सकें।
  • आवेदनकर्ता को आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए आवेदनकर्ता के खाते में कम से कम 50000 रूपये तो होने ही चाहिए ।
  • बहुत सारे राज्यों में कम से कम शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास है लेकिन किसी राज्य में कम या अधिक भी हो सकती है।
  • आवेदनकर्ता एवं उसके परिवार के किसी अन्य सदस्य द्वारा इससे पूर्व कोई इस तरह की दुकान का लाइसेंस लेकर वह चलाई न हो। अर्थात ऐसे लोग जो पूर्व में अपनी सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस रद्द करवा चुके हैं। वे दुबारा इस तरह की दुकान के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं ।
  • आवेदनकर्ता आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दोषी नहीं होना चाहिए।
  • आवेदनकर्ता के पास पूर्व में ही खाद्यान्न विभाग द्वारा जारी किया गया खाद्य तेल, चीनी, गेहूं, चावल इत्यादि का लाइसेंस नहीं होना चाहिए ।

सस्ते गल्ले की दुकान कैसे शुरू करें? (How to Start Fair Price Shop)

जैसा की अब तक हम जान चुके हैं की सस्ते गल्ले की दुकान ( Fair Price Shop) खोलने के लिए क्या क्या पात्रता की आवश्यकता होती है। इसलिए आगे यह जानना भी बेहद जरुरी हो जाता है की इस तरह की दुकान के लिए आवेदन करने की क्या प्रक्रिया है । यद्यपि शहरी इलाकों में हो सकता है की इस तरह की राशन कार्ड का लाइसेंस लेने के लिए ऑनलाइन भी आवेदन किया जाता हो।

लेकिन ग्रामीण भारत में आज भी इस प्रक्रिया को करने की व्यवस्था ऑफलाइन है। और हो सकता है की भविष्य में यहाँ भी यह प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाय। कहने का आशय यह है की ग्रामीण भारत एवं शहरी भारत दोनों में सस्ते गल्ले की दुकान (FPS) आवंटित करने की प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है। तो आइये जानते हैं की ग्रामीण भारत में कैसे कोई व्यक्ति सस्ते गल्ले की दुकान के लिए आवेदन कर सकता है।

  • ग्रामीण इलाकों में भिन्न भिन्न ग्राम सभाओं की एक बैठक आयोजित की जाती है जिसमें इस बात पर विचार किया जाता है। की उनकी ग्राम सभा या क्षेत्र में सस्ते गल्ले की दुकान की आवश्यकता है या नहीं। यह बैठक उस परिस्थिति में हो सकती है जब ग्राम सभा वासियों को राशन लेने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती हो, या फिर वे मौजूदा राशन वितरक के आचरण एवं व्यवहार से संतुष्ट न हों।
  • इस बैठक में सहायक ब्लाक डेवलपमेंट ऑफिसर पर्यवेक्षक के तौर पर कार्यरत होना चाहिए।
  • इसी बैठक में सहायक ब्लाक डेवलपमेंट ऑफिसर के सामने ग्राम सभा सस्ते गल्ले की दुकान चलाने वाले व्यक्ति को नामित कर सकती है।
  • बैठक में जब Fair Price Shop चलाने वाले उम्मीदवार का चयन कर लिया जाता है तो उसके बाद उसके पात्रता सम्बन्धी शर्तों को पूर्ण करने के उद्देश्य से उसके दस्तावेज जमा कर दिए जाते हैं। यद्यपि उम्मीदवार को कुछ आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ग्राम प्रधान, सरपंच एवं सहायक ब्लाक डेवलपमेंट ऑफिसर से भी संपर्क करना पड़ सकता है।
  • इसके बाद व्यक्ति का आवेदन फॉर्म एवं उसके साथ संग्लग्न सभी दस्तावेज ब्लाक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) को भेजे जाते हैं। उसके बाद बीडीओ द्वारा ये दस्तावेज डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर (DSO) को भेजे जाते हैं।
  • उसके बाद डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर द्वारा Fair Price Shop खोलने के इच्छुक आवेदनकर्ता के दस्तावेज जिला मजिस्ट्रेट के पास भेजे जाते हैं। जहाँ लाइसेंस की सिक्यूरिटी के तौर पर कुछ रूपये राज्यों के आधार पर अंतरित हो सकते हैं जमा किये जाते हैं।           

 शहरी क्षेत्र में सस्ते गल्ले की दुकान खोलने की प्रक्रिया

उपर्युक्त वाक्यों में हमने ग्रामीण इलाकों में सस्ते गल्ले की दुकान (Fair Price Shop) खोलने की क्या प्रक्रिया है के बारे में बात की । अब बात करते हैं शहरी इलाकों में इस तरह की दुकान खोलने की क्या प्रक्रिया है। 

  • यदि शहर के किसी एरिया में लगभग 4000 यूनिट हों तो सरकार द्वारा इस तरह की दुकान खोलने के लिए अधिसूचित किया जाता है । यह अधिसूचना स्थानीय अख़बार, सम्बंधित विभाग की वेबसाइट इत्यादि के माध्यम से दी जा सकती है। इन समाचार पत्रों एवं वेबसाइट के माध्यम से इच्छुक आवेदनकर्ताओं से एक निश्चित तिथि तक आवेदन मांगे जाते हैं।
  • इसके बाद जब सम्बंधित विभाग को सभी आवेदन पत्र प्राप्त हो जाते हैं तो उसके बाद सर्किल आपूर्ति निरीक्षक इन आवेदनों का निरीक्षण करता है।
  • निरीक्षण के बाद रिपोर्ट के आधार पर कुछ Fair Price Shop खोलने के इच्छुक आवेदनकर्ताओं को चयन समिति के सामने उपस्थित होने के लिए चुना जाता है।
  • इस चयन समिति में जिला आपूर्ति अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट/ अपर मजिस्ट्रेट, मुख्य विकास अधिकारी, राजस्व विभाग का नामित व्यक्ति इत्यादि शामिल रहते हैं।
  • चयन समिति द्वारा जिस आवेदनकर्ता की सिफारिश आगे भेजने के लिए की जाती है उसी आवेदन को डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर के पास भेजा जाता है। जो आवेदनकर्ता की आर्थिक स्थिति एवं चरित्र की जाँच करता है।
  • उसके बाद इस एप्लीकेशन को जिला मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाता है जहाँ लाइसेंस सिक्यूरिटी शुल्क भी जमा किया जाता है। 

आम तौर पर एक सस्ते गल्ले की दुकान (Fair Price Shop) 2000 यूनिट यानिकी लगभग 400 राशन कार्ड पर प्रदान की जाती है। लेकिन सहकारी समिति, ट्रस्ट इत्यादि की स्थिति में यह 4000 यूनिट लगभग 800 राशन कार्ड है । हालांकि भारत में यह देखा गया है की सस्ते गल्ले की दुकानों के आवंटन में राजनितिक हस्तक्षेप बहुत ज्यादा है।

अर्थात कोई स्थानीय नेता चाहे तो अपने व्यक्तियों को इस तरह का लाइसेंस दिला सकता है। एक बार जब सस्ते गल्ले की दुकान (Fair Price Shop) का लाइसेंस प्रदान कर दिया जाता है तो इसके रिन्यू या वैधता की समय सीमा सम्बन्धी कोई नियम नहीं है। इसलिए एक बार लाइसेंस मिलने के बाद राशन वितरक ताउम्र यही दुकान चलाते हैं। हालांकि उन्हें अपनी दुकान के बाहर एक बोर्ड पर राशन की रेट लिस्ट लिखना एवं इसे प्रदर्शित करना अनिवार्य है। 

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  1. Avatar for Shivam Singh Shivam Singh

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