Glass Bangles Making Business

Glass Bangles Making Business

Glass Bangles यानिकी कांच की चूड़ियाँ हमारे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हैं, इन्हें विभिन्न शेड और रंग के ब्लाक ग्लास से या फिर सीधे बैच सामग्री से निर्मित किया जाता है | इन चूड़ियों का आकार गोल एवं दिखने में आकर्षक रंगों में होता है यही कारण है की महिलाएं/लड़कियां अपने पहनावे के रंग के अनुरूप चूड़ियों का भी चयन करती हैं | महिलाओं एवं लड़कियों द्वारा चूड़ियाँ पहनने का रिवाज प्राचीनकाल से चला आ रहा है इसलिए इसे हम औरतों/लड़कियों द्वारा पहने जाने वाली एक प्रथागत सजावटी वस्तु भी कह सकते हैं | Glass Bangles हो या कोई अन्य चूड़ियाँ लड़कियों को बचपन से ही पहनाये जाते हैं इन्हें पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है | इसके अलावा विशेष तौर पर पूर्वी और उत्तरी भारत में  महिलाओं के लिए Glass Bangles को वैवाहिक स्थिति का भी चिन्ह माना जाता है |

Glass-Bangles-Making business

Glass Bangles Making Business kya hai:

यद्यपि चूड़ियाँ तो विभिन्न प्रकार की धातु जैसे सोने, चाँदी, पीतल, लोहे इत्यादि से भी बनाई जाती हैं इसके अलावा प्लास्टिक से भी चूड़ियों का निर्माण किया जाता है | लेकिन यहाँ पर हम Glass Bangles अर्थात कांच की चूड़ियों की बात कर रहे हैं जो अन्य चूड़ियों के मुकाबले अधिक प्रचलन में हैं | जब किसी उद्यमी द्वारा कांच की विभिन्न साइज़ की चूड़ियों को बनाकर मार्किट में बेचकर अपनी कमाई की जाती है तो हम कह सकते हैं की वह उद्यमी Glass Bangles Manufacturing business में संलिप्त है | अर्थात विभिन्न आकार, रंग की कांच की चूड़ियाँ बनाकर उन्हें मार्किट में बेचकर कमाई करने की क्रिया Glass Bangles Making business कहलाता है |

Market Potential in Bangles Making:

Glass bangles लड़कियों/महिलाओं द्वारा हाथों की सजावट हेतु उपयोग में लायी जाने वाली एक मुख्य प्रसाधन है | India में इसका उपयोग बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है क्योकि एक लड़की या महिला के पास अनेकों रंग की Glass Bangles हुआ करती हैं | यद्यपि औरतों/लड़कियों द्वारा इन्हें दैनिक सजावट के उपयोग में भी लाया जाता है किन्तु जब कोई त्यौहार जैसे करवा चौथ, दीवाली या फिर कोई आयोजन या शादी समारोह हो तो इस मौसम में Glass Bangles की मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है | बाज़ार में प्लास्टिक इत्यादि की चूड़ियाँ प्रतिस्पर्धात्मक रूप में होने के बावजूद Glass Bangles की मांग बढती जा रही है | इसकी मांग बढ़ने के पीछे कहीं न कहीं Glass Bangles पहनने को शुभ मानने वाली विचारधारा भी जुड़ी हुई है | चूँकि कांच की चूड़ियाँ जल्दी टूटने वाली वस्तु हैं इसलिए इनकी Replacement की भी  Market में अच्छी मांग हमेशा बनी रहती है | वर्तमान में India में Glass Bangles बनाने का काम फिरोजाबाद में किया जाता है, इसलिए देश के अन्य हिस्सों में भी यह काम करने की अच्छी संभावना है | Glass Bangles Making business start करने वाले उद्यमी को Skilled worker चाहिए होती है | इस प्रकार के उत्पाद की मांग अधिकतर तौर पर मध्यम वर्गीय एवं निम्न वर्गीय परिवारों से जुड़ी महिलाओं में अधिक है, इसलिए India में Glass Bangles Making business के लिए Market का रुख सकारात्मक है |

Required Machinery and Raw Material for Bangles Making:

Glass bangles making में मुख्य रूप से उपयोग में लायी जाने वाली Machinery विभिन्न प्रक्रियाओं को अंजाम देने के लिए अलग अलग भट्टियाँ हैं लेकिन इनके अलावा और भी मशीनरी की आवश्यकता होती है जिसकी लिस्ट निम्नवत है |

  • Pot Furnace (शीशे को पिघलाने के लिए भट्टी)
  • Auxiliary furnace for reheating (सहायक भट्टी)
  • Belar furnaces (दुबारा गरम करने की भट्टी)
  • Direct coal fixed pot furnace with pots each
  • चिमनी
  • धूल एकत्रित करने वाला यंत्र
  • Office Furniture & Equipments.
  • Optical pyrometer
  • Orasaat appratus
  • Vacume cleaner.
  • Tools, Dies & Equipments

Glass Bangles Making में काम आने वाली Raw Materials की लिस्ट इस प्रकार से है |

  • Borax (बोरेक्स)
  • Cullet (टूटा हुआ ग्लास)
  • Fire Clay pots (बर्तन)
  • Lime Stone (चूना पत्थर)
  • Other minor Chemical (अन्य केमिकल)
  • Packing Material (पैकेजिंग सामग्री)
  • Potassium Nitrates (पोटेशियम नाइट्रेट)
  • Silica Sand (सिलिका की रेत)
  • Soda Ash (सोडा ऐश)

Manufacturing process of Glass Bangles:

Glass bangles अर्थात कांच की चूड़ियाँ बनाने के लिए Highly Skilled लोगों की जरुरत होती है वैसे हम इस प्रक्रिया को तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं |

  • ग्लास को पिघलाना (Glass Melting)
  • Parison बनाना (Parison Making)
  • चूड़ी को घुमाना/ कुंडली बनाना (Bangle spiral / coil forming)

सर्वप्रथम शीशे की बैच सामग्री जैसे Sand, Soda ash, चूना पत्थर felsafer, बोरेक्स इत्यादि एवं अन्य पदार्थ जैसे रंग को उचित मात्रा में लेकर मिला दिया जाता है | और उसके बाद उसे बर्तन वाली भट्टी में डाल दिया जाता है | इस कच्चे माल को भट्टी में 1300-1400C तापमान में गरम करके पिघलाया जाता है | उसके बाद एक लोहे के पाइप के माध्यम से पिघले हुए शीशे को Parison Making के लिए लोहे की प्लेट में निकाला जाता है | विभिन्न रंगों के Parison को एक साथ जोड़ दिया जाता है उसके बाद इसे एक सहायक भट्टी में दुबारा गरम किया जाता है, ताकि इसे आवश्यक design दिया जा सके | उसके बाद दुबारा गरम किये गए Parison को Belar Furnace की ओर Spiral/Coil करने के लिए अग्रसित किया जाता है | इसमें चूड़ियों के घुमावदार को Manually Count किया जाता है इसलिए इस प्रक्रिया को करने के लिए Highly Skilled workers की जरुरत होती है | यही वे कर्मचारी होते हैं जो किसी चूड़ी बनाने वाली फैक्ट्री में सबसे अधिक वेतन लेते हैं | चूड़ी का व्यास Spiral Formation में use हुए Spindle के व्यास पर निर्भर करता है, चूड़ियों की मोटाई अर्थात Thickness मुलायम Glass Parison की डाली गई मात्रा पर निर्भर करती है | उसके बाद Spiral को Spindle से निकालकर Pencil cutter की मदद से काट लिया जाता है | उसके बाद इन कटी हुई चूड़ियों को जोड़ने के लिए भेजा जाता है, फिर Finishing, Cutting, Decorating एवं Polishing क्रिया को अंजाम दिया जाता है, उसके बाद चूड़ियों को पैकेजिंग कर मार्किट में बेचकर कमाई की जाती है  |

Comments

  1. By vijay kumar cholkar

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