पैथोलोजिस्ट कैसे बनें? How to become pathologist in India in HINDI.

हालांकि सामान्य बोलचाल की भाषा में एक Pathologist को भी डॉक्टर ही कहा जाता है | लेकिन जहाँ एक फिजिशियन या अन्य डॉक्टर का काम रोगी का ईलाज करना होता है वहीँ एक Pathologist का काम रोगी के रोग की पहचान करना होता है | कहते हैं मेडिकल क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कभी मंदी नहीं होती, कहने का अभिप्राय यह है की मनुष्य और कुछ करे न करे लेकिन यदि वह बीमार है तो वह डॉक्टर के पास अवश्य जायेगा | और चिकित्सक उसकी बीमारी का पता लगाने के लिए उसे जाँच करने को अवश्य कहेगा | यही कारण है की वर्तमान में मेडिकल क्षेत्र कमाई करने की दृष्टी से सबसे सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है | इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से जानने की कोशिस करेंगे की कैसे कोई व्यक्ति Pathologist बनकर अपनी कमाई कर सकता है | लेकिन उससे पहले हम साधारण भाषा में यह जान लेते हैं की पैथोलोजिस्ट होते कौन हैं |

कौन होते हैं पैथोलोजिस्ट (Who are pathologist ):

वर्तमान में हर कोई व्यक्ति भले ही स्वयं के बीमार होने के कारण अस्पताल एवं डॉक्टर के पास न गया हो, लेकिन किसी न किसी सगे सम्बन्धी के साथ या उसकी बात खबर लेने डॉक्टर या अस्पताल में अवश्य गया होगा | और इसी वक्त उसने ध्यान दिया होगा की रोगी के शरीर में रोग की स्थिति एवं रोग का निदान करने के लिए डॉक्टर द्वारा मरीज को जांच करने के लिए कहा जाता है | जिस व्यक्ति द्वारा मरीज के मल, मूत्र, खून, कोशिका, ऊतकों इत्यादि के सैंपल के माध्यम से बीमारीयों का कारण एवं शरीर पर उसके प्रभावों का अध्यन किया जाता है उसे Pathologist कहा जाता है | साधारण भाषा में एक ऐसा वैज्ञानिक जो बीमारी के कारणों एवं शरीर पर होने वाले उसके प्रभावों का अध्यन करता है, विशेष रूप से वह व्यक्ति जो प्रयोगशाला में रोगों का निदान एवं फोरेंसिक उद्देश्यों के लिए शरीर के कोशिका एवं ऊतकों के नमूने की जांच करता है Pathologist कहलाता है |

Pathologist

पैथोलोजिस्ट की आवश्यकता (Requirement of Pathologist):

मनुष्य की जीवन शैली में हो रहे परिवर्तनों, पर्यावरण में हो रहे बदलावों से हर रोज नए नए रोग सामने आ रहे हैं | ऐसे में कुछ ऐसे विशेष व्यवसायिक लोगों की आवश्यकता होती है जो रिसर्च करके इन रोगों के होने का कारण पता कर सकें | और इस रोग के बारे में डॉक्टर एवं सर्जन को अवगत करा सकें ताकि वे उस विशेष रोग से ग्रसित रोगी का ईलाज कर पाने में सक्षम हों | पैथोलॉजी को चिकित्सा की एक ऐसी शाखा कहा जा सकता है जो खून के नमूनों, अन्य तरल, शरीर के ऊतकों, कोशिकाओं, अंगों, हड्डी इत्यादि का परीक्षण करके रोगी में रोग का एवं उसकी स्थिति का पता लगाती है | इसलिए वर्तमान में जब हर परिवार से कोई न कोई व्यक्ति किसी न किसी रोग से जूझ रहा है ऐसे में अस्पतालों एवं क्लिनिक में हमें भीड़ ही भीड़ नज़र आती है | ऐसे में कोई व्यक्ति Pathologist बनकर न सिर्फ अपनी कमाई कर पायेगा बल्कि इस तरह के क्षेत्र में आकर वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर मानव जाति को दुःख से भी उबार पाने में सक्षम होगा | इसलिए कहा जा सकता है की जहाँ जिस क्षेत्र में भी मनुष्य जाति निवासित है वहां Pathologist एवं चिकित्सकों की नितांत आवश्यकता रहती है |

पैथोलोजिस्ट बनने के लिए योग्यता (Eligibility Criteria):

Pathologist बनने के लिए विद्यार्थी का साइंस पृष्ठभूमि जिसमे फिजिक्स, केमिस्ट्री एवं बायोलॉजी इत्यादि विषय हों से होना बेहद जरुरी है | जिसके बाद विद्यार्थी को किसी विख्यात एवं मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से MBBS करना होता है | 4.5 साल की MBBS के बाद व्यक्ति को Pathology में विशेषता प्राप्त करने के लिए M.D. Degree करनी होती है जिसमे तीन सालों का समय लग सकता है | या फिर स्नातक स्तर पर भी Pathology चुना जा सकता है | जहाँ तक MBBS के लिए शैक्षणिक योग्यता की बात है वर्तमान में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी इत्यादि विषय के साथ कम से कम 60% अंक लेकर पास हुआ 10+2 विद्यार्थी MBBS करने के लिए अप्लाई कर सकता है |

पैथोलोजिस्ट कैसे बनें (How to become pathologist in India Hindi):

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की Pathologist बनने के लिए विद्यार्थी को MBBS उसके बाद MD (Pathology) करनी होती है | तो आइये जानते हैं स्टेप बाई स्टेप प्रक्रिया के बारे में की कैसे कोई विद्यार्थी Pathologist बन सकता है |

  1. 10+2 साइंस से करें

Pathologist बनने के लिए बहुत पहले से तैयारी करने की आवश्यकता होती है इसके लिए विद्यार्थी को 10+2 में साइंस (PCB) यानिकी फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी विषयों का चुनाव तो करना ही होता है | साथ में यह भी सुनिश्चित करना होता है की उसके कम से कम 60% अंक तो आये ही | क्योंकि मेडिकल कॉलेज के एंट्रेंस एग्जाम में बैठने के लिए कम से कम 60% अंक निर्धारित किये गए हैं |

  1. UG मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम दें:

साधारणतया इस तरह के एग्जाम मई जून में होते हैं और ये मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम अनेकों राज्यों एवं स्वतंत्र निकायों जैसे NEET- UG., AIPMT, AIIMS, GPAT इत्यादि द्वारा आयोजित किये जाते हैं | इसलिए Pathologist बनने की ओर विद्यार्थी का दूसरा कदम मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में अच्छी रैंक लाने का होना चाहिए | क्योंकि विभिन्न मेडिकल कॉलेज में दाखिला रैंक के आधार पर ही मिलता है | इस परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप ही प्रश्न आते हैं जो अंग्रेजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी विषयों से ही सम्बंधित होते हैं |

  1. मेडिकल कॉलेज में दाखिला लें:

हालांकि यह सच है की यदि विद्यार्थी की मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में ज्यादा अच्छी रैंक नहीं आई तो उसके माता पिता को उसे मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए काफी पैसे खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है | इसलिए Pathologist बनने का सपना देखने वाले विद्यार्थी को चाहिए की वह मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में अच्छी रैंक लेके आये ताकि उसके अभिभावकों को कम पैसा खर्च करना पड़े | MBBS का यह कोर्स 4.5 सालों का होता है | कहने का आशय यह है की विद्यार्थी की 4.5 सालों की कड़ी मेहनत उसे MBBS की डिग्री दिलाने में मददगार होगी | MBBS के बाद विद्यार्थी को उसी मेडिकल कॉलेज में एक साल की Internship करनी होती है जो की अनिवार्य होती है | हालांकि विद्यार्थी चाहे तो अन्य मेडिकल कॉलेज या हॉस्पिटल में भी Internship कर सकता है लेकिन वह कॉलेज भी उसी यूनिवर्सिटी से संबद्ध होना चाहिए जिससे विद्यार्थी ने MBBS किया हो | इसकी प्रक्रियाएं जटिल होने के कारण अधिकतर विद्यार्थी उसी कॉलेज में Internship करते हैं जहां से उन्होंने MBBS किया हो |

  1. Pathologist बनने के लिए PG मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम दें:

जिस तरह MBBS में प्रवेश के लिए UG Medical entrance exam में अच्छी रैंक की आवश्यकता होती है ठीक इसी प्रकार MD (Pathology) करने हेतु प्रवेश लेने के लिए Medical Entrance exam PG में अच्छे रैंक की आवश्यकता हो सकती है | एडमिशन तो MBBS और Internship पूरी करने के बाद बहुत ज्यादा अच्छी रैंक न आने पर भी मिल सकता है लेकिन इसके लिए फिर से Pathologist बनने की चाह रखने वाले उद्यमी के अभिभावकों को अच्छा खासा पैसा खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है |  इसलिए कोशिश यही करें की PG Medical Entrance Exam में भी आपकी अच्छी रैंक आये |

  1. MD (Pathology) के लिए एडमिशन लें

PG medical entrance exam में अच्छी रैंक आने पर व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज में MD Pathology की सीट आसानी से मिल सकती है | यह तीन साल का कोर्स होता है | हालांकि क्लिनिकल पैथोलॉजी में एक दो साल का डिप्लोमा कोर्स (DCP) है जो बेहद कम प्रचलित है | लेकिन यदि विद्यार्थी के अभिभावकों के पास पैसे खर्च करने के लिए बहुत सारे पैसे नहीं हैं तो वह Diploma in Clinical Pathology के लिए अप्लाई कर सकता है | तीन साल MD Pathology करने के बाद विद्यार्थी एक Pathologist बन जाता है | कहने का आशय यह है की किसी विद्यार्थी को Pathologist बनने के लिए (MBBS 4.5 Years+ 1 Year Internsip+3 Year MD Pathology) यानिकी 8.5 Years कड़ी मेहनत एवं लगन की आवश्यकता होती है |

Pathologist बनने में कितना खर्चा आ सकता है?

Pathologist बनने में आने वाला खर्चा अलग अलग मेडिकल कॉलेज के आधार पर अलग अलग हो सकता है | MBBS करने एवं MD Pathology करने में आने वाला खर्चा जहाँ सरकारी मेडिकल कॉलेज में कुछ हज़ार से कुछ लाख रूपये तक आ सकता है वहीँ निजी मेडिकल कॉलेज में यह खर्चा 18-22 लाख रूपये तक आ सकता है | हालांकि कुछ प्रमुख एवं प्रचलित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से यह कोर्स करने पर खर्चा दिए गए आंकड़े से भी ऊपर आ सकता है |  लेकिन MD Pathology करते वक्त प्रतिभाशाली एवं मेधावी छात्र स्कॉलरशिप प्राप्त कर सकते हैं | हालांकि पैथोलॉजी में रिसर्च वर्क एवं अन्य क्षेत्रों के लिए वजीफे का भी प्रावधान है |

Pathologist अपनी कमाई कैसे कर सकते हैं?

चूँकि हमारे इस लेख का असल उद्देश्य लोगों को कमाई की ओर प्रोत्साहित करना है इसलिए हमारे लिए यह जानना बेहद जरुरी हो जाता है की कोई व्यक्ति Pathologist बनकर अपनी कमाई कैसे कर सकता है | पैथोलोजिस्ट किसी भी सरकारी एवं निजी अस्पतालों में नौकरी कर सकते हैं | इसके अलावा वे अस्पताल एवं दवाइयों के क्षेत्र में रिसर्चर की भूमिका अदा करने के बदले अपनी अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं | किसी नामी गिरामी पैथोलॉजी लैब में नौकरी कर सकते हैं खुद की पैथोलॉजी लैब खोलकर बिज़नेस करके कमाई कर सकते हैं |

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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