सिनेमा हॉल बिजनेस कैसे शुरू करें? How to Start Movie Theater Business.

सिनेमा हाल अर्थात Movie Theater से शायद ही कोई व्यक्ति अनभिज्ञ होगा वह इसलिए क्योंकि सिनेमा के प्रति लोगों का लगाव एवं प्यार लगभग हर भारतीय के दिल में मौजूद होता है । यही कारण है की चाहे शहर हो या ग्रामीण इलाके दोनों क्षेत्रों में सिनेमा के प्रति लगाव रखने वालों की कोई कमी नहीं है। इसलिए दोनों स्तरों पर दर्शकों को देखते हुए कहा जा सकता है की ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में Movie Theater बिजनेस करना कमाई की दृष्टि से उपयुक्त हो सकता है। हालांकि सिनेमा हाल खोलना भारतीय लोगों का सिनेमा के प्रति लगाव को देखते हुए एक अच्छा बिजनेस हो सकता है लेकिन इस तरह का बिजनेस करना बोलने जितना आसान बिलकुल भी नहीं है। लेकिन इस लेख में हम इस तरह का बिजनेस शुरू करने सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए यदि आपमें सिनेमा हाल बिजनेस शुरू करने का जूनून सवार है तो आप हमारे द्वारा दी गई इस जानकारी का लाभ उठा सकते हैं।

Movie-Theater
Movie-Theater

सिनेमा हॉल कैसे शुरू करें (How to Start a Movie Theater in Hindi):

भारत में Movie Theater Business शुरू करना आसान काम बिलकुल भी नहीं है इस तरह के बिजनेस को शुरू करने के लिए जहाँ भारी भरकम निवेश की आवश्यकता हो सकती है। वहीँ तरह तरह के परमिशन, लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की भी आवश्यकता हो सकती है। इन सब बातों का उल्लेख हम आगे इस लेख में कर रहे हैं। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई व्यक्ति स्वयं का सिनेमा हाल बिजनेस शुरू कर सकता है।   

1. रिसर्च करें

यद्यपि सिर्फ Movie Theater ही नहीं अपितु सभी प्रकार का बिजनेस शुरू करने से पहले रिसर्च करने की आवश्यकता होती ही होती है। क्योंकि किसी भी उद्यमी को स्थानीय लोगों की जीवनशैली को समझते हुए अपने बिजनेस की योजना बनाने की आवश्यकता होती है। आम तौर पर सिनेमा हॉल बिजनेस के संभावित ग्राहक स्थानीय लोग ही होते हैं जो इस तरह के बिजनेस को सफल बनाने में अहम् योगदान देते हैं। इसके अलावा वर्तमान बाजार परिदृश्य भी बिजनेस से मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। एक सिनेमा हॉल के मालिक को उस क्षेत्र में स्थित अपने प्रतिद्वंदियों को भी समझने की आवश्यकता होती है। इसलिए उद्यमी को अपने बिजनेस को सफल बनाने के लिए जहाँ अपने गुणों एवं खामियों की लिस्ट तैयार करनी होगी। वहीँ खामियों को दूर करने के लिए योजनायें भी बनानी होंगी और योजना के अनुरूप उनका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना होगा। इसलिए उद्यमी को बाजार, संभावित ग्राहकों एवं प्रतिस्पर्धा को समझने के लिए रिसर्च जरुर करनी चाहिए।

2.सिनेमा हॉल की प्रकृति डीसाइड करें (Decide the Nature of Movie Theater)

कोई भी उद्यमी Movie Theater को दो स्वरूपों में से किसी एक स्वरूप में खोल सकता है आम तौर पर सिनेमा हॉल को दो भागों मिनिप्लेक्स एवं मल्टीप्लेक्स में विभाजित किया जा सकता है। मिनिप्लेक्स में वे मूवी थिएटर आते हैं जहाँ केवल एक स्क्रीन लगी हुई होती है जबकि मल्टीप्लेक्स में एक से अधिक स्क्रीन में फिल्में दिखाई जाती हैं। इसलिए Movie Theater Business शुरू करने वाले उद्यमी को इस बात का निर्णय लेना होगा की वह मिनिप्लेक्स खोलना चाहता है या फिर मल्टीप्लेक्स क्योंकि जहाँ मल्टीप्लेक्स खोलने के लिए तुलनात्मक रूप से अधिक बजट की आवश्यकता होगी वहीँ कुछ लाइसेंस एवं परमिशन में भी अंतर हो सकता है। मल्टीप्लेक्स की तुलना में मिनिप्लेक्स को प्रबंधित करना भी आसान है क्योंकि सिंगल स्क्रीन होने के कारण यहाँ कम लोगों के बैठने का प्रबंध होता है जिन्हें आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है। छोटे शहरों एवं ग्रामीण इलाकों में मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल खोलना कमाई की दृष्टि से जोखिमभरा हो सकता है क्योंकि वहाँ पर निवासित जनता फिल्म देखने के लिए महंगे टिकट खरीदने की आदी नहीं होती। इसलिए शुरूआती दौर में किसी भी उद्यमी के लिए मिनिप्लेक्स के तौर पर ही सिनेमा हॉल बिजनेस करना उपयुक्त रहेगा।             

3. लोकेशन फाइनल करें

Movie Theater Business शुरू करने की ओर आगे बढ़ने से पहले अब उद्यमी के लिए बेहद जरुरी हो जाता है की वह इस व्यापार के लिए लोकेशन एवं जगह का प्रबंध करे। उद्यमी को चाहिए की वह इस बिजनेस की प्रकृति के आधार पर ही जगह का चयन करे क्योंकि मिनिप्लेक्स के लिए मल्टीप्लेक्स की तुलना में कम जगह की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा संभावित ग्राहकों की अनुमानित संख्या भी उद्यमी के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। जिस लोकेशन पर उद्यमी को लगता है की यहाँ कम ग्राहक हैं तो वहाँ पर मिनिप्लेक्स शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा मॉल इत्यादि में मल्टीप्लेक्स शुरू किया जा सकता है।     

4.फ्रैंचाइजी या व्यक्तिगत का निर्णय लें

हालांकि उद्यमी जब Movie Theater के लिए लोकेशन एवं जगह तलाशना शुरू कर देता है तब तक उसे इस बात का निर्णय ले लेना चाहिए की वह इस बिजनेस को स्वतंत्र रूप से शुरू करेगा या फिर किसी प्रसिद्ध ब्रांड की फ्रैंचाइजी लेकर शुरू करेगा। यदि उद्यमी स्वतंत्र तौर पर इस तरह का बिजनेस शुरू करना चाहता है तो उसे इन्टरनेट मूवी डेटाबेस की सदस्यता खरीदने की आवश्यकता हो सकती है। यह डेटाबेस उद्यमी को इस क्षेत्र में मार्गदर्शित करने का कार्य करेगा वहीँ यह इस फील्ड के वितरकों एवं अन्य जानकारियों से भी उद्यमी को परिचित कराने में मदद करेगा। इस व्यवसाय में उद्यमी यदि किसी विशेष फिल्म में रूचि रखता है तो उसे उस फिल्म के वितरक से संपर्क करना होगा और उसकी फीस एवं कॉपीराइट विवरण के बारे में बात करके सौदा तय करना होगा। यदि उद्यमी मोलभाव करना जानता हो तो वह उचित दर पर सौदा तय करने में सफल हो सकता है। यदि सिनेमा हॉल अच्छे खासे टिकट बेचने में सफल होता है तो उद्यमी को इसका रिकॉर्ड मेन्टेन करके रखना होगा क्योंकि यह इकाई के लिए बेहद अच्छा साबित हो सकता है। जहाँ उद्यमी को स्वतंत्र रूप से यह बिजनेस करने पर मूवी वितरकों से खुद ही सौदा करना होगा वहीँ फ्रैंचाइजी लेने पर कंपनी ही वितरकों से सौदा करती है। हालांकि ऐसे लोग जिन्हें Movie Theater Business की पहले से कोई जानकारी नहीं है उनके लिए फ्रैंचाइजी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। क्योंकि इसमें उद्यमी को कंपनी द्वारा बताये गए दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए बिजनेस को चलाना पड़ता है और जरुरत पड़ने पर कंपनी मदद भी कर सकती है। लेकिन फ्रैंचाइजी विकल्प तुलनात्मक रूप से महंगा है इसमें 1.5 -3 करोड़ रूपये निवेश होने की संभावना है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह अपने बजट क्षमता इत्यादि के आधार पर इस बात का निर्णय ले की वह स्वतंत्र रूप से यह बिजनेस करना चाहता है या फिर फ्रैंचाइजी लेकर।

5. डिजाईन एवं कंस्ट्रक्शन(Design and Construction of Movie Theater)

इस पूरी प्रक्रिया में Movie Theater की डिजाईन एवं कंस्ट्रक्शन करना बेहद महत्वपूर्ण तत्व है डिजाईन एवं कंस्ट्रक्शन कराते वक्त उद्यमी को विभिन्न बातों जैसे आधुनिक बिल्डिंग आर्किटेक्चर, आलीशान इंटीरियर लुक, आँखों को अच्छे लगने वाले रंग, बच्चों से सम्बंधित क्षेत्र, इंतजार करने का स्थान इत्यादि का ध्यान रखना पड़ता है।  डिजाईन एवं कंस्ट्रक्शन के अलावा उद्यमी को निम्नलिखित गतिविधियों को कराते वक्त भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

  • चूँकि एक दर्शक Movie Theater या सिनेमा हॉल में तीन से अधिक घंटे बिताता है इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह दर्शकों के बैठने एवं एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था ऐसे करे की सभी दर्शक अच्छा आराम एवं सुखद आनंद की अनुभूति करें।
  • उद्यमी द्वारा बैठने के सीटों को फिक्स्ड सीट, पुश बेक सीट, मोटर चालित रिक्लाइनर चेयर, सोफा इत्यादि में वर्गीकृत किया जा सकता है।
  • उद्यमी अपने बजट के मुताबिक सिनेमा हॉल में स्प्लिट, सीलिंग या फिर सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग में से कुछ भी लगवा सकता है।
  • जहाँ तक सिनेमा हॉल के स्क्रीन की बात है टेक्नोलॉजी ने स्क्रीन में क्रन्तिकारी बदलाव ला दिया है। यही कारण है की आज Movie Theater Business करने वाले उद्यमी के पास अनेकों विकल्प जैसे सिल्वर स्क्रीन, वाइट स्क्रीन, 3D स्क्रीन इत्यादि मौजूद हैं। स्क्रीन का साइज़ क्या होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की सिनेमा हॉल का साइज़ क्या है।
  • प्रोजेक्शन के लिए उद्यमी सेटेलाइट प्रोजेक्ट तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है।
  • उद्यमी को अपने सिनेमा हॉल में डॉल्बी प्रोसेसर, एम्पलीफायरों और बेहतरीन साउंड स्पीकर का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि आगंतुक फिल्म का अच्छे से आनंद उठा सकें।

इन सबके अलावा Movie Thetaer Business करने वाले उद्यमी को टिकट विंडो, डिस्ट्रीब्यूटर लिंक, कैफेटेरिया के भी निर्माण में ध्यान देने की आवश्यकता होती है।            

6. आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन

उद्यमी द्वारा उपर्युक्त बताई गई सभी प्रक्रियाएं कर ली जाती हैं तो उसे संपर्कों का निर्माण शुरू कर देना चाहिए। इसके अलावा कॉपीराइट एवं लाइसेंस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर देनी चाहिए। Movie Theater Business शुरू करने के लिए उद्यमी को अनेकों लाइसेंस एवं परमिशन की आवश्यकता हो सकती है जिनमें स्थानीय एवं राज्य प्राधिकरण से कुछ अनिवार्य लाइसेंस भी शामिल हैं। नियमों के मुताबिक सिनेमाघरों के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन लिखित तौर पर ही होता है और आवेदक द्वारा आवेदन लाइसेंसिंग अथॉरिटी के पास लिखित तौर पर ही जमा कराया जाता है। लेकिन इस आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को संग्लन करने की भी आवश्यकता हो सकती है।

  • सिनेमा हॉल के स्वामित्व से जुड़ा पूर्ण विवरण एवं इस्तेमाल में लाये जाने वाले सिनेमैटोग्राफ तंत्र का विवरण।
  • नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की मूल प्रति।
  • ईमारत में संरचनात्मक सुविधाओं का विधिवत पालन हुआ है को प्रमाणित करने के लिए उस क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता पीडब्ल्यूडी विभाग से प्रमाणपत्र की आवश्यकता हो सकती है।
  • इलेक्ट्रिकल इंस्टालेशन आवश्यक मानक एवं नियमों के तहत हुई है इसके लिए सरकार के विद्युत् विभाग से जारी किये गए प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है।
  • सैनिट्रेसन एवं स्वच्छता मानकों का अनुपालन हुआ है इसके लिए जिलाधिकारी या पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट से प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है।
  • Movie Theater शुरू करने के लिए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से स्वीकृत किसी फिल्म प्रदर्शनी प्रमाण पत्र से भी एक प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है। यह लाइसेंस लाइसेंसिंग अवधि के दौरान फिल्मों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • सम्बंधित क्षेत्र के कर अधीक्षक से क्लेअरेंस सर्टिफिकेट की आवश्यकता हो सकती है।  

उपर्युक्त लाइसेंस के अलावा उद्यमी को कॉपीराइट के मामलों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। दर्शकों की पसंद एवं सार्वजनिक माँग वाली फिल्मों के कॉपीराइट के बारे में जानकारी लेने के लिए कॉपीराइट लाइसेंसिंग कंपनी को कॉल कर सकते हैं। Movie Theater business कर रहा उद्यमी चाहे तो फिल्म को अपने दर्शकों को दिखाने के लिए एक साल तक की अवधि के लिए कॉपीराइट खरीद सकता है।   

जब उपर्युक्त बताई गई सभी कार्यवाहियां पूर्ण हो जाती हैं तो उद्यमी खुद के सिनेमा हॉल से कमाई करने के लिए तैयार हो जाता है। अब उसका मकसद अधिक से अधिक दर्शकों को अपने सिनेमा हॉल तक लाने का होना चाहिए।

यह भी पढ़ें

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *