इनकम टैक्स बचाने के तरीके, बचाना चाहते हैं आयकर तो अपनाएं ये तरीके.

इनकम टैक्स बचाने के बारे में कोई भी मनुष्य तब सोचता है जब उसकी कमाई भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित की गई एक निश्चित सीमा से ऊपर होनी शुरू हो जाती है | कहने का आशय यह है की एक निश्चित सीमा तक कमाई आयकर क्षेत्र से बाहर होती है इसलिए उस पर किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता है | यह सीमा वर्तमान में 2.5 लाख रूपये है भारत में ढाई लाख से ऊपर की कमाई करने वाला हर एक सामान्य नागरिक टैक्स देने के लिए पात्र है | वह व्यक्ति जिसकी सालाना कमाई 2.5 लाख से अधिक है उसे अपनी कमाई के हिसाब से 5% से लेकर 30% तक का टैक्स सरकार को देना होता है | लेकिन यदि व्यक्ति इनकम टैक्स बचाने के तरीकों को अपनाये तो वह कर के रूप में दी जाने वाली राशि को बचा सकता है | प्रति वर्ष इनकम टैक्स भरने की चिंता हर उस व्यक्ति को सताने लगती है जिसकी कमाई निर्धारित सीमा से अधिक हो ऐसे में लोग इनकम टैक्स बचाने के तरीकों को तलाशने लगते हैं | अधिकतर लोग इस तरह के तरीकों को हिंदी में समझना एवं जानना पसंद करते हैं | इसलिए आज हम इस लेख के माध्यम से यह बताने की कोशिश कर रहे हैं की आयकर अधिनियम यानिकी Income Tax Act के अंतर्गत किन किन निवेशों एवं खर्चों पर कोई भी करदाता कैसे अधिकतम टैक्स बचा सकता है | नियमों की बात करें तो नियमों के मुताबिक इनकम टैक्स को दो तरीकों से पहला छूट यानिकी Exemptions दूसरा कटौती यानिकी Deductions करके कम किया जा सकता है | छूट के पहले तरीके में व्यक्ति की ऐसी कमाई सम्मिलित होती है जिस पर किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता है इसमें मुख्य रूप से घर का किराया भत्ता (HRA),  Leave Travel Allowance (LTA), परिवहन भत्ता (TA) इत्यादि सम्मिलित है | दूसरे तरीके यानिकी कटौती की बात करें तो यह तरीका कुछ विशेष प्रकार के खर्चों पर इनकम टैक्स बचाने का मौका देता है | कहने का अभिप्राय यह है की व्यक्ति द्वारा इन निर्धारित योजनाओं में जितना अधिक पैसा खर्च किया जायेगा या निवेश किया जायेगा उसकी कर योग्य कमाई उतनी ही कम हो जाएगी | टैक्स बचाने के तरीकों को आसानी से समझने के लिए हम इन तरीकों को मुख्य रूप से चार भागों में बाँट सकते हैं | कर मुक्त कमाई, धारा 80 सी के तहत कर में छूट, कर मुक्त भत्ते एवं धारा 80 सी के अलावा अन्य छूट |

इनकम टैक्स बचाने के तरीके

  1. कर मुक्त कमाई (Tax Free Income):

कर मुक्त कमाई के अंतर्गत आने वाले इनकम टैक्स बचाने के तरीकों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • इनकम टैक्स बचाने का पहला तरीका प्रोविडेंट फण्ड से जुड़ा हुआ है, किसी भी व्यक्ति के प्रोविडेंट फण्ड खाते में जमा धनराशि चाहे वह कर्मचारी का अंश हो या नियोक्ता द्वारा जमा किया हुआ अंश टैक्स छूट की श्रेणी में आता है | इसलिए इस प्रकार की जमा राशि पर कोई कर नहीं देना पड़ता है लेकिन कर मुक्त राशि तभी होगी जब नियोक्ता द्वारा जमा की गई राशि कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12% से अधिक नहीं होगा | बारह फ़ीसदी से अधिक होने पर टैक्स देना पड़ सकता है |
  • वर्तमान में शेयर बाजार एवं म्यूचुअल फण्ड में बहुत सारे लोग निवेश करते हैं इसलिए आपको बता देना चाहेंगे की यदि कोई निवेशक इक्विटी म्यूचुअल फण्ड एवं शेयर में पैसे लगाकर इन्हें कम से कम एक साल बाद बेचता है तो उसे इस निवेश से होने वाले लाभ पर किसी प्रकार का कोई इनकम टैक्स नहीं देना होता है | चूँकि इस निवेश की गणना दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के तौर पर होती है और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर से मुक्त है | इसमें यह जान लेना भी जरुरी है की डिविडेंड के रूप में शेयर होल्डर की जो कमाई होती है वह भी टैक्स फ्री होती है |
  • इनकम टैक्स बचाने के तरीकों में अगला तरीका शादी विवाह से जुड़ा हुआ है आपको जानकर ख़ुशी होगी की शादी में नाते रिश्तेदारों से मिले पचास हज़ार रूपये तक की कीमत वाले उपहार एवं गिफ्ट पर किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता है | लेकिन इसके लिए जरुरी है की मिलने वाले गिफ्ट शादी की तिथि के आस पास ही मिले हों |
  • वर्तमान में हर किसी के पास उसका अपना बचत खाता अवश्य होगा इसलिए उन खाताधारकों को यह जानकर हर्ष होगा की उनके बचत खाते से मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है | हालाँकि यह केवल रूपये दस हज़ार तक ब्याज पर ही लागू होता है |
  • अनिवासी भारतीय द्वारा भारत में खोले जाने वाले बैंक अकाउंट को NRE Account कह सकते हैं | यह अकाउंट चाहे बचत खाता हो या फिक्स्ड डिपाजिट इन दोनों खातों से मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है |
  • इनकम टैक्स बचाने के तरीके में अगला तरीका उद्यमिता से जुड़ा हुआ है अर्थात वे लोग जो किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं यह उनके लिए उपयोगी है | क्योंकि पार्टनरशिप फर्म के पार्टनरों को मिलने वाला लाभ का हिस्सा भी टैक्स फ्री होता है | लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है की यह सुविधा केवल लाभ पर लागू होती है सैलरी पर नहीं |
  • जीवन बीमा या अन्य कोई परिपक्वता राशि भी इनकम टैक्स से मुक्त होती है लेकिन इसके लिए भी एक प्रावधान यह है की उस निवेश का प्रीमियम कुल बीमित राशि के दस फीसदी से अधिक न हो यदि ऐसा होता है तो इस स्थिति में अतिरिक्त रकम पर कर देना पड़ता है | यदि बीमित व्यक्ति विकलांग या किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो तो इस स्थिति में यह सीमा 15 फीसदी है |
  • इनकम टैक्स बचाने का यह तरीका सरकारी कर्मचारियों से सम्बंधित है | यदि कोई सरकारी कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेता है तो उसको मिलने वाली पांच लाख रूपये तक की कीमत टैक्स फ्री है |
  • वसीयत या विरासत में मिली सम्पति जो किसी व्यक्ति को उसके पूर्वजों अर्थात माता पिता से मिलती है | इस प्रकार की सम्पति जेवर , कैश इत्यादि भी टैक्स फ्री होता है | हाँ इस सम्पति से आगे व्यक्ति जो भी ब्याज एवं कमाई प्राप्त करता है उस पर निर्धारित नियमों के अनुसार टैक्स देय होता है |
  • कृषि से होने वाली कमाई चाहे वह फसल बेचकर हुई हो, या उस भूमि को किराये पर देके हुई हो भी टैक्स फ्री इनकम में शामिल है |
  • इनकम टैक्स बचाने का यह तरीका बिजनेसमैन से जुड़ा हुआ है उनको यह जानकर ख़ुशी होगी की बिज़नेस के दौरान खाने पीने के खर्च पर भी किसी प्रकार का कोई टैक्स देय नहीं होता है | इसलिए टैक्स बचाने के लिए इन बिलों को व्यवसायिक खर्चों के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता है |
  1. धारा 80 सी के तहत कर में छूट (Tax exemption under Section 80C):

आयकर अधिनियम की धारा 80 C में कुछ इन्वेस्टमेंट एवं खर्चों पर छूट का प्रावधान किया गया है | लेकिन इस धारा के अंतर्गत अधिकतम छूट की सीमा भी तय की हुई है वर्तमान में यह सीमा 1.5 लाख रूपये है | कहने का आशय यह है की इस नियम में 1.5 लाख से अधिक की छूट नहीं ली जा सकती है | इसलिए आइये जानते हैं उन निवेश एवं खर्चों के बारे में जिन्हें इस प्रावधान के अंतर्गत रखा गया है |

  • इनकम टैक्स बचाने का अगला तरीका Voluntary Provident Fund (VPF) से जुड़ा हुआ है, चूँकि पीएफ नियम के मुताबिक पीएफ के लिए बेसिक सैलरी की 12 फ़ीसदी कटौती अनिवार्य है लेकिन कोई कर्मचारी चाहे तो इससे भी अधिक पीएफ कटवा सकता है | इसलिए 12% के अलावा व्यक्ति द्वारा जो भी राशि EPF खाते में जमा की जाती है उसे Voluntary Provident Fund (VPF) कहते हैं | इसके अंतर्गत जमा राशि पर भी 80 C के अंतर्गत छूट प्राप्त होती है |
  • एम्प्लोय प्रोविडेंट फण्ड (EPF) के बारे में सब जानते हैं इसमें जमा होने वाली राशि जो कर्मचारी के वेतन की 12 फीसदी होती है और उतना ही पैसा नियोक्ता द्वारा भी कर्मचारी भविष्य निधि में जमा किया जाता है | यह जमा राशि और इस पर अर्जित ब्याज पर आयकर अधिनियम धारा 80 C के तहत छूट प्राप्त होती है |
  • इनकम टैक्स बचाने का यह तरीका आम है जैसा की सबको विदित है की किसी भी जीवन बीमा योजना का प्रीमियम भरने पर 80C के तहत छूट मिलती है | और यह छूट केवल करदाता को अपना प्रीमियम भरने पर नहीं मिलती बल्कि उस पर आश्रित परिवार के अन्य लोगों का प्रीमियम भरने पर भी मिलती है |
  • पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड का खाता किसी भी व्यक्ति द्वारा बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से खुलवाया जा सकता है | यह कम से कम 500 रूपये प्रति वर्ष जमा राशि से शुरू किया जा सकता है इसमें लगभग पन्द्रह सालों का लॉक इन पीरियड रहता है जिसका अभिप्राय यह है की व्यक्ति को कम से कम पन्द्रह सालों तक नियमित रूप से पैसे जमा करने पड़ते हैं | इसमें जमा राशि भी धारा 80C के तहत छूट के लिए पात्र है |
  • पेंशन योजनाओं के अंतर्गत जमा राशि भी इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के अंतर्गत छूट प्राप्त करने के योग्य होती हैं | जैसे नेशनल पेंशन स्कीम में 5 लाख रूपये तक जमा की गई सालाना आय भी छूट प्राप्त करने के योग्य है | इसलिए करदाता इनकम टैक्स बचाने के लिए नेशनल पेंशन स्कीम एवं म्यूचुअल फण्ड की अन्य पेंशन योजनाओं में भी निवेश कर सकता है |
  • घर इत्यादि खरीदते वक्त स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन चार्जेज देने पड़ते हैं खुशखबरी यह है की इन पर खर्च की गई रकम भी 80 C के तहत छूट प्राप्त करने के योग्य है | व्यक्ति ने घर चाहे होम लोन लेकर ख़रीदा हो या फिर स्वयं के पैसे से इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है |
  • इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में निवेश किया जाने वाला पैसा भी कर में छूट प्राप्त करने के योग्य माना जाता है |
  • धारा 80 C के तहत होम लोन के प्रीमियम में मूलधन के हिस्से पर भी छूट प्राप्त है |
  • इनकम टैक्स बचाने के तरीके में यह तरीका बैंकों से जुड़ा हुआ है कहने का अभिप्राय यह है की बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को कर बचत वाली फिक्स्ड डिपाजिट पांच वर्षों के लिए उपलब्ध करायी जाती है | इन खातों के अंतर्गत जमा की गई राशि भी कर की छूट के लिए पात्र होती है | लेकिन इस तरह की जमा की गई राशि से मिलने वाले ब्याज पर किसी प्रकार की कर छूट का प्रावधान नहीं है |
  • डाकघर में कराई जाने वाली पंचवर्षीय फिक्स्ड डिपाजिट में जमा राशि भी टैक्स छूट दायरे में आती है लेकिन इस राशि पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है |
  • इनकम टैक्स बचाने का अगला तरीका यह है की यदि आपकी बच्ची की उम्र दस साल से कम है तो आप अपने नजदीकी डाकघर या बैंक में जाकर उसके नाम से भारत सरकार की योजना सुकन्या समृद्धि के अंतर्गत खाता खोल सकते हैं क्योंकि इसमें जमा राशि पर भी आयकर अधनियम की धारा 80 C के तहत छूट प्राप्त होती है |
  • इंफ्रास्ट्रक्चर बांड्स की बात करें तो इन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़े संस्थानों एवं कंपनियों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी एवं इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी इत्यादि द्वारा जारी किया जाता है इन बांड्स पर यह कंपनियां आकर्षक ब्याज का भुगतान करती हैं | इन बांड्स पर निवेश किया गया पैसा भी धारा 80 c के तहत छूट के योग्य है |
  • भारत में वरिष्ठ नागरिक यानिकी ऐसे लोग जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है अपना इनकम टैक्स बचाने के लिए सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम के तहत बैंक या डाकघर के माध्यम से खाता खुलवा सकते हैं | क्योंकि इस खाते में जमा होने वाली राशि भी छूट के योग्य है | यद्यपि ऐसे लोग जो 55 साल के बाद VRS लेते हैं और भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लोग इस प्रकार के खाते को 60 साल से पहले भी खुलवा सकते हैं |
  • बच्चों की पढ़ाई के लिए दी जाने वाली स्कूल फीस भी छूट के दायरे में आती है | इसमें भी नियम यह है की यह केवल दो बच्चों तक ही सिमित होगी |
  • नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट की बात करें तो यह भारतीय डाकघर द्वारा शुरू की गई एक बचत योजना है | कोई भी व्यक्ति इनकम टैक्स बचाने के लिए पांच सालों के लिए 100 रूपये से लेकर 10000 रूपये तक के सर्टिफिकेट खरीद सकता है | इस योजना के अंतर्गत जमा राशि भी टैक्स छूट दायरे में आती है | लेकिन अर्जित ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिलती है |
  1. इनकम टैक्स बचाने में सहायक कर मुक्त भत्ते (Tax Free Allowances):

भत्ते यानिकी (Allowances) वेतन पाने वाले व्यक्तियों को मिलते हैं इसलिए इनकम टैक्स बचाने के इन तरीकों को वेतन पाने वाले व्यक्ति उपयोग में ला सकते हैं | तो आइये जानते हैं उन भत्तों एवं खर्च के बारे में जो वेतन से जुड़े हुए हैं और उन पर टैक्स छूट का प्रावधान है |

  • इनकम टैक्स बचाने का यह तरीका नौकरीपेशा या वेतनधारी लोगों से जुड़ा हुआ है किराये के घर में रहने वाले कर्मचारियों को कंपनी की ओर से हाउस रेंट अल्लाउन्स यानिकी (HRA) मिलता है जो की टैक्स में छूट प्राप्त करने के योग्य होता है |
  • किसी कंपनी में कार्यकाल के दौरान किसी कर्मचारी को उसकी सुविधा के लिए मोबाइल और इन्टरनेट इत्यादि के लिए कंपनी से जो खर्चा मिलता है उसमे भी टैक्स पर छूट प्राप्त होती है | लेकिन इसमें केवल पोस्टपेड बिल को ही बिल के रूप में स्वीकार किये जाने का प्रावधान है |
  • सालाना 15000 रूपये तक के Medical Reimbursement पर भी टैक्स छूट प्राप्त होती है इसमें कर्मचारी को कंपनी के HR Department में उपयुक्त बिल पेश करने होते हैं |
  • कंपनी की तरफ से मिलने वाला Leave Travel Allowance भी कर छूट के दायरे में आता है |
  • सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले मनोरंजन भत्ते पर भी नियम के मुताबिक टैक्स छूट मिलती है |
  • सोलह सौ रूपये महीने तक के Transport Allowance पर भी छूट का प्रावधान है |
  • कार्यालय सम्बन्धी कार्यों को अंजाम देने के लिए यातायात पर आने वाला खर्च भी Tax Saving के दायरे में आता है |
  • कंपनी की तरफ से दिया जाने वाला बच्चों की पढाई एवं हॉस्टल खर्चा भी टैक्स छूट दायरे में आता है लेकिन इसकी सीमा प्रति बच्चा सौ रूपये है और यह दो बच्चों तक ही सिमित है | हॉस्टल के खर्च के लिए यह सीमा तीन सौ रूपये है |
  1. धारा 80 सी के अलावा अन्य छूट (Exemption Other than Section 80C):

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के अलावा कुछ मदों को अन्य धाराओं के तहत भी टैक्स में छूट प्राप्त है उनका संक्षिप्त विवरण कुछ इस प्रकार से है |

  • इनकम टैक्स बचाने के लिए व्यक्ति चाहे तो अपने एवं अपने बच्चों एवं पत्नी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी खरीद सकता है | क्योंकि इनके प्रीमियम पर धारा 80D के तहत टैक्स में छूट प्राप्त होती है | वरिष्ठ नागरिकों के लिए सालाना प्रीमियम की सीमा रूपये तीस हज़ार एवं सामान्य व्यक्तियों के लिए रूपये बीस हज़ार है |
  • यदि करदाता स्वयं दिव्यांग है तो वह आयकर अधिनियम की धारा 80U के तहत इसकी गंभीरता एवं स्तर के आधार पर रूपये दस लाख तक की सालाना कमाई पर छूट प्राप्त कर सकता है | लेकिन यदि करदाता के परिवार में से कोई अन्य सदस्य दिव्यांग है तो उसकी देखभाल में आने वाला खर्चा भी आयकर अधिनियम की धारा 80DD के तहत छूट प्राप्त करने के योग्य है |
  • इनकम टैक्स बचाने का यह तरीका गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, एड्स, थैलेसिमिया, पार्किसन्स इत्यादि से जुड़ा हुआ है | परिवार में किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी होने पर उस परिवार का करदाता बीमारी पर लगने वाले रूपये चालीस हज़ार तक के खर्च पर आयकर अधिनियम की धारा 80DDB के तहत टैक्स छूट प्राप्त कर सकता है | बीमारी से ग्रसित व्यक्ति यदि वरिष्ठ नागरिक है तो यह सीमा 60000 और अति वरिष्ठ नागरिक की स्थिति में यह सीमा 80000 रूपये है |
  • आयकर अधिनियम की धारा 80 E के अनुसार शिक्षा के लिए, लिए गए लोन पर दिए गए ब्याज पर भी टैक्स छूट प्राप्त होती है |
  • शैक्षणिक स्कोलरशिप यानिकी अध्यन एवं रिसर्च के लिए मिलने वाली स्कोलरशिप भी कर छूट प्राप्त करने के योग्य है |
  • इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80RRB के अनुसार रॉयल्टी एवं पेटेंट के तौर पर मिलने वाली राशि भी टैक्स में छूट प्राप्त करने के योग्य होती है | लेकिन यह छूट रूपये तीन लाख तक पर ही लागू होगी |
  • इनकम टैक्स बचाने का यह तरीका चैरिटी एवं डोनेशन से जुड़ा हुआ है | आयकर अधिनियम की धारा 80G, 80GGA, 80GGC के तहत सामजिक संस्थानों, राजनैतिक पार्टियों, वैज्ञानिक एवं अनुसन्धान संस्थाओं इत्यादि को दी जाने वाली डोनेशन या चैरिटी भी टैक्स छूट प्राप्त करने के योग्य होती है |
  • घर की मरम्मत, निर्माण इत्यादि के लिए लिया गया होम लोन के ब्याज पर भी टैक्स छूट दिए जाने का प्रावधान है |
  • कंपनी में जिस कर्मचारी द्वारा लगातार पांच वर्ष या उससे अधिक की सर्विस की जाती है कंपनी द्वारा उसे ग्रेच्युटी दिए जाने का प्रावधान है | ग्रेच्युटी में मिली रूपये दस लाख तक की रकम पर भी टैक्स छूट का प्रावधान किया गया है |
  • इनकम टैक्स बचाने का अगला तरीका ऐसे माता पिता के लिए है जिनके बच्चे अपने हूनर के बलबूते किसी प्रतियोगिता या अन्य स्टेज कार्यक्रमों से जीतकर थोड़ी बहुत आमदनी इकट्ठी कर लेते हैं | इनकम टैक्स एक्ट की धारा 64(1A) के अनुसार ऐसे करदाता माता पिता अधिकतम 1500 रूपये को चाइल्ड अर्निंग के रूप में अपनी कमाई में जोड़कर कर छूट का फायदा ले सकते हैं | बच्चों का बचत खाता खुलवाकर उसमें सालाना अधिक से अधिक 1500 रूपये तक की जमा राशि एवं उस पर अर्जित ब्याज पर भी टैक्स छूट का प्रावधान है | लेकिन यह केवल दो बच्चों तक ही सिमित है |

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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