इंटीरियर डिज़ाइनर कैसे बनें। How to become an Interior Designer.

Interior Designer नामक यह पदवी प्राप्त करना हर किसी के बस की बात नहीं है यह कैरियर विकल्प केवल उन लोगों के लिए है जिनमें डिजाइनिंग के प्रति एक जूनून एवं उनमें कलात्मकता कूट कूट कर भरी है । चूँकि इस तरह के कैरियर में व्यक्ति को लोगों के घरों एवं प्रॉपर्टी की डिजाइनिंग करनी होती है इसलिए ग्राहक अपने घर या प्रॉपर्टी के अन्दर जैसा भी ढांचा एवं वातावरण बनाना चाहते हैं एक Interior Designer का काम उसको मूर्त रूप देने का होता है। इसके लिए डिज़ाइनर के पास उत्कृष्ट प्रबंधन एवं संचार कौशल के साथ साथ रचनात्मकता का होना भी बेहद अनिवार्य है। इसलिए ऐसे लोग जो बजट के अनुसार अपने खर्च को बनाये रखने के साथ साथ विभिन्न सामाग्रियों के बारे में अच्छा ज्ञान रखते हैं। वे Interior Designing को अपने कैरियर विकल्प के तौर पर अपना सकते हैं। इसके अलावा ऐसे लोग जो डिटेल्स इत्यादि को अच्छी तरह परख सकते हैं और उन्हें विभिन्न प्रकार की पहेलियों को सुलझाने में आनंद आता है वे आम तौर पर आदर्श इंटीरियर डिज़ाइनर बनने में सक्षम होते हैं।

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इंटीरियर डिज़ाइनर कौन है (Who is Interior Designer):

Interior Designer एक विशेषज्ञ होता है जो व्यवसायिक तौर पर घर, ऑफिस एवं अन्य वाणज्यिक स्थापनाओं के आंतरिक भाग को डिजाईन करता है। वैसे देखा जाय तो इंटीरियर डिजाईन कला एवं विज्ञान दोनों है जिसका इस्तेमाल किसी ईमारत के आंतरिक भाग को सुन्दर, व्यवहारिक एवं मनभावन वातावरण देने के लिए किया जाता है। इसलिए कहा जा सकता है की एक Interior Designer वह व्यक्ति होता है जो इस तरह के प्रोजेक्ट की योजना बनाता है, रिसर्च करता है, प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य व्यक्तियों के साथ कोआर्डिनेट करके इनका प्रबंधन करता है। इनकी कोशिश रहती है की कम से कम जगह में भी किसी घर या ईमारत के आंतरिक हिस्से को उपयोगी, सुन्दर एवं मनभावन बनाया जाय। साधारण शब्दों में घर या किसी व्यवसायिक ईमारत के अंदरूनी हिस्से की साज, सज्जा की डिजाइनिंग बनाने वाले को ही Interior Designer कहा जाता है।

इंटीरियर डिजाइनर के कार्य (Work of Interior Designer):

Interior Designer किसी घर या बिल्डिंग के आंतरिक जगह को कार्यात्मक बनाने के साथ साथ उसे सुरक्षित एवं सौन्दर्य से परिपूर्ण बनाने का भी कार्य करते हैं। इसके लिए वे आवश्यक जगह का निर्धारण और सजावटी सामान जैसे रंग, लाइटिंग और अन्य सामग्री का भी चयन करते हैं। इनके अलावा कुछ प्रमुख कार्यों की लिस्ट निम्नवत है।

  • नए प्रोजेक्ट को खोजना एवं उन पर बोली लगाना।
  • प्रोजेक्ट के लिए ग्राहक के लक्ष्यों एवं जरूरतों का निर्धारण करना।
  • यह निर्धारित करना की आंतरिक जगह का उपयोग कैसे किया जायेगा और लोग उस जगह में कैसे इधर उधर जायेंगे।
  • बिजली एवं पार्टीशन लेआउट सहित प्रारम्भिक स्केच तैयार करना।
  • लाइटिंग, फर्नीचर, दीवार, फर्श इत्यादि के लिए सामग्री एवं साज सज्जा निर्दिष्ट करना।
  • Interior Design Project के लिए समय रेखा बनाना एवं परियोजना पर आने वाली लागत का अनुमान लगाना।
  • डिजाईन के एलिमेंट की इंस्टालेशन एवं लगने वाली सामग्री का आर्डर देना।
  • प्रोजेक्ट को योजना एवं विनिर्देशों के मुताबिक पूरा करने के लिए बिल्डिंग के ठेकेदारों इत्यादि के साथ समन्वय स्थापित करना।
  • प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद साईट पर जाकर ग्राहक की संतुष्टि का जायजा लेना।

इंटीरियर डिज़ाइनर बनने के लिए योग्यता (Interior Designer Eligibility Criteria):

Interior Designer बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता के तौर पर इच्छुक व्यक्ति का 10+2 यानिकी बारहवीं पास होना बेहद जरुरी है। और यह बारहवीं भी किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से PCM या PCB विषयों के साथ कम से कम 55% अंकों के साथ होनी चाहिए। तभी इच्छुक उम्मीदवार को किसी अच्छे डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट में एडमिशन मिल सकता है । इसके अलावा जहाँ तक उम्र सीमा की बात है अधिकतर डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा किसी भी प्रकार की उम्र सीमा एडमिशन के लिए तय नहीं की गई है। लेकिन अधिकतर इंस्टिट्यूट 17-21 वर्ष के विद्यार्थियों को प्राथमिकता देते हैं।

इंटीरियर डिज़ाइनर कैसे बनें (How to Become an Interior Designer in India):

भारत में Interior Designer बनने के लिए अनेकों डिग्री, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। लेकिन एक व्यवसायिक डिज़ाइनर बनने के लिए उम्मीदवार को लम्बी अवधि के डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का चयन करना चाहिए । ताकि वह लम्बे पाठ्यक्रमों का अध्यन करके अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित कर सके और अपने जीवन में एक सफल इंटीरियर डिज़ाइनर बन सके। तो आइये जानते हैं कैसे कोई इच्छुक विद्यार्थी इंटीरियर डिज़ाइनर बन सकता है।

1. बारहवीं साइंस से करें:

Interior Designer बनने के इच्छुक विद्यार्थी को बारहवीं से ही मेहनत की आवश्यकता होती है क्योंकि दसवीं के बाद उसे साइंस स्ट्रीम का चयन करना होता है और PCB या PCM विषयों के साथ बारहवीं कम से कम 55% अंकों के साथ पास करनी होती है। हालांकि कुछ डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट में निर्धारित प्रतिशत इससे अधिक या कम भी हो सकते हैं इसलिए कोशिश करें की बारहवीं में आपके अधिक से अधिक अंक आयें।   

2. प्रसिद्ध डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा आयोजित एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करें:

किसी प्रसिद्ध डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट से इंटीरियर डिजाईन में बैचलर डिग्री प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी को उस इंस्टिट्यूट द्वारा आयोजित मल्टी लेवल एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए बारहवीं पास करने के बाद Interior Designer बनने के इच्छुक विद्यार्थी को जिस इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेना हो उसके एंट्रेंस एग्जाम के बारे में जानना चाहिए। हालांकि कुछ इंस्टिट्यूट विद्यार्थी द्वारा बारहवीं में प्राप्त अंकों के आधार पर भी एडमिशन दे सकते हैं।

3. डिग्री डिप्लोमा कोर्स पूरा करें (Complete Diploma /Degree to become Interior Designer):

डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा आयोजित एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने के बाद जब विद्यार्थी को इंस्टिट्यूट में एडमिशन मिल जाता है तो उसके बाद उसे कड़ी मेहनत करके उस कोर्स को पूरा करना होता है।  आम तौर पर एक बैचलर डिग्री पाठ्यक्रम को पांच सालों में पूरा किया जा सकता है जबकि कुछ इंस्टिट्यूट द्वारा बारहवीं करने के बाद चार सालों का भी डिग्री पाठ्यक्रम प्रदान किया जाता है। इसके अलावा अल्प अवधि के डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स भी इस क्षेत्र में उपलब्ध हैं। लेकिन Interior Designer बनने की ओर गंभीर विद्यार्थी को लम्बी अवधि के कोर्स का चयन करना चाहिए और इसे पूरा करना चाहिए।    

4. काम करें या उच्च स्तरीय कोर्स करें:

Interior Designing का कोर्स पूरा कर लेने के बाद व्यक्ति चाहे तो किसी सीनियर इंटीरियर डिजाईन के साथ असिस्टेंट डिज़ाइनर के तौर पर कार्य शुरू कर सकता है। क्योंकि अनुभवी डिज़ाइनर के साथ काम करने पर उम्मीदवार इंटीरियर डिजाइनिंग सम्बन्धी व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर पायेगा। जिससे उसे कम्पनियों में काम मिलने में परेशानी नहीं होगी। या फिर व्यक्ति चाहे तो इंटीरियर डिजाइनिंग में कोई उच्च स्तरीय कोर्स जैसे एमएससी इत्यादि कर सकता है । उपर्युक्त शैक्षणिक योग्यता एवं व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद व्यक्ति चाहे तो खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकता है । या फिर किसी बड़ी इंटीरियर डिजाइनिंग फर्म में नौकरी कर सकता है।

इंटीरियर डिज़ाइनर बनकर कमाई:

हालांकि इस तरह के क्षेत्र में भी अच्छी खासी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है लेकिन यदि व्यक्ति कौशल से परिपूर्ण है तो Interior Designer बनकर वह खुद का बिजनेस स्थापित करके या नौकरी करके दोनों तरीके से पैसे कमा सकता है। इस तरह की अधिकतर नौकरीयाँ फिल्म एवं टेलिविज़न इंडस्ट्री, थिएटर, एक्जीबिशन सेण्टर, कंस्ट्रक्शन फर्म, इवेंट मैनेजमेंट कम्पनीज इत्यादि में अधिक निकलती हैं। और जहाँ तक सैलरी का सवाल है शुरूआती दौर में एक इंटीरियर डिज़ाइनर 25000 से 30000 रूपये प्रति महीने वेतन पा सकता है। और ऐसे Interior Designer जो खुद का बिजनेस शुरू करते हैं वे अपनी क्षमता के अनुरूप कितना भी कमा सकते हैं । यह कुछ हजार रुपयों से लाखो तक हो सकता है यह सब कुछ डिज़ाइनर की कार्य क्षमता, मार्केटिंग स्किल, काम की सफाई, निपुणता इत्यादि पर निर्भर करता है।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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