शराब की दुकान कैसे खोलें? How to start Liquor Shop Business In India.

Liquor Shop यानिकी शराब की दुकान का बिजनेस कमाई करने की दृष्टी से कितना लाभकारी हो सकता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है। की भले ही आदमी अन्य जरुरी वस्तुओं को खरीदने में कितना भी मोलभाव कर ले, लेकिन जब वह शराब के ठेके पर पहुँच जाता है तो उसे जितना बोला जाता है उतने पैसे वह खुशी ख़ुशी अपने जेब से निकालकर देता है। वैसे देखा जाय तो एक सभ्य एवं नशामुक्त समाज में शराब यानिकी मदिरा की कोई जगह नहीं है इसलिए शराब पीने की लत को एक बुराई के तौर पर ही देखा जाता है। इसके बावजूद नैतिकता की बातें करने वाले भले ही शराब को सभी बुराइयों की जड़ क्यों न मानते हों लेकिन सच्चाई यह है की कुछ राज्यों को छोड़कर अधिकतर राज्यों में Liquor Shop Business शुरू करना कानूनी तौर पर वैधानिक है। इसलिए आज का हमारा यह लेख इसी विषय पर केन्द्रित है। हालांकि अधिकतर राज्यों में शराब के ठेकों को वितरित करने के लिए राज्य सरकार के आबकारी या एक्साइज विभाग द्वारा ई टेंडर के लिए विज्ञप्ति जारी की जाती है। इसी विज्ञप्ति के अनुसार ही शराब का ठेका खोलने के इच्छुक व्यक्तियों को निश्चित शुल्क के साथ आवेदन करना होता है। हालांकि अलग अलग राज्यों में लाइसेंस लेने एवं इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है।

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शराब की दुकान खोलना लाभकारी क्यों है? (Why Liquor Shop Business is profitable):

शराब की दुकान खोलना कमाई करने की दृष्टी से बेहद ही लाभकारी बिजनेस है हालंकि इस तथ्य से हर कोई अच्छी तरह वाकिफ है की शराब या मदिरा का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिककारक होता है। लेकिन इसके बावजूद भी Liquor Shop में शराब खरीदने वालों की अच्छी खासी भीड़ देखी जा सकती है। यद्यपि मदिरा का इतिहास काफी पुराना रहा है इसलिए प्राचीनकाल में राजा महाराजा भी मदिरा का सेवन किया करते थे। लेकिन वर्तमान में इसका चलन इतना बढ़ गया है की हर ख़ुशी या गम के मौके पर लोगों को शराब पीते हुए देखा जा सकता है इसके बढ़ने का कारण लोगों की तनाव से भरे जीवन को भी माना जाता है। यही कारण है की वर्तमान में शराब के ठेके प्रमुख सड़क पर न होकर किसी गली नुक्कड़ में ही क्यों न हों, इनके बाहर अच्छी खासी भीड़ देखी जा सकती है। अब चूँकि Liquor Shop Business कमाई की दृष्टि से उपयुक्त बिजनेस है इसलिए इस तरह के बिजनेस को शुरू करना कोई आसान काम भी बिलकुल नहीं है। और किसी एक राज्य में इस तरह का बिजनेस शुरू करना किसी दुसरे राज्य से भिन्न हो सकता है क्योंकि अलग अलग राज्यों में भिन्न भिन्न एक्साइज एक्ट लागू हो सकते हैं।

शराब की दुकान खोलने से पहले ध्यान देने योग्य बातें:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की अलग अलग राज्यों में Liquor Shop Business करने सम्बन्धी नियम अलग अलग हो सकते हैं । लेकिन अधिकतर राज्य सरकारों द्वारा टेंडर प्रणाली को ही शराब की दुकान वितरित करने के लिए अपनाया जाता है। इसके अलावा इच्छुक व्यक्ति को इस तरह का बिजनेस करने के दौरान या उससे पहले निम्न बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

  • चूँकि यह एक बेहद लाभकारी बिजनेस है इसलिए इसे शुरू करने में आने वाली लागत भी बहुत अधिक आती है। लाइसेंस फीस इत्यादि को छोड़कर उद्यमी को एक अच्छी लोकेशन पर इस तरह का बिजनेस स्थापित करने के लिए 25-30 लाख रूपये निवेश की आवश्यकता हो सकती है।
  • देश के अलग अलग राज्यों में शराब की बिक्री एवं खरीद सम्बन्धी नियम अलग अलग हो सकते हैं। इसलिए इस तरह का बिजनेस करने से पहले उस राज्य विशेष में चालित नियम एवं कानूनों के बारे में जानने का प्रयास अवश्य करें।
  • अधिकतर राज्यों में शराब के ठेकों को आबकारी विभाग नियंत्रित करता है इसलिए समाचार पत्रों में विज्ञप्ति भी राज्य के आबकारी विभाग द्वारा ही जारी की जाती है । इसलिए ध्यान रहे Liquor Shop business शुरू करने के लालच में किसी भी धोखे से अपने आपको बचाएं रखें।
  • ध्यान रहे हर राज्य ने शराब की खपत के लिए एक कानूनी उम्र निर्धारित की है यह 18-25 वर्ष के बीच कुछ भी हो सकती है। इसलिए कानूनी उम्र से कम किसी भी व्यक्ति को शराब बेचना कानूनन अपराध हो सकता है। 
  • भले ही प्रत्येक राज्य में इस तरह का बिजनेस करने सम्बन्धी नियम अलग अलग हों लेकिन एक नियम जो सभी राज्यों में लागू है वह यह है की शराब की बिक्री एवं खरीदारी के लिए Liquor License की आवश्यकता होती है। और यह लाइसेंस अधिकतर राज्यों में राज्य के आबकारी विभाग द्वारा ही तय मानकों का निरीक्षण करने के पश्चात प्रदान किया जाता है।  

शराब की दुकान के प्रकार (Types of Liquor Shop):

यहाँ पर शराब की दुकानों के प्रकार का जिक्र करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि अलग अलग प्रकार की दुकानों के लिए लाइसेंसिंग नियम एवं फीस अलग अलग हो सकते हैं। जैसे एक अंग्रेजी शराब के ठेके की फीस देशी शराब के ठेके की तुलना में अधिक हो सकती है। कहने का अभिप्राय यह है की दुकान का प्रकार दुकान में बिकने वाली शराब के आधार पर निर्धारित होता है। जहाँ देशी शराब मिलती है उसे देशी मदिरा की दुकान एवं जहाँ अंग्रेजी शराब मिलती है उसे इंग्लिश शराब की दुकान कहा जाता है। राज्य के आबकारी विभाग द्वारा आम तौर पर तीन प्रकार के शराब की दुकानों के लिए विज्ञप्ति जारी की जाती है। जो निम्न हैं।

देशी शराब की दुकान:  इस श्रेणी के अंतर्गत चयनित जगह पर सरकार द्वारा केवल और केवल देशी शराब बेचने की इजाजत दी जाती है। कहने का आशय यह है की इस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाला उद्यमी सरकार की स्वीकृति मिलने पर देशी शराब की बिक्री एवं खरीदारी कर सकता है।

अंग्रेजी शराब की दुकान: इस श्रेणी के अंतर्गत चयनित उद्यमी को अंग्रेजी शराब बेचने एवं खरीदने की अनुमति सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। अर्थात एक ऐसी जगह जहाँ से व्यक्ति अंग्रेजी शराब एवं बियर खरीद सके अंग्रेजी शराब की दुकान कहलाती है।

मॉडल शॉप: इस तरह की यह दुकानें खोलने की इजाजत राज्य सरकार बड़े बड़े शहरों में देती है जहाँ पारम्परिक दुकानों में ग्राहकों को अन्दर प्रवेश करने की इजाजत नहीं होती। वहीँ मॉडल शॉप में घुसकर व्यक्ति स्वयं की मनपसंद मदिरा लेकर उसका भुगतान करके बाहर निकल सकता है।

शराब की दुकान खोलने के लिए कितना पैसा चाहिए (Money you need to open a Liquor Shop)

अक्सर जब भी कोई व्यक्ति Liquor Shop Business शुरू करने के बारे में सोचता है तो उसके दिमाग में जो सबसे पहला प्रश्न कौंधता है वह यही होता है की शराब की दुकान खोलने अर्थात इसका ठेका लेने में लगभग कितने पैसों की आवश्यकता होती है। आम तौर पर एक शहर में अच्छी लोकेशन पर इस तरह का बिजनेस शुरू करने में 25-30 लाख रूपये का खर्चा आ सकता है जिसमें लाइसेंस फीस एवं धरोहर राशि इत्यादि शामिल नहीं है। धरोहर राशि इत्यादि का निर्धारण भी उस लोकेशन पर पिछले वित्तीय वर्ष में हुई मदिरा की बिक्री पर निर्भर करता है। इसके अलावा दूर सुदूर इलाके में Liquor Shop खोलने का खर्चा 7-12 लाख रूपये तक हो सकता है। इसमें भी सरकारी शुल्क एवं धरोहर राशि शामिल नहीं है।

लाइसेंस के प्रकार (Types of Liquor License):

यद्यपि हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की शराब की बिक्री, खरीदारी, वितरण सम्बन्धी नियम हर राज्य में अलग अलग हो सकते हैं। यहाँ तक की कुछ राज्यों ने पूरे राज्य में शराब प्रतिबंधित की हुई है गुजरात एवं बिहार इसके उदाहरण हैं। इसलिए हर राज्य के लिए जरुरी हो जाता है की वह मदिरा से समबन्धित अपने नियम एवं कानून बनाये। कहने का आशय यह है की Liquor Shop License के प्रकार भी राज्य के आधार पर अंतरित हो सकते हैं। लेकिन अधिकतर राज्यों में नियम सम्बन्धी कुछ समानताएं देखने को मिलती हैं जिनकी लिस्ट निम्नवत है।

  • एक जानकारी के मुताबिक हर राज्य में एक मादक पेय नियंत्रण विभाग होता है जो शराब की बिक्री, खरीद, खपत एवं वितरण की शर्तों को नियंत्रित करता है।
  • कुछ राज्यों में Liquor Shop Business को नियंत्रित करने के लिए लाइसेंस कोटा होता है जो किसी भी समय राज्य के अंतर्गत शराब बेचने के स्थानों की संख्या को सीमित कर सकते हैं।    

जहाँ तक Liquor License की बात है इसे निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है।

ऑन लाइसेंस (On License): लाइसेंस का यह प्रकार उनको जारी किया जाता है जहाँ शराब की बिक्री एवं खपत एक ही जगह पर होती है। इसके प्रत्यक्ष उदाहरण बार, रेस्टोरेंट, होटल, अहाते, डिस्क इत्यादि हैं।

ऑफ लाइसेंस (Off License): इस लाइसेंस की आवश्यकता तब होती है जब मदिरा खरीदकर लोग कहीं और ले जाकर पीते हैं इसके प्रत्यक्ष उदाहरण दारु के ठेके या शराब की दुकानें हैं।

आवश्यक दस्तावेज (Required Documents to Apply for Liquor Shop):

  • ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट की आवश्यकता हो सकती है।
  • हैसियत प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है।
  • एक्सपीरियंस प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है।
  • चरित्र प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है।
  • फाइल किये गए इनकम टैक्स रिटर्न के दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है।
  • पैन कार्ड चाहिए हो सकता है।
  • आधार कार्ड चाहिए हो सकता है।
  • पासपोर्ट साइज़ फोटोग्राफ की आवश्यकता हो सकती है।

शराब की दुकान के लिए आवेदन कैसे करें (How to apply for liquor shop):

यद्यपि प्रत्येक राज्य में Liquor Shop Business सम्बन्धी नियम अलग अलग हो सकते हैं लेकिन अक्सर देखा गया है की आम तौर पर सभी राज्यों में लगभग एक जैसे ही दस्तावेज मांगे जाते हैं। इसलिए जो भी व्यक्ति शराब की दुकान के लिए आवेदन करना चाहता है उसे नियमित तौर पर अख़बार पढने या देखने की आदत डालनी होगी। क्योंकि राज्य सरकार के आबकारी विभाग द्वारा शराब के ठेकों की विज्ञप्ति स्थानीय समाचार पत्रों में जारी की जाती है जिसमें लाइसेंस फीस से लेकर, दुकान की लोकेशन एवं धरोहर राशि इत्यादि का पूरा जिक्र होता है। और यह भी उल्लेखित होता है की आवेदनकर्ता ऑफलाइन आवेदन कर सकता है या ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इस प्रणाली को भी भ्रष्टाचार से मुक्त एवं पारदर्शी बनाने के लिए कुछ राज्यों में केवल ऑनलाइन ही इसके लिए आवेदन मांगे जाते हैं। जबकि बाकी राज्यों में अभी पारम्परिक तरीके अर्थात ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है। स्थानीय समाचार पत्रों के अलावा विभाग द्वारा अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर भी विज्ञप्ति जारी की जाती है इसलिए Liquor Shop Business करने के इच्छुक व्यक्ति को उस राज्य विशेस की एक्साइज विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पर भ्रमण करते रहना चाहिए।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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