Nidhi Company क्या है? फायदे, नियम एवं रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया।

Nidhi Company को एक प्रकार की वित्तीय कंपनी भी कहा जा सकता है जैसा की हम सबको विदित है की मनुष्य जीवन में यह महत्वपूर्ण नहीं है की मनुष्य कितनी कमाई करता है। बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है की मनुष्य अपने भविष्य की जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए बचत कितनी करता है। दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो ठीक ठाक कमाते हैं लेकिन इसके बावजूद वे अपनी भविष्य की योजनाओं के लिए बचत नहीं कर पाते हैं। जिससे वे अधिक कमाकर भी मानसिक रूप से परेशान रहते हैं। इसके विपरीत कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनकी कमाई औसतन होती है लेकिन वह उसमें से भी एक बड़े हिस्से की बचत कर पाने में सफल हो पाते हैं इसलिए वे मानसिक रूप से संतुष्ट एवं स्वस्थ जान पड़ते हैं। Nidhi Company की बात करें तो इसका लक्ष्य भी अपने सदस्यों को बचत की ओर अग्रसित करके उनका जीवन आसान बनाने का होता है।

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निधि कंपनी क्या है (What is Nidhi Company in India)

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है की निधि नामक इस शब्द का अर्थ खजाने से लगाया जा सकता है और खजाना तभी बनता है जब उसमें बचत की हुई धनराशि उपलब्ध होती है। हालांकि भारतीय वित्तीय क्षेत्र में Nidhi Company को कंपनी अधिनियम 2013 के धारा 406 के तहत पंजीकृत किया जाता है। निधि कम्पनी को कई अन्य नामों जैसे बेनिफिट फण्ड, परमानेंट फण्ड, म्यूच्यूअल बेनिफिट कम्पनीज और म्यूच्यूअल बेनिफिट फण्ड के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह की कम्पनियों का रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) द्वारा किया जाता है। हालांकि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वित्तीय मामलों के सम्बन्ध में इन्हें समय समय पर निर्देशित किया जाता है। इस तरह की ये कम्पनियां दक्षिण भारत में काफी प्रचलित हैं और एक आंकड़े के मुताबिक अधिकतर निधि कंपनियां तमिलनाडु में ही स्थापित हैं। इस तरह की यह कम्पनियां अपने सदस्यों से ही पैसे उधार लेकर उन्हीं को पैसे उधार देती हैं। Nidhi Company को मुख्य तौर पर लोगों में बचत की आदतों का अनुसरण करने एवं बढाने के उद्देश्य से शुरू किया जाता है।

भारत में निधि कंपनी शुरू करने के फायदे

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की एक Nidhi Company का केन्द्रीय लक्ष्य अपने सदस्यों में बचत की आदत डालना और उन्हें पैसे बचाने के लिए प्रोत्साहित करने का होता है। ताकि जब भी उन्हें पैसों की आवश्यकता हो वे उन्हें सुचारू रूप से पूरा कर पाने में सक्षम हो पायें। मितव्ययी होने के कारण उन्हें अन्य लोगों या बैंकों से ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होती और वे आत्मनिर्भर बन जाते हैं। और बचत की आदत के कारण वे अपने भविष्य के खर्चों को भी आसानी से निभा पाते हैं। भारत में निधि कंपनी शुरू करने के कुछ फायदे हैं जिनमें से कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • निधि कंपनी के निदेशकों एवं शेयरधारकों के दायित्व एवं देयता सीमित हैं। यदि इस तरह की कंपनी को कोई नुकसान होता है और वह वित्तीय संकट से गुजर रही है। तो इस स्थिति में निदेशकों या सदस्यों में से किसी की भी व्यक्तिगत पूँजी या सम्पति को बैंक, लेनदारों या सरकार द्वारा जब्त नहीं किया जा सकता है।
  • यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है की एक Nidhi Company को निधि नियम 2014 के तहत नियंत्रित किया जाता है और इन्हें केंद्र सरकार नियंत्रित करती है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा निधि कंपनी पर लगाये गए दिशानिर्देश बेहद कम है। यही कारण है की इस तरह की कंपनी को आरबीआई के लाइसेंस की भी आवश्यकता नहीं होती है।
  • ट्रस्ट, सहकारी समितियों , गैर सरकारी संगठनों की तुलना में सदस्यों का विश्वास इन पर अधिक होता है।
  • निधि कम्पनियां बचत के लिए बेहतर विकल्प के तौर पर साबित हुई हैं चूँकि इनका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच बचत की आदत को प्रोत्साहित करने का होता है। इसलिए ये अपने सदस्यों एवं शेयरहोल्डरों को ही ऋण उपलब्ध कराती है और उधार भी लेती हैं।
  • Nidhi Company के सदस्य एवं शेयरहोल्डर बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थानों की तुलना में इस कंपनी से जल्दी और सस्ती दरों पर ऋण ले सकते हैं।
  • इस तरह की कम्पनियां आम जनता को बचत करने एवं पैसे जमा करने के लिए आमंत्रित करने का सबसे आसान एवं सुरक्षित तरीका है। बस कंपनी को उन्हें अपने पंजीकृत सदस्यों के तौर पर लेने की आवश्यकता होती है।
  • निधि कम्पनियां अपनी सर्विस ऐसे दूरस्थ एवं ग्रामीण इलाकों में भी पहुंचाती हैं जहाँ बैंक एवं अन्य एनबीएफसी की सेवाओं से मुक्त है।
  • इस तरह की यह कंपनी एक बेहतर क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी है यही कारण है की छोटे फाइनेंसर द्वारा इन्हें पसंद किया जाता है। कम्पनी पंजीकृत होने के बाद इसके सदस्य क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी के सभी लाभों का फायदा ले सकते हैं।
  • चूँकि यहाँ पर सिर्फ कंपनी के सदस्यों एवं शेयर होल्डर को ही ऋण दिया जाता है इसलिए यह किसी अंजान को ऋण देने से बेहतर एवं आसान है। यही कारण है की इसमें ऋण देने की प्रक्रिया भी आसान एवं सरल होती है।
  • Nidhi Company Registration के लिए आरबीआई से लाइसेंस लेने की आश्यकता नहीं होती है बल्कि केवल MCA में पब्लिक लिमिटेड के तौर पर कंपनी को रजिस्टर करना होता है।
  • निधि कंपनी शुरू करने के लिए तय की गई कम से कम पूँजी रूपये 5 लाख रूपये जो की बेहद कम है। लेकिन निधि कंपनी द्वारा इस राशि को एक साल के अन्दर अन्दर 10 लाख तक बढाने की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त लाइसेंस इत्यादि पर 30-35 हज़ार रूपये खर्चा और आ सकता है।
  • चूँकि इसमें सदस्यों को ऋण इत्यादि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बिलकुल भी जटिल नहीं है इसलिए इस तरह की ये कंपनिया निम्न और मध्यम आय वाले समूहों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में अहम् योगदान निभा सकते हैं।
  • जैसा की हम सबको विदित है की बैंकों इत्यादि द्वारा ऋण देने के लिए उच्च पात्रता मापदंडों का अनुसरण किया जाता है। जिससे दैनिक मजदूरी पाने वाले तबके को बैंक से ऋण नहीं मिल पाता लेकिन ऐसे लोग निधि कंपनी के सदस्य बनकर आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
  • इन कम्पनियों में कोई भी बाहरी भागीदार नहीं होता है क्योंकि Nidhi Company अपने सदस्यों के माध्यम से धन एकत्रित करती हैं और जरुरत पड़ने पर उन्हें ही सस्ती दरों पर ऋण प्रदान करती हैं। इसलिए कंपनी के संचालन में कोई भी बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं होता है।
  • निधि कंपनी को क़ानूनी रूप से एक अलग इकाई माना गया है जो अपने नाम से सम्पति एवं ऋण का अधिग्रहण करने के लिए प्राधिकृत है।

निधि कम्पनी सम्बन्धी कुछ नियम (Some Key Rules to operate of Nidhi Company)

भारत में निधि कम्पनियां किस तरह से संचालित होंगी इनके लिए कुछ नियम निर्धारित हैं। 2014 के निधि नियमों के अनुसार नियम 6 में कुछ बिन्दुओं का उल्लेख किया गया जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण नियम निम्नलिखित हैं।

  • एक निधि कंपनी कई तरह के लेनदेन जैसे लीजिंग फाइनेंस, हायर परचेज फाइनेंस, चिट फण्ड, इंश्योरेंस या किसी निगम द्वारा जारी प्रतिभूतियों का अधिग्रहण नहीं कर सकती है।
  • इस तरह की ये कम्पनियां किसी बाहरी व्यक्ति या निगम से न तो कोई जमा राशि स्वीकार कर सकती हैं और न ही उन्हें किसी प्रकार का ऋण प्रदान कर सकती हैं।
  • एक Nidhi Company को किसी भी रूप में प्रीफेरेंस शेयर, डिबेंचर, या फिर कुछ अन्य ऋण उपकरणों को जारी करने का अधिकार नहीं है।
  • निधि कम्पनी के कार्यों का संचालन एवं नियंत्रण कंपनी अधिनियम 2013 एवं निधि नियम 2014 के मुताबिक ही होता है।
  • इस तरह की ये कम्पनियां रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के दायरे में नहीं आती हैं इसलिए इन्हें शुरू एवं संचालित करने के लिए आरबीआई से लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • इन कम्पनियों को भारत में माइक्रो फाइनेंस व्यवसाय या व्हीकल फाइनेंस बिजनेस करने का अधिकार नहीं होता है।
  • निधि कम्पनी रजिस्ट्रेशन के एक साल के भीतर भीतर सदस्यों की कम से कम संख्या 200 होनी अति आवश्यक है।
  • इस प्रकार की कंपनी द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर अधिकतम 20%  वार्षिक ब्याज की दर से अधिक नहीं लगाया जा सकता है।
  • और बचत खाते पर दिए जाने वाले ब्याज की दर राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ब्याज की दर से 2% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • निधि कंपनी फिक्स्ड डिपाजिट, रेकरिंग डिपाजिट इत्यादि बचत को स्वीकार कर सकती है।
  • फिक्स्ड एवं रेकरिंग डिपाजिट पर दी जाने वाली ब्याज की दर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा एनबीएफसी के लिए निर्धारित अधिकतम ब्याज की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • Nidhi Company द्वारा पहले तीन वर्षों में एक जिले में केवल एक ही कार्यालय के माध्यम से संचालन किया जाएगा। और तीन वर्ष होने के बाद उसी जिले में निधि कंपनी अपनी तीन शाखाएं खोल सकती है। जबकि जिले के बाहर शाखाएं खोलने के लिए नियामक निदेशक से पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
  • निधि कम्पनियां सिक्यूरिटी के अगेंस्ट ऋण प्रदान कर सकती हैं सिक्यूरिटी के तौर पर गोल्ड, प्रॉपर्टी, फिक्स्ड डिपाजिट, लाइफ इंश्योरेंस इत्यादि को कंसीडर किया जा सकता है।
  • निधि कंपनी में बिना किसी प्रयोजन के जमा राशि कुल बकाया जमा राशि की 10% से भी कम होनी चाहिए।
  • वार्षिक लेखा जोखा, ऑडिट, टैक्स रिटर्न इत्यादि प्रक्रियाएं नियमों के मुताबिक अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।                 

निधि कम्पनी स्थापित करने के लिए आवश्यकता

एक Nidhi Company के रजिस्ट्रेशन या संचालन के लिए कुछ चीजों की आवश्यकता होती है। लेकिन इन आवश्यकताओं को हमने दो भागों एक रजिस्ट्रेशन से पहले की आवश्यकता और दूसरी रजिस्ट्रेशन के बाद की आवश्यकता में विभाजित किया है। जिनका उल्लेख कुछ इस प्रकार से है।

रजिस्ट्रेशन से पहले आवश्यकता (Before Registration of Nidhi Company)

निधि कंपनी स्थापित करने के लिए निम्न व्यवस्थाएं करने की आवश्यकता हो सकती है।

  • शेयर होल्डर या सदस्यों की कम से कम संख्या 7 होनी ही चाहिए।
  • डायरेक्टर की कम से कम संख्या 3 होनी ही चाहिए।
  • कम से कम यानिकी न्यनतम 5 लाख पूँजी की आवश्यकता होती है।
  • डायरेक्टर के लिए डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर की आवश्यकता होती है।
  • प्रीफेरेंसे शेयर जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • कंपनी का उद्देश्य लिखित रूप में केवल और केवल सस्द्यों में बचत की आदत को प्रोत्साहित करने का और उनसे पैसे जमा करके जरुरत पड़ने पर उन्हें आसान नियमों के तहत पैसा उपलब्ध कराने का होना चाहिए।  

रजिस्ट्रेशन के बाद (After Registration)  

  • रजिस्ट्रेशन के एक वर्ष बाद Nidhi Company के सदस्यों की संख्या कम से कम 200 होनी चाहिए।
  • एक वर्ष बाद कंपनी का कम से कम Net Owned Fund (NOF) 10 लाख से अधिक होना चाहिए।
  • Net Owned Fund (NOF) के लिए डिपाजिट का अनुपात 1:20 से अधिक होना चाहिए।
  • अप्रयुक्त डिपाजिट बकाया जमा का 10% से अधिक नहीं  होना चाहिए।

निधि कंपनी कैसे रजिस्टर करें (How to Register a Nidhi Company in India)

भारत में एक Nidhi Company Register करने के लिए कम्पनी अधिनियम 2013 के मुताबिक एक लिमिटेड कंपनी को स्थापित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके तहत निधि कंपनी स्थापित करने के लिए तीन डायरेक्टर एवं सात शेयर होल्डर या सदस्यों की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में 30-45 दिनों तक का समय लग सकता है।

  • सबसे पहले डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) एवं डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के लिए आवेदन करने की आवश्यकता होती है। जिन्हें Ministry of Corporate Affairs (MCA) के कार्यालय या वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई भी किया जा सकता है। 
  • जब डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) एवं डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC)  प्राप्त हो जाते हैं तो उसके बाद निधि कम्पनी के नाम को रिज़र्व करने के लिए INC -1 form के माध्यम से MCA में आवेदन किया जा सकता है। ध्यान रहे निधि कंपनी का नाम यूनिक होना चाहिए और किसी अन्य कंपनी से मिलता जुलता नहीं होना चाहिए। Nidhi Company का नाम सरकारी नियमों के मुताबिक वांछनीय होना चाहिए और इसके अंत में Limited लगेगा।
  • जब सम्बंधित कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा निधि कंपनी के नाम को मंजूरी मिल जाती है तो उसके बाद मेमोरेंडम ऑफ़ एसोसिएशन (MOA) और आर्टिकल ऑफ़ एसोसिएशन (AOA) तैयार किया जाना चाहिए। इन्हें तैयार करते वक्त कंपनी के उद्देश्यों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
  • उसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स में इनकारपोरेशन के लिए आवेदन किया जा सकता है।
  • जब सम्बंधित मंत्रालय द्वारा इनकारपोरेशन जारी कर दिया जाता है तो उसके बाद कंपनी के पैन एवं TAN  के लिए आवेदन किया जाना चाहिए।
  • उसके बाद टैक्स पंजीकरण जैसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया जा सकता है। और Nidhi Company के नाम से बैंक में चालू खाता खोला जा सकता है।

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |