प्लाईवुड बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें? Plywood Manufacturing Business.

Plywood Manufacturing से आशय प्लाई बनाने के व्यवसाय से लगाया जा सकता है प्लाई की यदि हम बात करें तो इसे विभिन्न सामग्री की पतली परतों से बनाया जाता है । या फिर लकड़ी की विभिन्न परतों या अन्य सामग्री को एक साथ चिपकाकर भी इसका निर्माण किया जाता है। वैसे देखा जाय तो प्लाई को विनिर्मित बोर्ड के परिवार से एक इंजीनियर्ड लकड़ी भी कहा जाता है इसमें मीडियम डेंसिटी फाइबरबोर्ड और पार्टिकल बोर्ड जैसे चिप बोर्ड इत्यादि शामिल होते हैं। एक समग्र सामग्री तैयार करने के लिए सभी प्लाईवुड में बाइंड रेजिन और लकड़ी फाइबर शीट मौजूद होती है इसमें सेल्यूलोज कोशिकाएं लम्बी, मजबूत एवं पतली होती हैं। इस तरह के इस विकल्प को क्रॉस ग्रैनिंग के नाम से जाना जाता है जिसके कई फायदे होते हैं। यह किनारों से टूटने या निकलने की प्रवृत्ति को कम कर देता है यह प्लाई के विस्तार एवं संकुचन को भी रोकता है। इसलिए वर्तमान में प्लाई का इस्तेमाल फर्नीचर उद्योग में बड़े पैमाने पर देखा जा सकता है। ऐसे में यदि आप कोई स्वयं का बिजनेस करने की सोच रहे हैं और यदि बिजनेस में आने वाली लागत आपके लिए कोई बड़ी समस्या नहीं है तो फिर आपके लिए Plywood Manufacturing Business शुरू करना लाभकारी हो सकता है।

Plywood Manufacturing business plan hindi

प्लाईवुड कैसे होनी चाहिए

अच्छी क्वालिटी की प्लाईवुड में निम्नलिखित गुण होने चाहिए।

मजबूती एवं आयामी स्थिरता :

प्लाईवुड की यदि मजबूती की बात करें तो यह इस बात पर निर्भर करता है की वह किस प्रकार की लकड़ी से निर्मित हुई है। कहने का आशय यह है की अलग अलग इमारती लकड़ी से निर्मित प्लाईवुड की मजबूती अलग अलग हो सकती है। क्रॉस ग्रैनिंग की प्रक्रिया प्लाईवुड को और अधिक मजबूती एवं आयामी स्थिरता प्रदान करती है ।  

पानी एवं रसायन प्रतिरोधी

पतली परतों का निर्माण करते समय लिबास को एक ऐसे पदार्थ के साथ समायोजित किया जाता है जो पानी एवं रसायन प्रतिरोधी होता है। Plywood Manufacturing में प्लाईवुड को पानी एवं रसायन प्रतिरोधी बनाने के लिए प्लाईवुड को रासायनिक यौगिकों एवं जल प्रतिरोधी गोंद से ट्रीट किया जाता है। इस तरह की इस प्लाईवुड को मरीन प्लाईवुड के नाम से जाना जाता है।

अग्नि प्रतिरोधी

प्लाईवुड को अग्नि प्रतिरोधी रसायनों के साथ आसानी से ट्रीट किया जा सकता है अग्नि प्रतिरोधी बनाने के लिए प्लाईवुड को गैर ज्वलनशील सामग्रियों जैसे रेशेदार सीमेंट या प्लास्टरबोर्ड के साथ जोड़ा जा सकता है। इस तरह की यह रासायनिक कोटिंग ऑक्सीकरण प्रक्रिया को रोकती है या उसका विरोध करती है जिससे आग के फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है।

प्लाईवुड के प्रकार एवं इस्तेमाल

प्लाईवुड की यदि हम बात करें तो यह एक ऐसा कंस्ट्रक्शन सामग्री है जिसके कंस्ट्रक्शन में कई उपयोग हैं। इसलिए Plywood Manufacturing Business शुरू कर रहे उद्यमी को इसके प्रकार एवं इसके इस्तेमाल के बारे में जानना अति आवश्यक हो जाता है।

स्ट्रक्चरल प्लाईवुड

स्ट्रक्चरल प्लाईवुड यानिकी संरचनात्मक प्लाईवुड से आशय संरचनात्मक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग में लाये जाने वाले प्लाईवुड से है। इस प्रकार की इस प्लाईवुड में पूर्ण मौसम परिवर्तन एवं उसके प्रभाव से उत्पन्न तनाव को सहन करने की शक्ति होनी चाहिए। इस प्रकार की प्लाईवुड को बीम,  आंतरिक संरचनाएं, सबफ्लोरर्स,  शिपिंग बक्से, वॉल ब्रेसिंग, छत ब्रेसिंग इत्यादि उपयोगों में लाया जाता है।

एक्सटिरियर प्लाईवुड 

इस तरह के प्लाईवुड को जलरोधी गोंद द्वारा बाउंड करके बनाया जाता है ताकि इसे बाहरी उपयोग में इस्तेमाल किया जा सके। यद्यपि इस तरह की ये प्लाईवुड पानी प्रतिरोधी तो होती हैं लेकिन इन्हें सूर्य की किरणों या गर्मीं में और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए पेन्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है। आम तौर पर इनका उपयोग दीवारों, आउटडोर फ्लोरिंग, रूफ लाइनिंग, स्टेबल इत्यादि के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। 

इंटीरियर प्लाईवुड

इंटीरियर प्लाईवुड की यदि हम बात करें तो इसे बनाने में मजबूती से अधिक सौन्दर्य एवं आकर्षण का ध्यान रखा जाता है। इस प्रकार के प्लाईवुड का इस्तेमाल आम तौर पर घरों, भवनों इत्यादि के अन्दर किया जाता है, इसलिए यह बाहरी तत्वों जैसे धूप, बारीश इत्यादि के संपर्क में नहीं आता है। इसलिए इस प्रकार की Plywood Manufacturing में मजबूती का ध्यान कम ही रखा जाता है। इसे आम तौर पर इंडोर फर्नीचर, सीलिंग, इंटीरियर क्लाडिंग इत्यादि में इस्तेमाल में लाया जाता है।

मरीन प्लाईवुड

मरीन प्लाईवुड का इस्तेमाल बहुत ही विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता है इस तरह की प्लाईवुड के कुछ क्षेत्र को वाटरप्रूफिंग करने की आवश्यकता हो सकती है। इस प्लाईवुड को बनाने में उच्च तनाव सहन करने वाली इमारती लकड़ी एवं अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है जो इसे नमी एवं पानी वाले स्थानों में भी सड़ने, गलने से बचाने में समर्थ होते हैं। इसका इस्तेमाल नाव एवं डॉक्स बनाने में किया जा सकता है।

प्लाईवुड मार्किट का विश्लेषण ( Market Analysis for Plywood Manufacturing):

हमारे देश भारत में प्लाईवुड का इस्तेमाल अधिकतर फर्नीचर निर्माण के लिए किया जाता है यह कुल लकड़ी की खपत का लगभग दो तिहाई हिस्सा होता है। एक विश्वसनीय आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2019 तक भारतीय प्लाईवुड बाजार 4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया था। इसलिए Plywood Manufacturing Business शुरू करना किसी भी इच्छुक उद्यमी के लिए सही एवं लाभकारी निर्णय हो सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं की भारत में पिछले दशकों में लोगों की बढती आय, शहरीकरण, अचल संपत्ति में निवेश, पश्चिमी प्रभाव, इत्यादि के परिणामस्वरूप फर्नीचर पर खर्च करने की लोगों की आदत बढ़ गई है। इसके अलावा वर्तमान में नए डिजाईन एवं फर्नीचर के विविध उत्पाद रेंज के कारण उपभोक्ताओं के बीच प्लाईवुड से निर्मित फर्नीचर की मांग में अच्छी खासी वृद्धि देखी गई है। लोगों की फर्नीचर सम्बन्धी मांग की पूर्ति के लिए फर्नीचर वितरण नेटवर्क के विस्तार और फर्नीचर निर्माताओं की संख्या में हो रही वृद्धि के चलते प्लाईवुड की मांग लगातार बढ़ते जा रही है। यही कारण है की 2025 तक इस औद्योगिक क्षेत्र के 5.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। अंतिम उपभोग के आधार पर प्लाईवुड बाजार को व्यवसायिक एवं आवासीय रूप से विभाजित किया गया है । यद्यपि आवासीय क्षेत्र Plywood Manufacturing Business करने वाले उद्यमियों के लिए सबसे बड़ा उपभोक्ता क्षेत्र है, जो इस बाजार में कुल शेयर के आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार है।

प्लाईवुड निर्माण बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start Plywood Manufacturing Business):

Plywood manufacturing बिजनेस की यदि हम बात करें तो इसे शुरू करने के लिए भी उद्यमी को न सिर्फ मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता होती है। बल्कि इनके साथ साथ जमीन एवं बिल्डिंग, ऑफिस, कच्चे माल, लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन इत्यादि की भी आवश्यकता होती है। आगे इस लेख में हम स्टेप बाई स्टेप प्लाईवुड निर्माण बिजनेस शुरू करने के बारे में बात करेंगे।

1. जमीन एवं जगह का प्रबंध करें

Plywood Manufacturing Business शुरू करने के लिए आवश्यक जगह प्लांट की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करती है, लेकिन इन सबके बावजूद इस व्यवसाय के लिए एक बड़ी जगह की आवश्यकता हो सकती है। इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी को कम से कम लगभग 5000 वर्ग फीट या इससे भी अधिक जगह की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए यदि उद्यमी के स्वयं की जमीन है तो वह उसी पर कंस्ट्रक्शन का कार्य शुरू करवा सकता है। और यदि उद्यमी के पास स्वयं की जमीन नहीं है तो वह बनी बनाई बिल्डिंग इत्यादि इस काम के लिए किराये पर ले सकता है। उद्यमी इसे कहीं भी गैर कृषि भूमि में या फिर इंडस्ट्रियल एरिया में स्थापित कर सकता है। इसके अलावा उद्यमी को कमर्शियल विद्युत् कनेक्शन, जल कनेक्शन, प्लांट लेआउट अप्प्रूव कराने की भी आवश्यकता हो सकती है।       

2. लाइसेंस एवं पंजीकरण (License for Plywood Manufacturing Business):

Plywood Manufacturing Business शुरू करने के लिए अनेकों तरह के लाइसेंस एवं पंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है।कुछ प्रमुख लाइसेंस एवं पंजीकरणों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • सबसे पहले उद्यमी को अपने व्यवसाय को एक वैधानिक स्वरूप प्रदान करने के लिए इसे रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में किसी एक बिजनेस एंटिटी के तहत रजिस्टर करना होगा। उद्यमी चाहे तो प्रोप्राइटरशिप के तहत रजिस्टर करा सकता है।  
  • उद्यमी को जीएसटी रजिस्ट्रेशन की भी आवश्यकता होगी, और बैंक में चालू खाता खोलने एवं व्यवसायिक नाम से पैन कार्ड बनाने की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • इसके अलावा फैक्ट्री लाइसेंस या ट्रेड लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है जिसके लिए उद्यमी स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम, नगर पालिका से संपर्क कर सकता है।
  • फायर डिपार्टमेंट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • चूँकि Plywood Manufacturing Business में कच्चे माल के तौर पर इमारती लकड़ी का इस्तेमाल होता है इसलिए इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के लिए फारेस्ट डिपार्टमेंट से भी परमिशन लेने की आवश्यकता हो सकती है।
  • यदि उद्यमी चाहता है की उसके व्यवसाय को सरकार की नज़र में एक एमएसएमई के तौर पर पहचान मिले, और वह विभिन्न योजनाओं का फायदा उठा सके तो वह उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन एवं एमएसएमई डाटा बैंक रजिस्ट्रेशन भी करा सकता है।

3. मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल

Plywood Manufacturing Business में इस्तेमाल में लायी जाने वाली प्रमुख मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • हॉट प्रेस मशीन
  • स्पिंडललेस पीलिंग मशीन
  • लाग वुड डीबारकर
  • 3 डेक 4 सेक्शन वाला रोलर विनियर ड्रायर
  • लिफ्ट लोडिंग और अनलोडिंग सीजर
  • ग्लू सेपरेटर
  • ब्रश सन्डिंग मशीन
  • डिपिंग मशीन
  • स्टील वूल
  • ग्लू मिक्सचर
  • डीडी सॉ मैन्युअल
  • केंची
  • पेडल चॉपर
  • ट्राली
  • कोल्ड ड्राई प्रेस
  • जनरेटर

 Plywood Manufacturing में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी एवं उपकरणों की कीमत लाखों रूपये हो सकती है, इसलिए इस तरह का यह व्यवसाय केवल वही व्यक्ति शुरू कर सकता है जिसमें लाखों लाख रूपये निवेश करने की क्षमता हो। इस व्यवसाय के लिए मशीनरी उपकरण खरीदने से पहले उद्यमी को विभिन्न सप्लायर से कोटेशन मंगानी चाहिए। और फिर उनका तुलनात्मक विश्लेषण करने के पश्चात ही किसी अच्छे सप्लायर का चुनाव करना चाहिए। इस व्यवसाय में इस्तेमाल में लायी जाने वाली प्रमुख कच्चे माल की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • ईमारती लकड़ी
  • गोंद
  • कोर  

इस व्यवसाय को शुरू करने में और इसे सफलतापूर्वक चलाने में उद्यमी को दस कर्मचारियों से अधिक को नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए हो सकता है की उद्यमी को ईपीएफ, ईएसआई इत्यादि रजिस्ट्रेशन करने की भी आवश्यकता हो।     

4. प्लाईवुड निर्माण शुरू करें (Start Plywood Manufacturing)

जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की वर्तमान परिदृश्य में कारपेंट्री इंडस्ट्री में प्लाईवुड एक बुनियादी कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है। प्लाईवुड को उसकी आवश्यकता के अनुरूप उपयुक्त प्रकार के पेड़ों को काटकर प्राप्त किया जाता है। सबसे पहले पेड़ को चेन सॉ की मदद से कई गोलाकार लॉग में काट लिया जाता है, उसके बाद  Plywood Manufacturing Process में इन्हें लॉग डीबार्कर में डाला जाता है जो इनकी छाल को हटाने का कार्य करता है। उसके बाद इस लकड़ी को मुलायम करने के लिए गर्म पानी में भिगोने के लिए या स्ट्रीमिंग के लिए रख दिया जाता है। उसके बाद इन मुलायम लकड़ी के पीलर ब्लाक को विनियर पीलिंग मशीन में डाला जाता है ये मशीन इन ब्लाक को लगातार पतली शीट में कन्वर्ट कर देती है। उसके बाद विनियर प्राप्त करने के लिए इसे विनियर कटर से पास कराया जाता है। Plywood Manufacturing Process में फिर इन विनियर को ड्रायर में रखा जाता है ताकि इनमें नमी की मात्रा को कम किया जा सके। इसके बाद इन विनियर को गोंद फैलाने वाली मशीन से होकर गुज़ारा जाता है ताकि इनमें समान रूप से गोंद को फैलाया जा सके उसके बाद इन्हें प्लाईवुड पविंग मशीन की ओर भेजा जाता है। इस मशीन का काम इन विनियर को अन्य जनरेटिंग प्लाईवुड के एक के ऊपर एक रखने का होता है क्योंकि इसमें विनियर के ऊपर विनियर को जोड़ना होता है । इस जोड़ को मजबूती देने के लिए इनमें कोल्ड प्रेस मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। उसके बाद इन्हें हॉट प्रेस मशीन में भी डाला जाता है और तापमान के साथ साथ उसमें दबाव भी जारी रहता है ताकि प्लाईवुड को बिना नुकसान पहुंचाएं इसके जोड़ की मजबूती को बढाया जा सके। प्लाईवुड को ठंडा करने के बाद Plywood Manufacturing Process में इसे प्लाईवुड ट्रिमिंग मशीन में भेजा जाता है इस मशीन का काम प्लाईवुड के किनारे और अतिरिक्त सामग्री की ट्रिमिंग करने का होता है। उसके बाद ब्रश संडिंग मशीन की मदद से इनकी फिनिशिंग की जाती है। उसके बाद निर्मित प्लाईवुड को एक नियंत्रित वातावरण में स्टोर करने की आवश्यकता होती है ताकि इन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान जैसे नमी एवं दीमक से बचाया जा सके।

यह भी पढ़ें  

About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |