कॉयर पेपर विनिर्माण बिजनेस। Coir Paper Manufacturing Business.

Coir Paper से भले ही आप अनिभिज्ञ हों, लेकिन कार्ड, कैलेन्डर, स्क्रैपबुक इत्यादि से तो आप अच्छी तरह से अवगत होंगे जी हाँ दोस्तों आज हम एक ऐसे व्यवसाय के बारे में बात कर रहे हैं जिससे उद्यमी का व्यक्तिगत फायदा तो हो ही सकता है साथ में पर्यावरण का भी फायदा हो सकता है। जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की कागज़ का निर्माण पेड़ों की लुगदी से किया जाता है इसलिए कागज़ निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई संभावित है। लेकिन जब बात Coir Paper की हो रही हो तो इसका निर्माण करने के लिए पेड़ों की लुगदी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि कॉयर का निर्माण नारियल की जटा और ख़राब पेपर इत्यादि से भी आसानी से किया जा सकता है। इसलिए इसे कोकोनट इंडस्ट्री का एक बाई प्रोडक्ट भी कहा जा सकता है। वर्तमान में हम विभिन्न पेपर कार्डों, फोटो फ्रेम्स, स्क्रैपबुक, आर्टबुक इत्यादि का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करते हैं इन सबका निर्माण अधिकतर तौर पर कॉयर पेपर को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाकर ही किया जाता है । यही कारण है की भले ही इस कागज़ को आम लोगों द्वारा न ख़रीदा जाता हो लेकिन नोटबुक बनाने वाली कम्पनियों, फोटो फ्रेम्स का निर्माण करने वाली कम्पनियों, कैलेन्डर बनाने वाली कम्पनियों इत्यादि द्वारा बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए बिजनेस करने के इच्छुक उद्यमी द्वारा Coir Paper Manufacturing Business शुरू करने का भी विचार किया जा सकता है । लेकिन इससे पहले की हम इस विषय पर विस्तृत जानकारी देने का प्रयत्न करें आइये जानते हैं की इस तरह का यह पेपर होता क्या है?  

Coir Paper Manufacturing Business

 

कॉयर पेपर क्या है (What is Coir Paper):

Coir Paper की यदि हम बात करें तो इसका निर्माण कोकोनट इंडस्ट्री या कॉयर प्रसंस्करण इकाई से एकत्र कॉयर फाइबर के कचरे से किया जाता है। कभी कभी इसमें गत्ते के बॉक्स बनाने में इस्तेमाल में लायी जाने वाली सामग्री के अपशिष्ट को भी मिलाया जाता है । कहने का आशय यह है की इसके निर्माण के लिए प्रमुख कच्चे माल को कोकोनट इंडस्ट्री याकॉयर प्रसंस्करण इकाई से खरीद लिया जाता है जबकि गत्ते बॉक्स का अपशिष्ट तो उद्यमी को लोकल मार्किट या फिर गत्ते बनाने वाली फैक्ट्री से भी प्राप्त हो सकता है। इस उत्पाद का इस्तेमाल भी औद्योगिक तौर पर ही किया जाता है क्योंकि कैलंडर बनाने के उद्योगों, फोटो फ्रेम्स बनाने के उद्योगों, स्क्रैपबुक और आर्टबुक बनाने के उद्योगों द्वारा इसका इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर किया जाता है । इसलिए Coir Paper Manufacturing Business शुरू करने वाले उद्यमी के मुख्य ग्राहक के तौर पर यही औद्योगिक इकाइयाँ रहने वाली हैं। इसलिए इसे B2B बिजनेस कहें तो गलत नहीं होगा।

कॉयर पेपर बिक्री संभाव्यता

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की इस तरह के उत्पाद की कैलंडर इंडस्ट्री, फोटो फ्रेम्स इंडस्ट्री, स्क्रैपबुक, आर्टबुक, नोटबुक इंडस्ट्री बहुत बड़े ग्राहक हैं। और इनकी मांग हमेशा इसलिए बनी रहती है क्योंकि शिक्षा के क्षेत्र में और कार्यालयों में विभिन्न परियोजनाओं को अंजाम तक पहुँचाने के लिए इनकी आवश्यकता होती रहती है । और आज का भारतीय नागरिक चाहे वह किसी भी आयु एवं आय वर्ग का क्यों न हो, वह अपने बच्चों की पढाई के प्रति बेहद जागरूक है इसलिए बच्चों की पढाई में काम आने वाली वस्तुओं पर वह खर्चा करने से परहेज भी नहीं करता है। इसलिए संभावना यही लगायी जा सकती है की Coir Paper की मांग जनसँख्या वृद्धि और लोगों की शिक्षा के प्रति बढती जागरूकता के साथ और बढ़ेगी। हमारा देश भारतवर्ष विविधताओं से भरा हुआ देश है यहाँ पर अनेकों धर्मों को मानने वाले लोग निवास करते हैं इसलिए अक्सर देखा जाता है की लोग अपनी अपनी मान्यता के अनुसार भगवान् और देवी देवीताओं की फ्रेम में लगी हुई फोटो भी खरीदना पसंद करते हैं और अपनी एवं अपने परिवार जनों की फोटो को भी फ्रेम में रखकर टांगना पसंद करते हैं । कहने का आशय यह है की इन फोटो फ्रेम के पिछली तरफ कवर के तौर पर भी Coir Paper का ही इस्तेमाल किया गया होता है। इसलिए इसके एक नहीं बल्कि अनेकों औद्योगिक अनुप्रयोग हैं और जिस उत्पाद के जितने अधिक इस्तेमाल होते हैं उसकी बिक्री की संभावना भी उतनी ही अधिक होती है।

कॉयर पेपर निर्माण बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start Coir Paper Manufacturing Business):

Coir Paper Manufacturing Business शुरू करने वाले उद्यमी को एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा की इस व्यवसाय में उसके प्रमुख ग्राहक के तौर पर स्क्रैपबुक बनाने वाली इकाइयाँ, नोटबुक बनाने वाली इकाइयाँ, आर्टबुक बनाने वाली इकाइयाँ, कैलंडर इत्यादि के कवर बनाने वाली इकाइयाँ रहने वाली हैं। इसलिए उद्यमी को किसी ऐसी लोकेशन का चयन करना नितांत आवश्यक हो जाता है जहाँ पर ऐसे इकाइयों की अधिकता हो। अच्छी लोकेशन का चुनाव करने वाला उद्यमी को और भी अनेकों कदम उठाने की आवश्यकता होती है जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है।

1. जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करें

वैसे देखा जाय तो जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करने से पहले उद्यमी को Coir Paper Manufacturing Business शुरू करने के लिए एक अच्छी सी लोकेशन का चुनाव करना होता है। अब चूँकि हम इस बारे में उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं इसलिए हम सीधे जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करने के विषय में बात कर रहे हैं। एक विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए उद्यमी को विनिर्माण स्थल, कच्चे माल और उत्पादित माल को रखने के लिए स्टोर रूम, बिजली उपयोगिताओं जैसे जनरेटर इत्यादि को रखने के लिए जगह और एक छोटा सा ऑफिस स्थापित करने के लिए भी जगह की आवश्यकता होती है। इस प्रकार से हम देखें तो छोटे स्तर पर भी इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 500-600 Square Feet जगह की आवश्यकता हो सकती है। यदि उद्यमी के पास खुद की गैर कृषि योग्य भूमि है तो वह वहीँ पर इस तरह का निर्माण शुरू करवा सकता है लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो उद्यमी किसी बनी बनाई बिल्डिंग को किराये पर लेकर भी यह बिजनेस शुरू कर सकता है।       

2. वित्त का प्रबंध करें (Fund Arrangement for Coir Paper Manufacturing):

हालांकि Coir Paper Manufacturing  इकाई स्थापित करने में कितनी लागत आएगी वह तो इस बात पर निर्भर करेगा की उद्यमी की व्यवसायिक योजना के मुताबिक उस इकाई की उत्पादन क्षमता क्या रहने वाली है। लेकिन यदि उद्यमी ने व्यवसायिक योजना तैयार की है तो प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी अवश्य तैयार की होगी इसलिए उद्यमी को इसी परियोजना रिपोर्ट में उल्लेखित अनुमानित लागत के अनुसार ही वित्त का प्रबंध करना चाहिए। वित्त का प्रबंध करने के लिए उद्यमी किसी सरकारी योजना में सब्सिडी ऋण, बैंक ऋण और व्यतिगत बचत का इस्तेमाल कर सकता है।  

3. लाइसेंस और पंजीकरण कराएँ

चूँकि Coir Paper Manufacturing Business में कच्चे माल के तौर पर पेड़ों की लुगदी तो इस्तेमाल में लायी नहीं जाती हैं, इसलिए यह इकाई पेड़ों की कटाई को भी प्रोत्साहित नहीं करती है तो फारेस्ट या अन्य डिपार्टमेंट से लाइसेंस इत्यादि लेने की भी आवश्यकता नहीं है। कुल मिलाकर यदि हम देखें तो इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए किसी विशेष प्रकार के लाइसेंस की तो आवश्यकता नहीं होती। लेकिन उद्यमी चाहे तो अपने व्यवसाय को रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में रजिस्टर करके, जीएसटी रजिस्ट्रेशन इत्यादि करवाकर, अपने व्यवसाय के नाम से बैंक में चालू खाता भी खुलवा सकता है। इन सबके अलावा एमएसएमई सेक्टर के लिए सरकार द्वारा जारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन भी कर सकता है।   

4. मशीनरी उपकरण और कच्चा माल खरीदें

Coir Paper का निर्माण करने के लिए भी उद्यमी को अनेकों प्रकार की मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता होती है । इसलिए इस तरह की मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए उद्यमी को लाखों रूपये खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है। उद्यमी को चाहिए की वह इनकी खरीदारी से पहले किसी अच्छे सप्लायर का चुनाव अवश्य कर ले । इसके लिए उद्यमी चाहे तो विभिन सप्लायर से कोटेशन मंगा सकता है और फिर सबसे संपर्क करके रेट नेगोशिएट कर सकता है और फाइनल रेट एवं अन्य शर्तों का अच्छे से मूल्यांकन करने के बाद ही किसी अच्छे सप्लायर का चुनाव कर सकता है। इस व्यवसाय में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी और उपकरणों की लिस्ट निम्नलिखित है।

  • कॉयर फाइबर श्रेडर
  • हॉलेंडर बीटर
  • हाइड्रो पल्पर
  • टीडीआर रिफाइनर
  • सिलेंडर मोल्ड बोर्ड मशीन
  • हाइड्रोलिक पॉवर प्रेस
  • पल्प अजिटेटर
  • पल्प पंप
  • कैलेन्डरिंग मशीन
  • कटिंग मशीन
  • ट्राली, मापक यंत्र और अन्य टूल्स

इसके अलावा Coir Paper Manufacturing Business में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • कॉयर अपशिष्ट फाइबर (Coir waste fiber)
  • बोर्ड का बेकार कागज (Waste Paper)    

5. निर्माण कार्य शुरू करें (Start Coir Paper Manufacturing):      

सबसे पहले दोनों कच्चे माल कॉयर अपशिष्ट फाइबर और बेकार कागज को एक ट्रीटमेंट पॉट में डाल दिया जाता है, उसके बाद इस सामग्री से लुगदी बनाने के लिए इसमें पानी एवं अन्य योजक जोड़े जाते हैं। उसके बाद इस लुगदी के मिश्रण को एक जाल पर फैलाया जाता है जिससे इसमें उपलब्ध पानी नीचे चला जाता है जो उसे कागज़ की शीट बनाने में सक्षम बनाता है। उसके बाद इन कागज़ की शीटों को ऊनी चादर पर डालकर बिछाया जाता है। उसके बाद हाइड्रोलिक प्रेस की मदद से इन शीटों से पानी निकाल दिया जाता है और इन शीट को कपड़े से अलग कर दिया जाता है और धूप में सूखने के लिए डाला जाता है। Coir Paper Manufacturing Process में सुखाने के बाद इन शीट को दो भारी रोलर्स के बीच से गुज़ारा जाता है उसके बाद पेपर या बोर्ड को पॉलिश करने के लिए दो मेटल शीट के बीच कैलेंडरिंग की जाती है। उसके बाद इन शीटों को आवश्यक आकार में काटकर अन्य औद्योगिक इकाइयों को बेचा जा सकता है।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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