Rubber Balloons Making Business

Rubber Balloons Making Business

Rubber Balloons Making business को साधारण शब्दों में गुब्बारे बनाने का काम भी कह सकते हैं | शायद भारतवर्ष में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जिसे गुब्बारे का नाम सुनकर अपना बचपन न याद आता हो | वह इसलिए क्योंकि बहुत पहले से ही माता पिता अपने बच्चों को खेल खिलाने अर्थात एक खिलोने के तौर पर Rubber Balloons खरीदते आये हैं  और आज भी यह चलन ज्यों का त्यों है | बल्कि वर्तमान में Rubber Balloons का उपयोग न सिर्फ बच्चों का मन बहलाने के लिए अपितु अनेकों आयोजन जैसे Birth Day, शादी समारोहों, घरों, ऑफिसों को सजाने के लिए भी किया जाता है | और चूँकि यह उत्पाद बेहद सस्ते दामों में बाजारों में उपलब्ध होता है इसलिए समाज के हर वर्ग द्वारा जब भी उन्हें आवश्यकता होती है निःसंकोच ख़रीदा जाता है | यही कारण है की Rubber Balloons समाज के हर वर्ग में बेहद ही प्रचलित उत्पाद है |

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Rubber Balloons Making Business Kya Hai:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की लगभग हर व्यक्ति की बचपन की यादें गुब्बारों के साथ शायद अवश्य जुड़ी होंगी | वह इसलिए क्योंकि Rubber Balloons किसी भी माता पिता द्वारा अपने बच्चों को दिया जाने वाला एक सामान्य सा खिलौना है इसकी कीमत अधिक न होने के कारण समाज के हर वर्ग के माता पिता अपने बच्चों को इसे खिलौने के तौर पर देने में सक्षम हैं | इसके अलावा घर, ऑफिस इत्यादि की सजावट करने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है यही कारण है की Rubber Balloons की डिमांड मार्किट में हमेशा विद्यमान रहती है | लोगों की इसी आवश्यकता की पूर्ति एवं अपनी कमाई करने के मद्देनज़र जब किसी उद्यमी द्वारा गुब्बारे बनाने का काम किया जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह कार्य Rubber Balloons Making Business कहलाता है |

Market Potential in Rubber Balloons Making Business:

Rubber balloons अर्थात Natural latex से निर्मित गुब्बारों को तरह तरह के आयोजनों, घर को सजाने, ऑफिस को सजाने एवं बच्चों के खिलोनों के रूप में उपयोग में लाया जाता रहा है और शायद हमेशा लाया जाता रहेगा | और जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Rubber Balloons को बच्चों के खिलोने के तौर पर पहले से उपयोग में लाया जाता रहा है इसका मुख्य कारण यह है की यह अन्य खिलोनों की तुलना में काफी सस्ता होता है और चूँकि बच्चों की हरकतों की वजह से यह जल्दी फट भी जाया करते हैं इसलिए यदि कोई माता पिता अपने बच्चों के लिए Rubber Balloons खरीदते हैं तो उनकी मात्रा अधिक ही रखते हैं ताकि जब जब बच्चा जिद करे उसे गुब्बारा फुलाकर दे दिया जाय | इसके अलावा सजावट के purpose से उपयोग में लाये जाने वाले गुब्बारों की भी बाज़ार में बहुतायत मांग इसलिए होती है क्योंकि लोग सजावट गुब्बारों के रंग के आधार पर करते हैं इसलिए वह अलग अलग रंग के गुब्बारों के पैकेट लेना ही पसंद करते हैं, क्योंकि एक ही पैकेट में मिश्रित गुब्बारे लेने से उनकी आवश्यकता पूर्ण नहीं हो पाती | Rubber Balloons Making business एक ऐसा व्यापार है जो कहीं से भी शुरू किया जा सकता है हाँ इतना अवश्य है की ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में इनका उपयोग अधिक होने के आसार हैं |

Required Machinery and Raw Material:

Rubber balloons making business में काम आने वाला मुख्य Raw Material Natural Latex rubber है वह इसलिए क्योंकि इसमें Synthetic Rubber के मुकाबले अधिक लचीलापन अर्थात Elasticity होती है | इसके अलावा Vulkanex SP, Casein, पोटेशियम हाइड्रो ऑक्साइड, सल्फर, जिंक ऑक्साइड इत्यादि भी Rubber Balloons manufacturing process में उपयोग में लाया जाता है | मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • अमोनिया को कम करने वाला बर्तन चलनी एवं मोटर के साथ (De-ammonizing vessel with stirrer)
  • बर्तन जार चक्की मोटर के साथ (Jars Pot Mill with Motor)
  • मोटर के साथ पैडल मिक्सर (Paddle mixer with Motor )
  • Dipping vats with covers
  • Electric Hot Air
  • Formers, testing equipments, weighing balance & tools

Rubber Balloons Making business में उपयोग में आने वाली कुछ प्रमुख Raw Materials की लिस्ट निम्नवत है |

  • latex रबर (Natural Rubber latex)
  • Vulkanox SP
  • पोटेशियम हाइड्रो ऑक्साइड
  • सल्फर
  • Vulkacit
  • जिंक ऑक्साइड
  • Pigments
  • Polythene bags & cartoons

Manufacturing Process of rubber balloons making:

सर्वप्रथम Latex से अमोनिया के तत्वों को कुछ हद तक कम किया जाता है | उसके बाद इस Latex Casein में अन्य कच्चा माल एवं रंग मिला दिया जाता है | वैसे बाज़ार में Raw materials Suppliers Pigments मिला हुआ latex भी बेचते हैं |  उसके बात इस Latex को एक ऐसे टैंक में डाला जाता है जिसमे Dipping प्रक्रिया को अंजाम दिया जायेगा | इस टैंक का एक निश्चित तापमान पर रख दिया जाता है | उसके बाद Balloon Forms को dipping प्रक्रिया के लिए तैयार किया जाता है इस प्रक्रिया को करने के लिए Balloon Forms को गरम किया जाता है उसके बाद उसे coagulant solution के टैंक में विसर्जित कर दिया जाता है | coagulant के कारण ही रबर जैल रूप में परिवर्तित होकर पतली सी Sheet Forms के चारों ओर लग जाती है | उसके बाद Balloon Forms को 38 C से 92 C तक के तापमान पर गरम किया जाता है | उसके बाद इसको रंग वाले latex टैंक में विसर्जित कर दिया जाता है | यह प्रक्रिया latex को Coat करने में मददगार होता है | Baloons Forms को लम्बा करके टैंक में छोड़ दिया जाता है जिससे पतली सी Coating उन पर चिपक जाती है | चूँकि Baloons Making के लिए latex की एक पतली सी परत ही पर्याप्त होती है इसलिए टैंक में Balloons Forms को केवल कुछ सेकंड के लिए ही छोड़ा जाना चाहिए | इस प्रक्रिया को अंजाम देते वक्त बेहद सावधानियां बरतने की जरुरत होती है ताकि जरुरत के मुताबिक पतली परत हासिल की जा सके | उसके बाद गुब्बारों के अग्रभाग अर्थात मुहं में स्थित Baloon Ring का निर्माण करना होता है इसको बनाने के लिए गुब्बारे की गर्दन पर एक Lip का गठन किया जाता है यह प्रक्रिया ब्रश या Rollers का उपयोग करके रबर के किनारों को रोल किया जाता है | उसके बाद यदि Balloons में स्कंदक(coagulant) की मात्रा अधिक हो तो इसे हटाने की प्रक्रिया की जाती है यह प्रक्रिया leaching solution टैंक में इन्हें डालकर की जाती है | यह प्रक्रिया कर लेने के बाद रबर को पूर्ण रूप से सूखाने की प्रक्रिया की जाती है अलग अलग उद्यमियों द्वारा अलग अलग विधि से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है कुछ उद्यमियों द्वारा उस latex का उपयोग किया जाता है जिसमे पहले से vulcanizing agent सम्मिलित होता है और कुछ उद्यमियों द्वारा Oven का उपयोग किया जाता है | अब उसके बाद Balloons को Forms से अलग करने का काम किया जाता है यह क्रिया water Spray का उपयोग करके अंजाम दी जा सकती है | यदि यह क्रिया water Spray करके अंजाम दी जाति है तो उसके बाद गुब्बारों से पानी को हटाने के लिए इन्हें centrifuge में डालना होगा | उसके बाद Tumble Dryers का उपयोग करके Balloons को Dry किया जाता है | उसके बाद प्रिंटिंग करके इनकी पैकेजिंग कर मार्किट में बेचकर कमाई की जाती है |

Comments

  1. By manzoor alam

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