School Uniform Manufacturing स्कूल की वर्दी बनाने के उद्योग की जानकारी.

School Uniform manufacturing business पर बात करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि जैसा की हम सबको विदित है वर्तमान में हर स्कूल द्वारा किसी न किसी रंग की स्कूल ड्रेस का उपयोग अवश्य किया जाता है | अब शायद आपके अंतर्मन में एक सवाल हिचकोले ले रहा होगा की हर स्कूल में किसी न किसी कपड़े के रंग, जूते के रंग, मोज़े के रंग, टाई के रंग इत्यादि को School uniform का हिस्सा क्यों बनाया जाता है | हालंकि बहुत सारे लोगों को इसका जवाब पहले ज्ञात होगा लेकिन जिन्हें नहीं है उनको बता देना चाहते हैं की हर स्कूल द्वारा अपनी यूनिफार्म, ड्रेस या वर्दी इसलिए निर्धारित की जाती है ताकि विद्यालय या स्कूलों में सकारत्मकता व्याप्त हो | किसी भी बच्चे को यह न लगे की किसी और ने उससे अधिक कीमती एवं अच्छे कपड़े पहने हैं इसलिए वह उससे श्रेष्ठ है, और इस बात को लेकर कोई भी बच्चा हीनभावना का शिकार न हो | School Uniform विद्यालय के वातावरण में सकरात्मकता का प्रसार करने में तो मदद करती ही है साथ में स्कूल के वातावरण में सामाजिक एवं आर्थिक समानता भी बनाये रखती है | खैर आज का हमारा विषय School Uniform के फायदे गिनाने का नहीं बल्कि School Uniform manufacturing business का है इसलिए आइये जानते हैं यह है क्या?

School-Uniform manufacturing

School Uniform manufacturing business Kya hai:

आज भारतवर्ष पहले की तरह अशिक्षित भारत नहीं रहा है वर्तमान में उन ग्रामीण देहाती क्षेत्रों में भी जहाँ केवल लड़कियों को स्कूल भेजा जाता था | सरकार द्वारा किये जा रहे वर्षों से अथक प्रयत्नों जैसे मध्याहन भोजन की शुरुआत, साक्षरता अभियान के माध्यम से प्रौढ़ लोगों को शिक्षा देकर उनमे पढ़ाई के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना ताकि वे अपने बच्चों को भी स्कूल भेजने से हिचकें नहीं, इत्यादि के कारण वर्तमान में लोगों ने लड़कियों को भी स्कूल भेजना शुरू किया और यही कारण है की आज साक्षरता दर हर क्षेत्रों में बढती जा रही है | कहने का आशय यह है की School Uniform manufacturing business मनुष्य की ऐसी आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ बिज़नेस है जो अर्थात शिक्षा सबके लिए बेहद जरुरी है | एक बात हमें और समझ लेनी चाहिए की जहाँ पहले अधिकतर स्कूलों के बच्चे रेडीमेड यूनिफार्म का कम उपयोग किया करते थे, वहीँ वर्तमान में यह चलन सा हो गया है की स्कूल के बच्चों द्वारा सिर्फ रेडीमेड यूनिफार्म का उपयोग किया जा रहा है | विद्यार्थियों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर जब किसी उद्यमी द्वारा स्कूल की ड्रेस बनाने का काम किया जाता है तो यह School Uniform manufacturing business कहलाता है |

Market Potential in School Uniform Making:

यद्यपि हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की देश के हर क्षेत्र में School Uniform का उपयोग किया जाता है | इसलिए यह माना जा सकता है की हर विद्यार्थी द्वारा लगभग दो जोड़े School Uniform तो उपयोग में लाये ही लाये जाते होंगे | कहने का आशय यह है की ऐसी इकाई जो 10000 School Uniforms का निर्माण करती हो उसे लगभग 5000 विद्यार्थियों की आवश्यकता होगी जिन्हें वह अपने उत्पाद को बेच सके | उद्यमी को चाहिए की वह एक ऐसी लोकेशन या ऐसे क्षेत्र जहाँ अधिक से अधिक विद्यार्थी हों उसी को अपनी बिज़नेस लोकेशन बनाये (अच्छी बिज़नेस लोकेशन का चुनाव करने के टिप्स की जानकारी के लिए पढ़ें ) ताकि वह अपने उत्पाद को स्थानीय क्षेत्र में बेचने में सफल हो सके | कहा तो यह भी जा सकता है की यदि किसी एक विद्यालय में पढने वाले विद्यार्थियों की संख्या 500-600 है तो 10-15 स्कूलों को लक्ष्य करके एक इकाई सफलतापूर्वक चलाई जा सकती है |

आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल:

School Uniform manufacturing business में काम आने वाली मशीनरी उपकरणों एवं कच्चे माल की मात्रा उत्पादन क्षमता के आधार पर अंतरित हो सकती है इसलिए हम मशीनरी, उपकरणों एवं कच्चे माल की मात्रा न देकर केवल उनके नाम की लिस्ट दे रहे हैं | उद्यमी चाहे तो इस बिज़नेस के साथ साथ रेडीमेड गारमेंट बनाने का काम भी इसी इकाई में शुरू कर सकता है | मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • व्यवसायिक तौर पर कपड़े सिलने वाली मशीन (Universal Sewing Machine) इस एक मशीन की कीमत 15-20 हज़ार हो सकती है और इनकी मात्रा इकाई की उत्पादन क्षमता के आधार पर अंतरित हो सकती है |
  • व्यवसायिक तौर पर उपयोग में लायी जाने वाली आटोमेटिक जिग जैग मशीन जिसकी कीमत 30-32 हज़ार हो सकती है |
  • ओवर लॉक मशीन जिसकी कीमत 18-20 हज़ार रूपये हो सकती है |
  • cutting टेबल
  • फिनिशिंग टेबल
  • व्यवसायिक तौर पर उपयोग में लायी जाने वाली प्रेस
  • अन्य उपकरण जैसे कैंची, मापक टेप इत्यादि |

School Uniform manufacturing business में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की लिस्ट इस प्रकार है |

  • Plain Dyed acrylic Cloth
  • शर्ट के लिए Acrylic Cloth
  • फ्रॉक के लिए डाई किया हुआ कॉटन क्लॉथ
  • ब्लाउज के लिए acrylic Cloth
  • सिलाई का धागा, ज़िपन बटन इत्यादि
  • पैकेजिंग सामग्री

Manufacturing process of School Uniform:

School Uniform Manufacturing की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सबसे पहले आवश्यकता के मुताबिक डाई किया हुआ, ब्लीच किया हुआ, प्रिंट किया हुआ कॉटन का कपड़ा या फिर सिंथेटिक कपड़ा विभिन्न रंगों का खरीद लिया जाता है | उसके बाद इस ख़रीदे गए कपड़े का निरीक्षण किया जाता है निरीक्षण करने के लिए इस कपड़े को एक टेबल पर फैला दिया जाता है जिसे Inspection Table कहा जाता है, और उचित प्रकार अर्थात लाइट में इस कपड़े को चेक कर लिया जाता है की कहीं इस पर कोई अनावश्यक दाग, कट या अन्य कोई फाल्ट तो विद्यमान नहीं है | ताकि फाल्ट मिलने पर उस कपड़े से उसे अलग किया जा सके | उसके बाद अगली प्रक्रिया कटिंग एवं सिलाई की होती है इसलिए निरीक्षण किये हुआ कपड़े को कटिंग टेबल पर फैला दिया जाता है और डिजाईन के मुताबिक चौक से इस पर निशान लगाये जाते हैं और उसके बाद उसी के अनुरूप इसकी कटाई की जाती है और उसके बाद सिलाई | जब सिलाई पूर्ण हो जाती है तो उसके बाद School Uniform Manufacturing Process में सिली गई यूनिफार्म को चेकिंग टेबल पर ले जाया जाता है ताकि कोई गलती नज़र आने पर उसे हटाया जा सके, सब कुछ ठीक होने पर इसमें प्रेस किया जाता है, और पैकेजिंग करके कमाई हेतु ,मार्किट में उतारा जा सकता है |

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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