ड्राइविंग स्कूल कैसे खोलें? How to open Driving School in India Hindi.

Driving School Business की उत्पति मनुष्य की वाहन चलाना सीखने की ललक के कारण हुई है | इंडिया में ही नहीं अपितु पुरे विश्व में लगभग हर आदमी अपनी जिन्दगी में कभी न कभी वाहन चलाने की इच्छा व्यक्त करता है या यूँ कहें की उसके अन्दर वाहन चलाने की इच्छा कभी न कभी जन्म लेती है तो गलत नहीं होगा | इनमे से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने किसी जानकार, रिश्तेदार, भाई बहिन, माता पिता इत्यादि से Driving सीख लेते हैं |  लेकिन अधिकतर लोग वाहन चलाना सीखने के लिए किसी Driving School में अवश्य जाते हैं, क्योंकि एक व्यवसायिक ट्रेनर की मौजूदगी में वे जल्दी ड्राइविंग सीख पाने में सक्षम होते हैं | हालांकि अभी तक ऐसा कोई नियम नहीं है की ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए व्यक्ति को ड्राइविंग स्कूल से ही ड्राइविंग सीखनी पड़ेगी | व्यक्ति चाहे तो अपने किसी सगे सम्बन्धी के माध्यम से ड्राइविंग सीखकर भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई कर सकता है | चूँकि वर्तमान में लोग सुरक्षा के प्रति अधिक सजग हो गए हैं इसलिए इन सबके बावजूद वे Driving School से ही प्रशिक्षण लेना बेहतर समझते हैं | लोगों की यही आवश्यकता अन्य को इस प्रकार का यह बिज़नेस करने का अवसर प्रदान करती है | इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से इंडिया में Driving School Business शुरू करने की प्रक्रिया के बारे में बात करेंगे | लेकिन उससे पहले यह जान लेते हैं की ड्राइविंग स्कूल होते क्या हैं |

ड्राइविंग स्कूल क्या है (What Is Driving School in Hindi):

जैसा की नाम से ही विदित होता है की Driving School ड्राईवरों की शिक्षा से जुड़े हुए स्कूल होते हैं | इन स्कूलों का मकसद अपने ग्राहकों को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देना होता है, ताकि व्यक्ति को ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से प्राप्त हो सके और वह वाहन को ट्रैफिक नियमों का अनुपालन करते हुए सड़कों पर सुरक्षित चला सके | कहने का आशय यह है की ड्राइविंग स्कूल में व्यक्ति को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है और बदले में उस व्यक्ति से एक निश्चित फीस ली जाती है |

ड्राइविंग स्कूल की जरुरत:

driving school business

जैसा की हम अब तक के वार्तालाप से समझ चुके हैं की एक Driving School का मकसद अपने प्रशिक्षणार्थियों को न सिर्फ वाहन चलाना बल्कि राज्य एवं स्थानीय नियमों का अनुपालन करते हुए सुरक्षित वाहन चलाना सिखाने का होता है | हालांकि वाहन चलाने की इच्छा हर व्यक्ति की अपने जीवन में कभी न कभी होती है इसलिए Driving School की आवश्यकता भी हर राष्ट्र राज्य एवं शहर में हो सकती है | वर्तमान में जब लोगों की कमाई में धीरे धीरे वृद्धि हो रही है और उनके रहन सहन में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं ऐसे में व्यवसायिक वाहन चलाने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि के साथ साथ कार इत्यादि खरीदने की चाह रखने वाले लोगों की भी संख्या में भी वृद्धि हो रही है | लेकिन लोग अपना वाहन खरीदने से पहले वाहन चलाना सीखने के लिए Driving School का रुख करते हैं | इसलिए आज के समय में हर शहर एवं नगर में Driving Training center की आवश्यकता है |

ड्राइविंग स्कूल बिज़नेस कैसे शुरू करें (How to start Driving School in India Hindi):

इंडिया में Driving School खोलने वाले उद्यमी को अलग अलग राज्यों के आधार पर अलग अलग नियमों का अनुपालन करना पड़ सकता है | चूँकि ड्राइविंग स्कूल खोलने के लिए उस राज्य विशेष के परिवहन विभाग से लाइसेंस एवं अनुमति की आवश्यकता होती है और अलग अलग राज्य में परिवहन विभाग ड्राइविंग स्कूलों के लिए अलग अलग गाइडलाइन जारी करते हैं | इसलिए यहाँ पर यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है की Driving School खोलने के लिए कौन से राज्य में कौन कौन से नियम निर्धारित हैं | लेकिन यहाँ पर हम यह अवश्य बताना चाहेंगे की कैसे कोई उद्यमी अपने खुद का ड्राइविंग स्कूल खोल कर अपनी कमाई कर सकता है |

  1. लोकेशन का चुनाव करें (Select Location):

Driving School Business में एक अच्छी लोकेशन की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है क्योंकि अक्सर लोग अपने घर के आस पास ही कोई ऐसे स्कूल ढूंढते हैं जो उन्हें उनके घर से पिक करके क्लास खत्म होने पर घर में ही ड्राप भी कर दे | अक्सर कार चलाना सीखने के इच्छुक लोग ड्राइविंग स्कूलों से यह अपेक्षा रखते हैं | जबकि बड़े वाहन जैसे बस, ट्रक इत्यादि सीखाने वाले Driving School शहर में नियमों के मुताबिक कहीं भी अपना ऑफिस खोल सकते हैं, उनके बिज़नेस पर इस बात का ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखाई देता |  इसलिए यदि व्यक्ति शुरुआत में सिर्फ Car Driving School खोलने की सोच रहा हो तो उसे एक ऐसी लोकेशन का चुनाव करना चाहिए जो रिहायशी इलाकों के नज़दीक हो और उद्यमी अपने ग्राहकों को घर से पिक और ड्राप की फैसिलिटी दे पाय | इसके अलावा लोकेशन का चुनाव करते वक्त उद्यमी को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की जिस लोकेशन पर वह अपना Driving School खोलने की सोच रहा है | उस लोकेशन पर पहले से कितने ड्राइविंग स्कूल चल रहे हैं और कितना अच्छा चल रहे हैं | यह सब डिटेल्स उद्यमी को यह निर्णय लेने में मदद करेंगी की उस लोकेशन पर उसका बिज़नेस चल पायेगा या नहीं | एक अच्छी बिज़नेस लोकेशन का चुनाव कैसे करें?

  1. ड्राइविंग स्कूल व्यापार की योजना बनायें (Make a proper business plan for Driving School):

उद्यमी द्वारा लोकेशन का चुनाव कर लेने के बाद अपने Driving School के लिए योजना बना लेनी चाहिये | इस योजना में वाहनों को खरीदने से लेकर, ऑफिस स्थापित करने में आने वाली अनुमानित लागत, और मासिक आधार पर इस बिज़नेस से होने वाली अनुमानित कमाई का ब्यौरा होना चाहिए | इसके अलावा यह भी उल्लेखित होना चाहिए की उद्यमी वित्त इत्यादि की व्यवस्था कहाँ से कितना कितना प्रतिशत करेगा | और आने वाले एक वर्ष बाद उद्यमी के बिज़नेस में कितनी बढोत्तरी हो चुकी होगी | एक प्रभावी बिज़नेस प्लान उद्यमी को न सिर्फ उसके व्यापार के लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करता है बल्कि समय आने पर उचित निर्णय लेने की ओर मार्गदर्शित भी करता है |

  1. वित्त का प्रबंध करें (Arrangement of Finance):

हालांकि केवल एक वाहन रखकर भी इंडिया में Driving School शुरू किया जा सकता है और यह वाहन कार हो तो उत्तम रहता है | क्योंकि अधिकतर तौर पर देखा गया है की ड्राइविंग स्कूल में अधिकतर लोग कार चलाना सीखने के लिए ही आते हैं | इसका कारण शायद यह भी हो सकता है की ट्रक, बस इत्यादि बड़े वाहन चलाने वाले ड्राईवर अपने साथ एक सहायक को लेकर हमेशा चलते हैं जिसे वे बीच बीच में ड्राइविंग भी सीखाते रहते हैं | कहने का आशय यह है की अधिकतर Commercial Driver Driving School में नहीं बल्कि किसी अन्य ड्राईवर के साथ काम करके ड्राइविंग सीखते हैं | इसलिए शुरूआती दौर में उद्यमी चाहे तो केवल एक वाहन और वह भी पुराना वाहन जो आसानी से 2-3 लाख में उद्यमी को मिल जायेगा खरीद सकता है | उसके बाद उस वाहन में ब्रेक इत्यादि दोनों तरफ अर्थात ड्राइविंग सीट के बगल में भी लगा सकता है | लेकिन यदि उद्यमी बड़े सेटअप के साथ Driving School खोलने की सोच रहा हो तो उसे उसके बिज़नेस प्लान के माध्यम से उस पर आने वाली अनुमानित लागत का पता चल गया होगा | इसलिए उद्यमी को उसी आधार पर वित्त का प्रबंध करना चाहिए इसके लिए वह चाहे तो क्राउड फंडिंग, एंजेल इन्वेस्टर इत्यादि के माध्यम से भी वित्त की व्यवस्था कर सकता है |

आइये जानते हैं क्राउड फंडिंग से वित्त की व्यवस्था कैसे की जा सकती है |

एंजेल इन्वेस्टर बिज़नेस को कैसे मदद करते हैं |

  1. ड्राइविंग स्कूल पंजीकरण एवं लाइसेंस(License and Registration of Driving School) :

हालांकि भारतवर्ष के प्रत्येक बड़े शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलौर इत्यादि की हर कॉलोनी में एक से अधिक Driving School देखने को मिल जायेंगे | लेकिन इनमे कुछ स्कूल ऐसे भी होते हैं जो बिना लाइसेंस के चल रहे होते हैं या जिनका लाइसेंस समाप्त हो गया होता है | तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं होता है की Driving School Business शुरू करने के लिए किसी प्रकार की लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है | बल्कि सच्चाई तो यह है की भले ही हर राज्य में इनके लिए अलग अलग गाइडलाइन विद्यमान हों लेकिन इस प्रकार का व्यापार करने के लिए स्थानीय प्राधिकरण एवं क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से लाइसेंस लिया जाना अनिवार्य है | कहने का आशय यह है की सिर्फ वे लोग जिन्हें इस प्रकार का बिज़नेस करने की क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से अनुमति प्राप्त हो सिर्फ वही लोग यह काम कर सकते हैं | अब यदि उद्यमी इस बिज़नेस को छोटे स्थानीय स्तर पर शुरू करके कमाई करना चाहता है तो वह स्थानीय प्राधिकरण एवं क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से लाइसेंस प्राप्त करके यह बिज़नेस कर सकता है | लेकिन यदि उद्यमी चाहता है की धीरे धीरे उसका बिज़नेस पूरे शहर में और उसके बाद अलग अलग शहरों में फैले तो उपर्युक्त लाइसेंस के अलावा उद्यमी को अपने बिज़नेस को Registrar Of Companies के साथ रजिस्टर भी करना होगा | आइये जानते हैं इंडिया में अपनी कंपनी कैसे खोल सकते हैं |

  1. वाहन खरीदें (Purchase the Vehicle):

यदि उद्यमी के पास शुरूआती दौर में Driving School Business में लगाने के लिए अधिक पैसे नहीं है तो वह केवल एक वाहन से भी इस बिज़नेस की शुरुआत कर सकता है | और यह वाहन भी वह पुराना खरीदकर उस पर काम कराके उसे ड्राइविंग सीखाने के योग्य बना सकता है | कहने का आशय यह है की एक साधारण वाहन एवं Driving School द्वारा सीखाने के इस्तेमाल में लाये जाने वाले वाहन में फर्क होता है | इन वाहनों में दो तरफ ब्रेक, गेर इत्यादि हो सकते हैं | ताकि प्रशिक्षणार्थी द्वारा गलती करने पर इंस्ट्रक्टर ब्रेक इत्यादि संभाल सके और सड़क पर किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके | इसके अलावा यदि उद्यमी एक से अधिक वाहन खरीदकर यह काम शुरू करना चाहता है तो उसे वाहन खरीदने के अलावा अनुभवी एवं होशियार ड्राईवरों की भी आवश्यकता होगी | जो उसके ग्राहकों को सफलतापूर्वक ड्राइविंग सीखा पाने में समर्थ हों |

  1. Driving School के लिए ग्राहक लायें और कमाई करें?

उद्यमी द्वारा अपना Driving School खोलने के लिए लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हों तो अब उसका अगला कदम अधिक से अधिक ग्राहकों को अपनी सर्विस देने का होना चाहिए | हालांकि जिन्हें ड्राइविंग सीखनी होती है वे खुद ही अपने आस पास इस तरह के प्रशिक्षण केंद्र का पता करते हैं | लेकिन अपने वाहनों के आगे अपने बिज़नेस का नाम एवं नंबर वाली प्लेट लगाना व्यापार की दृष्टी से लाभकारी होता है |  इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह स्थानीय ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए अपने सभी वाहनों की छत की ओर ऐसे फ्लायर या बोर्ड अवश्य लगाये जिनमें बड़े अक्षरों में उसके बिज़नेस का नाम एवं फोन नंबर दिया हुआ हो | इसके अलावा उद्यमी चाहे तो स्थानीय मार्केट में अपने पम्पलेट, पोस्टर  इत्यादि भी चिपका सकता है | जिससे उसके Driving School के बारे में अधिक से अधिक लोगों को पता चल सके |

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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