Ultramarine Blue Making Business – नील बनाने के उद्योग की जानकारी.

सबसे पहले यह स्पष्ट कर देना चाहेंगे की Ultramarine Blue को नील के नाम से भी जाना जाता है | पुराने समय की बात करें तो खानों से निकलने वाले एक बहुमूल्य पत्थर जिसे लाजिसी लाजूली कहते थे को पीसकर नील के तौर पर उपयोग में लाया जाता था | इसके बाद 1700 ई. में नील के पौधे की खेती करके नील तैयार की जाने लगी थी भारत में नील की खेती की बात करें तो बिहार राज्य में लगभग 1940 तक बड़े पैमाने पर नील की खेती की जाती थी | लेकिन वर्तमान में नील को कुछ विशिष्ट खनिज यानिकी मिट्टियों, गंधक एवं कोयले के पाउडर को पकाकर भी तैयार कर लिया जाता है | चूँकि इस तरह से Ultramarine Blue यानिकी नील का उत्पादन करने से यह काफी सस्ती पड़ती है और थोक के भाव बेचने पर भी इससे अच्छी खासी कमाई की जा सकती है | इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से नील बनाने के व्यवसाय के बारे में जानकारी मुहैया कराने की कोशिश करेंगे |

ultramarine blue manufacturing business

नील बनाने का उद्योग एवं बिज़नेस क्या है (What is ultramarine Blue Making Business Hindi):

अक्सर आपने अपने घर में या अड़ोसी पडोसी को सफ़ेद कपड़ों को नील में भिगोते हुए देखा होगा यह तो नील का एक अदना सा उपयोग था इसका अधिकतर उपयोग डिटर्जेंट बनाने वाले उद्योगों एवं कागज़ निर्माताओं द्वारा किया जाता है | लोगों एवं उद्यमियों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर जब किसी व्यक्ति द्वारा Ultramarine Blue बनाने का काम किया जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह बिज़नेस नील बनाने का उद्योग कहलाता है |

उत्पाद की बिक्री की संभावनाएं:

नील का उपयोग केवल घरों में सफ़ेद कपड़ों को भिगोने के लिए ही नहीं किया जाता है अपितु इसका उपयोग प्लास्टिक बनाने वाले उद्योगों, रबर उद्योगों, पेंट उद्योगों, डिटर्जेंट एवं कागज़ उद्योगों द्वारा किया जाता है इसलिए कहा जा सकता है की Ultramarine Blue Making Business मुख्य रूप से B2B बिज़नेस पर आधारित बिज़नेस है |

आवश्यक मशीनरी उपकरण एवं कच्चा माल:

नील उद्योग शुरू करने के लिए मशीनों से अधिक जरुरी है की उद्यमी के पास ऐसी पर्याप्त जगह होनी चाहिए जहाँ साफ़ सुथरे पानी की उचित व्यवस्था हो | Ultramarine Blue Making Business में प्रयुक्त होने वाले मुख्य मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट निम्नवत है |

  • उपकरणों के साथ Electric Shuttle Kiln
  • इलेक्ट्रिक मोटर के साथ Nauta Mixer
  • Tray Drier
  • ceramic lining के साथ बाल मिल
  • मोटर एवं उपकरणों के साथ Vibrating screen
  • मापक यंत्र
  • लेबोरेटरी उपकरण

नील बनाने के काम में उपयोग में लायी जाने वाले कच्चे माल की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • China Clay Or Kaoline
  • Sodium Carbonate
  • Sodium Sulphate
  • Sulphur
  • Charcoal
  • Resin
  • Kaloin
  • Packaging Material

निर्माण प्रक्रिया (Manufacturing Process) :

Ultramarine Blue manufacturing process में सर्वप्रथम kaloin नामक खनिज मिटटी, सोडियम सलफेट, चारकोल इत्यादि को पाउडर के रूप में पीस लिया जाता है उसके बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिला दिया जाता है | इसद पद्यति के अनुसार kaloin में सिलिका एवं अल्युमिना लगभग 2:1 के अनुपात होना चाहिए | इस पद्यति में चारकोल एवं resin रिड्युसिंग एजेंट के तौर पर कार्यरत रहते हैं | मिश्रण को क्रुसिबल में पैक करके भट्टी में आठ घंटे तक गरम कर लिया जाता है | इस प्रकार मिश्रण का रंग लाल हो जाता है उसके बाद भट्टी को धीरे धीरे ठन्डी होने देते हैं जिससे मिश्रण का रंग हल्का हरा हो जाता है इस उत्पाद को Ultramarine Green कहा जाता है उसके बाद इसी उत्पाद को नील में परिवर्तित कर दिया जाता है | यद्यपि उपर्युक्त बताई गई Manufacturing Method Indirect Method है इसका उत्पादन डायरेक्ट मेथड से भी किया जाता है जिसमे Ultramarine Green की उत्पति नहीं बल्कि सीधे Ultramarine Blue की उत्पति की जाती है |

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मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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