भारत में बिजनेस करने के फायदे एवं नुकसान.

भारत की यदि हम बात करें तो यह पूरी दुनियाँ में एक तीव्र गति से बढ़ता हुआ उपभोक्ता बाजारों में से एक है। एक रिसर्च के मुताबिक यदि यह देश उच्च विकास के पथ पर ऐसे ही बढता रहा तो आने वाले दो दशकों में भारतीय बाजार में महान परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। आजकल भारतीय बाजार के विकास ने अपनी उपस्थिति एवं बिक्री को व्यापक बनाने के मद्देनज़र कम्पनियों के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। वर्तमान में इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता है की भारत सभी प्रकार के बिजनेस के लिए एक केंद्र बन गया है। यही कारण है की भारत एक बिजनेस हब के तौर पर सामने आया है और इस रूप में यह उपभोक्ता बाजार एवं संघीय नीतियों दोनों के कारण बिजनेस स्थापित करने का भी एक बड़ा लाभ प्रदान करता है। भारत को एक बेहतर व्यापार स्थल बनवाने की दौड़ में दौड़ाने में मुद्रा का भी अहम् योगदान है। मुद्राओं में वृद्धि के साथ उत्पादकता में भी सुधार होता है जिससे लोगों की क्रय शक्ति अर्थात खरीदने की सामर्थ्य में भी बढोत्तरी होती है। इन सबके अलावा भारत बिजनेस के लिए एक उदार एवं निवेशकों के अनुकूल वातावरण तैयार करने की ओर भी लगातार प्रयासरत रहा है। इसलिए कहा जा सकता है की भारत में बिजनेस करने के अनेकों फायदे हो सकते हैं।

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भारत में बिजनेस करने के फायदे (Advantages of Starting up a Business in India in hindi):

  • अक्सर देखा गया है की विभिन्न विदेशी ब्रांड भारत में काफी पसंद किये जाते हैं इसलिए वे यहाँ काफी लोकप्रिय भी हैं । विभिन्न विदेशी ब्रांड को यहाँ सहर्ष स्वीकार भी किया जाता है और चूँकि यहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं एवं रंग के लोग निवास करते हैं इसलिए यहाँ कोई भी व्यक्ति खुद को अलग थलग महसूस नहीं करता है।
  • भारतीय समाज काफी स्वतंत्र है यही कारण है की वेबसाइट, संगीत एवं अन्य संस्कृतियों की फिल्में सिमित या फिर सेंसर नहीं हैं।
  • भारतीय बाजार में सीधे तरीके से निवेश एवं उससे लाभ अर्जित किया जा सकता है। विदेशी कम्पनियाँ इस देश में इक्विटी पूँजी को आसानी से बढ़ा सकती हैं।
  • एक आंकड़े के मुताबिक भारत में उपलब्ध मार्केटिंग एवं वितरण कम्पनियाँ अनुभवी एवं प्रतिभाशाली लोगों से भरी हुई है। इसलिए जो उद्यमी या विदेशी निर्माता भारत में व्यवसाय करने या उसे बढ़ावा देने की इच्छा रखते हैं वे उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में कभी विफल नहीं होते हैं।
  • यदि बिजनेस करने वाले उद्यमी की मातृभाषा अंग्रेजी है तो भारत में अंग्रेजी बोलने वाले लोगों को खोजना बिलकुल भी कठिन काम नहीं है। इसके अलावा ऐसे उद्यमी जो अंग्रेजी नहीं भी जानते हैं उन्हें अंग्रेजी सीखने की सामग्री एवं संस्थान आसानी से मिल जाते हैं। और भारत के कुछ प्रमुख शहरों में लोगों को स्पेनिश, जर्मन, फ्रेंच इत्यादि भाषाएँ बोलते हुए भी देखा जा सकता है।
  • वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रारम्भ अर्थात लागू होने से राज्यों में माल की दक्षता एवं आवजाही बढने की उम्मीद लगाई जा सकती है।
  • चूंकि वर्तमान में भारत के ग्रामीण इलाकों में भी इन्टरनेट की उपलब्धता एवं स्मार्ट डिवाइस की उपलब्धता मौजूद है। इससे ऑनलाइन खरीदारी की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। यही कारण है की यह पद्यति मार्केटिंग एवं वितरण पेशेवरों के लिए विदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए आसान रहा है।
  • इसके अलावा यह भी एक निर्विवाद तथ्य है की भारत में युवा आबादी और बढती आर्थिक शक्ति आने वाले वर्षों में सभी विदेशी फर्मों के लिए एक चुंबक साबित हो सकती है।

भारत में बिजनेस करने के नुकसान (Disadvantages of Starting up a Business in India):

भारत में बिजनेस करने के फायदों की बात तो हम उपर्युक्त वाक्यों में कर ही चुके हैं लेकिन यहाँ बिजनेस करने के अनेकों नुकसान भी हो सकते हैं। जिनमें से कुछ प्रमुख नुकसानों की लिस्ट इस प्रकार से है। कहने का आशय यह है की बिजनेस करना अपने आप में एक बेहद ही कठिन कार्य है लेकिन भारत में यह निम्न कारणों से और भी कठिन हो जाता है।

  • भारत में एक बहुत बड़ी मार्किट ऐसे लोगों की है जो किसी भी उत्पाद या सेवा को उसकी गुणवत्ता से नहीं अपितु उसकी कीमत के आधार पर तुलना करते हैं। जिससे गुणवत्तायुक्त उत्पाद या सेवा को भी यहाँ कमाई करने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
  • लोग उत्पाद के बारे में जानने की कोशिश नहीं करते हैं इसलिए भले ही आपके पास कोई विशेष उत्पाद क्यों न हो, लेकिन शुरूआती दौर में उस उत्पाद पर कम ही लोग ध्यान देंगे।
  • भारतीय लोग मार्केटिंग हथकंडों जैसे ऑफर, डिस्काउंट इत्यादि के चक्कर में जल्दी आ जाते हैं जिसके कारण अच्छे उत्पाद का बिकना मुश्किल हो सकता है।
  • यहाँ के ग्राहकों में किसी भी ब्रांड के प्रति निष्ठा बना पाना कठिन है क्योंकि वे ऑफर एवं डिस्काउंट के प्रलोभन में किसी नई कंपनी के उत्पाद भी खरीदने को तत्पर रहते हैं।
  • अधिकतर भारतीय बुनियादी बातों से चिपके रहना पसंद करते हैं यही कारण है की वे अनुभव या माहौल की अधिक परवाह नहीं करते हैं।
  • भारतीय लोग जुगाड़ से काम चलाने में विश्वास रखते हैं यही कारण है की वे यूरोपीय देशों या अमेरिका की तरह तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते हैं।  

निष्कर्ष: चुनौतियाँ या कठिनाइयाँ तो बिजनेस में केवल भारत में ही नहीं अपितु दुनिया के सभी देशों में आती हैं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है की भारत एक उभरता बाजार है। और यहाँ किसी भी बिजनेस के लिए सफलता के अपार अवसर विद्यमान हैं क्योंकि यहाँ एक बहुत बड़ा ग्राहक आधार निवासित रहता है। इसलिए किसी भी बिजनेस की सफलता एवं असफलता व्यापारिक रणनीति एवं व्यवसाय करने के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे लोग जो उपर्युक्त बताये गए नुकसानों को एक चुनौती के तौर पर न देखकर केवल नुकसान के तौर पर देखते हैं। उनसे आग्रह है की वे भारत में बिजनेस शुरू न करें। क्योंकि इस स्थिति में वे सर्वाइव कर नहीं पाएंगे और यदि वे इन नुकसानों को एक चुनौती के तौर पर सहर्ष स्वीकार करेंगे तो इनसे निबटने का वे कोई न कोई रास्ता भी अवश्य निकाल लेंगे।

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About Author:

मित्रवर, मेरा नाम महेंद्र रावत है | मेरा मानना है की ग्रामीण क्षेत्रो में निवासित जनता में अभी भी जानकारी का अभाव है | इसलिए मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य बिज़नेस, लघु उद्योग, छोटे मोटे कांम धंधे, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, कैरियर और अन्य कमाई के स्रोतों के बारे में, लोगो को अवगत कराने से है | ताकि कोई भी युवा अपने घर से रोजगार के लिए बाहर कदम रखने से पहले, एक बार अपने गृह क्षेत्र में संभावनाए अवश्य तलाशे |

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