Agri Export Zones के बारे में शायद बेहद कम लोग जानते होंगे जैसा की हम सबको विदित है की भारत एक कृषि प्रधान देश है | इसलिए कृषि सम्बन्धी उत्पादों की यहाँ भरमार है इन्हीं उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भारत के लगभग सभी राज्यों में Agri Export Zones स्थापित किये गए हैं | भारत सरकार द्वारा गठित किये गए विशेष कृषि निर्यात क्षेत्र (AEZ) कृषि विविधीकरण, मूल्यवर्धन और निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने की ओर लिया गया महत्वपूर्ण कदम है । अंतराष्ट्रीय व्यापार पर्यावरण में हो रहे तेजी से बदलावों के साथ कदम मिलाते हुए एवं भारत के भुगतान की शेष राशि में सुधार करते हुए इन जोन ने पूरी प्रक्रिया को एकीकृत करने के लिए इंड टू इंड दृष्टीकोण को अपनाया है | जिसमे सभी गतिविधियों का केंद्र जो संभावित उत्पादों और भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान के चरण से ही शुरू होकर कच्चे माल की सौर्सिंग, उसकी प्रोसेसिंग, उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार, और उत्पाद को उस स्टेज पर पैकेजिंग करना जहां यह एक संगत क्षेत्र में उत्पादित उत्पाद के अंतिम निर्यात तक पहुंचता है | इत्यादि गतिविधियाँ सम्मिलित हैं |

Agri-Export-Zones list in hindi

Agri Export Zones क्या हैं :

Agri Export Zones (AEZ) को हिंदी में कृषि निर्यात क्षेत्र भी कह सकते हैं कहने का आशय यह हैं की किसी भी देश में कृषि निर्यात क्षेत्र एक विशिष्ट भौगौलिक क्षेत्र होता है | जिसे मुख्य रूप से निर्यात के लिए  कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना के लिए निर्धारित किया जाता है | इस शब्द का उपयोग मुख्य रूप से इंडिया में ही किया जाता है | देश के विभिन्न राज्यों में Agri Export Zones की पहचान करने का दायित्व राज्य सरकारों का होता है | राज्य ही इन क्षेत्रों में गहन वितरण के लिए सभी सरकारी एजेंसियों,  राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र सरकार के सभी संस्थानों और एजेंसियों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का एक व्यापक पैकेज विकसित करेगा । उपयुक्त प्रमाण पत्र वाले कॉर्पोरेट क्षेत्र को नए कृषि निर्यात क्षेत्र को प्रायोजित करने के लिए प्रोत्साहित किये जाने का भी प्रावधान है | इंडिया की विदेश व्यापार नीति (FTP) के मुताबिक, Agri Export Zones स्टार एक्सपोर्ट हाउस के रूप में आवेदन करने के लिए भी पात्र हैं ।

एग्री एक्सपोर्ट जोन की अवधारणा:

कृषि निर्यात क्षेत्र की अवधारणा की बात करें तो इस प्रकार के ये जोन एक विशेष क्षेत्र में उत्पादित विशेष उत्पाद पर व्यापक रूप से ध्यान देते हैं | ताकि उत्पाद के उत्पादित करने से लेकर उसे अंतिम जगह तक निर्यात करने में किसी परेशानी का अनुभव न हो | इसमें उत्पाद के विकास, कच्चे माल की सौर्सिंग, माल का प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इत्यादि शामिल हैं | इस अवधारणा के अंतर्गत संभावित उत्पादों की पहचान करने के लिए सम्पूर्ण प्रयास क्लस्टर दृष्टिकोण के आस पास केन्द्रित हैं |  ऐसे भौगौलिक क्षेत्र जिनमें उत्पाद उगाया जाता है से लेकर उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए इंड टू इंड दृष्टिकोण अपनाने का प्रावधान है ताकि सम्पूर्ण प्रक्रिया को एकीकृत किया जा सके |

अवधारणा का संचालन कैसे होता है :

Agri Export Zones नामक इस अवधारणा का संचालन निम्न प्रावधानों के अंतर्गत होता है |

  • कृषि निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने का पूरा दृष्टिकोण परियोजना मोड पर लिया गया है ।
  • राज्य सरकार द्वारा ही संभावित निर्यात योग्य उत्पादों की पहचान की जाती है जिन्हें क्लस्टर दृष्टीकोण के साथ विकास के लिए चुना जा सकता है |
  • राज्य सरकारें उन प्रोजेक्ट को विकसित करती हैं जो व्यवहार्य हैं और तुरंत लागू किये जा सकते हैं | उन्हें सांकेतिक दिशानिर्देशों का पालन भी करना होता है |
  • उसके बाद राज्यों द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट कृषि और संसाधित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) को फॉरवर्ड किये जाते हैं जो प्रोजेक्ट की प्रारम्भिक जांच करते हैं |
  • अपनी जांच में कृषि और संसाधित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) यदि प्रोजेक्ट को व्यवहार्य पाता है तो वह विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है |
  • प्रारंभिक जांच के बाद, इस रिपोर्ट को स्टीयरिंग कमेटी के समक्ष रखा जाता है | जिसे वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता में गठित किया गया होता है ।
  • जब स्टीयरिंग कमेटी द्वारा राज्य द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट को अनुमोदित अर्थात स्वीकृत कर लिया जाता है | उसके बाद APEDA एवं राज्य सरकार के बीच प्रोजेक्ट को संभावित सहयोग देने के लिए एक MOU साइन किया जाता है |

कृषि निर्यात क्षेत्र के फायदे (Benefits of Agri Export Zones in Hindi):

Agri Export Zones में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा अनेकों प्रकार की सहायता दिए जाने का प्रावधान है | जिनमें से कुछ मुख्य का विवरण निम्नवत है |

  • केंद्रीय और साथ ही राज्य सरकार और उनकी एजेंसियां दोनों कृषि निर्यात से संबंधित गतिविधियों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं ।
  • Agree Export Zones के अंतर्गत स्थापित उद्यमों को प्रशिक्षण और विस्तार, अनुसंधान एवं विकास, गुणवत्ता उन्नयन, आधारभूत संरचना और विपणन आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है |
  • केंद्र सरकार की एजेंसियां जैसे APEDA, NHB, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विभाग, कृषि मंत्रालय भी सहायता प्रदान करते हैं | और कई राज्य सरकारों ने भी Agri Export Zones के अंतर्गत स्थापित उद्यमों को इसी तरह की सहायता देने का प्रावधान किया है |
  • मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यातक बिजली उत्पादन के लिए ड्यूटी फ्री ईंधन की सोर्सिंग के लिए पात्र होंगे, बशर्ते परम उत्पाद में बिजली का लागत घटक 10% या उससे अधिक हो और डीजीएफटी की अग्रिम लाइसेंसिंग कमेटी द्वारा तय किये गए इनपुट-आउटपुट मानदंड ही मान्य होंगे ।
  • निर्यात संवर्धन पूंजीगत सामान योजना के तहत लाभ, जो अब तक सीधे निर्यातकों के लिए उपलब्ध थे, अब कृषि निर्यात क्षेत्रों में सेवा निर्यातकों तक बढ़ा दिए गए हैं |

Agri Export Zones के लक्ष्य:

  • बाजार उन्मुख दृष्टिकोण के साथ पिछड़े संबंधों को सुदृढ़ करना ।
  • उत्पाद स्वीकार्यता और विदेशों में प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ-साथ घरेलू बाजार में भी प्रतिस्पर्धा ।
  • बुनियादी कृषि उपज में मूल्य संवर्धन |
  • पैमाने की अर्थव्यवस्था के माध्यम से उत्पादन की लागत नीचे लाना |
  • कृषि उपज के लिए बेहतर कीमत |
  • उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग में सुधार |
  • व्यापार से संबंधित अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना |
  • रोजगार के अवसरों को बढ़ाना |

Agri Export Zones list in Hindi:

वर्तमान में कृषि और संसाधित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा 60 Agree Export Zones स्थापित किये जा चुके हैं | जो पूरे देश भर में 20 राज्यों के 230 जिलों में फैले हुए हैं जिनकी हिंदी में लिस्ट निम्नवत है |

Sl No. राज्य का नाम प्रोजेक्ट/फसल जिला/एरिया
1. पश्चिम बंगाल अनन्नास दार्जीलिंग, जल्पैगुरी, उत्तर दिनाजपुर, कुच बेहार, होव्रह
लीची मुर्शिदाबाद, मालदा, 24 परगना (उत्तर), 24 परगना (दक्षिण)
आलू हूघली, बर्दवान, मिदनापोर (पश्चिम), उदय नारायणपुर, होव्रह
आम मालदा, मुर्शिदाबाद
सब्जी नदिया, मुर्शिदाबाद, 24 परगना (उत्तर)
दार्जीलिंग चाय दार्जिलिंग
2. कर्नाटक खीरा टुमकुर, बंगलौर अर्बन, बंगलौर रूरल, हस्सन, कोलर, चित्रदुर्गा, धारवाड़, बागलकोट
रोज अनियन बंगलौर, कोलर
फूल बंगलौर, कोलर, टुमकुर, कोडागु, बेलगाम
वैनिला दक्षिण कन्नड़ के जिले, उत्तर कन्नड़, उडुपी, शिमोगा, कोडागु, चिक्क्मागालुर
3. उत्तराखंड लीची उधमसिंह नगर, देहरादून एवं नैनीताल
फूल देहरादून, पंतनगर, उधमसिंह नगर, नैनीताल और उत्तरकाशी
बासमती चावल उधमसिंह नगर, नैनीताल, देहरादून और हरीद्वार.
औषधीय और सुगंधित पौधे उत्तरकाशी, चमोली, पिथोरागढ़, देहरादून, नैनीताल, हरीद्वार और उधमसिंह नगर.
4. पंजाब सब्जी फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, संगरूर, लुधियाना और रोपर
आलू सिंघपुरा, जिला जीरकपुर, पटियाला, रामपुर फुल में सैटेलाइट सेंटर, मुक्तसर, लुधियाना, जुल्लूउन्दुर
बासमती चावल गुरदासपुर, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर और नवांशहर
5. उत्तर प्रदेश आलू आगरा, हाथरस, फर्रुखाबाद, कन्नोज, मेरठ, बाघपत और अलीगढ़, जनपद बदायूँ, रामपुर, गाज़ियाबाद और फिरोजाबाद.
आम एवं सब्जी लखनऊ, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर और बाराबंकी.
आम सहारनपुर, मुज्ज़फर्नगर, बिजनौर, मेरठ, बाघपत और बुलंदशहर, ज्योतिफुलेनगर
बासमती चावल बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, रामपुर, बदायूँ, बिजनोर, मुरादाबाद, जेबी फुलेनगर, सहारनपुर, मुज्जफरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद और बाघपत.
6. महाराष्ट्र अंगूर एवं ग्रेपवाइन नासिक, सांगली, सोलापुर, सतारा, अहमदनगर
आम रंतागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगढ़ और ठाणे
केसर आम औरंगाबाद, बीड, जालना, अहमदनगर और लातूर
फूल पुणे, नासिक, कोल्हापुर, और सांगली
प्याज नासिक, अहमदनगर, पुणे, सतारा, जलगाँव, सोलापुर
अनार सोलापुर जिला, सांगली, अहमदनगर, पुणे, नासिक, ओसमनाबाद और लातूर
केले जलगाँव, धुले, नंदुरबार, बुलधाना, परभानी, हिंडोली, नांदेड और वर्धा
संतरे नागपुर और अमरावती
7. आन्ध्र प्रदेश आम पल्प एवं ताज़ी सब्जियां चितूर
आम एवं अंगूर रंगारेड्डी, मेदक, महबूबनगर
आम कृष्णा
खीरे जिला महबूबनगर, रंगारेड्डी, मेदक, करीमनगर, वारंगल, अनंतपुर और नालगोंडा
मिर्च गुंटूर
8. जम्मू एवं कश्मीर सेब श्रीनगर, बारामुला, अनंतनाग, कुपवाड़ा, कठुआ और पुलवामा
अखरोट बारामुला, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम, कुपवाड़ा, श्रीनगर, डोडा, पूँछ, उधमपुर, राजौरी और कठुआ
9. त्रिपुरा अन्नानास कुमारघाट, मानु, मेलाघर, माताबारी, और कक्राबन ब्लाक
10. मध्य प्रदेश आलू, प्याज और लहसुन मालवा, उज्जैन, इंदौर, देवास, धार, शाजापुर, रतलाम, नीमुच मंदसौर और खंडवा
बीज वाले मसाले गुना, मंदसौर, उज्जैन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर और नीमुच
    गेहूं शरबती गेहूं को मिलाकर उज्जैन क्षेत्र (नीमुच, रतलाम, मंदसौर, उज्जैन ) इंदौर क्षेत्र ( इंदौर, धार, शाजापुर और देवास ) भोपाल क्षेत्र (सेहोर, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, हरडा, नरसिंगपुर एवं भोपाल)
    दाल एवं चना शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, नर्सिंगपूरा, छिन्दवारा
    संतरे छिन्दवारा, ज्प्स्जम्गाबाद, बेतुल
11. तमिलनाडु कट फ्लावर धरमपुरी
  फूल निलगिरी
  आम मदुराई जिला, थेनी, डिंडीगुल, विरुधनगर, और तिरुनेलवेली
  काजू कद्दलोर, थंजावुर, पुदुकोट्टई और सिवंगंगा
12. बिहार लीची, सब्जी और शहद मुज्ज़फरपुर, समस्तीपुर, हाजीपुर, वैशाली, पूर्व और पश्चिम चम्पारण, भागलपुर, बेगुसराई, खगरिया, सीतामढ़ी, सरन और गोपालगंज
13. गुजरात आम एवं सब्जियां अहमदाबाद, खेड़ा, आनंद, वड़ोदरा, सूरत, नवसारी, वलसाड, भरूच, नर्मदा
    मूल्यवर्धित आम जिला भावनगर, सुरेंद्रनगर, अमरेली, राजकोट, जूनागढ़, और जिला जामनगर
    तिल के बीज अमरेली, भावनगर, सुरेंद्रनगर, राजकोट, जामनगर
14. सिक्किम फूल (ऑर्किड) और चेरी काली मिर्च। पूर्वी सिक्किम
  अदरक उत्तर, पूर्व, दक्षिण एवं पश्चिमी सिक्किम
15. हिमांचल प्रदेश सेब शिमला, सिरमौर, कुल्लू, मंडी, चंबा, किन्नौर
16. उड़ीसा अदरक एवं हल्दी कन्दमल
17. झारखण्ड सब्जी रांची, हजारीबाग एवं लोहरदगा
18. केरल बागवानी उत्पाद थ्रिस्सुर, एर्नाकुलम, कोट्टायम, अलापुज़हा, पथनाम थीटा, कोल्लम, त्रिवंतपुरम, इदुक्की और पल्लाकड़
  औषधीय पौधे वायनाड, मल्लापुरम, पलक्कड़, थ्रिस्सुर, एर्नाकुलम, इदुक्की, कोल्लम, थिरुवनंतपुरम
19. असम ताजा एवं संशाधित अदरक कामरूप, नलबारी, बारपेटा, दर्रांग, नागांव, मोरीगांव, कारबी, आंगलोंग और उत्तरी कैचर
20. राजस्थान धनिया कोटा, बूंदी, बरन, झालावार, एवं चित्तौड
  जीरा नागपुर, बारमेर, जालोर, पाली और जोधपुर

उपर्युक्त दी गई Agri Export Zones की लिस्ट कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की अधिकारिक वेबसाइट में दी गई जानकारी के आधार पर बनाई गई है | इसलिए भविष्य में इस लिस्ट में किसी भी प्रकार के बदलाव अधिकारिक वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं |

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